Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत माना जाता है. यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन शाम के समय प्रदोष काल में की गई पूजा से भगवान शिव बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.प्रदोष व्रत के दिन सबसे शुभ समय शाम का होता है. सूर्यास्त के बाद से लगभग ढाई घंटे तक का समय प्रदोष काल कहलाता है. इसी समय भगवान शिव की पूजा करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है.
शाम की पूजा
शाम के समय सबसे पहले स्नान कर लें या हाथ-मुंह धोकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद घर के मंदिर या शिवलिंग के सामने शांत मन से बैठें. भगवान शिव के समक्ष घी या तेल का दीपक जलाएं. दीपक जलाते समय मन में भगवान शिव का ध्यान करें और उनसे अपने जीवन की परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें.
इसके बाद शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें. यदि संभव हो, तो गंगाजल मिलाकर जल चढ़ाएं. साथ ही बेलपत्र, फूल और अक्षत भी शिवलिंग पर अर्पित करें. मान्यता है कि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है.
पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें. यह मंत्र अत्यंत सरल है और इसके जाप से मन शांत होता है तथा नकारात्मक विचार दूर होते हैं. यदि समय हो, तो शिव चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं. शाम की पूजा के बाद भगवान शिव की आरती करें और पूजा के अंत में उनसे जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करें.
भगवान शिव का ध्यान
यह भी मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय कुछ देर शांत बैठकर भगवान शिव का स्मरण करने से मानसिक तनाव कम होता है. कहा जाता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और सफलता प्राप्त होती है. इसलिए प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय यह एक कार्य अवश्य करें और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करें.
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
अनुभव: 15+ वर्ष
विशेषज्ञता: वैदिक ज्योतिष, ग्रह गोचर विश्लेषण
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