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गुरुजी क्रेडिट कार्ड में 4% के बदले 10.65% ब्याज, विद्यार्थियों के परिजनों पर अतिरिक्त बोझ

रांची से मनोज सिंह की रिपोर्ट

Guruji Student Credit Card: झारखंड प्रशासन की महत्वाकांक्षी ‘गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ में तकनीकी जटिलता से समय पर लोन की किस्त लौटने वाले कई लाभुक छात्रों के अभिभावकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को योजना के तहत मात्र 04% ब्याज पर लोन दिया जाता है, लेकिन तय नीति के अनुसार कई लाभुकों को प्रशासनी सब्सिडी (इंट्रेस्ट सबवेंशन) का लाभ नहीं मिल पा रहा है. ताजा मामलों के अनुसार, बैंक छात्रों से 10.45% से लेकर 10.65% तक की दर से ब्याज वसूल रहे हैं, जबकि नियमानुसार शेष 5.55% से अधिक की राशि प्रशासन द्वारा लाभुक के खाते में लौटाई जानी है. मामले में विभाग का कहना है कि चूंकि यह योजना पहली बार शुरू हुई है. इस कारण कुछ तकनीकी परेशानी आई है. इसको दूर किया जा रहा है.

परेशान लाभुकों ने की शिकायत

परेशान लाभुकों ने तकनीकी शिक्षा विभाग के पास शिकायत की है. विभाग इस मामले को सलटाने के लिए बैंकों से संपर्क में है. बैंक तकनीकी परेशानी की बात कह रहे हैं. विभागीय अधिकारियों ने बैंकों को इस तरह के मामलों को जल्द सलटाने का निर्देश दिया है. इस स्कीम का संकल्प एक अगस्त 2023 को निकला था. स्कीम लागू हुए करीब दो साल हो गए हैं.

हर महीने अंतर राशि लौटने का है प्रावधान

इस स्कीम के संकल्प में जिक्र है कि ऋण की राशि अधिकतम 15 लाख रुपये होगी. छात्रों को ऋण बैंक के माध्यम से दिया जायेगा. छात्रों को ब्याज के रूप में मात्र चार फीसदी की दर से सामान्य ब्याज दर पर राशि दी जायेगी. शेष ब्याज की राशि इंट्रेस्ट सबवेंशन के रूप में राज्य प्रशासन द्वारा वहन की जायेगी. राज्य प्रशासन की भूमिका स्कीम के गारंटर की होगी. हर माह ब्याज लौटाने पर एक फीसदी अतिरिक्त छूट का प्रावधान भी इस स्कीम में है.

लाभुक ने स्कीम बीच में छोड़ा

झारखंड प्रशासन के एक कर्मचारी ने अपने पुत्र शिवम नारायण के लिए 10.40% रुपये लोन गुरुजी क्रेडिट कार्ड से 14 नवंबर 2024 को लिया था. इसके लिए बैंक, लाभुक और प्रशासन के बीच एमओयू भी हुआ था. लाभुक लोन की राशि में तय ब्याज दर प्रतिमाह लौटा रहे थे. प्रतिमाह उससे 10.65% की तरह से ब्याज काटा जा रहा था. इस दौरान मात्र एक बार लाभुक के खाते में 10.65% और 4% के बीच का अंतर राशि खाते में आया. इसके बाद करीब एक साल तक 10.65% की दर से ब्याज राशि कटती रही. इसकी शिकायत अधिकारी ने कई बार विभाग से की. विभागीय अधिकारियों से भेंट भी की, लेकिन इसमें कोई सुधार नहीं हुआ. एक साल से अधिक समय तक 10.65% की दर से राशि कटने से परेशान शिवम ने स्कीम बीच में छोड़ दिया. स्कीम बीच में छोड़ने की सूचना विभाग को दे दी.

दो साल में 1512 लाभुकों को मिला लोन

अब तक 1512 विद्यार्थियों को इस स्कीम का लाभ मिला है. ऋण के रूप में 46.46 करोड़ रुपये बांटे गये हैं. अब तक 207.10 करोड़ रुपये स्वीकृत हो गये हैं. लाभुकों के बीच इंट्रेस्ट सबमेंशन का मात्र 1.85 लाख रुपये बांटा गया है. अब तक इस स्कीम के लिए 5722 आवेदन हो चुके हैं. इसमें 2601 एक विद्यार्थियों का लोन एप्रुव हो चुका है.

क्या है योजना

झारखंड प्रशासन ने तकनीकी शिक्षा की पढ़ाई करनेवाले विद्यार्थियों के लिए यह योजना शुरू की है. इसमें किसी भी लाभुक को शिक्षा के लिए चार फीसदी ब्याज पर ऋण मिलेगा. इसके लिए एक त्रिपक्षीय समझौता पत्र तैयार किया जाता है. इसमें लोन देने वाले बैंक, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग तथा लाभुक होते हैं. लाभुक को शिक्षा ऋण की दर पर लोन मिलता है. इसमें चार फीसदी छोड़कर शेष राशि बैंक के खाते में प्रशासन दे देती है. प्रशासन ने इसके लिए एचडीएफसी बैंक को नोडल बनाया है. नोडल बैंक का काम लाभुक और बैंक के बीच जो ब्याज राशि का गैप है, उसको बैंक को देना है. यह राशि हर माह लाभुक के खाते में जानी है.

क्या कहते हैं अधिकारी

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव राहुल पुरवार ने कहा कि विभाग की महत्वाकांक्षी योजना है. चूंकि यह पहली बार शुरू हुई है, इस कारण कुछ तकनीकी परेशानी भी आयी है. इसको दूर किया जा रहा है. जो भी शिकायत मिल रही है, उसे तत्काल दूर किया जा रहा है. इसके लिए किसी को कार्यालय का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है. विभाग ने इस योजना के लिए एक चैट बॉक्स शुरू किया है. इससे भी किसी तरह की परेशानी का हल खोज सकते हैं.

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योजना के आंकड़े

  • कुल आवेदन: 5,722
  • स्वीकृत लोन: 2,601
  • वितरित लोन: 1,512 छात्रों को (46.46 करोड़ रुपये)
  • बांटी गयी सब्सिडी: मात्र 1.85 लाख रुपये

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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