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24 लाख के दवा घोटाले में सदर अस्पताल के कर्मी को नाेटिस

– डीआइजी के निर्देश पर फिर से खुली फाइल मुजफ्फरपुर. स दर अस्पताल में 24 लाख रुपये के दवा खरीद घोटाले की फाइल नहीं देने पर नगर थाने की पुलिस ने अस्पताल के एकाउंटेंट व स्टॉक रूम मैनेजर को नोटिस किया है. फाइल के लिए केस के आइओ दारोगा रविकांत कई बार सदर अस्पताल गये. एकाउंटेंट से मिलकर फाइल व दवा खरीद से जुड़े अन्य कागजात की मांग की. लेकिन, आइओ को कुछ भी जानकारी उपलब्ध नहीं करायी गयी. जिसके बाद अब विधिवत नोटिस देकर फाइल की मांग की जा रही है. अब कागजात नहीं मिलने पर साक्ष्य खत्म करने की धारा के तहत आगे की कार्रवाई होगी. डीआइजी के आदेश पर आठ साल बाद दवा घोटाले की नये सिरे से जांच शुरू हुई है. दवा घोटाले में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. ललिता कुमारी, जिला स्वास्थ्य समिति के तत्कालीन लेखा प्रबंधक मो. हैदर और पटना की दवा सप्लाई एजेंसी के प्रोप्राइटर एसके भगत नामजद आरोपित हैं. कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2017 के फरवरी माह में नगर थाने में एफआइआर दर्ज की गयी थी.अधिवक्ता पंकज कुमार ने कोर्ट में परिवाद दायर कराया था.अधिवक्ता ने आरोप लगाया था कि पटना की एक दवा कंपनी से जिला स्वास्थ्य समिति ने 24 लाख रुपये की दवाइयां खरीदने का ऑर्डर निर्गत किया था. दवा खरीद के लिए अग्रिम भुगतान भी किया गया, लेकिन ऑर्डर के अनुसार दवा नहीं आयी. इस तरह प्रशासनी राशि का गबन किया गया.सीजेएम कोर्ट के आदेश से नगर थाने में एफआइआर की गयी थी. 2017 से अब तक यह केस लंबित था. डीआइजी के निरीक्षण के दौरान इसकी समीक्षा की गयी. तत्कालीन नगर डीएसपी मुकुल रंजन ने 10 बिंदुओं पर जांच के निर्देश सुपरविजन रिपोर्ट में तत्कालीन आइओ को दिया था. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post 24 लाख के दवा घोटाले में सदर अस्पताल के कर्मी को नाेटिस appeared first on Naya Vichar.

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Patna News : निलेश मुखिया हत्याकांड का फरार आरोपित भूषण जहानाबाद से गिरफ्तार

संवाददाता, पटना : पाटलिपुत्र थाने के कुर्जी माेड़ पर हुए चर्चित निलेश मुखिया हत्याकांड का फरार आरोपित भूषण सिंह उर्फ भूषण शर्मा काे एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया. एसटीएफ ने उसे जहानाबाद में छापेमारी कर गिरफ्तार किया. पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी. वह दुल्हिन बाजार थाने के लाला भदसारा गांव का रहने वाला है. 31 जुलाई, 2023 काे निलेश काे अपराधियाें ने गोली मार दी थी. इसके बाद से भूषण फरार था. इसके बाद उसने 27 दिसंबर, 2023 काे जहानाबाद के किंजर थाना क्षेत्र में ट्रक चालक काे लूटा था. पाटलिपुत्र थानेदार राजकिशाेर प्रसाद ने बताया कि भूषण की कार से ही निलेश की हत्या के लिए रेकी की गयी थी. वह कार भूषण के चालक अनिल के नाम पर रजिस्टर्ड है. हत्याकांड के बाद हरियाणा दिल्ली में बना लिया था ठिकाना निलेश की हत्या के बाद से ही एसटीएफ उसके पीछे पड़ी थी. उसने दिल्ली, हरियाणा में ठिकाना बना लिया था. एसटीएफ ने भूषण काे गिरफ्तार करने के बाद किंजर थाने के हवाले कर दिया. एसटीएफ के अनुसार भूषण पर पटना, नालंदा, अरवल, भाेजपुर, राेहतास के अलावा बाेकाराे में संगीन वारदात के केस दर्ज हैं. मालूम हो कि 31 जुलाई, 2023 को निलेश मुखिया को उनके ऑफिस के पास ही अपराधियों ने गोली मार दी थी़ इलाज के दौरान दिल्ली में 23 अगस्त, 2023 को उनकी माैत हो गयी. निलेश की हत्या के लिए पप्पू राय ने दी थी 20 लाख की सुपारी निलेश मुखिया की पत्नी सुचित्रा सिंह वार्ड 22 बी की पार्षद हैं. पप्पू राय ने अजय को 20 लाख की सुपारी दी. अजय ने पटना सिटी के शूटर इमरान को हत्या की सुपारी दे दी और उसे 5.50 लाख रुपए भी दिए. इसी साजिश के तहत 31 जुलाई, 2023 को गोली मारी गयी थी. दाे आरोपित अब भी फरार, पप्पू-धप्पू हैं जेल में निलेश की हत्या के 18 माह व 15 दिनों के बाद भी माे. अरबाज और छाेटू फरार चल रहा है. वहीं, इसी मामले का नामजद रिंकू की गिरफ्तारी पर काेर्ट ने राेक लगा रखी है. इस मामले के मुख्य आरोपित पप्पू राय और धप्पू राय के अलावा एजाजुद्दीन, इरामन और मो. कैफ समेत 10 आरोपित जेल में बंद हैं. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post Patna News : निलेश मुखिया हत्याकांड का फरार आरोपित भूषण जहानाबाद से गिरफ्तार appeared first on Naya Vichar.

