नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर। समस्तीपुर में NEET (राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा) के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया इनपुट के आधार पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया। मामले में बेगूसराय जेल में पदस्थापित डॉक्टर रंजीत कुमार और दरभंगा निवासी रामबाबू मलिक को गिरफ्तार किया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने असली अभ्यर्थियों की जगह स्कॉलर को परीक्षा में बैठाने की साजिश रची और इसे अंजाम तक पहुंचाया।जानकारी के अनुसार, आरोपितों ने परीक्षा में कमजोर छात्रों की जगह टैलेंटेड स्कॉलर को बैठाने के लिए 2.50 लाख से 5 लाख रुपये तक की डील की थी। पुलिस ने मोहनपुर पुल के पास स्थित एक परीक्षा केंद्र के समीप दोनों संदिग्धों को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पकड़ा। तलाशी के दौरान उनके पास से 3 मोबाइल, एक कार, 50 हजार रुपये नकद और कई छात्रों के एडमिट कार्ड बरामद किए गए।
सदर एसडीपीओ संजय पांडे का बयान:
सदर एसडीपीओ संजय पांडे ने मीडिया से बातचीत में बताया कि “हमें पटना से खुफिया जानकारी मिली थी कि कुछ लोग फर्जी तरीके से NEET परीक्षा में छात्रों की जगह स्कॉलर को बैठा रहे हैं। इसी इनपुट के आधार पर हमने एक टीम गठित की और संदिग्धों की निगरानी शुरू की। पूछताछ में डॉक्टर रंजीत ने स्वीकार किया है कि वह ऐसे मामलों में पहले भी शामिल रहा है और पैसे के बदले स्कॉलर को एग्जाम में बिठाता था। हम इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहे हैं। इसमें अन्य कई जिलों में फैले तारों की भी संभावना है। जांच के लिए विशेष टीम बनाई गई है जो एडमिट कार्ड्स और परीक्षा केंद्रों के मिलान का काम कर रही है।”पुलिस को शक है कि यह गिरोह वर्षों से इस तरह की गतिविधियों में लिप्त है और इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और बरामद मोबाइल फोन से तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।यह घटना NEET जैसे उच्च स्तरीय परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। शिक्षा व्यवस्था में इस तरह के फर्जीवाड़े छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के बराबर हैं। प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई में जुट गया है।