हिंदुस्तानीय प्रौद्योगिकी संस्थान-हिंदुस्तानीय खनि विद्यापीठ (आइआइटी-आइएसएम) धनबाद आज अपनी स्थापना की 100वीं वर्षगांठ मना रहा है. इस विशेष अवसर पर नया विचार के वरीय संवाददाता अशाेक कुमार ने संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्र से विस्तृत बातचीत की. उन्होंने संस्थान के गौरवशाली इतिहास, रैंकिंग सुधार, चल रहे शोध कार्यों, छात्रों की 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्यता में बदलाव, संस्थान की भविष्य दृष्टि और स्कूली शिक्षा एवं स्टार्टअप के क्षेत्र में संस्थान की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किये. प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश.प्रभात बातचीत
प्रश्न. आज जब संस्थान अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है, निदेशक के तौर पर आपका अनुभव कैसा है?
उत्तर : यह मेरे लिए अत्यंत गर्व का क्षण है. मैं उस समय संस्थान का निदेशक हूं, जब आइआइटी आइएसएम अपना 100वां स्थापना दिवस मना रहा है. 100 वर्षों की यात्रा बेहद समृद्ध रही है. हमारे सामने एक उज्ज्वल भविष्य है और मैं स्वयं को अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच पुल के रूप में काम करते हुए देखता हूं. शताब्दी स्थापना सप्ताह का आयोजन भी इसी सोच के साथ किया जा रहा है, ताकि हमारा इतिहास और वर्तमान मिलकर भविष्य की मजबूत नींव रख सकें.
प्रश्न. आप संस्थान की 100 साल की यात्रा को कैसे देखते हैं?
उत्तर : एक शताब्दी पुराना यह संस्थान अब झारखंड का प्रमुख थिंक टैंक है. खनन, मेटल उद्योग, शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और स्टार्टअप नवाचार, हर क्षेत्र में हमारी भूमिका राज्य के सतत विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दिखाती है. आने वाले वर्षों में यह योगदान और मजबूत होगा.
प्रश्न. झारखंड की प्रगति में आइआइटी आइएसएम की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर : आइआइटी आइएसएम राज्य के औद्योगिक, शैक्षणिक और तकनीकी विकास का मजबूत स्तंभ बन चुका है. हम हर वर्ष देश को 1000 से अधिक उत्कृष्ट इंजीनियर देते हैं. साथ ही, खनन, मेटल उद्योग, स्टार्टअप इको-सिस्टम और तकनीकी शिक्षा के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. राज्य प्रशासन के तकनीकी सलाहकार के रूप में हम सतत विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.
प्रश्न. राज्य के स्टार्टअप इको-सिस्टम को विकसित करने में संस्थान की क्या भूमिका है?
उत्तर: हमारा अटल इनोवेशन मिशन के तहत राज्य प्रशासन के साथ एमओयू है. अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर में अब तक 60 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सहायता दी गयी है. उद्देश्य है- युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय रोजगार बढ़ाना. हम राज्य की स्टार्टअप पॉलिसी बनाने में भी सहयोग कर रहे हैं.
प्रश्न. राज्य की तकनीकी शिक्षा सुधार के लिए संस्थान क्या कार्य कर रहा है?
उत्तर: बीआइटी सिंदरी के पाठ्यक्रमों को उद्योग की जरूरतों के अनुसार अपडेट किया गया है. 20 से अधिक शिक्षकों को हमने आइआइटी के विभिन्न विभागों में पीएचडी करायी है. इसका सकारात्मक प्रभाव वहां की शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ा है. साथ ही, रांची विश्वविद्यालय और झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू कर आदिवासी छात्रों को बेहतर मेंटरिंग और स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
प्रश्न. एनआइआरएफ रैंकिंग को लेकर संस्थान की रणनीति क्या है?
उत्तर: हम एनआइआरएफ सहित हर रैंकिंग में सुधार को लेकर प्रतिबद्ध हैं. एनआइआरएफ तीन वर्ष के चक्र पर चलता है, इसलिए प्रयासों का प्रभाव धीरे-धीरे दिखता है. इस वर्ष हमारे अंक पिछले वर्ष से बेहतर रहे, हालांकि रैंकिंग में बदलाव नहीं हुआ. रैंकिंग कई पैरामीटरों यथा- फैकल्टी संख्या, रिसर्च, प्रकाशन और प्लेसमेंट पर निर्भर करती है. इन सभी बिंदुओं पर हम लगातार सुधार कर रहे हैं.
प्रश्न. रिसर्च और पेटेंट के क्षेत्र में प्रगति कैसी है?
उत्तर : पिछले कुछ वर्षों में शिक्षकों की शोध क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. इसका सीधा प्रभाव पेटेंट संख्या पर पड़ा है. शोध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ी हैं और आने वाले वर्षों में इसमें और प्रगति दिखेगी.
प्रश्न. 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्यता समाप्त करने से क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह अनिवार्यता केवल परीक्षाओं के लिए समाप्त की गयी है. अब कम उपस्थिति के कारण छात्रों को परीक्षा से वंचित नहीं किया जायेगा. लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि क्लास अटेंड करना आवश्यक नहीं है. छात्रों को नियमित रूप से क्लास करना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी सीखने की क्षमता, प्रदर्शन और करियर के अवसरों में सुधार होता है.
प्रश्न. मल्टी डिसिप्लिनरी इंजीनियरिंग को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: इंजीनियरिंग का भविष्य बहुविषयक मॉडल पर आधारित है. हमारे सभी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अर्थ साइंस से जुड़े हैं, लेकिन शोध पूरी तरह मल्टी डिसिप्लिनरी है. उदाहरण के तौर पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन माइनिंग में फाइवजी तकनीक पर काम हो रहा है. आने वाले समय में यह दायरा और बढ़ेगा.
प्रश्न. केंद्र प्रशासन की पहल पर स्कूली शिक्षा सुधार की दिशा में संस्थान क्या कदम उठा रहा है?उत्तर : हम राज्य के स्कूलों में एसटीइएम शिक्षा को मजबूत करने के लिए कई कार्यक्रम चला रहे हैं. स्कूल प्रिंसिपलों को एआइ और एंमएल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने विद्यालयों में नयी तकनीकी शिक्षा शुरू कर सकें. साथ ही, पीएम श्री विद्यालयों के छात्रों को कैंपस भ्रमण पर बुलाकर रोबोटिक्स, एआइ और एएम का लाइव डेमो दिया जाता है.
प्रश्न. झारखंड स्कूल इनोवेशन चैलेंज से छात्रों को क्या लाभ मिलता है?
उत्तर : यह कार्यक्रम छात्रों में नवाचार की भावना विकसित करता है. राज्यभर के छात्र अपने विचारों को प्रोटोटाइप में बदलते हैं. हम उन्हें लैब, तकनीकी मार्गदर्शन और फंडिंग देते हैं. विजेता टीमों को इनक्यूबेशन सपोर्ट भी मिलता है, ताकि वे अपने उत्पाद को बाजार तक ले जा सकें.
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