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December 8, 2025

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Grah Gochar: सूर्य का धनु राशि में गोचर, इन 5 राशि वालों को बना सकता है अमीर

Grah Gochar: सूर्य 16 दिसंबर को धनु राशि में गोचर करने वाले हैं. ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर जी के अनुसार, धनु राशि में सूर्य देव के रथ की गति मानव जीवन को कई तरह से प्रभावित करेगी. साल का यह आखिरी गोचर पांच राशि के जातकों की किस्मत चमका सकता है. इन राशियों को करियर, कारोबार, धन और स्वास्थ्य के मोर्चे पर बिना प्रयत्न के लाभ मिल सकते हैं. मेष राशि यह समय आर्थिक मोर्चे पर उन्नति देने वाला साबित होगा. धन प्राप्ति के योग बन सकते हैं. कोई प्रॉपर्टी खरीदने का मन बना सकते हैं. यदि आप लंबे समय से किसी प्रॉपर्टी को बेचने का प्रयास कर रहे हैं, तो सफलता मिल सकती है. भाई-बहनों के साथ तालमेल बिठाने के लिए आपको कुछ प्रयास जरूर करने होंगे. सिंह राशि धन लाभ के योग बनेंगे. व्यवसायिक लाभ होने के योग बन सकते हैं. कार्यक्षेत्र में भी आपको एक टीम के सदस्य की तरह काम करना लाभदायक रहेगा. केवल अपने बारे में सोचने से स्थितियां बदल सकती हैं. आपसी संबंध सुधरेंगे और सामाजिक तौर पर यह समय आपके परिवार को उन्नति दिलाएगा. तुला राशि यदि आप व्यवसाय करते हैं, तो इस दौरान अच्छी उन्नति होने के प्रबल योग बनेंगे. आपकी कार्यकुशलता में बढ़ोतरी होगी. कार्यक्षेत्र में मित्रों का सहयोग मिल सकता है. मेहनती लोगों को शुभ समाचार मिलते रहेंगे. दांपत्य जीवन में मिठास बढ़ेगी. धनु राशि व्यवसाय में उन्नति के योग बनते दिख रहे हैं. आय के नए स्रोत उत्पन्न हो सकते हैं. खर्चों में कमी आएगी. कहीं से रुका हुआ धन प्राप्त हो सकता है. हालांकि, आपको रोग-बीमारियों से सावधान रहने की सलाह दी जाती है. हर कार्य में आपको उनका समर्थन मिलेगा. मकर राशि कार्यक्षेत्र में आपके काम की जमकर सराहना होगी. वरिष्ठ अधिकारियों से आपके संबंध सुधरेंगे. हालांकि, खर्चों में बढ़ोत्तरी भी देखी जा सकती है. बैंक-बैलेंस को अच्छे से मेंटेन करने का प्रयास करें. बच्चों के भविष्य के बारे में सोचेंगे और किसी अच्छी योजना में निवेश कर सकते हैं. यह भी पढ़ें: Aries Yearly Horoscope 2026: नया साल क्या कहता है मेष राशि वालों की किस्मत के बारे में? जानें वार्षिक राशिफल से पूरी एनालिसिस The post Grah Gochar: सूर्य का धनु राशि में गोचर, इन 5 राशि वालों को बना सकता है अमीर appeared first on Naya Vichar.

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बाबरी मस्जिद के दोबारा बनाए जाने के समर्थन में आए जदयू के सांसद, कह दी ये बड़ी बात, देखें वीडियो 

Babri Masjid Murshidabad West Bengal: बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाए जाने के मामले में नालंदा से जदयू के लोकसभा सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने बाबरी मस्जिद दोबारा बनाए जाने का समर्थन किया है. कौशलेन्द्र कुमार ने कहा कि इस लोकतंत्र में सबको अधिकार है अपना धर्म मानने का.  कौशलेन्द्र कुमार ने क्या कहा ?  नालंदा से जदयू के लोकसभा सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने कहा कि ये देश सबसे बड़े संवैधानिक व्यवस्था का देश है. हार जाति और धर्म के लोग इस देश में रहते हैं. सबको इस लोकतंत्र में अधिकार है अपने-अपने धर्म को मानने का. अगर वहां बाबरी मस्जिद बना है या बनना शुरू हुआ है तो ये अच्छी बात है. जो लोग उस धर्म को मानने वाले हैं उनके लिए जरूर अच्छा है.  बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण पर नालंदा के जदयू सांसद कौशलेन्द्र कुमार…@Jduonline @BJP4Bihar #biharpolitics #NitishKumar #KaushalendraKumar pic.twitter.com/zt8x7bxFAF — Nishant Kumar Ojha (@journanishant) December 8, 2025 क्या है पूरा मामला ?  पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर विधानसभा के विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर 2025 को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखी है. 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया है. पार्टी ने उनके इस कृत्य पर बाहर का रास्ता दिखाया है.  Also read: बंगाल के बाबरी मस्जिद को लेकर बिहार में गरमाई सियासत, डिप्टी सीएम ने दिया बड़ा बयान   The post बाबरी मस्जिद के दोबारा बनाए जाने के समर्थन में आए जदयू के सांसद, कह दी ये बड़ी बात, देखें वीडियो  appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड की इस पहाड़ी पर हुई थी सभ्यता की पहली सुबह, पाषाण युग के रहस्यों की खोज में लगे पंडित अनूप वाजपेयी का दावा

