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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तैनात हुई इंडियन नेवी, वॉरशिप से एस्कॉर्ट कर रही तिरंगा लगे जहाज

Indian Navy Strait of Hormuz: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हिंदुस्तानीय नेवी को दो युद्धपोत टास्क फोर्स के तहत तैनात किए गए हैं. हिंदुस्तान ने ईरान के पास यह तैनाती होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले गैस और कच्चा तेल लेकर आ रहे व्यापारी जहाजों और टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए की है. हिंदुस्तानीय नौसेना एस्कॉर्ट किए जा रहे जहाजों को हर संभव सहायता और सुरक्षा प्रदान कर रही है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने तीन टैकरों की अदला-बदली की बात कही है. दरअसल हिंदुस्तान ने पहले इन टैंकरों को जब्त किया था. ईरान इनके बदले सुरक्षित मार्ग देने पर राजी हुआ है. इसके तहत हिंदुस्तानीय ध्वज वाले या हिंदुस्तान की ओर आने वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा.

अवैध कार्यों में लिप्त थे ईरानी जहाज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदुस्तानीय अधिकारियों का आरोप था कि ये जहाज अपनी पहचान छिपा रहे थे या बदल रहे थे और समुद्र में अवैध शिप-टू-शिप ट्रांसफर में शामिल थे. जब्त किए गए टैंकरों में डामर स्टार, अल जाफजिया और स्टेलर रूबी शामिल हैं. इनमें से स्टेलर रूबी ईरानी ध्वज वाला है, जबकि बाकी दो जहाज निकारागुआ और माली के झंडे के तहत रजिस्टर्ड हैं.

ईरान ने दवाइयों की भी की है मांग

तीन जहाजों के अलावा, तेहरान ने कुछ दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की भी मांग की है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के राजदूत ने सोमवार को नई दिल्ली में हिंदुस्तानीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से इस मुद्दे पर मुलाकात की.

हिंदुस्तान पहुंचा एक जहाज, एक आज आएगा

इस बीच, हिंदुस्तानीय एलपीजी कैरियर शिवालिक सोमवार शाम गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच गया. यह लगभग 40,000 मीट्रिक टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस लेकर आया है. यह जहाज सोमवार देर रात या आज मंगलवार सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार करने के बाद बंदरगाह पर पहुंचा. बंदरगाह से जारी बयान के अनुसार, इसमें से 20,000 मीट्रिक टन एलपीजी मुंद्रा बंदरगाह पर उतारी जाएगी, जबकि 26,000 मीट्रिक टन एलपीजी मंगलुरु में उतारी जाएगी.

वहीं हिंदुस्तान का एक और शिप नंदा देवी भी रास्ते में है, उसके भी जल्द से जल्द बंदरगाह तक पहुंचने की उम्मीद है. नंदादेवी होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजर चुका है और मंगलवार को उसके गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पहुंचने की संभावना है.

हिंदुस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है. देश लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इस समय 22 हिंदुस्तानीय जहाज हैं, जिन पर 611 नाविक सवार हैं. ये सभी तेल और गैस की सप्लाई के लिए खाड़ी देशों में गए हुए थे. इसके अलावा कई अन्य देशों के भी जहाज हैं, जो हिंदुस्तान के लिए अपने माल लेकर आ रहे है, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इनमें भी तिरंगा लगा हुआ है.

हिंदुस्तान लगातार स्थिति को मॉनीटर कर रहा

वहीं, नई दिल्ली में पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए, बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि शिप के कार्गो को उतारने में कोई देरी न हो, इसके लिए आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया और प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग की व्यवस्था की गई है.

विदेश मंत्रालय का एक विशेष कंट्रोल रूम लगातार सक्रिय है, जो हिंदुस्तानीय नागरिकों और उनके परिवारों के सवालों का जवाब दे रहा है. साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय जारी है. क्षेत्र में स्थित हिंदुस्तानीय मिशन 24×7 हेल्पलाइन चला रहे हैं, हिंदुस्तानीय समुदाय संगठनों के संपर्क में हैं और समय-समय पर एडवाइजरी जारी कर रहे हैं.

हिंदुस्तानीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहते हुए फंसे हुए हिंदुस्तानीयों और अल्पकालिक यात्रियों को सहायता प्रदान कर रहे हैं, जिसमें वीजा सपोर्ट, लॉजिस्टिक सहायता और ट्रांजिट सुविधा शामिल है. इसके अलावा, क्षेत्र में हिंदुस्तानीय नाविकों की मदद के लिए बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के साथ भी समन्वय किया जा रहा है. 28 फरवरी 2026 से अब तक पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र से करीब 2,20,000 यात्री हिंदुस्तान लौट चुके हैं.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हिंदुस्तानीय जहाज कैसे आ रहे?

ईरान इस समय कुछ गिने-चुने देशों को ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने दे रहा है. उसने अमेरिका और इजरायल के लिए इसे पूरी तरह बंद किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे खुलवाने के लिए वैश्विक सहयोग मांगा है. क्या हिंदुस्तान से भी इसके लिए कहा गया है? इस सवाल के जवाब में हिंदुस्तानीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम इससे अवगत हैं, लेकिन हमसे इस बारे में कोई द्विपक्षीय चर्चा नहीं की गई है.

वहीं हिंदुस्तानीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान से आने वाले जहाजों के संबंध में आपसी रिश्तों का हवाला दिया. उन्होंने फाइनेंशिय टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि हमारी कोई डील नहीं हुई है. दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, ये उसी का परिणाम है. वहीं रणधीर जायसवाल ने भी इस बारे में अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हिंदुस्तान और ईरान के बीच लंबे समय के रिश्ते हैं और हिंदुस्तान के जहाजों का होर्मुज स्ट्रेट से आ पाना उसी का परिणाम है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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