खास बातें
Kshudiram Tudu Ranibandh MLA: पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में कुछ जीतें केवल सीटों का आंकड़ा नहीं, बल्कि संघर्ष की दास्तान होती हैं. बांकुड़ा जिले की रानीबांध (ST) सीट से भाजपा की ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले खुदीराम टुडू की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.
जान जोखिम में डालकर किया ‘आतंक’ का सामना
एक समय था, जब जंगलमहल का यह इलाका माओवादी आतंक के साये में सांस लेता था. उस दौर में खुदीराम टुडू ने न केवल अपनी जान जोखिम में डालकर आतंक का सामना किया, बल्कि शिक्षा की लौ भी जलाये रखी. आज वही साधारण शिक्षक ‘माननीय विधायक’ बनकर बंगाल विधानसभा पहुंच गये हैं.
लाल आतंक का वो दौर और खुदीराम का हौसला
जंगलमहल के रानीबांध में वर्ष 2008 से 2011 के बीच माओवादियों का दबदबा ही नहीं, आतंक था. पेशे से शिक्षक खुदीराम टुडू ने उस दौर को करीब से देखा है, जब माओवादियों के डर से लोग घरों से बाहर निकलने में भी कतराते थे. उन पर भी कई बार दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. खुदीराम ने अपने कई साथियों को खोया, लेकिन आदिवासियों के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई कभी थमी नहीं.
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शिक्षक से विधायक तक का सफर
खुदीराम टुडू की छवि एक सौम्य और मिलनसार शिक्षक की रही है. वे प्रशासनी सहायता प्राप्त स्कूल में शिक्षक हैं और उनकी पत्नी आशा वर्कर. इस सादगी ने उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया. 2026 के बंगाल चुनाव में उन्होंने टीएमसी की कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री ज्योत्सना मांडी को पटखनी दी है. रानीबांध की जनता ने विकास और सुरक्षा के नाम पर खुदीराम को अपना प्रतिनिधि चुना है. खुदीराम कहते हैं कि उनकी प्राथमिकता रानीबांध के दुर्गम इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है.
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Kshudiram Tudu Ranibandh MLA: जंगलमहल का बदलता मिजाज
शुभेंदु अधिकारी की नयी प्रशासन में खुदीराम टुडू जैसे जमीनी नेताओं का कद बढ़ा है. माओवाद प्रभावित इलाकों में भाजपा की इस जीत को ‘आतंक पर लोकतंत्र की विजय’ के रूप में देखा जा रहा है. खुदीराम का मानना है कि अब जंगलमहल में डर का नहीं, बल्कि ‘सोनार बांग्ला’ के निर्माण का युग शुरू हो गया है.
हिंसा के रास्ते पर चल पड़े युवाओं के लिए मिसाल हैं टुडू
साधारण झोपड़ी से निकलकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचने वाले खुदीराम टुडू आज उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो हिंसा के रास्ते को छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं.
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