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Naxalism: अगले साल मार्च तक देश से हो जाएगा नक्सलवाद का खात्मा

Naxalism: देश में नक्सलवाद एक गंभीर समस्या रही है. नक्सलवाद के कारण कई राज्यों में विकास कार्य प्रभावित हुआ. नक्सलवाद की समस्या देश में वर्ष 1967 से चली आ रही है और एक दौर में यह पशुपतिनाथ से लेकर तिरुपति तक का पूरा क्षेत्र नक्सल प्रभावित क्षेत्र था. लेकिन यह थोड़े क्षेत्र सिमट कर रह गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री के नेतृत्व में केंद्र प्रशासन ने मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है और संभावना है कि समय से पहले यह लक्ष्य हासिल हो जाए. पूर्व की की प्रशासन नक्सलवाद को राज्य की समस्या मानती थीं, जिसके कारण केंद्र ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए ठोस नीति नहीं बनाई.

लेकिन वर्ष 2014 में मोदी प्रशासन बनने के बाद नक्सलवाद से निपटने के लिए एक ठोस, समग्र और प्रभावी नीति बनायी गयी. केंद्र और राज्य प्रशासन मिलकर नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को अंजाम तक पहुंचाने की रणनीति पर काम किया. मोदी प्रशासन ने नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का फैसला लिया और इससे निपटने के लिए सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देने की नीति को आगे बढ़ाने का काम किया. 

प्रशासन की समग्र नीति का नतीजा है कि पहले जहां नक्सलवाद से 10 राज्य प्रभावित थे अब उनकी संख्या घटकर पांच हो गयी है. वर्ष 2004-2014 के बीच देश में नक्सलवाद प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी, जो अब घटकर 11 हो गयी है. इस दौरान नक्सलवाद प्रभावित जिलों की संख्या में 91 फीसदी की कमी दर्ज की गयी है. 

विकास के साथ सुरक्षा को किया गया सशक्त

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय में लोकसभा में कहा कि मोदी प्रशासन ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए वर्ष 2015 में एक समग्र नीति एवं कार्ययोजना बनाई. इसके तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के कार्य को प्राथमिकता दी गयी. नक्सल प्रभावित राज्यों में जरूरत के हिसाब से केंद्रीय अर्धसैनिक बल की तैनाती की गयी. मौजूदा समय में नक्सल प्रभावित क्षेत्र में  केंद्रीय अर्धसैनिक बल के 574 बटालियन तैनात है. इसके अलावा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 3523 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गयी. 

विशेष अवसंरचना योजना के तहत 1757 करोड़ रुपये, विशेष केंद्रीय सहायता के तहत 3848 करोड़ रुपये, एसीएएलडब्लूईएमएस के तहत 1218 करोड़ रुपये, सिविक कार्रवाई कार्यक्रम के तहत 210 करोड़ रुपये मंजूर मंजूर किए गए. इसके अलावा 706 किलेबंद पुलिस स्टेशन बनाने की मंजूरी दी गयी. स्थानीय युवाओं की भागीदारी से केंद्रीय अर्धसैनिक बल की बस्तर बटालियन बनाया गया.

नक्सल प्रभावित इलाकों में बुनियादी सुविधा बेहतर करने के लिए 20 हजार करोड़ से अधिक लागत से सड़क निर्माण, 10 हजार से अधिक मोबाइल टॉवर, कौशल विकास केंद्र, नवोदय और केंद्रीय और एकलव्य आवासीय विद्यालय की स्थापना की गयी. प्रशासन के प्रयासों का नतीजा है कि जून 2019 से अब तक 29 टॉप नक्सली लीडर मारे गए हैं, जिसमें से सिर्फ इसी साल 14 शीर्ष नक्सली नेता मारे गए है. गृह मंत्रालय ने राज्यों को प्रोत्साहित कर सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति बनाने का काम किया है. 

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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