Table of Contents ‘जितनी शांत हैं राजमहल की पहाड़ियां, उतनी बोलती भी हैं’ ‘पत्थरों में भी होती है स्मृति, उन्हें पढ़ने की दृष्टि चाहिए’ झारखंड की धरती ने मानवता को दिया आकार ज्ञान और संस्कार की परंपरा से जन्मा एक शोधक मन संस्कृति, समाज और भाषा के दस्तावेज सहेज रहे अनूप स्नातकोत्तर में पढ़ायी जाती हैं वाजपेयी की कई किताबें इतिहास ही नहीं, धर्म और आध्यात्मिक परंपराओं के वैज्ञानिक अध्ययन पर भी केंद्रित है वाजपेयी का अध्ययन आस्था जब इतिहास से मिलती है, तो सभ्यता का जन्म होता है सभ्यता का उद्गम स्थल है राजमहल – पंडित वाजपेयी झारखंड की धरती में सोया है मानवता की कथा कहने वाला इतिहास – अनूप कुमार वाजपेयी Dawn of Civilization| दुमका, आनंद जायसवाल : कभी-कभी किसी व्यक्ति के लिए समय ठहर जाता है. वह वर्तमान में जीते हुए भी हजारों साल पीछे चला जाता है. मिट्टी, पत्थर और जीवाश्मों में इतिहास की धड़कनें सुनने लगता है. ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी हैं पंडित अनूप कुमार वाजपेयी. उन्होंने संताल परगना की धरती से उस प्राचीन सभ्यता के निशान खोजे, जिसके बारे में आज तक इतिहास की किताबों में कुछ नहीं लिखा गया. ‘जितनी शांत हैं राजमहल की पहाड़ियां, उतनी बोलती भी हैं’ राजमहल की पहाड़ियां जितनी शांत दिखती हैं, उतनी ही भी बोलती हैं. पत्थरों की भाषा में, जीवाश्मों की स्मृतियों में. पंडित अनूप कुमार वाजपेयी ने इन्हीं पहाड़ियों की मिट्टी में अपने जीवन का सबसे बड़ा सत्य खोजा है. अपने अध्ययन में उन्होंने पाया कि क्षेत्र के जीवाश्म 30 करोड़ वर्ष पुराने हैं -कार्बोनिफेरस काल के. उन्होंने चट्टानों पर मानव के पदचिह्न, हिरणों के पदचिह्न, मछलियों, पक्षियों और अन्य जीवों के जीवाश्म खोज निकाले हैं. ‘पत्थरों में भी होती है स्मृति, उन्हें पढ़ने की दृष्टि चाहिए’ वाजपेयी का दावा है कि दक्षिण अफ्रीका की तरह राजमहल की धरती पर भी पृथ्वी के आरंभिक जीवन के निशान मौजूद हैं. उनकी एक प्रसिद्ध उक्ति है -पत्थरों में भी स्मृति होती है, बस उन्हें पढ़ने की दृष्टि चाहिए. इसी दृष्टि ने उन्हें विश्व पटल पर एक खोजकर्ता के रूप में पहचान दिलायी है. पंडित वाजपेयी का अध्ययन परंपरागत इतिहास की सीमाओं को चुनौती देता है. उनका कहना है कि राजमहल क्षेत्र ही विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता का जन्मस्थान रहा है, जो सिंधु घाटी सभ्यता से भी पुरानी है. झारखंड की धरती ने मानवता को दिया आकार उनकी प्रसिद्ध कृति ‘विश्व की प्राचीनतम सभ्यता’ में उन्होंने प्रमाणों के साथ लिखा है कि इस धरती के नीचे वह सभ्यता सोयी है, जिसने मानवता को आकार दिया. उनका यह शोध इतिहास के पुनर्लेखन की दिशा में एक नये अध्याय की शुरुआत करता है. झारखंड की ताजा समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ज्ञान और संस्कार की परंपरा से जन्मा एक शोधक मन 2 नवंबर 1963 को गोड्डा जिले के बंदनवार गांव में जन्मे पंडित अनूप कुमार वाजपेयी के भीतर का शोधक मन किसी प्रयोगशाला में नहीं, बल्कि संस्कारों की पाठशाला में पला. उनके पिता प्रेम कुमार वाजपेयी प्रशासनी सेवा में रहे. अध्यवसाय और अनुशासन उनकी सबसे बड़ी विरासत थी. माता रुक्मणि देवी ने उन्हें अध्ययन, जिज्ञासा और सत्य की खोज के लिए प्रेरित किया. दादा पंडित लक्ष्मीकांत वाजपेयी शिक्षाविद् थे और