घर में प्रसव कराना एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है. ताजा मामला शहर के झारूडीह का है. यहां प्रसव के बाद सरोज देवी (33 वर्ष) की तबीयत बिगड़ने पर इलाज के दौरान एसएनएमएमसीएच में उनकी मौत हो गयी. सरोज देवी के पति दीपू कुमार होमगार्ड जवान हैं. जानकारी के अनुसार सोमवार की रात सरोज देवी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजनों ने अस्पताल ले जाने के बजाय घर में ही प्रसव कराने का फैसला किया. इसके बाद घर पर ही सरोज ने एक शिशु को जन्म दिया. हालांकि, प्रसव के कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. अत्यधिक कमजोरी और रक्तस्राव होने पर परिजनों ने उसे आनन-फानन में एसएनएमएमसीएच में भर्ती कराया. यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी.
हाल के दिनों में यह दूसरी घटना
ज्ञात हो कि हाल के दिनों में यह दूसरी घटना है, जिसमें घर में प्रसव के बाद स्त्री की मौत हो गयी. इससे पहले बाघमारा की एक स्त्री का भी घर में ही प्रसव कराया गया था. इसके बाद तबीयत बिगड़ने पर उसे एसएनएमएमसीएच में भर्ती कराया गया था. जहां इलाज के क्रम में उसकी मौत हो गयी थी. लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गयी है.
घर में प्रसव जोखिम भरा : डॉ डीके गिंदौरिया
एसएनएमएमसीएच के अधीक्षक डॉ डीके गिंदौरिया ने कहा कि घर में प्रसव कराना बेहद जोखिम भरा हो सकता है. कई बार प्रसव के दौरान या बाद में अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण, बीपी का अचानक गिरना व अन्य जटिलताएं उत्पन्न हो जाती हैं. अस्पताल में ही समय रहते ऐसी स्थिति को संभाला जा सकता है. उन्होंने कहा कि सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव हमेशा अस्पताल में प्रशिक्षित डॉक्टरों व नर्सों की देखरेख में ही होना चाहिए.
लोगों में जागरूकता की जरूरत
डॉ गिंदौरिया ने यह भी कहा कि प्रशासन की ओर से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं. इसके बावजूद लोग जागरूकता के अभाव में घर में ही प्रसव करा रहे हैं. ऐसे मामलों में थोड़ी भी लापरवाही मां की जान पर भारी पड़ सकती है. उन्होंने परिजनों से अपील की है कि प्रसव पीड़ा शुरू होते ही नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें, ताकि मां व बच्चा सुरक्षित रह सकें.
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