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पांचवें दिन किशोरी का बूढ़ी गंडक नदी से मिला शव

पानापुर. मीनापुर प्रखंड अंतर्गत पानापुर थाना क्षेत्र के रघई घाट से पांच दिन पहले बूढ़ी गंडक में डूबी हुई लड़की का शव बरामद किया गया. थाना प्रभारी अभिषेक कुमार गुप्ता ने बताया कि जामिन मठिया के रेपुरा निवासी निरंजन राय के पुत्री रूबी कुमारी का शव रघई घाट के पास बूढ़ी गंडक नदी में मिला है. मृतका के परिजन ने लिखित आवेदन दिया है जिसमें 12 फरवरी को नहाने के दौरान गहरे पानी में चले जाने से डूब कर मौत की बात बतायी है. सुबह में स्थानीय लोगों ने रघई घाट से कुछ दूरी पर नदी में शव देख शोर मचाना शुरू किया. स्थानीय लोगों के साथ आसपास के सैकड़ों लोग वहां पहुंच गए. लोगों ने इसकी सूचना पानापुर पुलिस को दी. शव मिलने की समाचार सुन रूबी के परिजन भी वहां पहुंच गए. सूचना पर विधायक राजीव रंजन उर्फ मुन्ना यादव, पैक्स अध्यक्ष सोनेलाल सहनी, मुखिया प्रतिनिधि रुद्र कुमार सिंह उर्फ गुड्डू सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि पहुंचे. सूचना पर थाना प्रभारी अभिषेक कुमार गुप्ता भी दलबल सहित पहुंच छानबीन कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा. थाना प्रभारी अभिषेक कुमार गुप्ता ने बताया कि परिजनों द्वारा दिए गए आवेदन पर यूडी केस दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post पांचवें दिन किशोरी का बूढ़ी गंडक नदी से मिला शव appeared first on Naya Vichar.

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दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सुरुचि की नाना-नानी के साथ मौत, मचा कोहराम

