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SIR in Bengal: मालदा हिंसा मामले में एनआइए की जांच तेज, 40 बीएलओ तलब

मुख्य बातें

SIR in Bengal: कोलकाता. मालदा में एसआइआर प्रक्रिया के विरोध के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाये जाने और हिंसा के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने जांच तेज कर दी है. एजेंसी ने 40 बीएलओ को तलब किया है, जिनमें से रविवार को 22 से पूछताछ की जा चुकी है. पूछताछ मालदा स्थित एनआइए के अस्थायी कार्यालय में की गयी. रविवार को एनआइए की टीम जांच के सिलसिले में एक बार फिर मोथाबाड़ी बीडीओ कार्यालय पहुंची. यहां घटना के दौरान न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेरकर रखे जाने के आरोप हैं. अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश की.

तीन हिस्सों में बांटा गया जांच का दायरा

सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार के बाद शनिवार को भी देर रात तक मोथाबाड़ी और कालियाचक इलाकों में जांच जारी रही. शनिवार को टीम इंग्लिशबाजार थाना क्षेत्र भी पहुंची, जहां सीसीटीवी फुटेज खंगाले गये और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की गयी. जांच को तीन हिस्सों में बांटकर आगे बढ़ाया जा रहा है. एक टीम बीडीओ कार्यालय, दूसरी घटनास्थल और तीसरी थाने में जांच कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि भीड़ कैसे इकट्ठा हुई, किसने नेतृत्व किया और न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना कैसे हुई. इस मामले में मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार किया जा चुका है. एनआइए को आशंका है कि इसके पीछे संगठित साजिश हो सकती है. फिलहाल एजेंसी जल्द ही अपनी प्राथमिक रिपोर्ट अदालत में पेश करने की तैयारी में है.

स्त्री बीएलओ के खिलाफ एफआईआर

इस बीच, तृणमूल के नेतृत्व वाली बीएलओ अधिकार संरक्षण समिति की एक स्त्री सदस्य के खिलाफ सीईओ कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. स्त्री बीएलओ तनुश्री मोदक भट्टाचार्य को नोटिस भेजा गया है. उन्हें नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर कोलकाता के हरे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा गया है. जानकारी के अनुसार, पुलिस ने चुनाव आयोग के आदेश पर यह एफआईआर दर्ज की है.

गिरफ्तारी की चेतावनी

स्त्री पुलिस अधिकारी को भेजे गए नोटिस में उन निर्देशों का उल्लेख है जिनका उसे पालन करना होगा. नोटिस में कहा गया है कि उसे जांच में पुलिस को हर संभव सहयोग देना होगा. उसे भविष्य में इस तरह की निंदनीय गतिविधियों में शामिल नहीं होना चाहिए. उसे घटना से संबंधित किसी भी सबूत को नष्ट नहीं करना चाहिए. उसे जांच के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे. उसे जांच में बाधा नहीं डालनी चाहिए. पुलिस ने नोटिस में कहा है कि इन निर्देशों का पालन न करने पर गिरफ्तारी हो सकती है.

एफआईआर दर्ज होने का यह पहला मामला

संयोगवश, पिछले साल नवंबर की शुरुआत में बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद कुछ बीएलओ (BLO) मुखर हो गए. तृणमूल समर्थित बीएलओ अधिकार संरक्षण समिति ने बीएलओ पर अत्यधिक कार्यभार का आरोप लगाते हुए सीईओ कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यभार के कारण कई बीएलओ ने आत्महत्या कर ली है. सीईओ कार्यालय के सामने इकट्ठा होने के लिए किसी स्त्री बीएलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने का यह पहला मामला है.

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भाजपा समर्थकों के खिलाफ शिकायत दर्ज

इसी बीच, 24 फरवरी को, विधानसभा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्यालय के बाहर बीएलओ अधिकार संरक्षण समिति के धरने के दौरान, विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्यालय गए. उन्हें नारे लगाते हुए देखा गया. इसके बाद, भाजपा समर्थक मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्यालय के बाहर जमा हो गए. मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्यालय के सामने अशांति फैल गई. इस घटना में तनुश्री मोदक भट्टाचार्य ने भाजपा समर्थकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. अब आयोग के आदेश पर पुलिस ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्यालय के सामने जमा होने के आरोप में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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