Economic Survey 2026: जब हम बाजार से चिप्स का पैकेट या ठंडी कोल्ड ड्रिंक उठाते हैं, तो हमें लगता है कि हम सिर्फ स्वाद खरीद रहे हैं. लेकिन इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की ताजा रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला सच सामने आया है. ये स्वाद नहीं, बल्कि आने वाली बीमारियों का ‘इन्विटेशन कार्ड’ है. आईए समझते है आसान शब्द में.
जंक फूड पर लगेगा ‘भारी टैक्स’: सर्वे में सुझाव दिया गया है कि चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट और पैकेट बंद सूप जैसे ‘अल्ट्रा-प्रोसेस्ड’ खाने को GST के सबसे ऊंचे स्लैब में डाल देना चाहिए. इसके अलावा, जिन चीजों में नमक, चीनी और फैट ज्यादा है, उन पर अलग से ‘सरचार्ज’ लगाने की भी तैयारी है.
बच्चों की सेहत पर मंडराता खतरा: रिपोर्ट के आंकड़े डराने वाले हैं. हिंदुस्तान में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में मोटापे की समस्या 2015-16 में 2.1% थी, जो अब बढ़कर 3.4% हो गई है. अनुमान है कि 2035 तक हिंदुस्तान में करीब 8.3 करोड़ शिशु मोटापे का शिकार हो सकते हैं. इसी वजह से सर्वे में मांग की गई है कि स्कूल-कॉलेजों में जंक फूड कंपनियों की स्पॉन्सरशिप बंद होनी चाहिए.
टीवी पर विज्ञापनों पर लगेगी लगाम?: क्या आपने गौर किया है कि टीवी और मोबाइल पर सुबह से रात तक जंक फूड के लुभावने विज्ञापन चलते हैं? सर्वे ने सुझाव दिया है कि सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक इन विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगा दी जानी चाहिए. साथ ही, पैकेट पर ‘स्टार रेटिंग’ के बजाय साफ-साफ ‘चेतावनी’ लिखी होनी चाहिए ताकि ग्राहक को पता चले कि वह जहर खरीद रहा है या खाना.
40 गुना बढ़ गया जंक फूड का बाजार: हिंदुस्तान में पैकेट बंद खाने का चस्का कितनी तेजी से लगा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2006 में यह बाजार सिर्फ $0.9 बिलियन का था, जो 2019 तक बढ़कर $38 बिलियन पहुंच गया. यानी करीब 40 गुना की बढ़ोतरी! इसी दौरान देश में पुरुषों और स्त्रीओं, दोनों में मोटापे की दर लगभग दोगुनी हो गई है.
कंपनियों की चालाकी और ‘हेल्थ’ का झांसा: सर्वे में कंपनियों की मार्केटिंग रणनीति की भी आलोचना की गई है. “एक के साथ एक फ्री” और फिल्मी सितारों के जरिए इमोशनल विज्ञापन दिखाकर असली खाने (फल, सब्जी, दाल) को हमारी थाली से दूर कर दिया गया है. कई उत्पाद ‘हेल्दी’ और ‘एनर्जी’ देने के नाम पर बेचे जा रहे हैं, जबकि हकीकत में वे सेहत के लिए खतरनाक हैं.
टैक्स के पैसे से सुधरेगी जनता की सेहत: प्रशासन का प्लान है कि जंक फूड पर टैक्स लगाकर जो पैसा इकट्ठा होगा, उसे पब्लिक हेल्थ पर खर्च किया जाए. इसमें प्रशासनी स्कूलों में मिलने वाले खाने (Mid-day Meal) की क्वालिटी सुधारना और दिल की बीमारियों व डायबिटीज जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए कैंपेन चलाना शामिल है.
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