TribalNews : पुरीहासा ग्राम सभा के ग्रामीणों ने बहुमंजिला इमारत निर्माण के विरोध में एकजुट होकर सड़क पर आक्रोश रैली निकाली. इस रैली में “ग्राम सभा जिंदाबाद”, “माझीमोड़ेहोड़जीतकर” और “ग्रामीण एकता जिंदाबाद” जैसे नारे गूंजते रहे. ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया. उनका कहना था कि इस प्रकार के निर्माण से न केवल पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि पारंपरिक जीवनशैली भी खतरे में पड़ गई है.
पर्यावरण और जल संकट की समस्या
गांव के लोग लंबे समय से इस क्षेत्र में पानी की कमी का सामना कर रहे हैं, और बहुमंजिला इमारतों के निर्माण से यह संकट और बढ़ गया है. ग्रामीणों का आरोप है कि इन निर्माण कार्यों के कारण जलस्त्रोत सूख रहे हैं, जिससे उन्हें पीने के पानी के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है. जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण गांव के परंपरागत जलाशय भी प्रभावित हो रहे हैं. पर्यावरण संतुलन बिगड़ने से कृषि और पशुपालन पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है, जिससे ग्रामीणों की आजीविका संकट में आ गई है.
स्वशासन और सामाजिक संरचना पर असर
ग्रामीणों का मानना है कि इन बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोग स्थानीय स्वशासन व्यवस्था को नहीं मानते, जिससे सामाजिक तानाबाना कमजोर हो रहा है. पारंपरिक ग्राम सभा के निर्णयों का सम्मान नहीं किया जा रहा है, जिससे स्वशासन की व्यवस्था खतरे में पड़ गई है. ग्रामीणों का कहना है कि बाहरी लोगों की बढ़ती संख्या से उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपरागत अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं.
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
-बहुमंजिला इमारत निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोका जाए.
-ग्राम सभा की सहमति के बिना कोई भी बड़ा निर्माण कार्य न किया जाए.
-पर्यावरण और पारंपरिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं.
-जल संसाधनों की रक्षा के लिए उचित योजनाएं बनाई जाएं.
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