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Swati Maliwal: स्वाति मालीवाल ने चीरहरण की तस्वीर पोस्ट कर AAP पर साधा निशाना, चुनावी नतीजों के बीच बढ़ा सियासी तापमान

Swati Maliwal: दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है. पिछले दस वर्षों से दिल्ली की सत्ता पर काबिज रही AAP को हार का सामना करना पड़ा है, जिससे पार्टी का राजधानी में शासन समाप्त हो गया. इस चुनाव में AAP प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नई दिल्ली विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार प्रवेश वर्मा के हाथों हार मिली. प्रवेश वर्मा को भाजपा में मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है. इस जीत के साथ ही बीजेपी 26 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी कर रही है. स्वाति मालीवाल का “द्रौपदी” पोस्ट हुआ वायरल चुनावी नतीजों के बीच, आम आदमी पार्टी की पूर्व सहयोगी और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल का एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है. उन्होंने महाहिंदुस्तान के ‘चीरहरण’ प्रसंग से जुड़ी एक पेंटिंग साझा की, जिसे नेतृत्वक हलकों में काफी चर्चा मिल रही है. pic.twitter.com/kig39RQYmD — Swati Maliwal (@SwatiJaiHind) February 8, 2025 केजरीवाल से बढ़ती दूरी और आरोपों की लंबी फेहरिस्त स्वाति मालीवाल, जो कभी केजरीवाल की करीबी मानी जाती थीं, अब उनकी सबसे मुखर आलोचकों में से एक बन चुकी हैं. उन्होंने दिल्ली स्त्री आयोग की अध्यक्ष रहते हुए कई बार केजरीवाल प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाए. मई 2024 में, मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी बिभव कुमार पर मारपीट का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया कि जब वे मुख्यमंत्री आवास पर मुलाकात के लिए गईं, तो उनके साथ ड्राइंग रूम में बुरी तरह मारपीट की गई, जबकि उस समय केजरीवाल भी उसी घर में मौजूद थे. दिल्ली की बदहाल स्थिति को लेकर किया था विरोध प्रदर्शन दिल्ली चुनावों से पहले स्वाति मालीवाल को तब भी सुर्खियों में देखा गया जब उन्होंने मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना दिया. उन्होंने दिल्ली में गंदगी, जलभराव, यमुना की सफाई और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली जैसे मुद्दों को उठाया. उनका कहना था कि AAP प्रशासन ने इन समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अब जब AAP दिल्ली की सत्ता से बाहर हो गई है और भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की है, तो मालीवाल के इस पोस्ट को लेकर सियासी हलकों में नई बहस छिड़ गई है. Also Read : केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा के पास कितनी है संपत्ति, जानें The post Swati Maliwal: स्वाति मालीवाल ने चीरहरण की तस्वीर पोस्ट कर AAP पर साधा निशाना, चुनावी नतीजों के बीच बढ़ा सियासी तापमान appeared first on Naya Vichar.

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Vastu Tips: घर में हमेशा रहेगी खुशी, बस इन वास्तु टिप्स का रखें ख्याल

