Property Benefits for Women: आज के दौर में घर खरीदना हर हिंदुस्तानीय परिवार का सबसे बड़ा सपना होता है. सालों की मेहनत और पाई-पाई जोड़कर हम इस सपने को सच करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि अगर आप घर का रजिस्ट्रेशन परिवार की किसी स्त्री के नाम पर कराते हैं, तो आप लाखों रुपये बचा सकते हैं?
जी हां, प्रशासन और बैंक स्त्रीओं को प्रॉपर्टी का मालिक बनाने के लिए कई खास छूट दे रहे हैं. आइए समझते हैं कैसे:
रजिस्ट्री के वक्त लाखों की बचत कैसे?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जब भी हम मकान या जमीन खरीदते हैं, तो प्रशासन को स्टैंप ड्यूटी (रजिस्ट्री फीस) देनी पड़ती है. हिंदुस्तान के कई राज्यों में स्त्रीओं के लिए यह फीस पुरुषों के मुकाबले 1% से 2% तक कम है. मान लीजिए आप दिल्ली या यूपी में 50 लाख का घर खरीद रहे हैं. एक पुरुष को जहां 6% या 7% फीस देनी होगी, वहीं स्त्री के नाम पर यह 4% या 5% हो सकती है. यानी सीधे-सीधे 1 लाख रुपये तक की बचत हो सकती है.
क्या होम लोन की ब्याज दर भी कम होगी?
ज्यादातर प्रशासनी और प्राइवेट बैंक स्त्रीओं को होम लोन पर स्पेशल डिस्काउंट देते हैं. आमतौर पर स्त्रीओं के लिए ब्याज दर 0.05% से 0.10% तक कम होती है. सुनने में यह मामूली लग सकता है, लेकिन अगर लोन 20 साल का है, तो लंबे समय में आपकी EMI और कुल ब्याज पर हजारों-लाखों का फर्क पड़ जाता है.
टैक्स में कितनी ज्यादा मिलेगी छूट?
अगर घर की मालकिन कामकाजी (Working Woman) है, तो उन्हें इनकम टैक्स में भी बड़ा फायदा मिलता है.
- लोन की मूल राशि (Principal): पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट.
- ब्याज (Interest): पर 2 लाख रुपये तक की छूट. अगर पति-पत्नी मिलकर जॉइंट प्रॉपर्टी लेते हैं, तो दोनों अलग-अलग इन टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं. इससे पूरे परिवार की टैक्स देनदारी काफी कम हो जाती है.
प्रशासनी स्कीम का लाभ कैसे लें?
आजकल की प्रशासनी योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में यह नियम है कि घर का मालिकाना हक स्त्री के नाम पर होना जरूरी है (या जॉइंट में). इसका मकसद स्त्रीओं को समाज में बराबरी का हक और आर्थिक सुरक्षा देना है.
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