:: बरियारपुर के बहादुरपुर गांव निवासी मनोज साह की पुत्री थी सुरुचि :: अपने नाना-नानी के साथ कुंभ में स्नान करने जा रही थी प्रयागराज प्रतिनिधि, सकरा दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में सकरा प्रखंड अंतर्गत बरियारपुर थाना क्षेत्र बहादुरपुर गांव निवासी मनोज साह की पुत्री सुरुचि कुमारी की दर्दनाक मौत हो गई. घटना में उसके नाना-नानी की मौत हुई है. मौत की जानकारी पिता ने शनिवार की देर रात बहादुरपुर गांव स्थित अपने माता पिता को मोबाइल पर दी. मौत की सूचना मिलते ही पूरे गांव में मातम छा गया. सुबह होते ही दरवाजे पर आसपास के लोगों की भीड़ जुट गयी.युवा जदयू के प्रखंड अध्यक्ष संजय कुमार साह एवं मृतका के दादा नरेश साह ने बताया कि उसका पुत्र सपरिवार अपने सास ससुर के साथ विगत कई वर्षों से दिल्ली में रहता है. उसका पुत्र मनोज ने बीती रात मोबाइल पर फोन कर बताया कि सुरुचि अपने नाना-नानी के साथ कुंभ स्नान के लिए प्रयागराज जाने के क्रम में दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने गयी थी. रेलवे स्टेशन पर भगदड़ हो गयी है. भगदड़ में कुचल कर सुरुचि एवं उसके नाना नानी की दर्दनाक मौत हो गयी है. उसके बाद पूरे परिवार में कोहराम मच गया. बताया कि सुरुचि के नाना नानी कुंभ स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे. इसकी जानकारी सुरुचि को हुई. वह भी नाना नानी के साथ कुंभ स्नान के लिए जिद करने लगी. इसपर नाना नानी उसे भी अपने साथ लेकर कुंभ स्नान जा रहे थे. लोगों ने बताया कि शव दिल्ली से बहादुरपुर के लिए वाहन से लाया जा रहा है. सोमवार को शव गांव पहुंचने की संभावना है. दिल्ली में ऑटो चालक है मनोज दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ में मृत सुरुचि के पिता दिल्ली में सपरिवार वर्षों से रहता है. उसके साथ समस्तीपुर जिला के ताजपुर थाना क्षेत्र के कोठिया गांव निवासी उसके सास ससुर भी सपरिवार रहते हैं. सुरुचि एक भाई एवं एक बहन थी. वह दिल्ली में रहकर पढ़ाई करती थी. मनोज ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था. विधायक अशोक कुमार चौधरी ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है. विधायक ने बताया कि इस तरह की घटना हृदय विदारक है. उन्होंने परिजन को दुख की घड़ी में धैर्य रखने एवं ईश्वर से कष्ट सहने की सहन शक्ति की कामना की है. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सुरुचि की नाना-नानी के साथ मौत, मचा कोहराम appeared first on Naya Vichar.

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कुंभ जाने के लिए आपाधापी: गोंदिया व पवन एक्सप्रेस में खिड़की से घुसने लगी महिलाएं, मची आपाधापी

मुजफ्फरपुर. प्रयागराज महाकुंभ जाने को लेकर दिल्ली में हुए भगदड़ के बाद जंक्शन पर अलर्ट किया गया है. रविवार को दोपहर में बरौनी-गोंदिया के साथ ही भीड़ के साथ धक्का-धुक्की की स्थिति उत्पन्न हो गयी. वहीं शाम के समय पवन एक्सप्रेस पहुंचने पर चढ़ने के लिए अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी. जबकि आरपीएफ, जीआरपी के साथ कॉमर्शियल व तमाम विभाग के अधिकारी व कर्मी क्राउड कंट्रोल में जुटे हुए थे. जनरल व स्लीपर कोच का गेट जाम होने पर स्त्री यात्री खिड़की से चढ़ने लगी. देर रात स्वतंत्रता सेनानी और बरौनी-अहमदाबाद में भीड़ के कारण अफरातफरी बनी रही. इस दौरान स्टेशन अधीक्षक अखिलेश कुमार सिंह, डीसीआइ नीरज पांडेय, डिप्टी एसएस कॉमर्शियल मृत्युंजय शर्मा खुद प्लेटफॉर्म पर मौजूद थे. स्लीपर व एसी से बाहरी यात्री को बाहर निकाला जंक्शन पर क्रांउड कंट्रोल के लिए आरपीएफ इंस्पेक्टर मनीष कुमार व जीआरपी थानाध्यक्ष रंजीत कुमार खुद नेतृत्व कर रहे थे. पवन एक्सप्रेस में स्लीपर व एसी में कई बाहरी यात्री घुसे थे. जिसके कारण कन्फर्म टिकट वाले नहीं चढ़ पा रहे थे. ऐसे में दोनों प्रभारियों ने कोच के भीतर से बगैर टिकट वाले यात्रियों को बाहर किया. वहीं लगातार अनाउंसमेंट की जा रही थी. मुजफ्फरपुर से स्पेशल ट्रेन चलाने की थी तैयारी, रेलवे बोर्ड ने नहीं दी अनुमति भीड़ को लेकर रेलवे की ओर से ट्रेन ऑन डिमांड के तहत रविवार को मुजफ्फरपुर से शाम के 7 बजे कुंभ स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए नोटिफिकेशन जारी हो गया. इसकी जानकारी होने पर स्थानीय रेलवे प्रबंधन की ओर से पूरी तैयारी कर ली गयी. अधिकारियों ने स्पेशल ट्रेन चलने की बात सामने आने पर थोड़ी राहत की सास ली, ताकि भीड़ नियंत्रण हो सके. लेकिन रेलवे बोर्ड की ओर से मुजफ्फरपुर के लिए अनुमति नहीं दी गयी. दूसरी ओर जयनगर और सहरसा से कुंभ स्पेशल चलायी गयी. जो देर रात मुजफ्फरपुर पहुंची. अलर्ट के बाद क्राउड कंट्रोल में जुटी विशेष टीम, लेकिन होल्डिंग एरिया नहीं नयी दिल्ली जंक्शन पर भगदड़ के बाद पूरे देश में अलर्ट के बाद मुजफ्फरपुर जंक्शन पर आरपीएफ व जीआरपी के साथ जिला पुलिस से एक दर्जन जवान व हेड क्वार्टर सोनपुर से अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती गयी है. हालांकि जंक्शन पर होल्डिंग एरिया के नहीं होने से परेशानी बनी हुई है. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post कुंभ जाने के लिए आपाधापी: गोंदिया व पवन एक्सप्रेस में खिड़की से घुसने लगी स्त्रीएं, मची आपाधापी appeared first on Naya Vichar.