परदादा पंडित रामचरण वाजपेयी (काव्यतीर्थ) साहित्य के आकाश में एक दीप्त नक्षत्र. ऐसे परिवेश में पले वाजपेयी के लिए लेखन, अध्ययन और खोज एक सहज प्रवृत्ति बन गयी. उन्होंने न केवल इतिहास पढ़ा, बल्कि इतिहास को मिट्टी में टटोला, पत्थरों पर लिखा और पुस्तकों में सहेजा. संस्कृति, समाज और भाषा के दस्तावेज सहेज रहे अनूप पंडित वाजपेयी का लेखन सिर्फ पुरातत्व तक सीमित नहीं है. वे समाज, संस्कृति, लोक और भाषा के भी सजग इतिहासकार हैं. पहाड़िया और अन्य क्षेत्रीय समुदायों की जीवन-पद्धति, परंपराओं और आस्थाओं पर उनका शोध अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. उनकी कृति ‘पूर्वी हिंदुस्तान के पहाड़िया’ में उन्होंने इस जनजाति की सांस्कृतिक अस्मिता को इतिहास की धारा में स्थान दिलाया. हिंदी और अंगिका, दोनों भाषाओं में उनका लेखन गहरी बौद्धिकता और लोक-संवेदना से भरा है. स्नातकोत्तर में पढ़ायी जाती हैं वाजपेयी की कई किताबें उन्होंने ‘हिंदुस्तानीय लोक देवता कोश’, ‘पूर्वी हिंदुस्तान के दुमका जिला की धार्मिक-सांस्कृतिक-पुरातात्विक झलक’ और ‘राजमहल’ जैसी पुस्तकों के माध्यम से झारखंड की सांस्कृतिक आत्मा को अभिलेखों में दर्ज किया है. उनकी कई पुस्तकें इतिहास, संस्कृत के अलावा स्नातकोत्तर के कई अन्य विषयों की पाठ्यपुस्तक के रूप में शामिल हैं. इतिहास ही नहीं, धर्म और आध्यात्मिक परंपराओं के वैज्ञानिक अध्ययन पर भी केंद्रित है वाजपेयी का अध्ययन इतिहास के साथ-साथ पंडित वाजपेयी का ध्यान धर्म और आध्यात्मिक परंपराओं के वैज्ञानिक अध्ययन पर भी केंद्रित है. उन्होंने देवघर के बैद्यनाथ मंदिर के शिखर पर स्थित कलश पर संस्कृत में अंकित अभिलेख का गहन अध्ययन किया और प्रमाणित किया कि यह राजा चंद्रमौलेश्वर द्वारा विक्रम संवत् 14 (43 ईसा पूर्व) में श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन स्थापित कराया गया था. उनका कहना है कि इस मंदिर के स्थापत्य में प्राचीन सभ्यताओं की कलात्मक परंपरा के संकेत मिलते हैं. आस्था जब इतिहास से मिलती है, तो सभ्यता का जन्म होता है वाजपेयी का दृष्टिकोण केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भी है. वे कहते हैं – आस्था जब इतिहास से मिलती है, तभी सभ्यता जन्म लेती है. पंडित अनूप कुमार वाजपेयी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनायी है. उनका मानना है कि पत्रकारिता इतिहास की तात्कालिक धड़कन है और पुरातत्व उसकी स्थायी स्मृति. उन्होंने तत्काल और अनंत दोनों को अपने लेखन में जोड़ा. उनके लेख न केवल शोधपरक होते हैं, बल्कि पुरातात्विक व ऐतिहासिक शोधपरक भी होते हैं, जिनमें भाषा की एक लय, विचार की गहराई और साहित्यिक संवेदना होती है. उनकी लेखनी में मिट्टी की गंध और पत्थरों की पुकार एक साथ सुनाई देती है. सभ्यता का उद्गम स्थल है राजमहल – पंडित वाजपेयी यही कारण है कि उनका संग्रह विशाल है. सर्वाधिक पत्थर से बने औजारों की खोज करने वाले आजाद हिंदुस्तान के वे पहले पुरातत्वविद हैं. आज जब आधुनिकता की आंधी में परंपराएं बिखर रहीं हैं, पंडित वाजपेयी का कार्य एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की तरह है. वे हिंदुस्तानीय दृष्टिकोण से इतिहास का पुनर्लेखन कर रहे हैं. एक ऐसा इतिहास, जो केवल विजेताओं का नहीं, बल्कि मिट्टी, जनजातियों और लोककथाओं का भी है. उनकी दृष्टि

