मानस सत्संग सद्भावना समिति की ओर से रविवार को मानस सद्भावना सम्मेलन के छठे दिन मानस कोकिला कृष्णा मिश्रा समेत देश के विभिन्न क्षेत्र के विद्वानों ने प्रवचन किया. आयोजन में मुख्य अतिथि एमएलसी डॉ एनके यादव ने हिस्सा लिया. सामूहिक सुंदरकांड पाठ और हवन से मारवाड़ी पाठशाला परिसर व आसपास क्षेत्र भक्तिमय हो गया. मानस कोकिला कृष्णा मिश्रा ने कहा कि भक्त के लिए जब भगवान जागते हैं, तभी भक्त चैन से सोते हैं. लोग बोलने के पहले बहिर्मुख होते हैं, लेकिन जब अंतर्मुखी होते हैं, तो उन्हें ईश्वर की वाणी होती है.
रामेश्वर उपाध्याय ने कहा कि जिसके जीवन में त्याग है, वही शांति को प्राप्त करते हैं. पंकज रामायणी ने कहा कि भगवान को भी गंगा पार करने के लिए केवट के नाव का सहारा लिया था, पर केवट ने उत्तराई के रूप में उनके चरण धोए. यह भक्ति थी. वास्तव में केवट पिछले जन्म में कछुआ था, जो भगवान के चरणों की सेवा करना चाहता था. पर क्षीरसागर में शेषनाग और लक्ष्मी जी के कारण उसे मौका नहीं मिलता. राम अवतार में भगवान ने उसे यह मौका दिया. नीलम शास्त्री ने कहा कि परमार्थ के लिए ही कार्य करना ईश्वर का कार्य होता है. रघुनंदन ठाकुर ने भी प्रवचन किया. रवि किशन जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को प्रभु श्रीराम की मर्यादा ही नहीं, उनके स्वभाव का भी अनुकरण करना चाहिए. मंच संचालन प्रमोद मिश्रा ने किया. आयोजन की अध्यक्षता अध्यक्ष मृत्युंजय प्रसाद सिंह ने की, तो कार्यक्रम का संचालन महामंत्री श्वेता सिंह ने किया. इस मौके पर अमरेंद्र कुमार सिन्हा, हरि किशोर सिंह कर्ण, रत्नाकर झा, महेश राय, सुनील चटर्जी, सुनीता सिंह, विनीता मिश्रा, पंडित अरुण शुक्ला, चंदन कर्ण, बलजीत सिंह, कुणाल सिंह, विनोद सिन्हा, मनोरमा देवी आदि उपस्थित थे.
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