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बंगाल के पुराने वोटर की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 10 को, जानें पूरा मामला

SIR West Bengal: पश्चिम बंगाल के उन पुराने वोटर की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी, जिनके नाम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से हटा दिये गये. हिंदुस्तान के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सीनियर एडवोकेट मनेका गुरुस्वामी की याचिका पर विचार करते हुए कहा कि वे इस याचिका पर सुनवाई करेंगे. याचिका वोटर लिस्ट से पुराने मतदाताओं के नाम हटाये जाने से संबंधित है.

मेनका गुरुस्वामी की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए नामित उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने देश की सबसे बड़ी अदालत में कहा कि ये मतदाता हैं. इन्होंने पहले मतदान किया था. अब उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किये जा रहे हैं. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा- हम न्यायिक अधिकारियों के फैसले के खिलाफ अपील को रोक नहीं सकते.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने कहा कि अपील विचार करने लायक है. इस पर पीठ ने कहा कि याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी. सर्वोच्च अदालत ने 24 फरवरी को एसआईआर प्रक्रिया में 80 लाख दावों और आपत्तियों को निपटाने के लिए पश्चिम बंगाल के 250 जिला जजों के अलावा दीवानी न्यायाधीशों की तैनाती और झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की अनुमति दी थी.

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22 फरवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को लिखी थी चिट्ठी

पीठ ने 22 फरवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की चिट्ठी पर भी गौर किया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर में तैनात 250 जिला जजों को भी दावों और आपत्तियों को निपटाने में लगभग 80 दिन और लग सकते हैं. पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा 28 फरवरी तय की गयी थी.

9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था असाधारण फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी को असाधारण फैसला देते हुए स्पष्ट किया था कि कोई भी व्यक्ति एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता. साथ ही न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आदेश दिया था कि चुनाव आयोग की ओर से भेजे गये नोटिस को जलाये जाने के आरोपों पर हलफनामा दायर करें.

ऐसे मामले विचाराधीन की श्रेणी में

  • वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज तर्कसंगत विसंगतियों में माता-पिता के नाम का मेल न होना.
  • मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से अधिक होना.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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