Vastu Tips: हर व्यक्ति की इच्छा होती है एक घर लेने की. अपने सपनों के घर को बनाने के लिए हर इंसान जी जान से मेहनत करता है. घर वो जगह है जहां हम अपना पूरा जीवन जीते हैं. इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि जब हम अपना घर बनाए तब बहुत सारी बातों का ख्याल रखें. वास्तु शास्त्र का बहुत बड़ा महत्व है और घर को बनाते समय वास्तु के नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक है ताकि आप किसी भी तरह के नुकसान से बचे रहें. अगर आप भी घर लेने की सोच रहे हैं तो वास्तु से जुड़े इन बातों का ध्यान जरूर रखें. तो आइए जानते हैं घर लेने से पहले किन बातों का ख्याल रखना चाहिए? किचन की दिशा जब भी आप नया घर खरीदते हैं या बनाते हैं तो इस बात का खास ख्याल रखें कि आपकी रसोई की दिशा क्या है. वास्तु के हिसाब से किचन हमेशा दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए. वास्तु से जुड़ी समाचारें यहां पढ़ें यह भी पढ़ें: Vastu Tips: घर के सामने इन चीजों की नहीं होती जगह, तुरंत हटा दें, वरना गर्त में पहुंच जाएंगे आप यह भी पढ़ें: Vastu Tips: इस दिशा में नहीं खाते हैं खाना, तो उजड़ सकती है आपके घर की बरकत मेन गेट   किसी भी घर का में गेट सबसे ज्यादा जरूरी स्थान होता है. जरूरी है की वस्तु के हिसाब से ही आप अपने घर का मुख्य दरवाजा रखें. अगर आपका में गेट पूर्व, उत्तर या फिर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर है तो ये वास्तु के हिसाब से शुभ माना जाता है. पूजा घर  अपने घर को बनाने समय पूजा घर को लेकर ध्यान देना बहुत आवश्यक है. वास्तु शास्त्र में पूजा घर को बनाने को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं जिनका पालन करना चाहिए. ईशान कोण जो उत्तर-पूर्व दिशा है इसी में आपको पूजा घर को बनाना चाहिए. इस दिशा में पूजा घर होने पर आपके घर में हमेशा खुशी रहेगी.  बाथरूम की दिशा घर बनाते समय आपका बाथरूम किस दिशा में स्थित है उसका भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है. आपका बाथरूम पश्चिम या फिर उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए. अगर आप भी  घर लेने की सोच रहे हैं तो वास्तु नियमों का पालन करें और वास्तु दोष से खुद को बचाएं. यह भी पढ़ें: Vastu Tips: पैसा रखने का ये है सही तरीका, तभी कम होगी घर की गरीबी Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर बेस्ड है. नया विचार किसी भी तरह से इनकी पुष्टि नहीं करता है. The post Vastu Tips: घर में हमेशा रहेगी खुशी, बस इन वास्तु टिप्स का रखें ख्याल appeared first on Naya Vichar.

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Awadh Ojha: दिल्ली चुनाव में हारने वाले अवध ओझा कितने संपत्ति के हैं मालिक?

Awadh Ojha: पटपड़गंज विधान सभा सीट से आम आदमी के उम्मीदवार अवध ओझा चुनाव हार गए हैं. अवध को हिंदुस्तानीय जनता पार्टी के रविंदर सिंह नेगी ने 28072 वोटों के अंतर से चुनाव हराया है. अवध ओझा के विधानसभा जाने का सपना फिलहाल तो टूट गया है. ऐसे में आइए जानते हैं अवध ओझा कितने संपत्ति के मालिक है? अवध ओझा की संपत्ति का विवरण उनके हलफनामे में सामने आया है, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वह करोड़पति हैं, हालांकि उन पर कुछ कर्ज भी है. ओझा के पास कुल 4.85 करोड़ रुपये से अधिक की चल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी के पास 59 लाख रुपये की चल संपत्ति है. उनके बच्चों के नाम भी लगभग 5 लाख रुपये की संपत्ति दर्ज है. नकद राशि की बात करें तो ओझा के पास 1.5 लाख रुपये, जबकि उनकी पत्नी के पास 28,500 रुपये नकद मौजूद हैं. इसके अलावा, ओझा के पास 9.67 लाख रुपये मूल्य का सोना है, जबकि उनकी पत्नी 20 लाख रुपये के सोने की मालकिन हैं. इसे भी पढ़ें: सोशल मीडिया पर मीम्स और रील्स की बाढ़, यूजर्स ले रहे आप-कांग्रेस के मजे वाहनों की बात करें तो ओझा के पास महिंद्रा स्कॉर्पियो, जबकि उनकी पत्नी के पास टाटा टियागो कार है. हालांकि, उनके पास कोई कृषि भूमि नहीं है. अचल संपत्तियों की बात करें तो ओझा के नाम पर ग्रेटर नोएडा में दो फ्लैट हैं, जबकि उनकी पत्नी के नाम पर लखनऊ, हरिद्वार और वजीराबाद में आवासीय संपत्तियां हैं. ओझा की कुल 1.45 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी की अचल संपत्ति 1.6 करोड़ रुपये के करीब है. हालांकि, ओझा पर 80 लाख रुपये का कर्ज है, जबकि उनकी पत्नी पर भी 4.38 लाख रुपये की देनदारी दर्ज है. इसे भी पढ़ें: राजा बनाने वाले अवध ओझा की हवा टाइट, जानें क्या हुआ? इसे भी पढ़ें: तिहाड़ जेल वापस जाएंगे अरविंद केजरीवाल?  इसे भी पढ़ें: तिहाड़ जेल वापस जाएंगे अरविंद केजरीवाल?  The post Awadh Ojha: दिल्ली चुनाव में हारने वाले अवध ओझा कितने संपत्ति के हैं मालिक? appeared first on Naya Vichar.

