…वरना दुनिया के ‘जंगलराज’ की ओर वापस जाने का खतरा, ब्रिटिश पीएम से ऐसा क्यों बोले जिनपिंग?
Britain China Relations: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस समय चीन के दौरे पर हैं. बीजिंग में उन्होंने गुरुवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात की. यह बैठक बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई और तय समय से ज्यादा करीब 80 मिनट तक चली. स्टार्मर पिछले आठ साल में चीन जाने वाले पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री हैं. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब कई सालों के तनाव के बाद दोनों देश रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं. ब्रिटेन और चीन के बीच यह मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विश्व व्यवस्था में खलबली मचाने के बाद हो रही है. बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और ब्रिटेन, दोनों मुक्त व्यापार के समर्थक हैं और उन्हें मिलकर सच्चे बहुपक्षवाद का समर्थन करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी असरदार होता है जब सभी देश उसका पालन करें, खासकर बड़े देश. उनके मुताबिक, ऐसा न होने पर वरना दुनिया के ‘जंगलराज’ की ओर वापस जाने का खतरा पैदा हो जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि चीन चाहे जितना भी आगे बढ़े, वह किसी के लिए खतरा नहीं बनेगा. जिनपिंग की यह टिप्पणी ऐसे समय में आ रही है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में हमला करके राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कर रहे हैं. कनाडा को धमका रहे हैं. अन्य यूरोपीय देशों पर टैरिफ डाल रहे हैं. ईरान पर हमले की तैयारी कर रहे हैं. ब्रिटेन चीन बिगड़ते हालात को सुधारने की कोशिश में ब्रिटेन और चीन के रिश्ते पिछले कुछ सालों में बिगड़े थे. वजहों में ब्रिटेन में चीन की कथित जासूसी, यूक्रेन युद्ध में रूस के लिए चीन का समर्थन और हांगकांग में आजादी पर पाबंदियां शामिल थीं. हांगकांग पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था, जिसे 1997 में चीन को सौंपा गया था. हाल ही में हांगकांग की एक अदालत ने ब्रिटिश नागरिक और मीडिया कारोबारी जिमी लाई को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दोषी ठहराया था. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय 10 डाउनिंग स्ट्रीट के मुताबिक, दोनों देशों ने एक लंबी अवधि की रणनीतिक साझेदारी बनाने की प्रतिबद्धता जताई है. दोनों इस बात पर सहमत हुए कि जहां सहयोग संभव है, वहां साथ काम करेंगे, और जिन मुद्दों पर मतभेद हैं, उन पर खुलकर बात जारी रखेंगे. स्टार्मर ने उन विषयों को भी उठाया जो ब्रिटेन के लिए चिंता का कारण हैं, जिनमें मानवाधिकार भी शामिल हैं. आर्थिक तरक्की की तलाश में ब्रिटेन इस दौरे में स्टार्मर के साथ करीब 50-60 बड़े व्यवसायों और सांस्कृतिक संगठनों का प्रतिनिधिमंडल भी गया है. उनका कहना है कि चीन के साथ नए आर्थिक अवसर ढूंढना ब्रिटेन की तरक्की के लिए जरूरी है. उन्होंने कहा कि देश की समृद्धि का संबंध दुनिया की बड़ी ताकतों के साथ रिश्तों से जुड़ा होता है. अवैध प्रवासन को रोकने पर बनी सहमति ब्रिटेन चीन के साथ एक नया सीमा सुरक्षा समझौता भी करने जा रहा है. इसका मकसद उन गिरोहों पर रोक लगाना है जो अवैध प्रवासियों को छोटी नावों के जरिए ब्रिटेन भेजते हैं. इन नावों में इस्तेमाल होने वाले कई इंजन और पुर्जे चीन में बनते हैं. ब्रिटेन प्रशासन के अनुसार, पिछले साल जब्त किए गए ऐसे इंजनों में से 60% से ज्यादा चीन में बने थे. स्टार्मर ने कहा कि इस समझौते से नावों की सप्लाई को स्रोत पर ही रोका जा सकेगा और लोगों की जान जोखिम में पड़ने से पहले ही अवैध यात्रा रुकेगी. ट्रंप का नाम लिए बिना साधा निशाना यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ फैसलों से वैश्विक व्यवस्था और व्यापार में अस्थिरता आई है. हालांकि बैठक में ट्रंप का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया गया. लेकिन, स्टार्मर ने कहा कि दुनिया के मुश्किल दौर में जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करना जरूरी है. चीनी दूतावास को मंजूरी, देने पर घिरे थे स्टार्मर स्टार्मर को चीन के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिशों पर ब्रिटेन में आलोचना भी झेलनी पड़ी है, खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकार के मुद्दों को लेकर. हाल ही में ब्रिटेन ने लंदन में एक बड़े नए चीनी दूतावास परिसर की योजना को मंजूरी दी है. इससे रिश्तों में सुधार तो हुआ, लेकिन कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि इसका दुरुपयोग जासूसी या दबाव बनाने के लिए हो सकता है. शी जिनपिंग ने कहा कि जब कोई काम देश के हित में होता है, तो नेताओं को चुनौतियों से डरना नहीं चाहिए. स्टार्मर ने भी कहा कि उन्होंने मानवाधिकार के मुद्दे सीधे उठाए और बातचीत सम्मानजनक माहौल में हुई. उन्होंने साफ किया कि ब्रिटेन राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करते हुए चीन के साथ बातचीत और व्यापारिक सहयोग जारी रखेगा. उन्होंने यह भी माना कि किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री के चीन आने में काफी लंबा समय लग गया. हाल के दिनों में चीन जाने वाले चौथे नेता स्टार्मर इस दौरे के दौरान स्टार्मर ने चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के अध्यक्ष जाओ लेजी से भी मुलाकात की. यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ब्रिटेन की वित्तीय स्थिति धीमी है और प्रशासन विदेशी निवेश व व्यापार बढ़ाने के मौके तलाश रही है. इस यात्रा में उनके साथ 50 से अधिक कारोबारी नेता और कुछ सांस्कृतिक संगठनों के नेता भी शामिल हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ निर्णयों ने वैश्विक व्यापार में जटिलताएं पैदा कर दी हैं, इसलिए अब कई देशों के लिए व्यापार और निवेश बढ़ाना जरूरी हो गया है. स्टार्मर इस महीने बीजिंग दौरे पर आने वाले अमेरिकी सहयोगी देश के चौथे नेता हैं. इससे पहले दक्षिण कोरिया, कनाडा और फिनलैंड के नेता बीजिंग आए थे. जर्मनी के चांसलर के अगले महीने आने की उम्मीद है. ये भी पढ़ें:- अमेरिका से टेंशन के बीच ईरान पर EU का एक्शन, 15 अधिकारियों और छह संगठनों पर लगाया प्रतिबंध ये भी पढ़ें:- यूक्रेन जंग पर ट्रंप का बयान, बोले- पुतिन एक हफ्ते तक कीव पर हमला नहीं करेंगे, रूस ने पुष्टि नहीं 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