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September 28, 2025

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Who are Indian Muslims : कौन हैं भारतीय मुसलमान? इतिहास के पन्नों में झांककर देखें

Table of Contents कौन हैं हिंदुस्तानीय मुसलमान? मध्य युग में कैसे हिंदुस्तान में बढ़ी मुसलमानों की संख्या? इस्लाम के प्रति कैसे बढ़ा लोगों का आकर्षण धर्मांतरण के बाद भी हिंदुस्तानीय मुसलमान करते थे देवी-देवताओं की पूजा Who are Indian Muslims : हिंदुस्तान की कुल आबादी 2025 में 140 करोड़ से ज्यादा हो गई है और हिंदुस्तान दुनिया का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है. इस आबादी में विभिन्न धर्म और जाति के लोग शामिल हैं, सबसे बड़ी आबादी हिंदुओं की है, जबकि दूसरे स्थान पर मुसलमान हैं. 2011 की जनगणना में इनकी आबादी 17 करोड़ से ज्यादा थी, अब जबकि 2025 में देश की आबादी 140 करोड़ हो गई है, तो निश्चित तौर पर इनकी आबादी में भी वृद्धि हुई होगी और यह संख्या 20 करोड़ से ज्यादा तो हो ही गई होगी. हिंदुस्तान में जितने भी धर्म हैं, उनमें जिनकी संख्या सबसे अधिक है वे हिंदू, मुसलमान, सिख और ईसाई हैं. हिंदू और सिख ये दो धर्म ऐसे हैं, जिनके लिए हिंदुस्तान की धरती शुरुआत से ही परिचित थी. मुसलमान हिंदुस्तान में अब से करीब 1313 साल पहले आए. जो मुसलमान हिंदुस्तान आए थे, वे आक्रांता थे और उन्होंने यहां लूटमार की, हत्या की और अत्याचार किया. उनके अत्याचार का एक़ असर यह हुआ कि हिंदुस्तान में इस्लाम का प्रवेश हुआ और हिंदुस्तान के कुछ लोग मुसलमान बन गए. कौन हैं हिंदुस्तानीय मुसलमान? हिंदुस्तान में इस्लाम का प्रवेश कैसे हुआ और किस तरह इसने यहां विस्तार किया, इसे लेकर बहुत सटीक और विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है. शुरुआत निश्चिततौर पर व्यापारियों से हुई जो अरब से यहां व्यापार करने आते थे. लेकिन 712 ईस्वी में जब मुहम्मद बिन कासिम ने यहां हमला किया, तो उसके अत्याचार ने हिंदुस्तान को मुसलमानों से परिचित कराया. उसने ना सिर्फ यहां अपना आतंक फैलाया और यहां की संपत्ति को लूटा बल्कि उसने हारे हुए लोगों की संस्कृति पर भी हमला किया. हिंदुस्तानीय इतिहास के विद्वान सर एचएम इलियट और जॉन डाउसन ने अपनी किताब, जो मूलत: मुस्लिम इतिहासकारों और लेखकों की कहानियों का अनुवाद है -The History of India as Told by Its Own Historians में लिखा है कि हिंदू औरतों को दास बाजारों में बेचा गया या फिर उन्हें हरम में रखा गया. जिन स्त्रीओं ने इस्लाम कबूल कर लिया उन्हें जीवनदान मिला और कुछ सम्मान भी. इस किताब में बताया गया है कि मुस्लिम शासकों ने इन युद्ध को धार्मिक विजय के तौर पर पेश किया है. कहने का आशय यह है कि हिंदुस्तान में इस्लाम का प्रवेश शुरुआती दौर में डर की वजह से ही हुआ. जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहे एम मुजीब ने अपनी किताब THE INDIAN MUSLIMS में लिखा है कि हिंदुस्तान में रहने वाले जितने भी मुसलमान हैं, वे अधिकतर यहीं के लोग हैं, जो विभिन्न कारणों से धर्म बदलकर मुसलमान हो गए. विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें मध्य युग में कैसे हिंदुस्तान में बढ़ी मुसलमानों की संख्या? हिंदुस्तानीय मुसलमान, एआई इमेज मध्य युग में जब हिंदुस्तान में मुसलमान आए, तो उन्होंने जबरन या भय दिखाकर लोगों को मुसलमान बनाया. धीरे-धीरे यहां मुस्लिम प्रभाव बढ़ने लगा और 1206 में दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई. उसके बाद लगभग 500 वर्षों तक देश पर मुसलमानों का राज और प्रभाव कायम रहा. लेकिन दिल्ली सल्तनत की स्थापना से पहले का जो समय था, उस दौर में देश में मुसलमान आक्रमणकारी आ तो रहे थे, लेकिन वे यहां जमकर नहीं बैठे थे. मुहम्मद बिन कासिम जो एक अरब सेनापति था, उसने सिंध और मुल्तान पर कब्जा किया था. उसके आगे वह नहीं बढ़ पाया था. इस लिहाज से यह सही प्रतीत होता है कि हिंदुस्तान में मुसलमानों की आबादी तब बढ़ी जब दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई और मुसलमानों का शासन देश में विस्तृत होता गया. इस्लाम के प्रति कैसे बढ़ा लोगों का आकर्षण प्रोफेसर एम मुजीब (THE INDIAN MUSLIMS) और इतिहासकार किशोरी शरण लाल (Growth Of Muslim Population In Medieval India) दोनों ही अपनी-अपनी किताब में इस बात का जिक्र करते हैं कि हिंदुस्तान में मुसलमान सिर्फ वही लोग नहीं हुए जिनपर अत्याचार हुआ था. अत्याचार की वजह से देश में धर्मांतरण तो हुआ, लेकिन उनकी संख्या बहुत सीमित थी. बाद में जब दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई, तो कई अन्य वजहों से भी हिंदुस्तान के लोगों ने इस्लाम कबूल किया और इसमें कोई जबरदस्ती नहीं थी. ये प्रमुख कारण हैं- जाति व्यवस्था से मुक्ति सेना या प्रशासन में नौकरी का लालच सूफी संतों का प्रभाव समाज में सम्मान और अवसर पाने की चाह धर्मांतरण के बाद भी हिंदुस्तानीय मुसलमान करते थे देवी-देवताओं की पूजा प्रोफेसर एम मुजीब अपनी किताब में लिखते हैं कि अगर जनगणना की मानें, तो, जो भी खुद को मुसलमान मानता है और हिंदुस्तानीय है, वह मुसलमान है. लेकिन हिंदुस्तानीय मुसलमान को इस तरह परिभाषित करना उनका सरलीकरण करना है. असल में हिंदुस्तानीय मुसलमान की पहचान बहुत जटिल है. इसकी वजह यह है कि उनके रीति-रिवाज, मान्यताएं और जीवन-शैली अलग-अलग क्षेत्रों की वजह से अलग-अलग है. हिंदुस्तानीय मुसलमानों पर अगर गौर करें, तो उन्हें दो हिस्सों में बांटा जा सकता है एक शहरी मुसलमान और दूसरा ग्रामीण मुसलमान. शिक्षित मुसलमान अक्सर खुद को शहरी सभ्यता से जोड़ते हैं और वे इस्लामिक कायदों में ज्यादा बंधे हैं, जबकि ग्रामीण मुसलमानों की परंपराएं हिंदू समाज से बहुत मिलती-जुलती थीं. जैसे देवी-देवताओं की पूजा, टोने-टोटकों और संतों में विश्वास. पंजाब, राजस्थान, गुजरात, सिंध, बिहार, बंगाल आदि में मुसलमानों की स्थानीय प्रथाएं अलग-अलग थीं. कई समुदाय (जैसे मीना, कोली, भील) मुस्लिम तो हो गए लेकिन उनके रीति-रिवाज हिंदू समाज से मिले-जुले रहे. सिंध में नदियों, पेड़ों और संतों की पूजा होती रही. बिहार-बंगाल में काली, भगवती, नाग-देवी जैसे देवी-देवताओं की आराधना मुसलमान भी करते थे. इस लिहाज से हिंदुस्तानीय मुसलमान एकसमान नहीं हैं—वे विविध परंपराओं और मान्यताओं का संगम हैं, लेकिन इस्लाम में साझा विश्वास ने उन्हें एक पहचान दी. वे कभी पूरी तरह से एक नेतृत्वक राष्ट्र नहीं रहे, बल्कि एक धार्मिक-सामाजिक समुदाय रहे. उन्होंने इस्लाम को स्वीकारा लेकिन रीति-रिवाजों में हिंदुस्तानीय हिंदू से जुड़े रहे. ये भी पढ़ें : Mughal Harem Stories : राजकुमारियों की शादी कराने से डरते थे मुगल, अधिकतर राजकुमारियां आजीवन रहीं कुंवारी Mughal Harem Stories : बंगाली स्त्रीओं

