सरायकेला: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के तत्वावधान में रविवार को स्थानीय जेल परिसर में जेल अदालत सह कानूनी जागरुकता एवं चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में डीएलएसए सचिव तौसीफ मेराज ने कहा कि जेल अदालत का आयोजन प्रत्येक माह लगभग तीसरे रविवार को किया जाता है, जिसका उद्देश्य बंदियों को त्वरित न्याय, निःशुल्क कानूनी सहायता और जागरुकता उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि जेल अदालत के साथ चिकित्सा शिविर आयोजित करने का उद्देश्य बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श और उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है. सचिव ने डीएलएसए द्वारा प्रदान की जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर, निरुद्ध व्यक्ति, स्त्रीएं, शिशु, अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांग तथा अन्य पात्र व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से अधिवक्ता, कानूनी परामर्श और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने बंदियों को अपने विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया और आश्वस्त किया कि न्यायालय व डीएलएसए उनकी सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.
नाबालिग घोषित हुआ एक बंदी :
शिविर के दौरान एक बंदी के नाबालिग होने की आशंका प्रकट की गयी थी. लीगल एड डिफेंस काउंसिल की पहल पर मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां बंदी को नाबालिग घोषित किया गया.
स्त्री वार्ड का निरीक्षण :
कार्यक्रम उपरांत सचिव मेराज ने स्त्री वार्ड का दौरा कर कैदियों से बातचीत की और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की. जेल अदालत के पश्चात स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें कैदियों की स्वास्थ्य जांच की गयी और आवश्यक दवाएं दी गयीं. मौके पर कारा अधीक्षक सत्येंद्र कुमार महतो, जेलर सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे.
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