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पटना से सीधे जुड़ेगा 610 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे, झारखंड और बंगाल जाना होगा आसान

Bihar Expressway: पटना से 610 किलोमीटर लंबा वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे अब सीधे जुड़ने जा रहा है. इस फैसले से झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश की यात्रा बेहद आसान हो जाएगी. इसके लिए पथ निर्माण विभाग ने पटना-गया-डोभी और पटना-आरा-सासाराम को वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से जोड़ने का फैसला किया है. इसके लिए जल्द ही केंद्र प्रशासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा. इससे न सिर्फ राज्य के लोगों के लिए यात्रा आसान होगी, बल्कि व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा. एक्सप्रेसवे से कैसे जुड़ेगा पटना पटना-गया-डोभी रूट को गोसाईडीह के पास एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा. इसके लिए 11 किलोमीटर लंबी फोर लेन सड़क बनेगी. वहीं पटना-आरा-सासाराम रूट को तिलौथू में एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा. इसके लिए करीब 10 किलोमीटर नई फोर लेन सड़क बनेगी. एक तरफ पटना-गया-डोभी रूट से झारखंड और बंगाल जाना आसान हो जाएगा. वहीं दूसरी तरफ पटना-आरा-सासाराम रूट से उत्तर प्रदेश जाना भी आसान हो जाएगा. सफर आसान और तेज होगा वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से यूपी, झारखंड और बंगाल की यात्रा आसान हो जाएगी. वाराणसी से कोलकाता की 14 घंटे की यात्रा सिर्फ 7 घंटे में पूरी की जा सकेगी. 6 लेन वाले इस एक्सप्रेसवे से हल्दिया बंदरगाह तक माल की आवाजाही आसान होगी, जिससे व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा. Also Read: पटना में दिनदहाड़े फायरिंग, बेटे को स्कूल छोड़ लौट रहे पिता को मारी दो गोली बिहार के चार जिलों से गुजरेगी वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के निर्माण से बिहार का यूपी, झारखंड और बंगाल के साथ व्यापार बढ़ेगा. साथ ही स्थानीय किसानों और व्यापारियों को भी इसका लाभ मिलेगा. 610 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है. जिसका करीब 160 किलोमीटर हिस्सा बिहार में होगा. जो राज्य के चार जिलों गया, औरंगाबाद, सासाराम और कैमूर से होकर गुजरेगा. यह एक्सप्रेसवे चंदौली से शुरू होकर बिहार में प्रवेश करेगा. Also Read: Bihar News : CBI के रडार पर आए दिनेश अग्रवाल से ED कर सकती है पूछताछ, IRS अधिकारी और CA भी निशाने पर The post पटना से सीधे जुड़ेगा 610 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे, झारखंड और बंगाल जाना होगा आसान appeared first on Naya Vichar.

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बिहार के शराबी हेडमास्टर साहब सस्पेंड, वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई

Headmaster Viral Video: मुजफ्फरपुर के प्राथमिक विद्यालय, विशुनपुर जगदीश के प्रभारी प्रधानाध्यापक जय किशुन बैठा को शराब के नशे में स्कूल आने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. जिला शिक्षा पदाधिकारी अजय कुमार के निर्देश पर डीपीओ स्थापना इंद्र कुमार कर्ण ने यह कार्रवाई की है. औराई प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की जांच में यह साफ हुआ है कि जय किशुन बैठा अक्सर शराब के नशे में विद्यालय आते थे. प्रधानाध्यापक ने गैर हाजिरी की सूचना नहीं दी थी शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि निरीक्षण के दौरान वे स्कूल में अनुपस्थित पाए गए और उन्होंने न तो अपनी गैरहाजिरी की कोई सूचना दी थी और न ही किसी अन्य शिक्षक को विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी सौंपी थी. जांच में यह भी सामने आया कि मध्याह्न भोजन भी मेनू के अनुरूप नहीं दिया जा रहा था. वीडियो में नशे में दिख रहे हैं हेडमास्टर साहब इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें हेडमास्टर नशे में दिख रहे हैं. वीडियो वायरल होते ही मामला तूल पकड़ने लगा और शिक्षा विभाग हरकत में आ गया. वायरल वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि हेडमास्टर जय किशुन बैठा नशे में झूमते हुए नजर आ रहे हैं. जब ग्रामीणों ने उनसे शराब पीने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने इसे यह कहते हुए टालने की कोशिश की कि वे छुट्टी पर हैं और प्रतिदिन शराब नहीं पीते, बल्कि कभी-कभी सेवन करते हैं. Also Read: शराब के नशे में धुत बिहार के हेडमास्टर का वीडियो देखिए, झूमते हुए पहुंचा स्कूल और कर दिया ये कांड The post बिहार के शराबी हेडमास्टर साहब सस्पेंड, वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई appeared first on Naya Vichar.