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Navratri 2025: पीरियड्स के समय क्या महिलाओं को करनी चाहिए माता की पूजा? जानें प्रेमानंद महाराज की राय

Navratri 2025:  22 सितंबर से शुरू हुआ नवरात्रि का महापर्व 2 अक्टूबर को समाप्त होगा. नवरात्रि के ये नौ पावन दिन माता दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित हैं. नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना से होती है, वहीं इसका समापन दशहरा के साथ होता है. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से इन नौ दिनों तक माता आदिशक्ति की पूजा, हवन और कन्या पूजन विधि-विधान के साथ करता है, उस पर माता दुर्गा की कृपा होती है. पूजा के दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं और मां की उपासना करते हैं. लेकिन नवरात्रि के दौरान यदि स्त्रीओं को पीरियड यानी मासिक धर्म आ जाए, तो इस समय क्या करना चाहिए, इसे लेकर कई स्त्रीओं के मन में सवाल उठते हैं. क्या पीरियड्स में माता की पूजा करनी चाहिए या बीच में छोड़ देना चाहिए, और यदि पूजा बीच में छोड़ी गई तो क्या पूजा पूरी मानी जाएगी? आइए, इस प्रश्न का उत्तर इस आर्टिकल के माध्यम से जानने की कोशिश करते हैं. पीरियड्स में पूजा करनी चाहिए या नहीं? – प्रेमानंद महाराज की राय प्रेमानंद महाराज का कहना है कि शास्त्रों में बताया गया है कि मासिक धर्म के दौरान स्त्रीओं को पूजा-पाठ और किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने से बचना चाहिए. उनका कहना है कि पीरियड्स के समय स्त्रीओं को पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए और न ही इस समय खाना बनाना, घर के भारी काम या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना चाहिए. इस दौरान स्त्रीओं को केवल आराम करना चाहिए. शास्त्रों में क्या कहा गया है? गरुड़ पुराण और याज्ञवल्क्य स्मृति में बताया गया है कि मासिक धर्म के समय स्त्रीओं को आराम करना चाहिए और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने से बचना चाहिए. माना जाता है कि इस दौरान मंदिर या हवन कार्य में हिस्सा नहीं लेना चाहिए. यह भी पढ़ें: Dussehra 2025: विजयदशमी के दिन ये 3 राशि वाले लोग करें ये खास उपाय, खुल जाएगा किस्मत का पिटारा Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. नया विचार किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. The post Navratri 2025: पीरियड्स के समय क्या स्त्रीओं को करनी चाहिए माता की पूजा? जानें प्रेमानंद महाराज की राय appeared first on Naya Vichar.

