IND vs WI: अहमदाबाद टेस्ट के दूसरे दिन हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम के युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ध्रुव जुरेल (Dhruv Jurel) ने अपने करियर का पहला शतक जड़कर इतिहास रच दिया. 24 साल के इस खिलाड़ी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ संभली हुई पारी स्पोर्ट्सी और 190 गेंदों का सामना करते हुए शतक तक पहुंचे. खास बात यह रही कि उन्होंने अपने शतक को पिता को समर्पित किया, जो कारगिल युद्ध में सेना की सेवा कर चुके हैं. बल्ला राइफल की तरह उठाकर किया गया उनका सेलिब्रेशन दर्शकों के लिए भावुक क्षण बन गया.
A moment to cherish forever! 🥳
Special scenes 📹 in Ahmedabad as Dhruv Jurel notches up a maiden Test 💯
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— BCCI (@BCCI) October 3, 2025
पहला शतक और भावुक सेलिब्रेशन
ध्रुव जुरेल ने 210 गेंदों पर शानदार 125 रनों की पारी स्पोर्ट्सी. उनकी इस पारी में 15 चौके और 3 छक्के शामिल रहे. जब उन्होंने तीन अंकों का आंकड़ा छुआ तो स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं. जुरेल ने शतक पूरा करने के बाद बल्ले को राइफल की तरह उठाकर सैल्यूट किया और फिर हेलमेट उतारकर बल्ला ऊंचा किया. उनका यह जश्न पिता और देश के वीर सैनिकों को समर्पित था. मैदान पर यह नजारा हिंदुस्तानीय क्रिकेट के इतिहास में यादगार बन गया.

नंबर 5 पर दिखाया दमखम
टीम इंडिया की ओर से नंबर 5 पर बल्लेबाजी करने आए जुरेल ने शुरुआत में काफी संयम से स्पोर्ट्सा. उन्होंने पहले रन बनाने की बजाय क्रीज पर टिके रहने पर ध्यान दिया और गेंदबाजों की रणनीति को भांपने की कोशिश की. जैसे ही पिच पर उनकी पकड़ मजबूत हुई, उन्होंने शॉट्स स्पोर्ट्सना शुरू किया. पहले पचास रन तक उन्होंने धैर्य दिखाया, इसके बाद आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए शतक पूरा किया. उनका यह प्रदर्शन बताता है कि वे न सिर्फ विकेटकीपर बल्कि एक भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में भी टीम के लिए अहम साबित हो सकते हैं.
पिच की समझ से मिली मदद
ध्रुव जुरेल ने पारी के बाद कहा कि बल्लेबाजी से पहले विकेटकीपिंग करना उनके लिए मददगार साबित हुआ. उन्होंने कहा मुझे बल्लेबाज या विकेटकीपर के तौर पर खिलाना मेरा फैसला नहीं है. मेरा एकमात्र काम रन बनाना है. क्योंकि विकेटकीपिंग के दौरान आपको पिच को समझने का मौका मिलता है. इससे मुझे अंदाजा हो जाता है कि किन शॉट्स को स्पोर्ट्सा जा सकता है. जुरेल के इस बयान से साफ है कि वे स्पोर्ट्स को लेकर कितने सजग और रणनीतिक हैं.
पिता की प्रेरणा और समर्पण
जुरेल का यह शतक सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि एक भावुक पल भी था. उन्होंने इस शतक को अपने पिता को समर्पित किया, जो हिंदुस्तानीय सेना में कारगिल युद्ध का हिस्सा रहे. पिता की इस पृष्ठभूमि ने ध्रुव में अनुशासन, दृढ़ संकल्प और देश प्रेम की भावना को गहराई से भर दिया है. यही कारण है कि शतक पूरा करने के बाद उनका सेलिब्रेशन दर्शकों के दिलों को छू गया. यह एक ऐसा लम्हा था जिसने स्पोर्ट्स और देशभक्ति दोनों को जोड़ दिया.
पंत की गैरमौजूदगी में खुद को साबित किया
टीम इंडिया इस समय चोटिल ऋषभ पंत की कमी झेल रही है. ऐसे में युवा ध्रुव जुरेल को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी दी गई. दबाव की इस स्थिति में जुरेल ने न सिर्फ अपनी विकेटकीपिंग से प्रभावित किया बल्कि बल्ले से भी बेहतरीन योगदान दिया. पहले ही टेस्ट मैच में शतक जड़कर उन्होंने चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट को यह दिखा दिया कि वे लंबे समय तक टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं. उनकी पारी ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और भविष्य के लिए उम्मीदें जगा दीं.
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