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दवा, दारू, दर, दीन और कालिंदी, AAP के अरविंद केजरीवाल की हार की 5 बड़ी वजह

Arvind Kejriwal: दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की अप्रत्याशित हार ने कई नेतृत्वक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है. आम आदमी पार्टी (AAP) जिसने एक समय दिल्ली की नेतृत्व में क्रांतिकारी बदलाव लाया था, अब सत्ता से बाहर हो चुकी है. दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 27 साल बाद सत्ता में वापसी की ओर कदम बढ़ा दिए हैं. पार्टी ने कई सीटों पर बढ़त बनाते हुए रुझानों में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है. 2013 में अन्ना हजारे के आंदोलन से नेतृत्व में कदम रखने वाले अरविंद केजरीवाल को पहली बार चुनावी हार का सामना करना पड़ा है. चुनाव के दौरान ही हार के संकेत मिलने लगे थे, लेकिन केजरीवाल अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता के सहारे इसे जीत में बदलने की कोशिश करते रहे. इस हार के पीछे दवा, दारू, दर (शीशमहल), दीन (मुस्लिम वोट बैंक) और कालिंदी (यमुना नदी) जैसे पाँच प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली से खुद अपनी सीट से हार गए हैं. भाजपा के प्रवेश वर्मा ने उन्हें शिकस्त दी है. आइए जानते हैं, AAP की इस हार के 5 प्रमुख वजहें… 1. दवा: मोहल्ला क्लीनिक मॉडल की गिरती साख केजरीवाल प्रशासन ने मोहल्ला क्लीनिक और प्रशासनी अस्पतालों के मॉडल को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया था. लेकिन चुनाव से पहले आई स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोर स्थिति और मुफ्त दवाओं की अनुपलब्धता ने जनता को निराश किया. दिल्ली के प्रशासनी अस्पतालों में बदहाल सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी के चलते कई मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ा. इससे आम जनता में AAP प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ी, जिसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ा. 2. दारू: शराब नीति पर विवाद और भ्रष्टाचार के आरोप केजरीवाल प्रशासन की नई शराब नीति को लेकर विपक्ष ने जोरदार हमला किया. आरोप लगे कि नई नीति के तहत शराब के ठेकों की संख्या बढ़ा दी गई, जिससे दिल्ली में शराब की खपत बढ़ गई और कई इलाकों में कानून-व्यवस्था बिगड़ने लगी. इस मुद्दे ने स्त्री मतदाताओं को खासा नाराज किया, क्योंकि उन्हें लगा कि यह नीति सामाजिक बर्बादी को बढ़ावा दे रही है. इसी दौरान शराब नीति में भ्रष्टाचार को लेकर मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी और घोटाले के आरोपों ने AAP की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया. इसके कारण अरविंद कुल 177 दिन जेल में रहे तो सिसोदिया ने 17 महीने जेल बिताए. यह सब उनकी नकारात्मक छवि में जुड़ता गया. 3. दर (शीशमहल): आलीशान बंगले पर विवाद केजरीवाल, जो खुद को आम आदमी के नेता के तौर पर पेश करते थे, उनके लग्जरी “शीशमहल” बंगले को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ. जब यह सामने आया कि प्रशासनी फंड से 45 करोड़ रुपये खर्च कर मुख्यमंत्री आवास को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया, तो जनता के बीच “आम आदमी बनाम विशेष आदमी” की बहस छिड़ गई. विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाकर AAP प्रशासन को घेर लिया और जनता में भी यह धारणा बनी कि केजरीवाल अब साधारण नेता नहीं रहे. 4. दीन: मुस्लिम वोट बैंक में सेंध AAP को हमेशा से मुस्लिम वोटरों का समर्थन मिलता रहा है, लेकिन इस बार इस वोट बैंक में दरार पड़ गई. हाल के वर्षों में कई मुस्लिम समुदायों ने कांग्रेस और अन्य दलों की ओर रुख कर लिया. दिल्ली दंगों, शाहीन बाग आंदोलन और AAP की केंद्र के प्रति नरम नीति को लेकर मुस्लिम मतदाता असमंजस में रहे. यही वजह रही कि AAP को अपने पारंपरिक वोट बैंक का पूरा समर्थन नहीं मिला और इसका सीधा फायदा विपक्षी दलों को हुआ. केजरीवाल ने 2020 में हुए दिल्ली दंगों में मुस्लिम जनता का उस तरह से साथ नहीं दिया, जितनी उस समाज की अपेक्षा थी. यह भी उनकी हार के प्रमुख कारणों में रहा. 5. कालिंदी (यमुना नदी): जल संकट और प्रदूषण दिल्ली में यमुना नदी की सफाई को लेकर बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन हालात जस के तस बने रहे. चुनाव से पहले आई झाग से भरी यमुना नदी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिससे AAP प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठे. जल संकट, बढ़ता प्रदूषण और खराब सीवरेज सिस्टम ने लोगों को नाराज कर दिया, खासकर उन इलाकों में जहां पानी की किल्लत सबसे ज्यादा थी. केजरीवाल ने चुनाव प्रचार के दौरान यहां तक कह गए कि यह चुनाव जिताने वाला मुद्दा नहीं है. इतना ही नहीं बीच चुनाव के दौरान हरियाणा के मुख्यमंंत्री के साथ पानी भरा गिलास भी छाया रहा. सत्ता से बाहर हुई AAP दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल की रेवड़ी संस्कृति बनाम भाजपा के बुनियादी विकास मॉडल की टक्कर देखने को मिली. जहां AAP लगातार मुफ्त सुविधाओं की घोषणाएं करती रही, वहीं भाजपा ने सड़कों और पानी की समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाया. बुराड़ी से संगम विहार और पटपड़गंज से उत्तम नगर तक टूटी सड़कों और अधूरी मरम्मत को लेकर भाजपा ने लगातार हमले किए. आरोप लगे कि जल बोर्ड ने कई जगह सड़कें तोड़ दीं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं हुई, जिससे जनता को परेशानी हुई. खुद केजरीवाल ने भी सड़कों की बदहाली को स्वीकार किया था. इसके अलावा, पानी की किल्लत और टैंकर माफिया की समस्या ने जनता को झकझोर दिया. गर्मियों में पानी की कमी एक बड़ी चिंता बनी रही, जिससे AAP की मुफ्त योजनाओं पर भी सवाल उठे. भाजपा ने जहां फ्री स्कीम जारी रखने का वादा किया, वहीं सड़कों और पानी की समस्या के समाधान का भरोसा भी दिलाया. माना जा रहा है कि दिल्ली की जनता ने इन्हीं मुद्दों पर भाजपा को मौका देने का फैसला किया. दिल्ली चुनाव में AAP की हार कोई एक दिन में नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे कई कारण हैं. स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट, शराब नीति पर विवाद, मुख्यमंत्री आवास का खर्च, मुस्लिम वोट बैंक की सेंध और जल संकट जैसे मुद्दों ने केजरीवाल प्रशासन की लोकप्रियता को कम कर दिया. जनता ने बदलाव का फैसला किया, और इसका सीधा असर चुनावी नतीजों में दिखा. वहीं भाजपा इस जीत से पूरी तरह बम-बम है. The post दवा, दारू, दर, दीन और कालिंदी, AAP के अरविंद केजरीवाल की हार की 5 बड़ी वजह appeared first on Naya Vichar.

