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Success Story: पिता को सैल्यूट और नम हो गईं आंखें…पहली बार में SSB क्रैक कर Army Officer बनी तीसरी पीढ़ी की बेटी

Success Story of Tanishka Damodaran: जब सपने विरासत से जुड़ते हैं और जज्बे से साकार होते हैं. कुछ कहानियां तब जन्म लेती हैं जब वह अलग छाप छोड़ती हैं और इसमें देशप्रेम का जुड़ाव हो तो फिर यह सफलता की चमक गर्वित करने वाली होती है. ऐसी प्रेरणादायक कहानी है लेफ्टिनेंट तनिष्का दमुदरन की. तनिष्का हिंदुस्तानीय सेना की तीसरी पीढ़ी की ऑफिसर हैं लेकिन अपने परिवार में पहली स्त्री हैं जिन्होंने सेना की वर्दी पहनी है. आइए विस्तार से जानते हैं Success Story of Tanishka Damodaran और उनके बारे में.

देशसेवा की विरासत, जो तीन पीढ़ियों से जारी है (Success Story)

रिपोर्ट्स और रिसर्च के मुताबिक, लेफ्टिनेंट तनिष्का (Tanishka Damodaran) के लिए सेना कोई नौकरी नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका है. उनके दादाजी ने 1965 और 1971 की जंग में वीरता दिखाई और सेना मेडल से सम्मानित किए गए. उनके पिता कर्नल सनिल दमुदरन और चाचा कर्नल संजय दमुदरन पैरा स्पेशल फोर्स में रहे हैं, जो सियाचिन, जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट जैसे कठिन इलाकों में तैनात रहे.

पासिंग आउट परेड में रचा इतिहास (Indian Army Success Story)

चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में पासिंग आउट परेड के दौरान तनिष्का ने अपने कोर्स की अगुवाई की. उन्होंने 54 कमांड्स इतनी सटीकता से दिए कि वहां मौजूद सीनियर ऑफिसर्स भी प्रशंसा किए बिना नहीं रह पाए. इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ऑर्डर ऑफ मेरिट में दूसरा स्थान (सिल्वर मेडल), मार्चिंग और शूटिंग में गोल्ड मेडल और कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स मेडल से नवाज़ा गया.

सपना सच होने जैसा..(Success Story of Tanishka Damodaran)

परेड के सबसे भावुक पल में तनिष्का ने अपने पिता को पहला सैल्यूट दिया. यह दृश्य पूरे परिवार की आंखों में आंसू ले आया. मां अनुपमा दमुदरन ने इसे “सपना सच होने जैसा” बताया.

एनसीसी से सेना तक (Success Story)

तनिष्का की यात्रा NCC से शुरू हुई, जहां उन्होंने अपनी क्षमता साबित की और सीधे SSB तक पहुंचीं. पहले ही प्रयास में SSB निकालकर वह OTA पहुंचीं. कर्नाटक की अंडर-19 क्रिकेट खिलाड़ी रह चुकीं तनिष्का ने पढ़ाई, स्पोर्ट्स और देशसेवा के सपनों को बखूबी संतुलित किया.

अगला लक्ष्य…पैराशूट रेजिमेंट में शामिल होना

तनिष्का अब आर्मी सर्विस कॉर्प्स में कमिशन हो चुकी हैं और श्रीनगर में अपनी पहली पोस्टिंग पर जा रही हैं. लेकिन उनका अगला सपना और भी चुनौतीपूर्ण है – Para ASC का हिस्सा बनना, जिसके लिए वो शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को तैयार कर रही हैं.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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