Bihar Politics: राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले रोहिणी आचार्य का बयान पार्टी के लिए असहज करने वाला साबित हो रहा है. उन्होंने बिना किसी का नाम लिए पार्टी की मौजूदा कमान और उसके आसपास मौजूद लोगों पर तीखा हमला बोला है.
रोहिणी ने साफ कहा कि जो सही मायनों में ‘लालूवादी’ होगा, वह पार्टी की बदहाली के खिलाफ आवाज उठाएगा, न कि चुप्पी साधेगा. उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है जब आरजेडी में नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक बदलाव की चर्चाएं तेज हैं.
जो सही मायनों में लालूवादी होगा, जिस किसी ने भी लालू जी के द्वारा, हाशिए पर खड़ी आबादी – वंचितों के हितों के लिए मजबूती से लड़ने वाली, खड़ी की गयी पार्टी के लिए निःस्वार्थ भाव से संघर्ष किया होगा, जिस किसी को भी लालू जी के द्वारा सामाजिक – आर्थिक न्याय के लिए किए गए सतत संघर्ष…
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) January 25, 2026
“लालूवाद को खत्म करने की साजिश” का आरोप
रोहिणी आचार्य ने पार्टी की स्थिति को ‘बदहाल’ और ‘चिंताजनक’ बताते हुए कहा कि अब असली कमान ऐसे लोगों के हाथ में चली गई है जो ‘घुसपैठिए’ और ‘साजिशकर्ता’ हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हें विरोधी ताकतों ने खास मकसद से भेजा है, ताकि लालू प्रसाद की विचारधारा यानी ‘लालूवाद’ को कमजोर किया जा सके. उनका कहना है कि पार्टी के भीतर वही लोग हावी हो रहे हैं, जिन्हें न तो आंदोलन की समझ है और न ही संघर्ष की विरासत का सम्मान.
नेतृत्व की चुप्पी पर सीधा सवाल
रोहिणी का सबसे तीखा हमला नेतृत्व की कार्यशैली पर किया है. उन्होंने कहा कि सवालों से भागना और भ्रम फैलाना किसी भी मजबूत नेतृत्व की पहचान नहीं हो सकती. उनका इशारा साफ तौर पर तेजस्वी यादव की ओर माना जा रहा है. रोहिणी ने लिखा कि अगर नेतृत्व चुप्पी साधे रहता है, तो यह मान लिया जाएगा कि वह साजिश करने वालों के साथ खड़ा है. उनके मुताबिक, जो लोग लालूवाद की बात करते हैं, उनके साथ दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पार्टी की मूल सोच के खिलाफ है.
रोहिणी का बयान पार्टी के भीतर गहरी होती दरार को उजागर करता है. उनका इशारा उन चेहरों की ओर है जो तेजस्वी यादव के कोर ग्रुप का हिस्सा माने जाते हैं और जिन पर पुराने लालूवादी नेताओं को किनारे करने का आरोप लगता रहा है. ऐसे में यह बयान सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि एक नेतृत्वक संदेश भी है.
बैठक में गूंज सकते हैं सवाल
आरजेडी इस समय कार्यकारिणी की बैठक करने में में जुटी है. ऐसे वक्त में रोहिणी का यह हमला नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकता है. अब देखना यह होगा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इन सवालों की कितनी गूंज सुनाई देती है और पार्टी इन आरोपों से कैसे निपटती है.
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