यह मामला 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़की हिंसा से जुड़ा है. उस समय दिल्ली के कई इलाकों में सिख समुदाय के लोगों पर हमले हुए थे. कई लोगों की जान गई थी और घर-दुकानों को नुकसान पहुंचा था. जनकपुरी और विकासपुरी भी उन्हीं इलाकों में शामिल थे.
नहीं साबित हुआ आरोप
प्रशासन की ओर से अदालत में कहा गया था कि सज्जन कुमार ने दंगों के दौरान भीड़ को उकसाया और हिंसा में उनकी भूमिका रही लेकिन कोर्ट ने सबूतों और गवाहों के बयानों को देखने के बाद कहा कि ये आरोप साफ तौर पर साबित नहीं हो सके.
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