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रेड लाइट एरिया के बच्चे कर रहे पढ़ाई, माताएं चुन रहीं स्वरोजगार

बदल रही चतुर्भुज स्थान के रेड लाइट एरिया की तस्वीरपुलिस और समाजसेवियों की पहल से साकार हो रहा सपना उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर. आम तौर पर रेड लाइट एरिया बदनाम गलियों के नाम से जाना जाता है, यहां के अधिकतर शिशु पढ़ाई-लिखाई से दूर रहते हैं और बड़े होने पर सामाजिक पहचान भी नहीं मिलती, लेकिन शहर के रेड लाइट एरिया की तस्वीर बदल रही है. यह बदलाव यहां के पुलिस अधिकारियों और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सलाहकार नसीमा खातून की पहल से हुआ है. यहां के कन्हौली ओपी में पिछले साल 15 जनवरी को पुलिस पाठशाला की स्थापना कर इस एरिया के रेड लाइट और वंचित समुदाय के बच्चों को स्कूली पाठ्यक्रम से जोड़ा गया. वैसे शिशु जो दिन भर इधर-उधर भटकते थे, उनकी शिक्षा की व्यवस्था की गयी. तत्कालीन सिटी एसपी सहित अन्य अधिकारी खुद आकर बच्चों को पढ़ाने लगे. बच्चों को अनुशासन सिखाया गया और शिक्षा का महत्व भी बताया गया. जिन परिवारों के लोग अपने बच्चों को यहां नहीं भेजते थे. उनके घर जाकर उन्हें समझाया गया. समय के साथ यहां बच्चों की संख्या बढ़ने लगी. कन्हौली ओपी के प्रभारी और पुलिस जवान शिक्षा व्यवस्था की मॉनीटरिंग करने लगे. महज एक साल में ही इस इलाके की रंगत बदल गयी. फिलहाल यहां 30 शिशु नियमित पढ़ाई कर रहे हैं. बैंककर्मी ने दिया कंप्यूटर, शिशु ले रहे बेसिक प्रशिक्षण पुलिस पाठशाला में पिछले दिनों एक बैंककर्मी ने कंप्यूटर दिया है. एसएसपी विश्वजीत दयाल ने बच्चों को कंप्यूटर के बारे में बताया. अब यहां के बच्चों को सप्ताह में तीन दिन कंप्यूटर का बेसिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. दूसरा कंप्यूटर भी यहां आने वाला है. बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां जितलेश कुमार, नाका कांस्टेबल छोटू कुमार, नसीमा खातून, आरिफ सहित चार लोग नियमित समय देते हैं. यहां के बच्चों को ड्रेस और किताबें भी डोनेट की जाती है. इसमें पुलिस पदाधिकारियों का भी सहयोग रहता है. पिछले एक साल में बच्चों में पढ़ाई की ललक पैदा हो गयी है. अब वे नियमित तौर पर पुलिस पाठशाला में पढ़ने आ रहे हैं. जीविका समूह से जुड़ रहीं शिशु की माताएं वंचित समुदाय के शिशु की माताएं अब जीविका समूह से जुडृ कर स्वरोजगार चुन रही हैं. इससे भी इस एरिया के माहौल में बदलाव आ रहा है. यहां की स्त्रीएं फिलहाल सिलाई समूह से जुड़ी हैं. जिसमें एक सुपरवाइजर भी हैं. इन स्त्रीओं को अच्छी संख्या में सिलाई का ऑर्डर भी मिल रहा है. इसके अलावा कुछ स्त्रीएं खाने-पीने के स्टॉल लगाने की तैयारी में हैं. सामाजिक कार्यकर्ता नसीमा खातून कहती हैं कि आने वाले समय में रेड लाइट एरिया की दशा बदल जाएगी. अब यहां की गलियां बदनाम नहीं रहेगी. यहां के शिशु भी पढ़-लिख कर मुख्यधारा में शामिल हो सकेंगे. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post रेड लाइट एरिया के शिशु कर रहे पढ़ाई, माताएं चुन रहीं स्वरोजगार appeared first on Naya Vichar.