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Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा की रात क्यों आती हैं माता लक्ष्मी, जानिए इस रात का महत्व और खासियत  

Sharad Purnima 2025: आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा कहा जाता है. इस दिन को स्वास्थ्य और निरोगी जीवन देने वाला दिन माना जाता है. इस रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे पास होता है और उसकी 16 कलाएं पूर्ण रूप से दिखाई देती हैं. इस कारण उसकी रोशनी सबसे ज्यादा तेज और ऊर्जावान होती है. हर साल रखा जाने वाला यह व्रत माता लक्ष्मी को प्रसन्न करता है और घर में सुख-समृद्धि लाता है. इसलिए खास है शरद पूर्णिमा नारद पुराण में बताया गया है कि शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी पर आती हैं. उनके हाथों में आशीर्वाद और वरदान होता है. इस रात वे देखती हैं कि कौन जाग रहा है और कौन अपने कामों व जिम्मेदारियों के प्रति सचेत है. जो लोग इस रात जागकर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उन पर उनकी विशेष कृपा बरसती है. माना जाता है कि अच्छे और धर्मपूर्ण जीवन जीने वालों को माता लक्ष्मी धन, यश, वैभव और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इसी रात चंद्रमा भी अपनी बहन से मिलने धरती के और करीब आता है और अपनी ठंडी, अमृतमयी किरणों से पूरी पृथ्वी को भर देता है. इसी दिन श्रीकृष्ण ने किया था महारास शरद पूर्णिमा की उज्ज्वल चांदनी रात को भगवान श्रीकृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ अद्भुत महारास रचाया था. कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने प्रत्येक गोपी के साथ नृत्य करने के लिए स्वयं के अनेक रूप बना लिए थे. यह रासलीला प्रेम, भक्ति और आनंद का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है. शरद पूर्णिमा की पूजा भी इसी कारण जीवन में प्रेम और उमंग भर देती है. लक्ष्मी जी का जन्म मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय चंद्रमा और माता लक्ष्मी प्रकट हुईं थीं. माता लक्ष्मी का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था, इसलिए इस दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है. कई जगहों पर कुंवारी कन्याएं सूर्य और चंद्रदेव की पूजा करती हैं, जिससे उन्हें मनचाहा वर मिलता है. साथ ही, घर-परिवार में सुख, सौभाग्य और समृद्धि आती है. क्यों रखा जाता है खुले आसमान के नीचे खीर शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे खीर रखने का खास विधान है. माना जाता है कि चंद्रमा की किरणें खीर को अमृत तुल्य बना देती हैं. जब 3-4 घंटे तक खीर पर चांदनी पड़ती है, तो उसका सेवन प्रसाद की तरह किया जाता है. इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है और सालभर निरोगी जीवन मिलता है. इस रात चांद को निहारना या सुई में धागा पिरोना आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी लाभकारी माना गया है. Also Read: Dussehra 2025: इस दशहरा अपनी राशी के अनुसार करें ये विशेष दान, करियर में मिलेगी खूब तरक्की Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. नया विचार किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. The post Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा की रात क्यों आती हैं माता लक्ष्मी, जानिए इस रात का महत्व और खासियत   appeared first on Naya Vichar.

