रनिया. दीपावली के नजदीक आने के साथ ही कुम्हारों के चाक की रफ्तार तेज हो गयी है. उनके परिवार के लोग सुबह से ही मिट्टी के दीपक, प्रतिमा और खिलौना बनाने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं. पिछले दिनों की लगातार वर्षा के कारण कुम्हार दीये को पकाने तथा बनाने में परेशानी हो रही थी. उन्हें उम्मीद है कि उनकी भी दीपावली औरों की तरह रोशन होगी. बाजारों में तरह-तरह के इलेक्ट्रॉनिक झालर, दीपक, प्रतिमा आदि आ जाने से मिट्टी के दीये की बिक्री में काफी कमी आयी है. मिट्टी के दीये और कलश सहित अन्य सामग्री बनाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले कूल्हाई गांव निवासी झखन महतो, देवमैन महतो, झगरू महतो ने बताया कि उनका जीवन-यापन का प्रमुख व्यवसाय मिट्टी के बर्तन बना कर उनकी बिक्री करना है. दीपावली के मद्देनजर उन्होंने मिट्टी के दीये बनाये हैं. मगर, चाइनीज सामानों के कारण अब तक अपेक्षा के अनुरूप बिक्री नहीं हो पायी है. उम्मीद जतायी कि इस बार बिक्री बढ़ेगी और उनका मुनाफा भी होगा. मिट्टी की सामग्री बना कर बिक्री करने वाले बुजुर्ग लूरका महतो, शंकर महतो ने बताया कि बाजार में एक से एक दीये आ गये हैं. जिसे लोग मिट्टी के दीये की अपेक्षा ज्यादा खरीदते हैं. इन दिनों मिट्टी के बर्तन बनाने में लागत काफी बढ़ गयी है. इसके चलते पहले की तुलना में मुनाफा काफी कम हो गया है.
इलेक्ट्रॉनिक झालर, दीपक, प्रतिमा आदि आ जाने से मिट्टी के दीये की बिक्री में आयी है कमीB
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