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वाहन एजेंसी के कर्मचारी सहित चार पर गबन की प्राथमिकी

मुजफ्फरपुर. अहियापुर थाना क्षेत्र के न्यू जीरोमाइल-बैरिया रोड स्थित एक वाहन एजेंसी के जीएम रंजीत कुमार सिंह ने अपने रक्सौल ब्रांच के चार कर्मियों पर जालसाजी कर गबन का आरोप लगाते हुए अहियापुर थाने में एफआइआर दर्ज करायी है. समें विकास सत्यम, सोनू कुमार, अनूप नारायण, अय्याज अली और प्रेमकला कुमारी को आरोपित किया है. थाने में दर्ज प्राथमिकी में रंजीत कुमार सिंह ने बताया है कि वाहन एजेंसी एक ब्रांच रक्सौल में भी खोला गया है. जिसकी देख रेख पश्चिम चंपारण के डुमरा जैतीया के विकाश सत्यम करते है.उनके सहयोग के लिए सोनू कुमार, अनूप नारायण मिश्रा, अय्याज अली, प्रेमकला कुमारी को रखा गया था. इनलोगों का काम ग्राहक की जांच कर गाड़ी बुकिंग करवाना और उस पैसे को कंपनी के खाते में स्थानांतरित करवाना होता है. इनलोगों को पता है कि गाड़ी बुकिंग व बिक्री तक ग्राहक से मात्र 1.99 लाख रुपया नगद लेना है. जो मुजफ्फरपुर शोरूम के काउंटर पर जमा होता है. बीते साल 21 सितंबर से पूर्व विकाश सत्यम ने आर्यन अग्रवाल को लेकर मुजफ्फरपुर शोरूम पर आये थे. आर्यन अग्रवाल को गाड़ियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी थी. जिसके आधार पर आर्यन को ऑनलाइन 11 हजार रुपये भुगतान कर आर्टिगा गाड़ी बुक किया गया. 30 जनवरी 2025 को आर्यन के द्वारा कंपनी के नंबर पर सम्पर्क कर शिकायत किया गया कि बीते साल 24 सितंबर को आठ लाख रुपये विकाश सत्यम के द्वारा प्राप्त कर एक रसीद दिया गया. जिस पर रक्सौल ब्रांच कर मुहर लगाया गया है. जबकि वहां वाले ब्रांच के मुहर का अधिकार नहीं रखा गया है. आर्टिगा की डिलेवरी भी कर दी गयी .गाड़ी का टैक्स इनवॉइस मेरे नाम से दिया गया है. लेकिन आज तक पंजीयन प्रमाण पत्र, बीमा आदि का कागज अभी तक नहीं दिया गया है. जांच के दौरान पाया गया कि विकास सत्यम का हस्ताक्षर तो है. लेकिन कंपनी से निर्गत नहीं है. इस दौरान पूरी तरह जाली पाया गया. जांच में यह भी पता चला कि विकाश सत्यम पूर्व में भी दरभंगा ब्रांच में काम करने के दौरान गबन किया है. अहियापुर थानेदार रोहन कुमार ने बताया कि मामले में एफआइआर दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है. :::::::::::::::::::: डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post वाहन एजेंसी के कर्मचारी सहित चार पर गबन की प्राथमिकी appeared first on Naya Vichar.