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सरकारी बीमा कंपनी में नौकरी पाने का मौका, सैलरी 85000 से ज्यादा

Sarkari Naukri 2025: प्रशासनी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक बढ़िया अवसर सामने आया है. ओरिएंटल बीमा कंपनी लिमिटेड यानी OICL ने एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के 300 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. अगर आप ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट हैं और एक स्थिर प्रशासनी करियर की तलाश में हैं, तो ये मौका आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है. OICL ने साल 2025 के लिए एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर (AO) के पदों पर बड़ी भर्ती निकाली है. इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 3 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और कैंडिडेट्स 18 दिसंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. कुल 300 पदों पर भर्तियां होनी हैं और इसमें देशभर के योग्य उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. Sarkari Naukri 2025: OICL की वैकेंसी में कैसे करें आवेदन? आवेदन करने के लिए सबसे पहले orientalinsurance.org.in पर जाएं. यहां होमपेज पर Recruitment सेक्शन पर क्लिक करें. अब OICL Administrative Officer Recruitment 2025 लिंक चुनें. अब रजिस्ट्रेशन पेज पर अपनी बेसिक डिटेल्स भरकर रजिस्टर करें. रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन करें और पूरा आवेदन फॉर्म भरें. मांगे गए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें. आवेदन शुल्क ऑनलाइन पे करें. सबमिट करने से पहले फॉर्म को एक बार अच्छे से चेक करें और फिर सबमिट कर दें. अंत में फॉर्म की एक कॉपी डाउनलोड कर लें. कौन कर सकता है अप्लाई? इस भर्ती में आवेदन करने के लिए कैंडिडेट्स के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होना जरूरी है. साथ ही, कैंडिडेट की उम्र 21 साल से कम नहीं और 30 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. आरक्षित वर्गों को उम्र सीमा में प्रशासनी नियमों के अनुसार छूट मिलेगी. कितनी होगी सैलरी? OICL में एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के पद पर काम करने वाले कैंडिडेट्स को काफी अच्छी सैलरी मिलती है. बेसिक पे 50,925 रुपये से शुरू होकर 96,765 रुपये तक जाता है. औसतन हर महीने लगभग 85,000 रुपये तक सैलरी मिलने की संभावना रहती है. इसके साथ ही मेडिकल, लीव ट्रैवल अलाउंस, इंश्योरेंस और अन्य प्रशासनी सुविधाएं भी मिलती हैं. यह भी पढ़ें: झारखंड को मिले सिर्फ 8 IAS, हजारीबाग की बेटी को मिला होम कैडर The post प्रशासनी बीमा कंपनी में नौकरी पाने का मौका, सैलरी 85000 से ज्यादा appeared first on Naya Vichar.

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Vande Mataram: मोदी अब पहले जैसे प्रधानमंत्री नहीं रहे, वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने ये क्या कह डाला

Vande Mataram: लोकसभा में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर बहस के दौरान, कांग्रेस MP प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, सच तो यह है कि मोदी अब पहले जैसे प्रधानमंत्री नहीं रहे. यह है कि यह दिखने लगा है. उनका आत्मविश्वास कमजोर हो रहे हैं. उनकी नीतियां देश को कमजोर कर रही हैं, और सत्ता में मेरे साथी चुप हैं, क्योंकि अंदर ही अंदर उन्हें भी इस बात पर शर्म आ रही है. आज देश के लोग दुखी हैं, परेशान हैं, और समस्याओं से घिरे हुए हैं, और आप उन्हें हल नहीं कर रहे हैं. BJP चुनाव के लिए है, हम देश के लिए हैं : प्रियंका गांधी कांग्रेस MP प्रियंका गांधी वाड्रा ने बीजेपी और प्रशासन पर हमला करते हुए कहा, “आप (BJP) चुनाव के लिए हैं, हम देश के लिए हैं. हम चाहे कितने भी चुनाव हार जाएं, हम यहीं बैठकर आपसे और आपकी आइडियोलॉजी से लड़ते रहेंगे. हम अपने देश के लिए लड़ते रहेंगे. आप हमें रोक नहीं सकते. #WATCH | During debate in Lok Sabha on 150 years of ‘Vande Mataram, Congress MP Priyanka Gandhi Vadra says, “The truth is that Modi is no longer the Prime Minister he once was. The truth is, it’s beginning to show. His self-confidence is declining. His policies are weakening the… pic.twitter.com/nkHAOooBSe — ANI (@ANI) December 8, 2025 प्रियंका गांधी ने बताया, प्रशासन वंदे मातरम पर चर्चा क्यों करना चाहती है लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर बहस के दौरान, कांग्रेस MP प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, आज सदन में वंदे मातरम पर बहस के दो कारण हैं. एक, पश्चिम बंगाल में चुनाव आ रहे हैं. ऐसे में हमारे प्रधानमंत्री अपनी भूमिका बनाना चाहते हैं और दूसरा, जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी, देश के लिए कुर्बानी दी- यह प्रशासन उन पर नए आरोप लगाने का मौका चाहती है. ऐसा करके प्रशासन देश का ध्यान जनता से जुड़े जरूरी मुद्दों से भटकाना चाहती है. प्रियंका गांधी ने आगे कहा- वे सिर्फ जनता का ध्यान भटकाना चाहते हैं. इसलिए आज हम वंदे मातरम पर चर्चा कर रहे हैं. वंदे मातरम देश के कण-कण में जिंदा है : प्रियंका गांधी कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा- वंदे मातरम देश के कण-कण में जिंदा है. इस पर कोई बहस नहीं हो सकती. आज प्रधानमंत्री ने यह चर्चा शुरू की. उन्होंने भाषण दिया और यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि वे भाषण तो अच्छे देते हैं, लेकिन जब फैक्ट्स की बात आती है तो वे कमजोर पड़ जाते हैं. इसमें भी एक कला है कि फैक्ट्स को जनता के सामने कैसे पेश किया जाए. मैं नई हूं, मैं लोगों की नुमाइंदगी हूं, एक्टर नहीं. ये भी पढ़ें: Vande Mataram : नेहरू का नाम बार–बार…पीएम मोदी की बात सुनकर भड़के कांग्रेस सांसद गोगोई Vande Mataram : कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम् पर समझौता किया, बोले पीएम मोदी The post Vande Mataram: मोदी अब पहले जैसे प्रधानमंत्री नहीं रहे, वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने ये क्या कह डाला appeared first on Naya Vichar.

