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bhagalpur news. न्याय सुलभ और त्वरित हुआ, लेकिन पुलिस अनुसंधान में अभी सुधार जरूरी

आदमपुर स्थित नया विचार कार्यालय में रविवार को आयोजित लीगल काउंसलिंग में वरीय अधिवक्ता ऋषिकेश चौधरी ने पाठकों को कानूनी सलाह दी. इस दौरान उन्होंने कहा कि देश की न्यायिक व्यवस्था में बीते वर्षों में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है. कहा कि न्यायालयों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे मामलों के निष्पादन की गति पहले के मुकाबले तेज हुई है. लोक अदालत के माध्यम से भी वादों का त्वरित और सुलभ निष्पादन संभव हो सका है. कहा कि न्यायालयों में तकनीक के बढ़ते उपयोग से न्याय प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है. ऑनलाइन सुनवाई, ई-फाइलिंग और डिजिटल रिकॉर्ड के कारण अब पीड़ित व्यक्ति को न्याय पहले की तुलना में अधिक सुलभ हुआ है. प्रशासन की ओर से आर्थिक रूप से विपन्न लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को भी मुफ्त और त्वरित न्याय मिल रहा है. नये कानून लागू होने के बाद न्यायिक प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन देखा जा रहा है. इससे थानों और प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ी है. अब थानों में शिकायतों को पहले की तुलना में अधिक गंभीरता से सुना जा रहा है. हालांकि, अधिवक्ता ने पुलिस की कार्यप्रणाली और अनुसंधान प्रक्रिया में और सुधार की आवश्यकता जताई. कहा कि पुलिस और प्रशासन को ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ तकनीकी अनुसंधान को अपनाना चाहिए, तभी न्याय व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी. अधिवक्ता ने बड़ी संख्या में पाठकों के प्रश्नों का उत्तर दिया. प्रश्न – मेरी शादी को सात साल हो गए. कोई बच्चा नहीं है, इसलिए मैं दूसरी शादी करना चाहता हूं. मेरे घर वाले दूसरी शादी के लिए प्रेशर बना रहे हैं, लेकिन पत्नी और उसके मायके वाले तैयार नहीं हैं. क्या है कानूनी प्रावधान.

एक पाठक, उर्दू बाजार, भागलपुर.

उत्तर – पहली शादी के कायम रहते आप दूसरी शादी नहीं कर सकते. बेहतर होगा कि आप अच्छे चिकित्सक के परामर्श लें. आप अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं.

प्रश्न – शिक्षक की नौकरी लगाने के एवज में भागलपुर के ही एक नेता ने मुझसे डेढ़ लाख रुपए ले लिए. अब देने में आनाकानी कर रहा है, क्या करना चाहिए जिससे रकम प्राप्त किया जा सके.

अभिनव, सुर्खिकल, भागलपुर

उत्तर – आप न्यायालय में मुकदमा दायर कर रकम प्राप्त कर सकते हैं.

प्रश्न – मेरे पति काफी शराब पीते हैं, इस कारण घर की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है. अगर पुलिस को सूचना देती हूं तो वे जेल चले जाएंगे और मेरे घर की स्थिति और ज्यादा खराब हो जाएगी. जब शराब बंद है तो पुलिस बेचने वाले पर कार्रवाई क्यों नहीं करती है. मुझे कानूनी सलाह दें.

एक पाठिका, मोजाहिदपुर, भागलपुर.

उत्तर – जेएलएनएमसीएच में एक नशा मुक्ति केंद्र संचालित है. वहां आप अपने पति का इलाज करवाईये. आपके पति को नशे से मुक्ति मिल जाएगी.

प्रश्न – मैं इन दिनों एक अजीब उधेड़बुन में हूं. मेरे पति दिल्ली में रहते हैं और वहां उन्होंने दूसरी शादी कर ली है. अब न तो वे खर्चा भेजते हैं और न ही फोन करते हैं. मुझे क्या करना चाहिए.

अलका कुमारी, भागलपुर.

उत्तर – फैमिली कोर्ट में मेंटनेंस केस करें. आप अपने पति से मेंटनेंस लेने की हकदार हैं.

प्रश्न – तीन साल से मेरी पत्नी मायके में है. वह आना नहीं चाहती. फैमिली कोर्ट गये तो वहां न्यायालय से एक्स पार्टी कर दिया गया है और अब गवाहों को गवाही देने को कहा जा रहा है.

राजेश मंडल, घोघा, भागलपुर.

उत्तर – आप सही न्यायिक प्रक्रिया में हैं. अपने वकील के माध्यम से केस की उचित पैरवी करवाते रहें. आपको निश्चित रूप से न्याय मिलेगा.

प्रश्न – मैंने डाऊट बाट में जमीन की खरीददारी की. घर बना लिया और रह भी रहा हूं. तीन साल बाद एक व्यक्ति आ कर उक्त जमीन पर दावेदारी कर रहा है कि पहले उसने जमीन खरीदी है. क्या करें.

उत्तर – आप विक्रेता को लीगल नोटिस भेजें और स्थिति स्पष्ट करने को कहें.

प्रश्न – मेरी पत्नी ने मुझपर झूठा मुकदमा कर दिया है. तलाक का मामला भी विचाराधीन है. न्यायालय के आदेश पर दस हजार रुपये मेंटनेंस दे रहा हूं, जो काफी अत्यधिक है. अब तलाक के एवज में पत्नी 20 लाख मांग रही है.

उत्तर – मेंटनेंस ज्यादा है तो आप अपनी बात को संबंधित अदालत या वरीय अदालत में रख सकते हैं. 20 लाख रुपये निश्चित रूप से मौखिक रूप से मांग रही होगी. इसके लिए बेफिक्र रहें, आपको तलाक निश्चित रूप से मिल जाएगा.

स्त्रीओं को शिक्षित और स्वावलंबी होना जरूरी

वरीय अधिवक्ता ने कहा कि स्त्रीओं में साक्षरता की कमी, आर्थिक दिक्कत और रोजगार के अवसरों का अभाव उन्हें घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है. जब स्त्री शिक्षित नहीं होती या आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर रहती है, तो वह अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में असमर्थ हो जाती है. घरेलू हिंसा के कई मामलों में असहायता और निर्भरता ही सबसे बड़ा कारण बनती है. स्त्रीओं को पुरुषों की बराबरी में खड़ा होने के लिए शिक्षित और स्वावलंबी होना अत्यंत आवश्यक है. शिक्षा से जागरूकता आती है और रोजगार से आत्मनिर्भरता, जिससे स्त्रीएं अपने सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा कर सकती है.

न्यायिक व्यवस्था में ग्राम कचहरी की भूमिका अहम

अधिवक्ता ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में ग्राम कचहरी ने जमीनी स्तर पर विवादों के त्वरित और सुलभ निपटारे में अहम भूमिका निभाई है. छोटे-मोटे विवादों का समाधान गांव में ही होने से लोगों को समय और खर्च दोनों की बचत होती है. इससे न्याय आम लोगों के और करीब पहुंचा है. हालांकि, ग्राम कचहरी के कार्य निष्पादन को और अधिक प्रभावशाली बनाने की आवश्यकता है. इसके लिए ग्राम कचहरी के क्रियान्वयन के दायरे को बढ़ाना, अधिकारों को स्पष्ट करना और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में न्यायिक व्यवस्था और अधिक सशक्त होगी.

प्रस्तुति – ऋषव मिश्रा कृष्णा

डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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