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Navratri Special Baby Names: नवरात्रि में जन्में बच्चे के लिए सबसे शुभ और खास नाम, देखें टॉप लिस्ट

Navratri Special Baby Names: नवरात्रि का समय बहुत ही शुभ और खास माना जाता है. कहते हैं कि इस दौरान जन्म लेने वाले बच्चों पर मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है. ऐसे में हर मम्मी-पापा यही चाहते हैं कि अपने नन्हे से लाडले या लाडली को ऐसा नाम दें जो प्यारा भी हो और शुभ भी. नवरात्रि में रखा गया नाम शिशु के पूरे जीवन में खुशियां और सकारात्मकता लेकर आता है. अगर आप भी सोच रहे हैं कि अपने बेबी के लिए क्या नाम सही रहेगा, तो यहां हम लेकर आए हैं नवरात्रि स्पेशल बेबी नेम्स की टॉप लिस्ट, जिनसे आप अपने शिशु के लिए एक शुभ और खास नाम चुन सकते हैं. नवरात्रि स्पेशल बेबी गर्ल नेम्स दुर्गा (Durga) – शक्ति और विजय की देवी पार्वती (Parvati) – भगवान शिव की अर्धांगिनी, सौम्यता की देवी सरस्वती (Saraswati) – विद्या और ज्ञान की देवी लक्ष्मी (Lakshmi) – धन, सुख और समृद्धि की देवी भवानी (Bhavani) – जीवनदायिनी और मां शक्ति का रूप अंबा (Amba) – मां अंबे का नाम, करुणा और शक्ति का संगम गौरी (Gauri) – उज्ज्वल, पवित्र और सुंदर रूप वंदना (Vandana) – पूजा और श्रद्धा का प्रतीक सिद्धि (Siddhi) – सफलता और समृद्धि देने वाली त्रिपुरा (Tripura) – तीनों लोकों की अधिष्ठात्री देवी नवरात्रि स्पेशल बेबी बॉय नेम्स शिवांश (Shivansh) – भगवान शिव का अंश शंकर (Shankar) – भगवान शिव का नाम, कल्याणकारी हर्षित (Harshit) – खुशियों और प्रसन्नता से भरा वीर (Veer) – साहसी और पराक्रमी आदित्य (Aditya) – सूर्य देव का नाम, उजाला और ऊर्जा का प्रतीक अर्चित (Archit) – पूजनीय और श्रद्धा योग्य कार्तिक (Kartik) – भगवान शिव और पार्वती के पुत्र ईशान (Ishan) – भगवान शिव का एक और नाम, उत्तर-पूर्व का देवता नित्यानंद (Nityanand) – सदा आनंद और खुशी देने वाला ओमकार (Omkar) – पवित्र ‘ॐ’ का स्वरूप ये भी पढ़ें: Navratri Baby Boy Names: नवरात्रि में जन्मे बेटे के लिए माता दुर्गा के आशीर्वाद से चुनें ये खास और शुभ नाम ये भी पढ़ें: Navratri Special Baby Girl Names: मां दुर्गा से प्रेरित 50 बेहतरीन हिन्दू लड़कियों के नाम, रखें अपनी बेटी का नाम शुभ खास ये भी पढ़ें: Navratri Baby Names: नवरात्रि में जन्मे बच्चों के लिए चुनें माता रानी से जुड़े नाम, जो देंगे जीवन भर आशीर्वाद ये भी पढ़ें: Hindu Mythological Names: भगवानों के आशीर्वाद से चुनें ये 50+ सबसे खास और शुभ नाम अपने बेटे के लिए Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post Navratri Special Baby Names: नवरात्रि में जन्में शिशु के लिए सबसे शुभ और खास नाम, देखें टॉप लिस्ट appeared first on Naya Vichar.

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Nishaanchi Box Office Collection: बुरी तरह फ्लॉप हुई ‘निशानची’, कलेक्शन सुनकर लगेगा झटका

Nishaanchi Box Office Collection: 19 सितंबर को अनुराग कश्यप की फिल्म ‘निशानची’ रिलीज हुई, जिसने बॉक्स ऑफिस पर बेहद खराब शुरुआत की. फिल्म को लेकर अनुराग कश्यप ने काफी प्रमोशन किया था, लेकिन रिलीज के बाद मूवी की हवा टाइट हो गई. फिल्म टिकट खिड़की पर परफॉर्म नहीं कर पाई और कुछ ही दिनों में इसका बैंड बज गया. अक्षय कुमार और अरशद वारसी की जॉली एलएलबी 3 के सामने निशानची नहीं चल पाई. चलिए आपको 9वें दिन का कलेक्शन बताते हैं. निशानची का 9वें दिन हाल बेहाल sacnilk की एक रिपोर्ट के अनुसार, ‘निशानची’ ने हिंदुस्तान में 9वें दिन सिर्फ 0.01 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. फिल्म की टोटल कमाई 1.27 करोड़ रुपये हो गई है और इसने वर्ल्डवाइड 1.35 करोड़ रुपये का बिजनेस किया है. फिल्म से ऐश्वर्य ठाकरे ने बॉलीवुड की दुनिया में कदम रखा है और मूवी में उनका डबल रोल है. इसके अलावा मूवी में मोनिका पंवार और वेदिका पिंटो ने भी अहम किरदार निभाया हैं. वहीं, जॉली एलएलबी 3 की कमाई की बात करें तो इसने 9 दिनों में 85 करोड़ कमा लिए. जल्द ही ये 100 करोड़ का आंकड़ा छू लेगी. निशानची ने हिंदुस्तान में किस दिन कितनी कमाई की? Nishaanchi Box Office Collection Day 1- 0.25 करोड़ रुपये Nishaanchi Box Office Collection Day 2- 0.4 करोड़ रुपये Nishaanchi Box Office Collection Day 3- 0.28 करोड़ रुपये Nishaanchi Box Office Collection Day 4- 0.12 करोड़ रुपये Nishaanchi Box Office Collection Day 5- 0.06 करोड़ रुपये Nishaanchi Box Office Collection Day 6- 0.07 करोड़ रुपये Nishaanchi Box Office Collection Day 7- 0.07 करोड़ रुपये Nishaanchi Box Office Collection Day 8- 0.01 करोड़ रुपये Nishaanchi Box Office Collection Day 9- 0.01 करोड़ रुपये Nishaanchi Total Collection- 1.27 करोड़ रुपये यह भी पढ़ें– Jolly LLB 3 Box Office Records: ‘जॉली LLB 3’ ने बनाया एक और रिकॉर्ड, ‘मद्रासी’ को छोड़ा पीछे, अगला टारगेट सनी देओल की ‘जाट’ The post Nishaanchi Box Office Collection: बुरी तरह फ्लॉप हुई ‘निशानची’, कलेक्शन सुनकर लगेगा झटका appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में पत्नी को मारी गोली फिर खुदकुशी की कोशिश, मां के पेट को चीरती बेटी के सीने में फंसी बुलेट

