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छांगुर बाबा को फांसी दो! राज्य महिला आयोग अध्यक्ष बबीता चौहान की गरज – बेटियां कोई प्रयोगशाला नहीं

Illegal Religious Conversion: राज्य स्त्री आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान ने जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा को फांसी की सजा देने की मांग करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और बेटियों की अस्मिता पर हमला है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं, जब तक इन समाज विरोधी तत्वों को सार्वजनिक रूप से कड़ी सजा नहीं दी जाएगी, तब तक यह मानसिकता नहीं रुकेगी. उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला देश की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन से जुड़ा हुआ है.

स्त्री आयोग अध्यक्ष ने मांगी कठोर सजा, कहा – बेटियां कोई प्रयोगशाला नहीं

बबिता चौहान ने भावुक शब्दों में कहा कि बेटियों को लालच, धोखे और भावनात्मक जाल में फंसाकर उनके धर्म को बदला जा रहा है. यह सब एक सोची-समझी योजना के तहत हो रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, “हमारी बेटियां कोई सामाजिक प्रयोग का हिस्सा नहीं हैं. यह न सिर्फ संविधान के खिलाफ है, बल्कि इंसानियत के खिलाफ भी है.” उन्होंने कोर्ट से अपील की कि ऐसे अपराधियों को उदाहरण बनाने के लिए फांसी दी जाए.

यूपी एटीएस के हत्थे चढ़ा ‘छांगुर बाबा’, था 50 हजार का इनामी

उत्तर प्रदेश एटीएस ने कई महीनों की निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर छांगुर बाबा को गिरफ्तार किया. यह गिरफ्तारी यूपी के धार्मिक नक्शे को बिगाड़ने की कोशिश करने वाले एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ मानी जा रही है. जांच में सामने आया है कि छांगुर बाबा सिर्फ अकेला व्यक्ति नहीं था, बल्कि उसके पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल चुका है. उसकी गिरफ्तारी राज्य प्रशासन की सख्त निगरानी और तत्परता का नतीजा है.

धर्मांतरण के लिए बनाई ‘रेट लिस्ट’, बेटियों को समझा था ‘टारगेट’

छांगुर बाबा पर आरोप है कि उसने लड़कियों के धर्मांतरण के लिए बाकायदा ‘रेट लिस्ट’ तैयार की थी, जिसमें यह तय किया गया था कि किस समुदाय की लड़की के धर्म परिवर्तन पर कितनी राशि या ‘रिवार्ड’ मिलेगा. इस सूची से यह साबित होता है कि यह कोई व्यक्तिगत प्रयास नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध था, जिसमें मानव तस्करी की तर्ज पर धर्म का सौदा किया जा रहा था. यह समाज की जड़ों को खोखला करने वाला काम है और इसकी तह तक जाना जरूरी है.

बबिता चौहान का तीखा हमला: हमारी बेटियां कोई टेस्ट केस नहीं

बबिता चौहान ने कड़े लहजे में कहा कि समाज की सबसे कमजोर कड़ी को निशाना बनाया जा रहा है हमारी बेटियां. उन्होंने कहा कि छल, प्रलोभन, झूठे प्यार और शादी का झांसा देकर धर्म परिवर्तन कराना न सिर्फ कानूनी अपराध है, बल्कि यह मानसिक शोषण का जघन्य रूप है. उन्होंने सवाल किया कि अगर समय रहते समाज जागरूक नहीं हुआ तो अगला शिकार कौन होगा? उन्होंने चेतावनी दी कि यह सिर्फ एक शुरुआत है, अगर इसे अभी नहीं रोका गया तो यह जहर पूरे देश में फैल जाएगा.

योगी प्रशासन का सख्त कानून, अब समाज की बारी – बोले बबिता

बबिता चौहान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के धर्मांतरण विरोधी कानून को एक साहसिक कदम बताया. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने अपना काम कर दिया है सख्त कानून बना दिया है, दोषियों को पकड़वाया है अब बारी समाज की है कि वह एकजुट होकर इस विकृति के खिलाफ खड़ा हो. उन्होंने यह भी कहा कि कानून तभी असरदार होगा, जब आम जनता भी जागरूक होकर इस तरह के मामलों की रिपोर्ट करे और बेटियों की सुरक्षा के लिए खुलकर सामने आए.

स्त्रीओं से अपील – चुप मत बैठो, आवाज उठाओ

राज्य स्त्री आयोग अध्यक्ष ने खासतौर से स्त्रीओं से अपील करते हुए कहा कि अगर आज हम चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियों की पहचान मिट जाएगी. उन्होंने कहा कि माताएं, बहनें और बेटियां इस लड़ाई में अपनी भूमिका निभाएं, छांगुर जैसे मानसिकता रखने वालों के खिलाफ खुलकर बोलें, शिकायत करें और सामाजिक जागरूकता फैलाएं. उन्होंने कहा कि यह समय डरने का नहीं, लड़ने का है और जब स्त्रीएं एकजुट होती हैं, तो बदलाव की लहर उठती है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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