भागलपुर चार माह से पेंशन से वंचित टीएमबीयू के पेंशनरों ने गुरुवार को विवि के गेस्ट हाउस में आपात बैठक की. पेंशनर संघर्ष मंच के तत्वावधान में आयोजित बैठक में चार दर्जन से अधिक सेवानिवृत्त शिक्षक व कर्मचारी शामिल हुए. दो साल से लगातार पेंशन से जुड़े अलग-अलग कारणों से विलंब किये जा रहे हैं. विवि प्रशासन व प्रशासन की संवेदनहीनता को लेकर पेंशनरों ने आक्रोश व्यक्त किया है. प्रशासन तो विभिन्न प्रकार का बहाना बनाकर अनुदान रोक देती है, लेकिन टीएमबीयू प्रशासन भी नियोक्ता होने का कर्तव्य नहीं निभाता है. विवि में ढाई हजार से अधिक पेंशनर हैं. उनमें से शायद ही कोई हो जिसका बकाया विवि के पास नहीं होगा. दर्जनों लोग ऐसे हैं, जिन्हें दो साल से पेंशन या फैमिली पेंशन नहीं मिला है. दूसरी तरफ विवि प्रशासन विभिन्न मदों के बकाया के भुगतान के लिए प्रशासन से प्राप्त राशि को वापस लौटा दिया जाता है. पूर्व में प्राप्त सेवांत लाभ की राशि को पहले तो वर्षों तक फिक्स्ड डिपॉजिट करके रखा गया. फिर प्रशासन के दबाव में लाभार्थियों को देने के बदले पिछले दिनों लगभग तीन सौ करोड़ रुपये लौटा दिया गया है. सदस्यों ने इस मामले को मानवाधिकार का उल्लंघन बताया.
टीएमबीयू के पेंशनर संघर्ष मंच के संयोजक डॉ पवन कुमार सिंह ने कहा कि पेंशनरों द्वारा मिलने का समय मांगने पर कुलपति नहीं मिलते हैं. अपने कार्यालयी वेश्म में नहीं बैठते हैं. बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि सभी पीड़ित पेंशनर व्यक्तिगत रूप से और पेंशनर संघर्ष मंच सामूहिक रूप से कुलाधिपति, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश व मानवाधिकार आयोग को त्राहिमाम संदेश भेजें. बैठक में प्रो तपन घोष, प्रो अमिता मोइत्रा, प्रो डीएन सिंह, प्रो वीरेंद्र कुमार सिंह, प्रो बिहारी लाल चौधरी, प्रो विभूति नारायण सिंह, प्रो अरुण कुमार, प्रो गुरुदेव पोद्दार, प्रो बहादुर मिश्रा, अमरेंद्र झा, आशुतोष राजेश, किशन कालजयी, अजय शर्मा, प्रो जेपी झा, अमरेंद्र झा, विभाष चंद्र झा, प्रो ओम प्रकाश गुप्ता, प्रो रविशंकर प्रसाद, प्रो राजीव सिंह, प्रो चंद्रभानु सिंह आदि मौजूद थे.
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