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पीएम मोदी ने मिडिल ईस्ट संघर्ष पर मुख्यमंत्रियों से की बात, ‘टीम इंडिया’ की भावना पर जोर

Middle East Crisis: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिडिल ईस्ट संघर्ष पर राज्य की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की जानकारी ली. प्रधानमंत्री की बैठक में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह राज्यों के मुख्यमंत्री और कई अधिकारी भी मौजूद रहे. बैठक में चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार डिजिटल माध्यम से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत केंद्र और राज्यों में समन्वय तय करना था. प्रधानमंत्री ने 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले शुरू होने के बाद मिडिल ईस्ट संघर्ष पर पहली बार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है.

किन राज्यों के सीएम बैठक में हुए शामिल

बैठक में शामिल होने वाले मुख्यमंत्रियों में एन. चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश), योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश), रेवंत रेड्डी (तेलंगाना), भगवंत मान (पंजाब), भूपेंद्र पटेल (गुजरात), उमर अब्दुल्ला (जम्मू-कश्मीर), सुखविंदर सिंह सुक्खू (हिमाचल प्रदेश), पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश) और अन्य मुख्यमंत्री शामिल थे.

कैबिनेट सचिवालय करेगा चुनावी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक

चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री आचार संहिता लागू होने के कारण इस बैठक में शामिल नहीं हुए. कैबिनेट सचिवालय तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग से बैठक करेगा. इससे पहले 25 मार्च को प्रशासन ने सभी नेतृत्वक दलों के नेताओं के साथ बैठक करके उन्हें पश्चिम एशिया की स्थिति की जानकारी दी थी.

प्रशासन ने बुलाई थी सर्वदलीय बैठक

प्रशासन ने 25 मार्च को पश्चिम एशिया संकट पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. बैठक में प्रशासन ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया था. इससे पहले 23 मार्च को लोकसभा में दिए गए बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण जो हालात बने हैं उसका असर लंबे समय तक रह सकता है. ऐसे में देश को एकजुट और तैयार रहने की जरूरत है, जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रहा था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया संकट पर बयान भी दिया था. पश्चिम एशिया में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी से जारी जंग के कारण होर्मुज से जहाजों को गुजरने में काफी परेशानी हो रही है. बहुत कम संख्या में कुछ देश के जहाज होर्मुज पार कर पा रहे हैं. इसके कारण कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है.

विदेश और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार कर रहा है अपडेट

विदेश मंत्रालय की ओर से मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात की जानकारी शेयर की जा रही है. शुक्रवार (27 मार्च) को भी मीडिया से बातचीत के दौरान सवालों के जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हिंदुस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने जहाजों के सुरक्षित पारगमन के लिए सभी संबंधित देशों के संपर्क में है. वहीं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि हिंदुस्तान में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रण में है और सभी खुदरा ईंधन दुकानों के पास पर्याप्त आपूर्ति है. देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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