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NEET UG 2025 : एनटीए ने जारी की नीट यूजी 2025 परीक्षा की तिथि, 4 मई को होगी परीक्षा 

NEET UG 2025 : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की ओर से नीट यूजी 2025 परीक्षा की तिथि की घोषणा कर दी गयी है. मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा 4 मई 2025 को आयोजित की जायेगी. आवेदन प्रक्रिया 7 फरवरी से शुरू हो चुकी है और 7 मार्च, 2025 को समाप्त होगी. उम्मीदवार एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं.   परीक्षा पैटर्न में किया गया है बदलाव नीट यूजी 2025 परीक्षा पेन-एंड-पेपर फॉर्मेट में ही आयोजित की जायेगी.हालांकि, परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया गया है. ऑप्शनल क्वेश्चंश को हटा दिया गया है, जिससे कुल प्रश्नों की संख्या 200 से घटाकर 180 कर दी गयी है. साथ ही, परीक्षा की कुल अवधि भी 200 मिनट से घटाकर 180 मिनट कर दी गयी है. नीट यूजी 2025: महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन की अंतिम तिथि : 7 मार्च, 2025शहर सूचना पर्ची जारी होने की तिथि : 26 अप्रैल, 2025एडमिट कार्ड जारी होने की तिथि : 1 मई, 2025 या उससे पहलेपरीक्षा तिथि : 4 मई, 2025परिणाम की घोषणा : 14 जून, 2025 तककाउंसलिंग प्रक्रिया : जुलाई 2025 में शुरू होने की संभावना इसे भी पढ़ें : CBSE Board Exam 2025 : बोर्ड परीक्षा का काउंटडाउन शुरू, पॉजिटिव अप्रोच के साथ हो जाएं तैयार नीट यूजी के बारे में नीट यूजी हिंदुस्तान की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसमें 2024 में 24 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे. यह परीक्षा देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है. 1.08 लाख एमबीबीएस सीटों में से लगभग 56,000 प्रशासनी कॉलेजों में हैं, जबकि बाकी सीटें निजी संस्थानों में उपलब्ध हैं. पिछले वर्ष नीट यूजी परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिनमें पेपर लीक और कानूनी विवाद शामिल थे. इसके चलते प्रशासन ने पूर्व इसरो प्रमुख आर राधाकृष्णन के नेतृत्व में एक पैनल का गठन किया, जिसने परीक्षा में सुधारों की सिफारिश की. पैनल ने नीट यूजी के लिए बहु-चरणीय (मल्टी-स्टेज) परीक्षा का सुझाव दिया, लेकिन 2025 के लिए कोई बदलाव लागू नहीं किया गया है.  The post NEET UG 2025 : एनटीए ने जारी की नीट यूजी 2025 परीक्षा की तिथि, 4 मई को होगी परीक्षा  appeared first on Naya Vichar.

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Delhi Election Big Faces Result: केजरीवाल, आतिशी समेत बड़े चेहरों का क्या हुआ? कौन हारे, किसने मारी बाजी

Delhi Election Big Faces Result: दिल्ली विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मौजूदा सीएम आतिशी सहित कई बड़े चेहरों ने चुनाव लड़ा. जिसपर सबकी नजरें टिकी थी. अबतक जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके अनुसार आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है. पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी सीट हार चुके हैं. प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल को हराया नई दिल्ली विधानसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को हरारी हार का सामना करना पड़ा है. बीजेपी उम्मीदवार प्रवेश वर्मा (परवेश साहिब सिंह) ने आप संयोजक को करारी शिकस्त दी है. प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल को करीब 3000 