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SBI Share Price: आठ दिसंबर को 1.66% गिरा एसबीआई का शेयर, मगर 5 साल में दिया छप्परफाड़ मुनाफा

SBI Share Price: देश के सबसे बड़े प्रशासनी बैंक एसबीआई (हिंदुस्तानीय स्टेट बैंक) का शेयर सोमवार 8 दिसंबर 2025 को करीब 1.66% तक गिर गया. लेकिन, इस बैंक के शेयर ने पिछले पांच सालों के दौरान अपने निवेशकों को छप्पड़फाड़ करीब 250.67% तक का रिटर्न दिया है. सोमवार के कारोबारी सत्र के आखिर में एसबीआई का शेयर 16.10 रुपये या 1.66% कमजोर होकर 955.40 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ. क्यों गिरा एसबीआई का शेयर सोमवार को शेयर बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स करीब 609.68 अंक या 0.71% और निफ्टी भी 225.90 अंक या 0.86% गिरकर बंद हुए. सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 26 के शेयर धराशायी हो गए. इसमें एसबीआई का शेयर भी शामिल था. हालांकि, एसबीआई के शेयर को कम घाटा हुआ. सबसे अधिक घाटा जोमैटो के शेयर को हुआ. शेयर बाजार का कारोबार शुरू होने के साथ एसबीआई का शेयर 970.05 रुपये पर खुला था, जो बाजार बंद होने के समय गिरकर 955.40 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ. शेयर बाजार में क्यों आई गिरावट फेडरल रिजर्व की नीतिगत घोषणा से पहले बढ़ी सतर्कता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर की मानें, तो घरेलू शेयर बाजार में बड़े पैमाने पर गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण इस हफ्ते के फेडरल रिजर्व बैंक की पॉलिसी फैसले से पहले निवेशक सतर्कता है. मजबूत घरेलू विकास के आंकड़ों और (आरबीआई) की ओर से हाल ही में ब्याज दर में कटौती के बावजूद शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट वैश्विक मौद्रिक नीति की चिंताओं, लगातार विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) आउटफ्लो और करेंसी में गिरावट से प्रभावित रहा. एसबीआई के शेयर ने 5 साल में बना दिया धन्नासेठ एसबीआई का शेयर तात्कालिक कारणों से भले ही सोमवार को 1.66% गिर गया हो, लेकिन इसका रिकॉर्ड चेक कीजिएगा तो इसने अपने निवेशकों को पिछले पांच सालों के दौरान बंपर रिटर्न दिया है. पिछले छह महीने के दौरान एसबीआई के शेयर ने अपने निवेशकों को 16.51% और एक साल के दौरान 11.35% का रिटर्न दिया है. वहीं, पांच साल के दौरान इसने अपने निवेशकों को 250.67% तक छप्परफाड़ रिटर्न दिया है. 11 दिसंबर 2020 को एसबीआई का शेयर 272.45 रुपये पर बंद हुआ था और आज 8 दिसंबर को यह 955.40 रुपये पर पहुंच गया है. इसे भी पढ़ें: Online Pickles Prices: कहां मिलता है सबसे सस्ता अचार, जो स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ जेब को देता है राहत 1 लाख के निवेश पर 2.5 लाख से अधिक कमाई अगर किसी व्यक्ति ने पांच साल पहले 11 दिसंबर 2020 को 272.45 रुपये की कीमत पर 1 लाख रुपये लगाकर एसबीआई का शेयर लिया होगा, तो आज 8 दिसंबर 2025 को उसके शेयर में 1.66% की गिरावट के बावजूद उसने 2.5 लाख रुपये से अधिक करीब 2,50,670 रुपये की कमाई की होगी. इस मुनाफे के साथ उसके खाते में इस समय करीब 3,50,670 रुपये का फंड जमा हो गया होगा. यानी पांच साल में दोगुने से भी अधिक मुनाफा हुआ. अगर यह पैसा किसी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट किया गया होता, तो निवेशक को इन पांच सालों में बैंक की ओर से 250.67% का बड़ा रिटर्न नहीं मिलता. इसे भी पढ़ें: शेयर बाजार में क्यों मचा हाहाकार, सेंसेक्स-निफ्टी में आई जोरदार गिरावट? ये है असली कारण The post SBI Share Price: आठ दिसंबर को 1.66% गिरा एसबीआई का शेयर, मगर 5 साल में दिया छप्परफाड़ मुनाफा appeared first on Naya Vichar.