Bihar Crime: भागलपुर में एक नाराज पति ने अपनी पत्नी को गोली मार दी. वह गोली स्त्री को चीरते हुए पास ही सो रही बेटी के सीने में जा फंसी. जिसके बाद दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है. सिर्फ इतना ही नहीं, हमले के बाद उसने खुद की भी जान लेने की कोशिश की. उसने अपने पेट में चाकू मार लिया, जिसमें वह घायल हो गया. तीनों घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. अवैध संबंध का मामला यह घटना शनिवार देर रात गोराडीह थाना इलाके के बदलूचक गांव की है. गोली मारने का कारण स्पष्ट नहीं है. समाचार है कि पति को शक था कि पत्नी का किसी से अफेयर है और इसी संदेह में इस घटना को अंजाम दिया गया है. पुलिस कस्टडी में आरोपी का इलाज जानकारी के अनुसार घायलों की पहचान बदलूचक निवासी मोहम्मद मजहर, उसकी पत्नी अफरोज (38) और बेटी शकीला (15) के रूप में हुई है. घायल स्त्री की गंभीर हालत को देखते प्राइवेट नर्सिंग होम में एडमिट कराया गया है. वहीं, बेटी का जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (मायागंज) में इलाज जारी है. गोली उसके सीने में फंसी हुई है. घायल आरोपी मोहम्मद अजहर का भी पुलिस कस्टडी में इलाज चल रहा है. अस्पताल में भर्ती बेटी का कहना है कि मैं सो रही थी, तभी अचानक अब्बा ने गोली चलाई. फायरिंग की आवाज सुनकर घर के अन्य सदस्य और आसपास के लोग भी पहुंचे. गुस्से में मारी गोली अस्पताल में भर्ती आरोपी ने कहा कि मैं गुस्से में था, इसलिए गोली चला दी. फिर उसने कहा कि गोली चलाने के बाद भीड़ जुट गई, इसलिए जमीन पर गिरा चाकू मैंने अपने पेट में घोंप लिया. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें पति ने पत्नी-बेटी को गोली मारी: डीएसपी मामले की सूचना मिलते ही गोराडीह थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और छानबीन शुरू कर दी. आरोपी को पुलिस हिरासत में लेकर इलाज कराया जा रहा है. मामले की जांच की जा रही है. इसे भी पढ़ें: बिहार के इस जिले में बदलेगी सड़कों की तस्वीर, सुगम यातायात को एनएच से बढ़ेगी कनेक्टिविटी The post बिहार में पत्नी को मारी गोली फिर खुदकुशी की कोशिश, मां के पेट को चीरती बेटी के सीने में फंसी बुलेट appeared first on Naya Vichar.

समस्तीपुर

मतदाता जागरूकता को लेकर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजित

नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर: बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 के दृष्टिगत मतदाता जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी जुही कुमारी के नेतृत्व में स्वीप कार्यक्रम के तहत पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में बच्चों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी कलात्मक प्रतिभा के माध्यम से मतदान के महत्व और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों का संदेश प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों को मतदान के अधिकार, कर्तव्य और चुनाव प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। प्रतियोगिता का उद्देश्य न केवल कलात्मक कौशल को प्रोत्साहित करना था, बल्कि युवाओं और बच्चों में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना भी था। जुही कुमारी ने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को सक्रिय मतदाता बनने और मतदान प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि कलात्मक माध्यम से संदेश देना एक प्रभावी तरीका है, जिससे मतदाता जागरूकता को सरल और रोचक ढंग से फैलाया जा सकता है।प्रतियोगिता ने युवाओं में लोकतंत्र और मतदान के महत्व के प्रति उत्साह और रुचि बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

समस्तीपुर

ईवीएम से लेकर विधि व्यवस्था तक सभी सेक्टर पदाधिकारियों को डीएम ने सिखाए चुनावी गुर