से अधिक वोटों से हराया है. अबतक आए आंकड़ों के अनुसार प्रवेश वर्मा को 28238 वोट मिले, जबकि केजरीवाल को केवल 24583 वोट मिले. इसी सीट से दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित की भी करारी हार हुई. कांग्रेस ने उन्हें नई दिल्ली सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था. लेकिन इस सीट पर वो तीसरे नंबर पर रहे. अबतक जो आंकड़े आए हैं उसके अनुसार उन्हें केवल 4217 वोट मिले हैं. जंगपुरा से हारे मनीष सिसोदिया दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी करारी हार मिली है. जंगपुरा सीट से चुनाव लड़ने वाले सिसोदिया को बीजेपी के उम्मीदवार तरविंदर सिंह मारवाह ने हराया. तरविंदर सिंह मारवाह को 38859 वोट मिले हैं, जबकि सिसोदिया को 38184 वोट मिले हैं. बीजेपी उम्मीदवार ने करीब 675 वोट के अंतर से सिसोदिया को हराया है. यह भी पढ़ें: Delhi Election Result: ‘और लड़ो आपस में’…दिल्ली में AAP-कांग्रेस की हार पर उमर अब्दुल्ला का तंज हारते-हारते आतिशी को मिली जीत आम आदमी पार्टी की दिग्गज नेता और मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी अपनी सीट बचाने में कामयाब रही. आतिशी ने कालकाजी से चुनाव लड़ा था. जिसमें उन्होंने बीजेपी के रमेश बिधूड़ी को हराया. आतिशी ने बिधूड़ी को करीब 2800 वोट के अंतर से हराया. आतिशी को 47267 वोट मिले, जबकि बिधूड़ी को 44472 वोट मिली. इसी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अलका लांबा ने भी चुनाव लड़ा था. जिसमें उनको हरारी हार का सामना करना पड़ा. लांबा को केवल 3803 वोट मिले हैं. पहले पीछे चल रही थी आतिशी आम आदमी पार्टी की दिग्गज नेता आतिशी शुरू में बीजेपी उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी से काफी पीछे चल रही थी. दोनों के बीच कांटे की टक्कर आखिर तक चलती रही. कभी बिधूड़ी आगे हो रहे थे, तो कभी आतिशी. आखिर में आतिशी अपनी सीट से जीत दर्ज करने में कामयाब रहीं. सौरभ भारद्वाज भी हारे आम आदमी पार्टी के नेता और मंत्री सौरभ भारद्वाज को भी अपनी सीट से हार का सामना करना पड़ा. सौरभ भारद्वाज ग्रेटर कैलाश नगर से चुनाव लड़ा था. लेकिन उन्हें बीजेपी उम्मीदवार शिखा रॉय ने हरा दिया. भारद्वाज को कुल 46231 वोट मिले. इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार गर्वित सिंघवी तीसरे स्थान पर रहे, उन्हें केवल 6677 वोट मिले. गोपाल राय को मिली जीत आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और मंत्री गोपाल राय ने अपनी सीट जीत ली है. राय को आम आदमी पार्टी ने बाबरपुर से मैदान में उतारा था. उन्होंने बीजेपी के अनिल कुमार वशिष्ठ को 22439 वोट के अंतर से हराया. राय शुरू से आगे चल रहे थे. गोपाल राय को कुल 74405 वोट मिले हैं, जबकि अनिल कुमार वशिष्ठ को 51966 वोट मिले. कांग्रेस के मोहम्मद इशराक खान तीसरे स्थान पर रहे. कपिल मिश्रा धमाकेदार जीत की ओर बढ़े बीजेपी उम्मीदवार कपिल मिश्रा धमाकेदार जीत की ओर से बढ़ चुके हैं. आरंभ से ही कपिल मिश्रा बढ़त बनाकर चल रहे हैं. कुछ राउंड की गिनती बाकी है. अबतक जो आंकड़े आए हैं, उसके अनुसार कपिल मिश्रा 44000 वोट से आगे चल रहे हैं. दूसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मनोज कुमार त्यागी हैं, जबकि तीसरे स्थान पर कांग्रेस के डॉ. पीके मिश्रा हैं. जिन्हें केवल 2312 वोट मिले हैं. The post Delhi Election Big Faces Result: केजरीवाल, आतिशी समेत बड़े चेहरों का क्या हुआ? कौन हारे, किसने मारी बाजी appeared first on Naya Vichar.

