Dhanbad News : जिले में चल रहे 2231आंगनबाड़ी केंद्रों में आनेवाले तीन से छह साल के 63,315 बच्चों के नाश्ता व खाना पर जल्द ही ग्रहण लगनेवाला है. पांच माह से पोषाहार की राशि नहीं मिलने से दुकानदार भी अब उधार देने में आनाकानी करने लगे हैं. इस स्थिति में केंद्र की सेविका व सहायिका बच्चों को पोषाहार उपलब्ध कराने में असमर्थ महसूस कर रहीं हैं.
विभाग से मिलता है सिर्फ चावल : आंगनबाड़ी केंद्र में वैसे शिशु आते हैं, जिनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर है. केंद्र संचालिकाओं का कहना है कि पोषाहार के लिए हमें विभाग से सिर्फ चावल दिया जाता है. अन्य सामग्री जैसे दाल, मसाला, चीनी, सूजी, घी, तेल खरीदनी पड़ती है, जिसका वाउचर विभाग में जमा करने पर भुगतान कर दिया जाता है, लेकिन पांच माह से राशि का भुगतान नहीं होने से अब परेशानी बढ़ने लगी है. दुकानदार स्पष्ट शब्दों में कहते हैं पहले पिछला बिल का भुगतान होगा, तभी उधारी दे पायेंगे.
स्वास्थ्य की देखभाल के साथ ही बच्चों को दी जाती है शिक्षा : जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के साथ अनौपचारिक शिक्षा दी जाती है. पोषाहार नहीं मिलने का असर बच्चों की उपस्थिति पर पड़ रहा है. कुपोषण दूर करने में अहम भूमिका निभाने वाले इन केंद्रों पर शिशु लगातार कम होने लगे हैं. यह स्थिति जिले के तकरीबन सभी केंद्रों की है.
कोट
पांच माह से पोषाहार राशि बकाया होने से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पोषाहार देने में परेशानी होने लगी है. दुकानदार भी उधारी देने से मना करने लगे हैं.
पुष्पा कुमारी, राष्ट्रीय महामंत्री, आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ
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