डीएम ने कहा– प्रपत्र भरकर अभ्यास कराएं, तभी दिखेगी असली तैयारी नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर : बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 की तैयारियों को लेकर रविवार को रेलवे सामुदायिक भवन में 400 सेक्टर पदाधिकारियों को जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी रोशन कुशवाहा की अध्यक्षता में द्वितीय चरण का प्रशिक्षण दिया गया। डीएम ने प्रशिक्षण के दौरान सभी विधानसभा क्षेत्र में प्रतिनियुक्ति सेक्टर पदाधिकारीयों को रैंडम तरीके से सवाल-जवाब कर उनकी तैयारियों की जांच की। उन्होंने मतदान प्रक्रिया से जुड़ी बारीकियों, संवेदनशील बूथों की निगरानी और समय पर सूचना आदान-प्रदान की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही ईवीएम व वीवीपैट की कमिशनिंग की प्रक्रिया को विस्तारपूर्वक समझाया और किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं बरतने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने मशीनों के संचालन की बारीकियों से सभी को अवगत कराया। इसके साथ ही प्री-पोल, ड्यूरिंग पोल और पोस्ट-पोल की विस्तृत कार्यप्रणाली समझाते हुए मतदान केंद्रों तक समय पर पहुंच, माॅक पोल की प्रक्रिया, मतदान कार्य की निगरानी और मतपेटियों की सुरक्षित वापसी जैसे अहम पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि निर्वाचन कार्य अत्यंत संवेदनशील दायित्व है, जिसे पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ निभाना है। उन्होंने सेक्टर पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने सेक्टर के मतदान केंद्रों का बार-बार निरीक्षण करें, संभावित चुनौतियों की सूची बनाएं और उसका समाधान समय रहते सुनिश्चित करें। डीएम ने कहा कि निर्वाचन कार्य जनविश्वास से जुड़ा संवेदनशील दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी निर्वाची पदाधिकारी अपने स्तर से सेक्टर पदाधिकारियों के प्रशिक्षण की समझ की जांच करें और उन्हें प्रपत्र भरकर अभ्यास भी कराएं, ताकि पोल डे पर किसी भी तरह की कठिनाई न हो। साथ ही उन्होंने निर्वाची पदाधिकारियों को यह भी हिदायत दी कि मतदान केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता, दिव्यांग और वरिष्ठ मतदाताओं की सुविधा, समयपालन और संवेदनशील बूथों पर सुरक्षा व्यवस्था की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर डीडीसी शैलजा पांडेय, नोडल पदाधिकारी प्रशिक्षण कोषांग सह जिला बंदोबस्त पदाधिकारी विजय कुमार, उप निर्वाचन पदाधिकारी विनोद कुमार, ओएसडी अली एकराम, सदर एसडीएम दिलीप कुमार, एसडीओ दलसिंहसराय, एसडीओ रोसड़ा, एसडीओ पटोरी सहित सभी सहायक निर्वाचक पदाधिकारी व अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे। मौके पर सभी अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर से सेक्टर पदाधिकारियों को चुनावी ड्यूटी में बरती जाने वाली सावधानियों और जिम्मेदारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सेक्टर पदाधिकारी न केवल मतदान केंद्रों के नोडल अधिकारी होंगे, बल्कि मतदाताओं का विश्वास कायम करने और चुनाव को निष्पक्ष व शांतिपूर्ण बनाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

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Indian Breakfast Recipes Ideas: सुबह का नाश्ता बनाना हुआ और भी आसान, जानिए यहां हफ्ते भर की झटपट बनने वाली रेसिपीज 