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Relationship Tips: गर्लफ्रेंड के सामने खाना ऑर्डर करते समय याद रखें ये 5 बातें, बढ़ेगा इंप्रेशन

Relationship Tips: जब आप अपनी गर्लफ्रेंड के साथ डेट पर जाते हैं, तो खाने का ऑर्डर करना सिर्फ एक सामान्य काम नहीं होता, बल्कि यह आपके व्यक्तित्व और समझदारी को भी दर्शाता है. गलत ऑर्डरिंग से आपका इंप्रेशन खराब हो सकता है, जबकि स्मार्ट तरीके से ऑर्डर देने पर आपकी छवि निखर सकती है. अगर आप पहली बार गर्लफ्रेंड के साथ बाहर खाना खाने जा रहे हैं, तो इन 5 बातों का जरूर ध्यान रखें (things to remember while ordering food). Relationship tips: गर्लफ्रेंड के सामने खाना ऑर्डर करते समय याद रखें ये 5 बातें, बढ़ेगा इंप्रेशन 1. उसकी पसंद को पहले समझें खाने का ऑर्डर देने से पहले यह जान लें कि आपकी गर्लफ्रेंड को क्या पसंद है. अगर वह शाकाहारी है और आप नॉनवेज ऑर्डर कर दें, तो यह अजीब स्थिति पैदा कर सकता है. इसलिए बातचीत में उसकी पसंद-नापसंद का ध्यान रखें और उसी के अनुसार मेन्यू से डिश चुनें. 2. बहुत ज्यादा महंगा या सस्ता ऑर्डर करने से बचें अगर आप बहुत महंगा ऑर्डर करेंगे, तो हो सकता है कि आपकी गर्लफ्रेंड असहज महसूस करे और बहुत सस्ता ऑर्डर करने से आप कंजूस लग सकते हैं. बैलेंस बनाकर ऐसा ऑर्डर करें जो क्वालिटी और बजट दोनों के हिसाब से सही हो. 3. एक्सपेरिमेंट करने से बचें अगर आप किसी नई डिश को ट्राई करने का सोच रहे हैं, तो पहले गर्लफ्रेंड की राय जरूर लें. कई बार एक्सपेरिमेंटल फूड पसंद नहीं आता और पूरा मूड खराब हो सकता है. बेहतर होगा कि ऐसी डिश ऑर्डर करें जो दोनों को पसंद हो और जिसे आप पहले भी खा चुके हों. 4. जरूरत से ज्यादा ऑर्डर न करें अगर आप जरूरत से ज्यादा खाना ऑर्डर कर देंगे और उसे खत्म नहीं कर पाएंगे, तो यह वेस्टेज लगेगा और आपके प्लानिंग स्किल्स पर सवाल खड़े कर सकता है. इसलिए सोच-समझकर उतना ही ऑर्डर करें, जितना खाया जा सके. 5. अच्छे से बिहेव करें और ऑर्डर करने का तरीका सही रखें ऑर्डर देते समय स्टाफ से अच्छे से बात करें, क्योंकि आपका व्यवहार आपकी गर्लफ्रेंड पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. अगर आप वेटर से रुखे तरीके से बात करेंगे या ऑर्डर देते समय जल्दबाजी करेंगे, तो यह आपके नेचर को दर्शाएगा. शांत और विनम्र होकर ऑर्डर दें ताकि आप एक जेंटलमैन लगें. गर्लफ्रेंड के सामने खाना ऑर्डर करना सिर्फ खाने से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह आपकी समझदारी और केयरिंग नेचर को भी दिखाता है. अगर आप इन 5 टिप्स को ध्यान में रखेंगे, तो आपका इंप्रेशन अच्छा बनेगा और आपकी डेट का अनुभव और भी शानदार हो जाएगा. Also Read: Valentine’s Day Gift Ideas: अपनी गर्लफ्रेंड को बिल्कुल गिफ्ट न करें ये 3 चीजें Also Read: Do you know: लड़कियों को नहीं पसंद होती लड़कों की ये 10 आदतें The post Relationship Tips: गर्लफ्रेंड के सामने खाना ऑर्डर करते समय याद रखें ये 5 बातें, बढ़ेगा इंप्रेशन appeared first on Naya Vichar.

