INS Trikand in Tanzania: ईरान में पिछले 28 फरवरी से जंग चल रही है. इसकी वजह से होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी जैसे हालात हैं. इसने पूरी दुनिया में तेल और गैस संकट पैदा कर दिया है. हिंदुस्तान अपनी कूटनीति का उपयोग करते हुए किसी तरह अपने शिप को इस संकरे स्ट्रेट से निकाल पा रहा है. इसमें हिंदुस्तानीय नौसेना भी लगी हुई है. इसी बीच हिंदुस्तानीय नौसेना का एक जहाज अफ्रीका महाद्वीप के देश तंजानिया पहुंच गया है. इंडियन नेवी की एक अग्रिम पंक्ति का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंद, दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी जारी तैनाती के तहत दार एस सलाम, तंजानिया पहुंचा.
इस यात्रा का उद्देश्य हिंदुस्तान और तंजानिया के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाना है. इस पोर्ट कॉल के दौरान कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिनमें पेशेवर बातचीत, तंजानिया नौसेना के साथ संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास शामिल हैं, ताकि आपसी समन्वय (इंटरऑपरेबिलिटी) और समुद्री सहयोग को बढ़ाया जा सके.
इसके अलावा, सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मैत्रीपूर्ण स्पोर्ट्स मुकाबले और योग सत्र शामिल हैं. एक सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया जाएगा, जो आपसी सद्भाव और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देगा. हिंदुस्तान से लाए गए महत्वपूर्ण सामग्री (क्रिटिकल स्टोर्स) भी इस यात्रा के दौरान सौंपे जाएंगे. जहाज के कमांडिंग ऑफिसर सचिन कुलकर्णी तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्स और तंजानिया प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे.
VIDEO | Dar-es-Salaam, Tanzania: INS Trikand, the frontline guided missile frigate of the Indian Navy, arrived at Dar-es-Salaam, Tanzania on April 3, 2026 during its ongoing operational deployment in the South-West Indian Ocean Region. The port call will further strengthen… pic.twitter.com/S2TQpyqp75
— Press Trust of India (@PTI_News) April 5, 2026
हिंदुस्तान और तंजानिया के बीच महत्वपूर्ण संबंध
हिंदुस्तान और तंजानिया के बीच संबंध पारंपरिक रूप से मजबूत और मित्रतापूर्ण और बहुआयामी हैं. दोनों देशों के रिश्ते औपनिवेशिक दौर से पहले से मौजूद हैं. तंजानिया में रहने वाली हिंदुस्तानीय मूल की बड़ी आबादी इन संबंधों को और मजबूती देती है. आर्थिक दृष्टि से हिंदुस्तान, तंजानिया का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है. हिंदुस्तान, तंजानिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और प्रमुख निवेशक है.
दोनों देश हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा, रक्षा, व्यापार (2022-23 में 6.4 बिलियन डॉलर) और निवेश के मामलों में सहयोग करते हैं. साथ ही हिंदुस्तान ने तंजानिया में कई इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं में निवेश भी किया है. जहां हिंदुस्तान दवाइयां, पेट्रोलियम उत्पाद और मशीनरी निर्यात करता है, वहीं तंजानिया से सोना, खनिज और कृषि उत्पाद आयात करता है.
इसके अलावा, हिंदुस्तान तंजानिया को लाइन ऑफ क्रेडिट और तकनीकी सहायता प्रदान करता है तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और आईटी क्षेत्र में सहयोग करता है. हिंदुस्तानीय स्कॉलरशिप के माध्यम से तंजानिया के छात्र हिंदुस्तान में शिक्षा प्राप्त करते हैं. लेकिन इस समय ईरान युद्ध की वजह से हिंदुस्तान की नैचुरल गैस की समस्या बढ़ी हुई है और तंजानिया इसमें हिंदुस्तान का सबसे बड़ा मददगार बन सकता है.
