Alapan Bandyopadhyay Resigns: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में बुरी तरह हारने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भले इस्तीफा नहीं देने पर अड़ी हों, लेकिन उनके बेहद करीबी रहे लोगों ने उनसे किनारा करना शुरू कर दिया है. 15 साल पुराने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन के अंत के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में इस्तीफों की झड़ी लग गयी है.
आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी का इस्तीफा
ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने के ऐलान के बाद निवर्तमान मुख्यमंत्री के 2 सबसे भरोसेमंद मुख्य सलाहकारों- आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. दोनों ही पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं और ममता के बेहद करीबी माने जाते थे. प्रशासन के आर्थिक सलाहकार और कानूनी सिपहसालारों ने भी नयी प्रशासन के शपथ ग्रहण से पहले अपने पद छोड़ दिये.
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मैदान छोड़कर ‘भागे’ नबान्न के 2 ‘पावर सेंटर’
राज्य सचिवालय (नबान्न) के सूत्रों के अनुसार, आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी ने मंगलवार को ही अपना इस्तीफा सौंप दिया.
- आलापन बंद्योपाध्याय : 2021 में केंद्र और राज्य के बीच विवाद का मुख्य चेहरा रहे आलापन बंद्योपाध्याय को रिटायरमेंट के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने अपना मुख्य सलाहकार बना लिया था. उनका इस्तीफा नौकरशाही में एक बड़े युग के अंत जैसा है.
- एचके द्विवेदी : पूर्व मुख्य सचिव रहे एचके द्विवेदी भी सलाहकार के रूप में प्रशासनिक निर्णयों में बड़ी भूमिका निभा रहे थे. सत्ता परिवर्तन की आहट पाते ही उन्होंने पद छोड़ना ही बेहतर समझा.
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Alapan Bandyopadhyay Resigns: अर्थशास्त्री अभिरूप प्रशासन और महाधिवक्ता ने भी छोड़ी कुर्सी
प्रशासनिक सर्जरी यहीं नहीं रुकी. प्रशासन के कई अन्य प्रमुख स्तंभ भी गिर गये हैं. प्रख्यात अर्थशास्त्री अभिरूप प्रशासन ने पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) और लघु उद्योग विकास निगम (WBSIDC) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) किशोर दत्ता ने पहले ही राज्यपाल आरएन रवि को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. इन इस्तीफों को स्वीकार कर लिया गया है और अब रिक्त पदों को भरने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
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सत्ता परिवर्तन का असर, ‘क्लीन स्लेट’ की तैयारी
भाजपा की 207 सीटों के साथ हुई प्रचंड जीत ने बंगाल की नौकरशाही में हड़कंप मचा दिया है. जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी के दौर में नियुक्त किये गये सलाहकार और अधिकारी अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार इन अधिकारियों पर ‘नेतृत्वक एजेंट’ के तौर पर काम करने का आरोप लगाया था.
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