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Babri Masjid Donation: बाबरी मस्जिद निर्माण के लिए अब तक कितना मिला दान? रात भर चली चंदे की गिनती

Babri Masjid Donation: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की शैली में मस्जिद बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक करीब 1.3 करोड़ रुपये का चंदा मिल चुका है. टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अभियान की शुरुआत की है. कबीर ने बताया कि लोग दिल खोलकर मस्जिद निर्माण के लिए चंदा दे रहे हैं. चंदे के लिए जगह-जगह लगाए गए दानपत्र करीब-करीब भर चुके हैं और नकदी गिनने वाली मशीनों की मदद से रात भर चंदे की गिनती चलती रही. कबीर ने कहा कि लोग नकदी और ऑनलाइन दोनों तरीके से दान दे रहे हैं. 1.30 करोड़ का अब तक दान, गिनती जारी निलंबित विधायक कबीर के कुछ करीबी लोगों ने सोमवार को बताया कि चार दान पेटियों और एक बोरी से अब तक कम से कम 37.33 लाख रुपये नकद गिने गए हैं, जबकि क्यूआर कोड के माध्यम से ऑनलाइन योगदान 93 लाख रुपये तक पहुंच गया है. दोनों को मिलाकर कुल राशि 1.30 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. जबकि सात और सीलबंद पेटियों को खोला जाना बाकी है. शनिवार को रखी थी मस्जिद की आधारशिला इससे पहले शनिवार को कबीर ने कड़ी सुरक्षा के बीच मुर्शिदाबाद के रेजिनगर में मस्जिद की आधारशिला रखी. आधारशिला के लिए 6 दिसंबर की तारीख होने के कारण बंगाल का सियासी पारा चढ़ा नजर आया था, खासकर इसलिए क्योंकि अगले साल बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कबीर ने छह दिसंबर को शिलान्यास कार्यक्रम स्थल पर 11 बड़े स्टेनलेस स्टील के दान पात्र रखे थे और लोगों से चंदे की अपील की थी. स्थानीय लोगों ने बताया कि तब से समर्थक नकदी और यहां तक ​​कि मस्जिद निर्माण के लिए ईंटें लेकर आ रहे हैं. नकदी की गिनती रविवार शाम सात बजे शुरू हुई और मध्य रात्रि तक जारी रही, यह काम 30 लोगों की एक टीम ने विशेष मशीनों का उपयोग करके किया. सोमवार शाम को खोले जाएंगे 7 और दानपत्र रिपोर्ट के मुताबिक बाकी सात दानपत्र सोमवार शाम को खोले जाएंगे और एक टीम इस प्रक्रिया की निगरानी करेगी. कबीर ने बताया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, गिनती का सीधा प्रसारण किया जा रहा है. कबीर ने दावा किया कि मदद सभी अपेक्षाओं से अधिक है. उनके मुताबिक दान कथित तौर पर देश के बाहर से भी आ रहा है. विधायक के करीबियों ने बताया कि एकत्रित धन को सीसीटीवी निगरानी वाले सुरक्षित कमरे में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जा रही है तथा इसे जमा कराने के लिए बैंकों के साथ चर्चा चल रही है. (इनपुट- भाषा) Also Read: बाबरी मस्जिद की आड़ में हिंदुओं पर हमले हुए, तो इसके लिए जिम्मेदार होगी राज्य प्रशासन : विहिप The post Babri Masjid Donation: बाबरी मस्जिद निर्माण के लिए अब तक कितना मिला दान? रात भर चली चंदे की गिनती appeared first on Naya Vichar.

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Motorola का मुड़ने वाला फोन हुआ ₹55,100 सस्ता, स्टॉक खत्म होने से पहले लपक ले तगड़ी डील

Motorola Razr 50 Ultra Price Cut: अभी भी कई शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर सेल चल रही है. स्मार्टफोन से लेकर टीवी, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, होम और किचन अप्लायंसेज तक पर ग्राहकों को शानदार ऑफर्स मिल रहे हैं. इसी बीच, अगर आप कई दिनों से एक बढ़िया फ्लिप फोन खरीदने की सोच रहे थे तो अब आपके पास सुनहरा मौका है. हां, हम बात कर रहे हैं Motorola Razr 50 Ultra फ्लिप फोन की, जिसे अब लॉन्च प्राइस से काफी कम कीमत में खरीदा जा सकता है. आइए आपको बताते हैं इस फोन पर कौन-कौन से डील्स और ऑफर्स मिल रहे हैं. Amazon पर सस्ता मिल रहा Motorola Razr 50 Ultra  कीमत की बात करें तो, 12GB RAM और 512GB स्टोरेज वाला वेरिएंट ₹1,19,000 में आता है. इसे आप Amazon की वेबसाइट से फिलहाल 46% के भारी डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं, जिससे इसकी कीमत घटकर सिर्फ ₹63,900 हो जाती है. इसके अलावा, इसे और भी सस्ता किया जा सकता है. आइए आपको बताते हैं कैसे. Motorola Razr 50 Ultra Offers आप इस फोन पर Canara Bank क्रेडिट कार्ड से बैंक ऑफर के जरिए ₹1,500 की बचत कर सकते हैं. इसके अलावा, आपको ₹47,600 का एक्सचेंज ऑफर भी मिल रहा है. आप इसे EMI में ₹3,098 की किश्त पर भी खरीद सकते हैं. ध्यान रहे, यह डील स्टॉक लिमिटेड है, इसलिए जल्दी ऑर्डर करें. Motorola razr 50 ultra amazon price details Motorola Razr 50 Ultra फीचर्स डिस्प्ले और प्रोसेसर Motorola का ये मुड़ने वाला फोन 4 इंच के बाहरी कवर डिस्प्ले और 6.9 इंच के अंदरूनी डिस्प्ले के साथ आता है. फोन 165Hz रिफ्रेश रेट और 300Hz टच सैंपलिंग रेट सपोर्ट करता है. फास्ट और मल्टीटास्किंग के लिए इसमें Qualcomm Snapdragon 8s Gen 3 प्रोसेसर दिया गया है. इसके साथ 12GB RAM और 512GB स्टोरेज भी मिलती है. कैमरा और बैटरी फोटो और वीडियो के लिए इसमें 50MP का डुअल कैमरा सेटअप दिया गया है. सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 32MP का फ्रंट कैमरा मौजूद है. इस डिवाइस में 4,000mAh की बैटरी है. इसमें USB Type-C चार्जिंग पोर्ट के साथ-साथ Wi-Fi, ब्लूटूथ और GPS जैसी कनेक्टिविटी फीचर्स भी मौजूद हैं. यह भी पढ़ें: Flipkart Buy Buy Sale: Oppo का प्रीमियम फोन हुआ हजारों रुपए सस्ता, जबरदस्त बैटरी-डिस्प्ले ने बना दिया बेस्ट डील The post Motorola का मुड़ने वाला फोन हुआ ₹55,100 सस्ता, स्टॉक खत्म होने से पहले लपक ले तगड़ी डील appeared first on Naya Vichar.