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इंजीनियरिंग में पीएचडी में नामांकन के लिए परीक्षा 22 को

मुजफ्फरपुर. इंजीनियरिंग में पीएचडी में नामांकन के लिए होने वाली लिखित परीक्षा की तिथि जारी हो गयी है. प्रदेश में पहली बार यह परीक्षा 22 फरवरी को होगी. परीक्षा के लिए आर्यभट्ट नाॅलेज विश्वविद्यालय कैंपस पटना को केंद्र बनाया गया है. इसमें पांच ब्रांचों के अभ्यर्थी शामिल होंगे. बिहार इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी की ओर से लिखित परीक्षा में शामिल होने वाले योग्य अभ्यर्थियों की सूची पहले ही जारी कर दी गयी है. पहली बार हो रही पीएचडी टेस्ट के लिए 17 जनवरी तक आवेदन जमा हुए थे. कुल 50 सीटों के लिए पीएचडी की लिखित परीक्षा होनी थी. इसमें सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर साइंस व इसीइ में 10-10 सीटें निर्धारित थी. फुल टाइम मोड में होने वाली पीएचडी लिखित परीक्षा के लिए पांच ब्रांच के कुल 39 अभ्यर्थियों को जगह मिली है. इसके बाद लिखित परीक्षा का परिणाम जारी किया जायेगा. परिणाम जारी होने के बाद इंटरव्यू की तिथि तय होगी. लिखित परीक्षा में सिविल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन व मैकेनिकल इंजीनियरिंग के अभ्यर्थी शामिल हैं. सबसे अधिक सिविल इंजीनियरिंग से 18 अभ्यर्थियों को लिस्ट में जगह मिली है. तीन अभ्यर्थियों को गेट का स्कोर अपलोड नहीं करने पर उनका आवेदन रिजेक्ट कर दिया गया है. इसको लेकर बीइयू की ओर से तिथि जारी की गयी है. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post इंजीनियरिंग में पीएचडी में नामांकन के लिए परीक्षा 22 को appeared first on Naya Vichar.

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पटियासा व गरहां में हटाया गया अतिक्रमण

– विरोध के बीच सीओ व मजिस्ट्रेट ने तुड़वाया मकान पटियासा, गरहां में ओवरब्रिज बनने में आ रही था बाधा प्रतिनिधि, बोचहां एनएचएआई के आग्रह पर रविवार को एनएच 57 के पटियासा व गरहां चौक पर अतिक्रमण हटाया गया. इस दौरान स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दोनों जगह पक्का निर्माण को तोड़ा गया. वहीं मौके पर विरोध करने के कारण आधा दर्जन लोगों को हिरासत में लिया गया. जिसके बाद सभी को मौके पर ही छोड़ दिया गया. मामले को लेकर सीओ विश्वजीत सिंह ने बताया कि पटियासा व गरहां में एनएच 57 पर ओवरब्रिज का निर्माण चल रहा है. एनएचएआई की ओर जमीन चिन्हित किया गया था. इसके बाद सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी दिया गया था. लेकिन अतिक्रमणकारियों ने जगह खाली नहीं किया. ओवरब्रिज निर्माण में बाधा आ रही थी. वरीय अधिकारियों के निर्देश पर दोनों जगहों पर पक्का निर्माण को जेसीबी से तोड़ा गया. पटियासा चौक पर एक ढाबा के आंशिक भाग को चिन्हित किया गया था. जिसे ढहाया गया था. वहीं गरहां चौक पर करीब डेढ़ दर्जन दुकानों को ध्वस्त किया गया है. मौके पर सीओ के अलावा मजिस्ट्रेट के रूप में बीपीआरओ जय किशोर साह व एमओ कमलेश कुमार के साथ गरहां थानाध्यक्ष आशीष कुमार ठाकुर दलबल के साथ मौजूद रहे. डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है The post पटियासा व गरहां में हटाया गया अतिक्रमण appeared first on Naya Vichar.

