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Anant Singh : नाम से नहीं, काम से! बेटे की राजनीति में इंट्री से पहले ‘बाहुबली’ ने रखी बड़ी शर्त?

Anant Singh Bahubali Statement Son : ‘बाहुबली’ ये शब्द अनंत सिंह के नाम के साथ बरबस ही लग जाता है. जेल की यात्राएं उनके लिए आम सी बात है. अनंत सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आए हैं. इस बार दुलारचंद यादव की हत्‍या के मामले में नामजद अभियुक्त बनाए गए थे. चार महीने जेल में रहने के बाद जेल से बाहर आए. उनके आगमन पर राजधानी पटना में जबरदस्त उत्साह देखा गया. बाहुबली का भव्‍य स्‍वागत हुआ. आज वो बड़हिया रवाना हुए.

दोबारा कहा, नहीं लड़ेंगे चुनाव

इस दौरान उन्होंने जो बात कही वो बिल्कुल ही चौंकाने वाली थी. शायद ‘बाहुबली’ के मुंह से तो ये बात थोड़ी अलग जरूर थी. वो बात क्या है? इस पर चर्चा आगे करेंगे. मगर इससे पहले थोड़ा बैकग्राउंड बता दूं. वैसे तो अनंत सिंह ये पहले ही कह चुके हैं कि अब वो चुनाव नहीं लड़ेंगे. यह ऐलान उन्होंने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद किया. उन्होंने यह भी कहा था कि जब नीतीश जी नहीं रहेंगे, तो हम भी चुनाव नहीं लड़ेंगे. 

‘पहले जनता के बीच जाएगा’

आज उन्होंने इसी बात को एक बार फिर बड़हिया जाते वक्त भी दोहराया है. उन्होंने अपने अंदाज में कहा, ‘न अब हम चुनाव नहीं लड़ेंगे.’ पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्‍या आप अपने बेटे को चुनावी मैदान में उतारेंगे? इस पर उनका जवाब ‘देखेंगे’ जैसा था. पहले तो अनंत सिंह इस सवाल पर रुकते नजर आए. फिर उन्होंने कहा, ‘पहले तो वो जनता के बीच जाएगा, जनता से मिलेगा… उनसे घुलेगा-मिलेगा, उनका काम करेगा तब.’

विरासत नहीं, काम से नेतृत्व का संकेत

अब आते हैं उसी चौंकाने वाली बात पर. अनंत सिंह ने जो जवाब दिया, वो बिहार की नेतृत्व के लिए तो चौंकाने वाली बात है. वो ऐसे कि उनका अपने विधानसभा क्षेत्र मोकामा में जो दबदबा है, उसे किसी को बताने की जरूरत नहीं. इस लिहाज से ये बयान चौंकाता है! अनंत सिंह जिस क्षेत्र में चुनाव लड़ाने और जिताने की क्षमता रखते हैं, उस क्षेत्र में अपने बेटे को मिलने-जुलने और जनता का काम करने की नसीहत दे रहे हैं! मोकामा में अनंत सिंह का साथ चुनाव में जीत की गारंटी है. मोकामा में अनंत सिंह की छवि और रुतबा अलग है. छोटी-मोटी समस्या के समाधान के लिए इलाके के लोग थाने नहीं जाते. विवादों का निपटारा उनके आवास पर ही हो जाता है. शायद इसलिए उन्हें ‘छोटे प्रशासन’ कहा जाता है. मगर वही छोटे प्रशासन अपने बच्‍चों को विरासत सौंपने से पहले जनता से मिलने-जुलने का संदेश दे रहे हैं.

बाहुबली का रुख चौंकाने वाला

ऐसे में, अपने बेटे को लेकर उनका यह बयान एक अलग नेतृत्वक संदेश देता है. आमतौर पर नेतृत्व में विरासत का रास्ता आसान माना जाता है, लेकिन अनंत सिंह इसे सहज नहीं बनाना चाहते. उनका संकेत साफ है, चाहे अभिषेक हों या अंकित, नेतृत्व में आने से पहले उन्हें जनता के बीच जाकर काम करना होगा, लोगों का भरोसा जीतना होगा. सिर्फ ‘अनंत सिंह’ का नाम ही उनकी पहचान नहीं बनेगा. बिहार की नेतृत्व में जहां उनसे जुड़े विवाद अक्सर चर्चा में रहते हैं, वहीं ‘बाहुबली’ नेता का यह रुख अपने आप में अलग और चौंकाने वाला जरूर है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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