Indian Breakfast Recipes Ideas: शिशुं हो या बुजुर्ग हर किसी को सुबह का नाश्ता बिल्कुल परफेक्ट चाहिए होता है. कई बार तो शिशुं की फर्माईश के बाद घर वालों को चिंता भी होने लगती हैं की आखिर हफ्ते के सातों दिन अलग- अलग नाश्ता कैसे तैयार क्या जाए. कई बार तो जल्दीबाजी में लोग सुबह के नाश्ते में बच्चों को ब्रेड और जैम दे देते हैं. ये एक दो दिन के लिए तो ठीक है लेकिन यह नाश्ता अगर रोज-रोज बच्चों को दी जाए तो यह उनकी सेहत पर बुरा असर डाल सकता है. ऐसे में जरूरत है कि आपको सुबह के नाश्ते में कुछ हेल्दी और झटपट बनने वाले नाश्तों के बारे में पता होना चाहिए. इस आर्टिकल में आपको सोमवार से लेकर रविवार तक झटपट बनने वाले नाश्ते के बारे में बताएंगे जो की जल्दी भी बन जाएंगी और हेल्दी भी रहेंगी.  सोमवार को पोहा सोमवार का दिन सभी के लिए हफ्ते की शुरुआत होती है. इस दिन से लोग पूरे हफ्ते को प्लान करते हैं. ऐसे में जरूरी है कि सुबह की शुरुआत भी अच्छे से हों. पोहा एक ऐसा नाश्ता है जो की झटपट बनकर तैयार हो जाता है वो ये बच्चों से लेकर बुजुर्ग सभी इसे खा सकते हैं. इसे बनाने में आप अपने अनुसार मन पसंद की सब्जियों को शामिल कर सकते हैं. जो की सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है. Poha मंगलवार को मूंग दाल का चीला  इस नाश्ते के लिए आपको थोड़ी तैयारी रात में ही कर लेनी होगी. मूंग दाल को रात भर भिगो कर रखने से ये सुबह याची तरह से फूल जाएंगे. इस चीले को सुबह बनाने में 10-15 मिनट लग सकते हैं. इसे दही के साथ आप नाश्ते में सभी को परोस सकते हैं. यह जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही हेल्दी भी.  Mung dal chila बुधवार को मसाला ओट्स  ओट्स का नाम सुनते ही सभी के मन में ऐसा खयाल आता है जैसे कितना बोरिंग खाने के बारे में बात की जा रही है, लेकिन क्या आपको पता है ओट्स बोरिंग नहीं बल्कि स्वाद और सेहत से भरपूर एक डिश है. इसे बनाने में आपको मुश्किल से 5 मिनट का समय लग सकता है इससे जायद नहीं और इसमें जो मसले शामिल होते है वो आप अपनी मर्जी के शामिल कर सकते हैं. बच्चों की इसे स्कूल जाते समय देना बेहद ही बेहतर उपाय है. ये ज्यादा भारी भी नहीं होता है और साथ ही ये सुपाच्य होता है.  Masala oats गुरुवार को उपमा  गुरुवार को  उपमा म चयन करना एक बेहतर विकल्प है. इसे बनाने में आपको 15 मिनट से भी कम का समय लग सकता है. यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों सभी एक लिए बहुत ही अच्छा होता है. इसमें आप सब्जियों को शामिल करके और भी मजेदार बना सकते हैं. इसके साथ ही आप इसे बच्चों को टिफिन में भी दे सकते हैं.  Upma शुक्रवार को इडली  इडली का नाम सुनते ही सभी के मुहं में पानी आ जाता है. इडली के लिए आपको रात में ही तैयारी करनी होगी तभी यह सुबह में सॉफ्ट और टेस्टी बनकर सामने आएगी. इसके साथ आप सांभर या फिर नारियल की चटनी परोस सकते हैं. ये स्वाद के सहट के मामले में भी काफी बेहतर विकल्प है.  Idli शनिवार को ढोकला  अगर हम रेगुलर नाश्ते से हटके थोड़ा बात करें तो ढोकला हर किसी को पसंद आता है क्योंकि इसके चटपटे स्वाद से सबका मन इसे खाने के लिए और भी ज्यादा हो जाता है. इसे बनाने में आपको 15-20 मिनट का समय लग सकता है. ये नाश्ते के लिए एक बेहतर विकल्प है और दफ्तर और स्कूल जाने वाले लोगों के लिए काफी बेहतर उपाय है.  Dhokla रविवार को डोसा  डोसा सभी का पसंदीदा होता है. इसे बनाने में थोड़ा समय ज्यादा लगता है. इसलिए इसे छुट्टी वाले दिन बनाने में ही फायदा होता है. डोसा क्रिस्पी होता है और यह खाने में भी काफी स्वादिष्ट होता है. बच्चों के साथ-साथ बुजुर्गों के सेहत और पेट के लिए भी ये एक बेहतर विकल्प है. Dosa यह भी पढ़ें: Lunch Recipe Ideas: लंच टाइम को बनाएं स्पेशल, ट्राई करें ये आसान और टेस्टी रेसिपी आइडियाज यह भी पढ़ें: Breakfast Recipe Indian: सुबह-सुबह मिनटों में तैयार करें टेस्टी और हेल्दी नाश्ता, जानिए परफेक्ट इंडियन ब्रेकफास्ट रेसिपी यह भी पढ़ें:Navratri Recipe Ideas Without Onion Garlic: बिना प्याज लहसुन के ट्राई करें स्वाद से भरपूर ये डिशेज The post Indian Breakfast Recipes Ideas: सुबह का नाश्ता बनाना हुआ और भी आसान, जानिए यहां हफ्ते भर की झटपट बनने वाली रेसिपीज  appeared first on Naya Vichar.

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चीन ने बनाया दुनिया का सबसे ऊंचा पुल, 625 मीटर की खाई पर इंजीनियरिंग का चमत्कार, 2 घंटे का सफर सिर्फ 2 मिनट में

