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Minority Violence Bangladesh: अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसाएं, दिसंबर में दर्ज 50 से अधिक मामले

Minority Violence Bangladesh: बांग्लादेश में फरवरी 12 को होने वाले आम चुनाव से पहले अल्पसंख्यक समुदाय पर हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं. बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई यूनिटी काउंसिल ने दिसंबर महीने में कम से कम 51 मामलों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा होने की जानकारी दी है. इन मामलों में हत्या, चोरी, लूट, घर और मंदिर पर कब्जा, आगजनी, झूठे आरोपों पर गिरफ्तारी और प्रताड़ना शामिल हैं. काउंसिल का कहना है कि ये हमले अल्पसंख्यकों को वोट डालने से रोकने के लिए किए जा रहे हैं.

प्रमुख नेता की उम्मीदवारी रद्द

हाल ही में गोपालगंज-3 सीट से जटिया हिंदू महाजोत के महासचिव गोविंद चंद्र प्रमाणिक की उम्मीदवारी बांग्लादेश निर्वाचन आयोग ने रद्द कर दी. प्रमाणिक ने कहा कि उनके समर्थन में नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले समर्थक मजबूर होकर पीछे हट गए. उन्होंने आरोप लगाया कि यह नेतृत्वक दबाव का हिस्सा है. बांग्लादेश में आम चुनाव में मुख्य मुकाबला आवामी लीग, विपक्षी बीएनपी और इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी के बीच है. चुनाव से पहले का माहौल काफी नाज़ुक और विभाजित है. प्रशासन पर पक्षपात और अल्पसंख्यकों पर हमलों के आरोप लग रहे हैं.

Minority Violence Bangladesh in Hindi: हाल की हिंसक घटनाएं

सोमवार रात, नरसिंघडी के चरसिंदुर बाजार में 40 वर्षीय सरत मणि चक्रवर्ती, जो कि किराना दुकान चलाते थे, को अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला कर मौत के घाट उतार दिया. अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई. यह पिछले 18 दिनों में छठी हत्या है. इसी दिन जेसोर में राणा प्रताप बैरागी, हिंदू आइस फैक्ट्री मालिक और स्थानीय अखबार के कार्यकारी संपादक, को सार्वजनिक जगह पर सिर में गोली मारकर हत्या कर दिया गया. पुलिस जांच कर रही है, लेकिन अभी तक मामले का मकसद स्पष्ट नहीं हुआ है.

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बढ़ती चिंता

हाल की घटनाओं जैसे कि खोकन दास की मौत, जो नए साल की पूर्व संध्या पर आग में झुलसकर मरे, ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है. एएनआई समाचार एजेंसी के अनुसार, बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने इन हिंसाओं पर गहरी चिंता और कड़ी निंदा व्यक्त की है. परिषद ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय भय और असुरक्षा में है और उन्हें डर है कि वे निर्वाध और स्वतंत्र रूप से वोट डाल पाएंगे या नहीं. परिषद का कहना है कि ये हमले देशभर में अल्पसंख्यकों को वोट डालने से रोकने के लिए योजनाबद्ध तरीके से किए जा रहे हैं. उन्होंने प्रशासन और निर्वाचन आयोग से फौरन कदम उठाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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