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Army Chief vs Police DGP: सेना प्रमुख और पुलिस DGP में कौन ज्यादा शक्तिशाली? जानें इनकी सैलरी

Army Chief vs Police DGP: हमने अक्सर फिल्मों, टीवी और समाचारों में हिंदुस्तानीय सेना के जनरल और पुलिस विभाग के डीजीपी (Director General of Police) का जिक्र सुना है. दोनों ही पद उच्चतम स्तर के होते हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों पदों की शक्तियों और जिम्मेदारियों में क्या अंतर है? आइए जानते हैं कि आर्मी जनरल और डीजीपी में कौन अधिक शक्तिशाली होता है और उनके अधिकार क्षेत्र क्या हैं. पद और जिम्मेदारियां हिंदुस्तानीय सेना का जनरल पूरे देश की बाहरी सुरक्षा का जिम्मा संभालता है. यह सेना का सर्वोच्च पद होता है और यह सीधे रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रपति को रिपोर्ट करता है. जनरल का मुख्य कार्य देश की सीमाओं की रक्षा करना, युद्ध के समय रणनीति तैयार करना और सशस्त्र बलों का नेतृत्व करना होता है. वहीं, एक डीजीपी किसी राज्य में पुलिस विभाग का सर्वोच्च अधिकारी होता है. वह राज्य की आंतरिक कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालता है. डीजीपी राज्य प्रशासन के गृह सचिव और मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करता है. कौन अधिक शक्तिशाली? अगर शक्ति की तुलना करें, तो हिंदुस्तानीय सेना का जनरल डीजीपी से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है. इसका मुख्य कारण यह है कि जनरल का संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से होता है, जबकि डीजीपी सिर्फ राज्य की कानून व्यवस्था को संभालता है. सेना का जनरल युद्ध और सीमाओं की सुरक्षा का प्रभारी होता है, जिसके आदेश पर देश में सैन्य कार्रवाई की जा सकती है. वहीं, डीजीपी की शक्तियां राज्य के दायरे तक सीमित होती हैं. वह केवल अपराध और कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल का नेतृत्व करता है. हालांकि, आपातकालीन परिस्थितियों में डीजीपी राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन उसकी शक्ति सेना के जनरल के मुकाबले कम होती है. वेतन और सुविधाएं अगर वेतन की बात करें, तो हिंदुस्तानीय सेना के जनरल का वेतन ₹2,50,000 प्रति माह होता है, साथ ही उन्हें कई अन्य प्रशासनी सुविधाएं मिलती हैं, जैसे कि प्रशासनी आवास, वाहन, सुरक्षा, मेडिकल सुविधाएं, कैंटीन सेवाएं और उच्च पेंशन. वहीं, डीजीपी का वेतन ₹2,25,000 प्रति माह होता है. उन्हें भी कई प्रशासनी सुविधाएं मिलती हैं, जैसे प्रशासनी आवास, वाहन, सुरक्षा, मेडिकल सुविधाएं, महंगाई भत्ता (DA) और पेंशन. हालांकि, सुविधाओं और शक्ति के मामले में सेना के जनरल को अधिक अधिकार और सुविधाएं प्राप्त होती हैं. आर्मी जनरल और डीजीपी दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वोच्च पदों पर होते हैं, लेकिन आर्मी जनरल की शक्ति, अधिकार और प्रभाव डीजीपी से अधिक होते हैं. एक जनरल राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करता है और देश की रक्षा की जिम्मेदारी संभालता है, जबकि डीजीपी केवल राज्य स्तर पर कानून व्यवस्था को बनाए रखने का कार्य करता है. हालांकि, दोनों ही पद देश और समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और अपनी-अपनी जिम्मेदारियों में अहम भूमिका निभाते हैं. इसे भी पढ़ें: 17 से 21 फरवरी तक भारी बारिश-आंधी-तूफान हाई अलर्ट The post Army Chief vs Police DGP: सेना प्रमुख और पुलिस DGP में कौन ज्यादा शक्तिशाली? जानें इनकी सैलरी appeared first on Naya Vichar.

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