China Builds World Tallest Huajian Grand Canyon Bridge: दुनिया को हैरत में डाल देने वाले पुलों का घर है चीन. हर कुछ साल में यहां कोई ऐसा प्रोजेक्ट सामने आता है, जिसे देखकर बाकी दुनिया दंग रह जाती है. इस बार गुइझोऊ प्रांत से समाचार आई है, जहां हुआजियांग ग्रैंड कैनियन ब्रिज तैयार हो गया है. रविवार (28 सितंबर) को इसे आम यातायात के लिए खोल दिया गया. तीन साल की मेहनत के बाद बना यह पुल समुद्र तल से नहीं, बल्कि सीधे नदी से 625 मीटर यानी 2051 फीट की ऊंचाई पर खड़ा है. और इसी के साथ यह दुनिया का सबसे ऊंचा पुल बन गया है. उद्घाटन का नजारा रविवार को राज्य मीडिया ने ड्रोन से लाइव फुटेज दिखाए. पुल के नीले खंभे बादलों में लिपटे थे और उनके ऊपर से गाड़ियां गुजर रही थीं. नजारा ऐसा कि जैसे किसी फिल्म का सीन हो. उद्घाटन समारोह में इंजीनियर, स्थानीय अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. सीएनए न्यूज के मुताबिक, कई लोगों ने मौके पर दिए लाइव इंटरव्यू में गर्व और खुशी जताई. Rising 625 meters above the river and set to be the world’s tallest, the Huajiang Grand Canyon Bridge in Guizhou, SW China, unveiled a spectacular water curtain test, where sunlight and spray merged to paint a rainbow over the canyon. 🌈 A breathtaking view! @UpGuizhou pic.twitter.com/xs8aIuLxxS — Mao Ning 毛宁 (@SpoxCHN_MaoNing) September 27, 2025 समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट कहती है कि इस पुल ने गुइझोऊ के ही बेइपानजियांग ब्रिज का रिकॉर्ड तोड़ दिया. वह पुल 565 मीटर ऊंचा है और अब दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा पुल बन गया है. China Builds World Tallest Huajian Grand Canyon Bridge: वॉटर कर्टेन टेस्ट  ब्रिज पर एक खास टेस्ट भी किया गया,‘वॉटर कर्टेन टेस्ट’. पानी की धारें और सूरज की रोशनी मिलकर घाटी पर इंद्रधनुष जैसी चमक पैदा कर रही थीं. इस नजारे ने पूरे उद्घाटन को और भी शानदार बना दिया. शिन्हुआ न्यूज एजेंसी बताती है कि गुइझोऊ वैसे भी पुलों के लिए मशहूर है. यहां हजारों ब्रिज हैं और अब दुनिया के दो सबसे ऊंचे पुल भी इसी प्रांत में हैं. इतना ही नहीं, दुनिया के 100 सबसे ऊंचे पुलों में से लगभग आधे गुइझोऊ में ही खड़े हैं. पढ़ें: दुनिया को निगल रहा यह जहर! हर साल 70 लाख मौतें, जानें ये कौन सी रैंकिंग जिसमें हिंदुस्तान है नंबर 2 पर तकनीक और आकार शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, हुआजियांग ब्रिज का मुख्य स्पैन 1,420 मीटर है. यह पहाड़ी इलाके में अब तक का सबसे बड़ा स्पैन है. इसे बनाने में तीन साल से ज्यादा का समय लगा. ऊंचाई के मामले में इसने सबको पीछे छोड़ दिया है, लेकिन ‘संरचना की ऊंचाई’ का रिकॉर्ड अभी भी फ्रांस के मिलौ वायडक्ट के पास है, जिसकी ऊंचाई 343 मीटर है. फर्क इतना है कि फ्रांस वाले पुल की बात खंभों की ऊंचाई से है, जबकि चीन वाले पुल की बात नदी से पुल की दूरी की है. सफर घटकर दो मिनट गुइझोऊ प्रांतीय ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की प्रमुख झांग यिन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हुआजियांग ग्रैंड कैनियन ब्रिज के खुलने से दोनों ओर का सफर दो घंटे से घटकर सिर्फ दो मिनट हो गया है. उनके मुताबिक, इस पुल से “क्षेत्रीय परिवहन की हालत सुधरेगी और आर्थिक-सामाजिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी.” पिछले कुछ दशकों से चीन बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करता आया है. यही वजह है कि देश में तेज शहरीकरण और आर्थिक विकास हुआ. खासकर पहाड़ी इलाकों में पुलों ने लोगों की जिंदगी बदल दी है. हुआजियांग ग्रैंड कैनियन ब्रिज इस कहानी का नया अध्याय है. ये भी पढ़ें: चीन का AI सबमरीन हंटर, समुद्र में छुपने वाली दुनिया की ताकतें अब सुरक्षित नहीं, 95% सबमरीन तक पकड़ने का दावा! गुइझोऊ प्रांत का हुआजंग ग्रैंड कैनियन ब्रिज के बाद हाईएस्टब्रिजस डॉट कॉम के अनुसार, चीन का डुगे (बेइपानजियांग) ब्रिज, जो 565 मीटर की ऊंचाई पर है, लंबे समय तक इस सूची में पहले स्थान पर रहा. तियानमेन ब्रिज (560 मीटर) और सिदुहे ब्रिज (496 मीटर) भी चीन की इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाते हैं. हिंदुस्तान का चेनाब ब्रिज इन शानदार चीनी पुलों के बीच, हिंदुस्तान ने भी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है. जम्मू-कश्मीर में 359 मीटर की ऊंचाई पर बना चेनाब रेलवे ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्क ब्रिज है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून, 2025 को इसका उद्घाटन किया. इंडिया टुडे और इंडिया टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह पुल न केवल इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है, बल्कि यह कश्मीर घाटी और देश के बाकी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा. The post चीन ने बनाया दुनिया का सबसे ऊंचा पुल, 625 मीटर की खाई पर इंजीनियरिंग का चमत्कार, 2 घंटे का सफर सिर्फ 2 मिनट में appeared first on Naya Vichar.

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