तंजानिया दूर कर सकता है हिंदुस्तान की नैचुरल गैस की समस्या
तंजानिया में प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार पाए जाते हैं, जो मुख्य रूप से हिंद महासागर के तटीय और ऑफशोर क्षेत्रों, जैसे सोंगो सोंगो और मनाजी बे में स्थित हैं. सबसे बड़े भंडार लिंडी और मटवारा के पास तट से दूर हैं, विशेषकर ब्लॉक 2, 1 और 4 में हैं. 2016 में, तंजानिया की रवु बेसिन में भी प्राकृतिक गैस का महत्वपूर्ण भंडार मिला था. इन गैस भंडारों का आकार 57.54 ट्ट्रिलियन्स क्यूबिक फीट में आंका गया है, जिससे तंजानिया पूर्वी अफ्रीका के प्रमुख गैस उत्पादक देशों में माना जाता है.
यह गैस देश में बिजली उत्पादन, औद्योगिक विकास और घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, साथ ही एलएनजी (LNG) परियोजनाओं के जरिए निर्यात की भी संभावनाएं बढ़ रही हैं. हालांकि, इन संसाधनों के पूर्ण उपयोग के लिए अभी बुनियादी ढांचे और निवेश की आवश्यकता बनी हुई है. ऐसे में हिंदुस्तान इस कमी को पूरा कर सकता है.
अभी तक तंजानिया में बड़े पैमाने पर तेल भंडार की पुष्टि नहीं हुई है. कुछ जगहों पर एक्सप्लोरेशन की संभावनाएं जरूर हैं, लेकिन व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन नहीं के बराबर है. हालांकि, हिंदुस्तान जैसी ऊर्जा जरूरत वाले देश के लिए तंजानिया की गैस भविष्य में एक संभावित स्रोत बन सकती है. हिंदुस्तान 2018 से ही तंजानिया के साथ इस क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
पोर्ट कॉल संबंध मजबूत करने का एक तरीका
इसलिए तंजानिया का यह पोर्ट कॉल हिंदुस्तान की ‘MAHASAGAR’ ( क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की दृष्टि के अनुरूप है. पिछले सप्ताह, आईएनएस त्रिकंद ने मापुटो, मोजाम्बिक में 29 मार्च को अपना पोर्ट कॉल समाप्त किया था. इस दौरान संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर गतिविधियां आयोजित की गईं, जिससे समुद्री सहयोग और आपसी समन्वय मजबूत हुआ.
इस यात्रा के दौरान हिंदुस्तान से भेजी गई HADR (मानवीय सहायता और आपदा राहत) सामग्री सौंपी गई. इसके अलावा, मोजाम्बिक नौसेना अस्पताल में एक चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया गया. प्रस्थान के समय, जहाज ने मोजाम्बिक नौसेना के कर्मियों के साथ संयुक्त विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) निगरानी और प्रशिक्षण गतिविधियां भी कीं, इसके बाद वह अपनी निर्धारित ऑपरेशनल तैनाती के लिए आगे बढ़ गया. यह पोर्ट कॉल हिंदुस्तान की रणनीतिक दृष्टि को दर्शाता है और हिंद महासागर में एक विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार और प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले देश के रूप में हिंदुस्तानीय नौसेना की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है.
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पोर्ट कॉल क्या होता है?
पोर्ट कॉल (Port Call) का मतलब होता है जब कोई नौसैनिक जहाज या वाणिज्यिक (मर्चेंट) जहाज किसी विदेशी या घरेलू बंदरगाह (Port) पर कुछ समय के लिए रुकता है. आसान भाषा में समझें तो जहाज का किसी पोर्ट पर आधिकारिक दौरा ही पोर्ट कॉल कहलाता है.
पोर्ट कॉल क्यों किया जाता है?
- सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए (जैसे हिंदुस्तानीय नौसेना और दूसरे देशों की नौसेना के बीच)
- ईंधन, राशन और जरूरी सामान लेने के लिए
- जहाज की मरम्मत या तकनीकी जांच के लिए
- संयुक्त अभ्यास (जॉइंट एक्सरसाइज) करने के लिए
- डिप्लोमैटिक संबंध मजबूत करने के लिए
- सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए
नौसेना के संदर्भ में खास मतलब
जब इंडियन नेवी का कोई जहाज किसी दूसरे देश के पोर्ट पर जाता है, तो वह सिर्फ रुकता नहीं है, बल्कि उस देश की नौसेना से ट्रेनिंग करता है, अधिकारियों की मुलाकात होती है और दोस्ताना संबंध मजबूत किए जाते हैं.
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