BJP: कोलकाता में आई-पैक के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय के छापे को लेकर सियासी बवाल थमता नहीं दिख रहा है. प्रवर्तन निदेशालय के छापे के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया. हालांकि प्रदर्शनकारी सांसदों को पुलिस उठाकर थाने ले गयी और कुछ घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया. वहीं पश्चिम बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस के नेता सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. कोलकाता हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई भीड़ के कारण स्थगित कर दी गयी और अब मामले की सुनवाई 14 जनवरी को होगी.
इस मामले में भाजपा भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रवैये को लेकर आक्रामक है. शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में जिस तरह दखल दिया गया वह हिंदुस्तान के इतिहास में कभी नहीं हुआ. मुख्यमंत्री ने जिस तरह का काम किया वह पूरी तरह अनैतिक, गैर-जिम्मेदार और असंवैधानिक है. मुख्यमंत्री की हरकत से लोकतांत्रिक प्रक्रिया कलंकित हुई है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एक निजी संपत्ति पर प्रवर्तन निदेशालय की ओर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत छापेमारी की कार्रवाई हो रही थी.
इस कार्रवाई के बीच मुख्यमंत्री ने वहां पहुंचकर जांच एजेंसी के अधिकारी को धमकाने का काम किया और दस्तावेज लेकर अपने साथ चली गयी. यह छापा किसी नेतृत्वक दल के कार्यालय पर नहीं मारा गया था बल्कि कोयले की तस्करी और और हवाला लेनदेन को लेकर किया गया था.
आखिर क्या छुपाना चाहती है ममता बनर्जी
भाजपा नेता ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर, दफ्तर, तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर या पार्टी के किसी नेता के घर पर नहीं हो रही थी. प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई एक निजी कंसल्टेंसी फर्म पर थी, जिस पर करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर शिकायत मिली थी. ऐसे में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों के छापे की जगह पहुंचकर जांच एजेंसी के अधिकारियों को धमकाने का काम करती है और उनसे जरूरी दस्तावेज छीनकर अपने साथ लेकर जाने का काम करती है. साथ ही जांच एजेंसी के अधिकारियों को धमकाया जाता है. एक मुख्यमंत्री का ऐसा आचरण अमर्यादित और शर्मनाक ही नहीं बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं को भी तार-तार करने वाला है.
उन्होंने कहा कि आखिर क्या वजह रही है कि मुख्यमंत्री प्रवर्तन निदेशालय के छापे से इतनी डरी और घबराई हुई हैं. पिछले 15 साल से मुख्यमंत्री के पद पर काबिज ममता बनर्जी को आखिर एक निजी एजेंसी पर छापे के कारण नियमों और संवैधानिक प्रक्रिया को ताक पर रखने के लिए क्यों कदम उठाना पड़ा? मुख्यमंत्री के रवैये से साफ जाहिर होता है कि वहां कुछ ऐसा संवेदनशील दस्तावेज था, जिसे निकालना बेहद जरूरी थी. चाहे इसके लिए नियमों और संवैधानिक मर्यादाओं को ही ताक पर क्यों नहीं रखना पड़े. ममता बनर्जी ने जिस तरह का काम किया है, उससे स्पष्ट होता है कि पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार का राज खुलने के डर से वे बौखला गयी है. लेकिन आने वाले समय में राज्य की जनता इसका जवाब देगी.
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