Organised Crime: देश में विभिन्न तरह के अपराध कर भागे अपराधियों को पकड़ने के लिए प्रशासन को उस देश की प्रशासनी नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी होती है. ऐसे अपराधियों को पकड़ने के लिए कई देशों के साथ प्रर्त्यापण संधि है. लेकिन फिर भी कई मामलों में प्रशासन को भगोड़े के प्रर्त्यपण के लिए उस देश के नियमों को स्वीकार करना होता है. ऐसे भगोड़े अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए गुरुवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो(सीबीआई) की ओर से दो दिवसीय ‘भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण-चुनौतियांऔर रणनीतियां’ विषय पर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है.
गुरुवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. सम्मेलन के दौरान विभिन्न केंद्रीय और राज्य पुलिस एजेंसियों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भगोड़ों को ट्रैक करने और उन्हें हिंदुस्तान में मुकदमे का सामना करने के लिए वापस लाने के प्रयासों को समन्वित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग के मुद्दों पर चर्चा करेंगे.
सम्मेलन में गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय सहित अन्य हितधारक शामिल होंगे. गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल के शुरू में सीबीआई द्वारा विकसित ‘हिंदुस्तानपोल’ पोर्टल को शुरू किया था. इस पोर्टल ने जिला पुलिस इकाइयों, राज्य पुलिस, केन्द्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सीबीआई को एक मंच पर लाकर सूचनाओं के निर्बाध प्रवाह को सक्षम बनाने का काम किया है.
नार्को, आतंकवाद, साइबर अपराध, संगठित अपराध पर होगा विशेष मंथन
इस दो दिवसीय सम्मेलन में विदेशों से सहयोग प्राप्त करने के लिए उपलब्ध औपचारिक और अनौपचारिक चैनलों का प्रभावी उपयोग, भगोड़े अपराधियों का पता लगाने में तकनीक का उपयोग, भगोड़ों के प्रत्यर्पण के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण और वांछित भगोड़ों के वित्तीय फुटप्रिंट का विश्लेषण सहित कई मुद्दों पर चर्चा होगी. नार्को, आतंकवाद, साइबर अपराध, संगठित अपराध और आर्थिक अपराधियों को पकड़ने पर विशेष चर्चा होगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हिंदुस्तान अंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टिगेशन के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विदेशों से वांछित भगोड़ों को वापस लाने के लिए एक समन्वित सहयोग पर जोर देते रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सीबीआई ने इस सम्मेलन का आयोजन किया है, ताकि उचित कानूनी और कूटनीतिक चैनलों के जरिये समयबद्ध तरीके से भगोड़ों को वापस लाने का काम हो सके.
गौरतलब है कि विभिन्न देशों में वांछित हिंदुस्तानीय भगोड़ों के संबंध में 300 से अधिक प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित हैं.
भगोड़े अक्सर इन देशों से अपने प्रत्यर्पण के प्रयासों को बाधित करने के लिए विभिन्न रास्तों का सहारा लेते हैं. संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े कई अपराधी विदेश में रहते हुए आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते है. सम्मेलन में कानून प्रवर्तन एजेंसियां और विशेषज्ञ इन चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर ऐसे भगोड़े अपराधियों के शीघ्र प्रत्यर्पण के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर काम करेंगे.
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