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Vastu Tip for Kitchen: रोटी बन जाने के बाद चकला-बेलन न छोड़ें ऐसे, वरना घर में आ सकती है बड़ी मुसीबत, जानें इसे रखने का वास्तु नियम

Vastu Tip for Kitchen: वास्तु शास्त्र में चकला-बेलन को मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है. मान्यता है कि यदि इनके उपयोग के बाद इन्हें गलत तरीके से इधर-उधर रखा जाए, तो इससे घर की बरकत और सुख-शांति खत्म हो सकती है. इसलिए आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि चकला-बेलन का उपयोग करने के बाद क्या करना शुभ और अशुभ माना जाता है, ताकि आपसे कोई गलती न हो. यहां चकला-बेलन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण वास्तु उपाय बताए गए हैं. रोटी बनाते समय करें ये वास्तु उपाय वास्तु शास्त्र के अनुसार, चकला-बेलन से बनाई गई पहली रोटी हमेशा गौमाता को खिलानी चाहिए. माना जाता है कि पहली रोटी में समस्त देवताओं का वास होता है. इससे पितृदोष कम होता है और राहु-केतु शांत होते हैं. इसके साथ ही घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती. रोटी बनाने के बाद चकला-बेलन कैसे रखें? रोटी बनाने के बाद चकला-बेलन को गंदा छोड़ देना या उल्टा रखना वास्तुदोष पैदा करता है. इसलिए हमेशा खाना बनाने के बाद इन्हें अच्छी तरह साफ करके सीधा और सुरक्षित स्थान पर रखें.बेलन को चकले पर खड़ा रखना या उल्टा लिटाना अशुभ माना जाता है. इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा रुकती है और नकारात्मकता बढ़ती है. इसके अलावा गुस्से या चिड़चिड़ाहट में चकला-बेलन को इधर-उधर फेंकना भी अशुभ होता है. ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और घर की बरकत चली जाती है. इसलिए चकला-बेलन को हमेशा सम्मान से रखें. चकला-बेलन रखने की शुभ दिशा वास्तु के अनुसार, चकला-बेलन को दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) या उत्तर-पूर्व दिशा में साफ-सुथरे शेल्फ पर रखना शुभ होता है.इन्हें हमेशा ऊंचाई पर रखें. इन्हें जमीन पर रखना अशुभ माना जाता है.  चकला-बेलन खुले में रखना चाहिए या नहीं? रात को सोने से पहले चकला-बेलन को अच्छी तरह साफ करके ढंककर रखें. इन्हें खुले में रखना नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करता है और सुबह का भोजन प्रभावित होता है. पुराने और टूटे चकला-बेलन का क्या करें? यदि चकला-बेलन पुराना या टूट गया है, तो उसे बहते पानी में प्रवाहित कर दें या मंदिर में दान करें.टूटा या पुराना चकला-बेलन घर में रखना अशुभ माना जाता है. धन-संबंधी समस्या के लिए चकला-बेलन से करें ये उपाय यदि लंबे समय से धन की रुकावट बनी हुई है, तो शुक्रवार के दिन नया चकला-बेलन खरीदकर किसी जरूरतमंद स्त्री को दान करें. माना जाता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में बरकत आती है. The post Vastu Tip for Kitchen: रोटी बन जाने के बाद चकला-बेलन न छोड़ें ऐसे, वरना घर में आ सकती है बड़ी मुसीबत, जानें इसे रखने का वास्तु नियम appeared first on Naya Vichar.

