Jharkhand 108 Ambulance Strike: झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर बुधवार, 21 अक्टूबर से स्थिति गंभीर हो सकती है. अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे 108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने आज से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का फैसला बरकरार रखा है. स्वास्थ्य विभाग और कर्मचारी संघ के बीच हुई वार्ता में सभी मांगों पर सहमति नहीं बनने के बाद संघ ने आंदोलन वापस नहीं लिया है.
किन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे कर्मचारी
108 एंबुलेंस कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लंबित वेतन का भुगतान, सेवा से हटाए गए कर्मचारियों की बहाली और श्रमिकों को वैधानिक अधिकार देने की मांग शामिल है. कर्मचारी EPF, ESI, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन जैसे अधिकारों की भी मांग कर रहे हैं.
इसके अलावा कर्मचारी 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से कराने और कर्मचारियों के वेतन भुगतान की व्यवस्था प्रशासनी स्तर पर करने की मांग कर रहे हैं.
वार्ता के बाद भी नहीं टला हड़ताल का फैसला
स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में कर्मचारियों की मांगों को लेकर वार्ता हुई थी. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कर्मचारियों की सभी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद कर्मचारी संघ ने 21 अक्टूबर से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल के अपने फैसले को बरकरार रखा.
कर्मचारियों का कहना है कि वेतन और श्रमिक अधिकारों से जुड़ी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं. इससे पहले भी कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन के तहत सेवा बाधित कर चुके हैं.
108 सेवा पर कितना पड़ेगा असर?
108 एंबुलेंस सेवा आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में अगर राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रभावी होती है तो आपातकालीन मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि झारखंड में 108 सेवा पूरी तरह बंद हो गई है. अलग-अलग जिलों में सेवा की स्थिति अलग हो सकती है. उदाहरण के लिए गिरिडीह में 16 अक्टूबर को जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने जिले की 39 एंबुलेंस के सामान्य रूप से चलने की जानकारी दी थी.
प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था का संकेत दिया
प्रशासन की ओर से पहले कर्मचारियों से हड़ताल का रास्ता छोड़कर काम पर लौटने की अपील की गई थी. मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में कार्रवाई और वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई थी. ऐसे में 21 अक्टूबर से कर्मचारियों के आंदोलन के बीच प्रशासन की ओर से 108 सेवा को चालू रखने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है, इस पर भी नजर रहेगी.
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पहले भी बाधित हो चुकी है 108 सेवा
लंबित मांगों को लेकर 108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने अक्टूबर में चरणबद्ध आंदोलन किया है. 15 अक्टूबर की रात से 17 अक्टूबर तक कर्मचारियों की कार्यबंदी के कारण कई जगह सेवा प्रभावित हुई थी और मरीजों को वैकल्पिक साधनों से अस्पताल पहुंचाना पड़ा था. अब 21 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल के फैसले के कारण राज्य की आपातकालीन एंबुलेंस सेवा पर संभावित असर को लेकर मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ सकती है.
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