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दिल्ली चुनाव में बीजेपी की जीत पर लोजपा सांसद शाम्भवी का बयान- दिल्ली तो अभी झांकी है बिहार अभी बाकी है

नया विचार समस्तीपुर- : दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी के जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए लोजपा सांसद शांभवी ने कहा कि यह सरप्राइजिंग रिजल्ट नहीं है । ये चीज बिल्कुल क्लियर था कि दिल्ली की जनता भ्रष्टाचार वाली प्रशासन के खिलाफ थी । वो बदलाव चाहती थी । जिस जिस राज्य में एनडीए की प्रशासन है उन उन राज्य में बहुत सारे काम हुए हैं । लेकिन दिल्ली में आप की प्रशासन में लोगों को बेसिक चीज जैसे शुद्ध हवा , पानी , नाली की समस्या से जूझना पड़ रहा था । आप प्रशासन ने अपने शासनकाल में कोई काम नहीं किया । शाम्भवी ने कहा दिल्ली तो बस झांकी है बिहार अभी बाकी है ।बिहार में बढ़ते क्राइम को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के ट्विटर के माध्यम से नीतीश प्रशासन पर लाँ एंड ऑर्डर को लेकर उठाए गए सवाल पर कहा कि वो बस ट्विटर के नेता बन कर रह गए हैं । विधानसभा सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उपस्थित नहीं रहते हैं । जमीनी स्तर पर भी वो कहीं नजर नहीं आते हैं । शांभवी ने उनके माता-पिता के शासनकाल को दोहराते हुए कहा कि जब वो सत्ता में थे । तब बिहार दंगों में डूब रहा था । संगठित अपराध का बिहार गढ़ बना हुआ था । वहीं अमेरिका के द्वारा अप्रवासी हिंदुस्तानीयों को अमेरिकी सेना के विमान से हिंदुस्तान भेजे जाने को लेकर विपक्ष के हमले के सवाल पर कहा कि विपक्ष भी मानता है कि यह अमेरिकन पॉलिसी है । इंडियन पॉलिसी के हिसाब से इलीगल इमीग्रेशन थे । इलीगल इमीग्रेशन को वापस करने का ट्रेंड हिंदुस्तान का किसी भी देश के साथ क्रूशियल पार्ट है । जो इलीगल इमीग्रेशन है उनको वापस आना होगा । हमारे देश में भी जो इलीगल इमीग्रेशन है उनको वापस भेजा जाता है । यह एक इंटरनेशनल पॉलिसी है । अमेरिका ने आज पहली बार वापस नहीं भेजा है । 2009 से यह वापस आ रहे हैं । हिंदुस्तान तो अपने नागरिक को पूरे रिस्पेक्ट के साथ वापस ले रहा है , लेकिन कुछ ऐसे देश हैं जैसे पाकिस्तान तो अपने सिटीजंस को वापस तक नहीं ले रहा है ।

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