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Punjab Haryana Water War: पंजाब और हरियाणा प्रशासन पानी की आपूर्ति को लेकर विवाद में उलझे हैं. पंजाब की भगवंत मान प्रशासन भाखड़ा बांध से हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के लिए तैयार नहीं है. ये खींचतान लगभग एक सप्ताह से चल रही है. पंजाब प्रशासन ने भाखड़ा बांध से हरियाणा के लिए छोड़े जाने वाली पानी की मात्रा को पहले ही 8500 क्यूसेक से कम करके 4 हजार क्यूसेक कर दिया था. अब वो अतिरिक्त पानी देने को किसी भी हालत में तैयार नहीं है. इसको लेकर हरियाणा प्रशासन सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है.
तीन राज्यों में बंटता है पानी
रावी, ब्यास और सतलुज से हर साल पंजाब को 35 अरब घन मीटर पानी मिलता है. इस पानी का पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में बंटवारा होता है.
पंजाब को सिंचाई के लिए सबसे अधिक पानी की जरूरत है, जो लगभग 40 अरब घन मीटर से अधिक होती है. क्योंकि राज्य भूजल के दोहन ने जलस्तर को कम कर दिया है. इसी कारण पंजाब ने नहर के पानी से सिंचाई बढ़ा दिया और अन्य राज्यों को पानी देने से मना कर दिया. केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब 26.24 अरब घन मीटर भूजल का इस्तेमाल हर साल सिंचाई के लिए करता है. जबकि वार्षिक वाटर रिचार्ज 19.19 अरब घन मीटर है. नियमानुसार पंजाब वार्षिक 17.63 अरब घन मीटर भूजल ही इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन ये लगभग डेढ़ गुना अधिक हो रहा है. इसी कारण पंजाब में भूजल का स्तर लगातार गिर रहा है. इस संकट से निजात पाने के लिए पंजाब ने नहरों के पानी से सिंचाई को बढ़ा दिया है.
हर साल तय होता है पानी का बंटवारा
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच पानी का बंटवारा करता है. ये बंटवारा 21 मई से अगले साल 20 मई तक लागू रहता है. पंजाब प्रशासन का कहना है कि हरियाणा अपने हिस्से का पानी 31 मार्च तक इस्तेमाल कर चुका है. लेकिन वह अतिरिक्त पानी की मांग कर रहा है.
क्यों आ रही दिक्कत
हिंदुस्तान के पास पानी को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है, मानसून में जब नदियां उफान पर होती हैं, तो पानी पाकिस्तान चला जाता है. ऐसे में पाकिस्तान भी हिंदुस्तान पर अतिरिक्त पानी छोड़ने का आरोप लगाता है. हर साल, खास तौर पर रावी नदी से, काफी मात्रा में पानी बिना इस्तेमाल के पाकिस्तान चला जाता है. पंजाब की नदियों में 42.6 बीसीएम पानी में से राज्य सिर्फ 14.80 बीसीएम पानी का इस्तेमाल करता है. बचा हुआ पानी राजस्थान (लगभग 10.6 बीसीएम), हरियाणा और पाकिस्तान में जाता है. मानसून के मौसम में इन नदियों का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान को छोड़ दिया जाता है.
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