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डोनाल्ड ट्रंप की इस स्ट्रेटजी से खुश हुआ रूस, कहा- हमारे नजरिए की दुनिया भी ऐसी ही

Russia on US National Security Strategy: अमेरिका ने अपनी नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति पेश कर दी. इसमें उसने चीन को नंबर 1 दुश्मन घोषित किया, हिंदुस्तान को साझेदार बताया और रूस के साथ संघर्ष कम करने की कोशिश का जिक्र किया है. नवंबर 2025 National Security Strategy को रिलीज करने के बाद दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. यूक्रेन युद्ध को लेकर फिलहाल अमेरिका की आंखों की किरकिरी बने रूस ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. रविवार को क्रेमलिन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस निर्णय पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. उसने कहा कि अब रूस को प्रत्यक्ष खतरे के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाएगा, यह अच्छी बात है. क्रेमलिन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की नई जारी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति बड़े पैमाने पर मास्को की अपनी विश्वदृष्टि से मेल खाती है, खासकर इस आकलन से कि यूरोप का प्रभाव घट रहा है. ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित और लचीले यथार्थवाद (flexible realism) के विचार पर आधारित इस रणनीति दस्तावेज में 19वीं सदी की मोनरो डॉक्ट्रिन को पुनर्जीवित करने की बात कही गई है. इसने पश्चिमी गोलार्ध को अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया था. इसमें चेतावनी दी गई है कि यूरोप सभ्यतागत मिटने के जोखिम में है, यह दावा किया गया है कि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना अमेरिका की प्राथमिकता है और यह भी कहा गया है कि वाशिंगटन का लक्ष्य मॉस्को के साथ रणनीतिक स्थिरता को पुनर्स्थापित करना है. नाटो की समाप्ति की उम्मीद पर खुश हुआ रूस क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने राज्य टीवी के पत्रकार पावेल जारूबिन से कहा कि दस्तावेज में बताए गए कई बदलाव हमारी समझ के अनुरूप हैं. उन्होंने उस हिस्से का स्वागत किया, जिसमें नाटो को लगातार विस्तार करने वाले गठबंधन के रूप में देखे जाने की धारणा को समाप्त करने और ऐसी वास्तविकता को रोकने की प्रतिबद्धता जताई गई है. उन्होंने इसे एक सकारात्मक संकेत बताया. सतर्क रहने की भी दी सलाह हालांकि पेस्कोव ने रूस को सावधानी बरतने की सलाह भी दी है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी “डीप स्टेट” की सोच ट्रंप से मूल रूप से अलग है. डीप स्टेट शब्द को ट्रंप यह आरोप लगाने के लिए करते रहे हैं कि अमेरिकी नौकरशाही नेतृत्व ऐसे नेताओं को कमजोर करने की कोशिश करती है, जो मौजूदा व्यवस्था को चुनौती देते हैं. इसमें ट्रंप भी शामिल हैं, जो इसका निशाना बने हैं.  क्रीमिया हमले के बाद बदला रूस के प्रति अमेरिका का रुख 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया के विलय और 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से, अमेरिकी रणनीतियों ने मास्को को एक हमलावर या खतरे के रूप में परिभाषित किया था, जो युद्ध के बल पर शीत युद्ध के बाद की व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा था. रूस की स्टेट समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में, पेस्कोव ने कहा कि रूस को प्रत्यक्ष खतरे के रूप में दर्शाने के बजाय उसके साथ रणनीतिक स्थिरता के मुद्दों पर सहयोग की बात करना एक सकारात्मक कदम है. ट्रंप पुतिन की प्रशंसा करते रहते हैं ट्रंप ने अक्सर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सकारात्मक और प्रशंसात्मक टिप्पणियाँ की हैं, जिसके चलते आलोचक उन पर मॉस्को के प्रति नरम होने का आरोप लगाते रहे हैं. हालांकि उनकी दोनों प्रशासनिक अवधि में रूस पर प्रतिबंध भी लगाए गए थे. यूरोप की प्रमुख शक्तियों के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बार-बार चिंता जताई है कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका यूरोप से मुंह मोड़ सकता है, जबकि यूरोप अपनी सैन्य सुरक्षा के लिए वाशिंगटन पर निर्भर है.  पीस प्लान पास करवाने में जुटे हैं ट्रंप फिलहाल ट्रंप यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए पीस प्लान लेकर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उनके पहले वाले प्लान पर रूस राजी था, लेकिन यूरोप और यूक्रेन की नामंजूरी के बाद यह ठंडे बस्ते में जा रहा था, लेकिन ट्रंप ने अपने दूत विटकॉफ और दामाद कुश्नर को बातचीत के लिए भेजा, ताकि बात बने. हालांकि अभी इस पर कोई सकारात्मक नतीजा रुख नहीं दिखा है.  ये भी पढ़ें:- रिश्तों में आई खटास, अरब सागर में आमने-सामने हुए यूएई-सऊदी अरब, क्यों हो रही UAE vs KSA में जंग? ‘क्रिसमस नॉटी लिस्ट’ में कौन-कौन? ट्रंप बोले- बहुत सारे नाम हैं… दुनिया में बवाल मच जाएगा पुतिन के दौरे के बाद जागा अमेरिका, टॉप डिप्लोमैट हुकर को भेजा इंडिया, किससे मिलेंगी और क्या है टूर का एजेंडा? जानें The post डोनाल्ड ट्रंप की इस स्ट्रेटजी से खुश हुआ रूस, कहा- हमारे नजरिए की दुनिया भी ऐसी ही appeared first on Naya Vichar.

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