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Mauni Amavasya 2026: पितरों की कृपा पाने का महासंयोग, मौनी अमावस्या पर करें ये अचूक उपाय

Mauni Amavasya 2026: माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. यह तिथि सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी मानी जाती है. इस दिन मौन रहकर स्नान, दान और पितृ तर्पण करने का विशेष महत्व होता है. साथ ही, इसी दिन माघ मेले का तीसरा प्रमुख स्नान पर्व भी संपन्न होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. इसके अतिरिक्त यह दिन पितरों की शांति और पितृ दोष से मुक्ति के लिए भी अत्यंत फलदायी माना गया है.

मौनी अमावस्या कब है?

माघ मास की अमावस्या 18 जनवरी 2026, रविवार को है.

  • अमावस्या तिथि प्रारम्भ – 17 जनवरी 2026 की रात 11:53 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त – 18 जनवरी 2026 की रात 01:08 बजे

मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है. यह दिन गंगा स्नान, दान और श्राद्ध के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है.

गंगा स्नान से मिटते हैं पाप और शांत होगा पितृ दोष

धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करने से जीवन में किए गए जाने-अनजाने सभी पाप समाप्त हो जाते हैं. यदि किसी कारणवश गंगा तट तक जाना संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है. इससे भी गंगा स्नान के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

स्नान के पश्चात पितरों के नाम से तर्पण, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए. इस दिन सफेद वस्त्र, कंबल, अनाज या गर्म कपड़ों का दान विशेष शुभ माना जाता है. ऐसा करने से पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं और पितरों की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

मौनी अमावस्या पर पितरों के लिए खास उपाय

मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद एक पात्र में जल लें और उसमें कुश, अक्षत (चावल) और काले तिल मिलाएं. इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के लिए जल अर्पित करें. तर्पण करते समय श्रद्धा भाव से ‘ॐ पितृभ्यो नमः’ मंत्र कम-से-कम 11 बार जप करें.

साथ ही इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. यदि संभव हो, तो हरिद्वार, गया, प्रयागराज जैसे पवित्र तीर्थस्थलों पर जाकर दान-पुण्य करना विशेष फल प्रदान करता है. मान्यता है कि इन उपायों से पितरों को संतोष प्राप्त होता है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं.

पीपल पूजा से पितरों की कृपा और घर में सकारात्मक ऊर्जा

हिंदू धर्म में यह विश्वास है कि पीपल के वृक्ष में पितरों का वास होता है. मौनी अमावस्या के दिन संध्या काल में पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है. इसके साथ ही पीपल की जड़ में दूध और गंगाजल अर्पित करें.

इसके पश्चात 7 बार पीपल वृक्ष की परिक्रमा करें और पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें. ऐसा करने से न केवल पितृ दोष शांत होता है, बल्कि घर-परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है.

यह भी पढ़ें: Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर मौन व्रत क्यों है जरूरी? जानिए पौराणिक कारण

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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