कहलगांव मथुरापुर संथाली टोला में शनिवार को आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व बधना उर्फ सोहराय उल्लास से मनाया गया. यह पर्व प्रकृति, पशुधन तथा भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक माना जाता है. पर्व के पहले दिन “ऊम” पर गांव के बाहर गोदखान पूजा कर मुर्गे की बलि दी गयी और खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया गया. दूसरे दिन “ढाका” में घरों और गोहाल में पारंपरिक चित्र बनाये गये तथा गोहाल की पूजा हुई. तीसरे दिन “खून” में पशुओं को धान की बालियों की माला से सजा कर ढोल-नगाड़ों से रस्म निभायी गयी. चौथे दिन “जाली” पर आपसी मिलन और नृत्य-संगीत हुआ. पांचवें दिन “हाकु काटकोम” में सामूहिक रूप से मछली पकड़ कर भोज का आयोजन किया गया. छठे और अंतिम दिन “सकरात” (मकर संक्रांति) पर पारंपरिक शिकार स्पोर्ट्सा गया. सोहराय पर्व को भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि भाई बहन को अपने घर आने का निमंत्रण देता है, जो एक लोककथा से जुड़ी परंपरा है. मौके पर मांझी, हाड़ाम, निशु मुर्मू, नायकी, लाले हांसदा, गोडेत, सोम, हांसदा, प्राणिक, राम लखन हांसदा, जोग मांझी, मंगल सोरेन, सामाजिक कार्यकर्ता कारण मुर्मू, शिव शंकर सोरेन, सुनील सोरेन सहित काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
महाशिवरात्रि पर फूलों की होली व कई धार्मिक कार्यक्रम
कहलगांव प्रखंड के उत्तरवाहिनी गंगा के तट स्थित बाबा बटेश्वर नाथ धाम में महाशिवरात्रि पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा. केंद्रीय रेलवे रेलयात्री संघ के अध्यक्ष विष्णु खेतान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इन कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की गयी है. रेलवे रेलयात्री संघ के अध्यक्ष ने बताया कि 14 फरवरी से मंदिर परिसर में 24 घंटे का अखंड संकीर्तन और रामचरितमानस पाठ का शुभारंभ होगा. मंदिर परिसर में साफ-सफाई, रंग रोगन कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है. महाशिवरात्रि पर मंदिर परिसर को फूलों से सजाया जायेगा. महाशिवरात्रि पर बाबा का रुद्राभिषेक, भव्य शृंगार, छप्पन भोग, फूलों की होली और विशाल भंडारा होगा. मंदिर परिसर में एंबुलेंस और व्हीलचेयर की विशेष व्यवस्था की गयी है.
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