कोलकाता. हिंदुस्तानीय संविधान में जिसे सामान्यतः बजट कहा जाता है, उसे आधिकारिक तौर पर अनुच्छेद 112 के तहत ””””वार्षिक वित्तीय विवरण”””” के रूप में परिभाषित किया गया है. यह दस्तावेज हिंदुस्तान की राजकोषीय नीति का मूल आधार है, जो प्रशासन की वित्तीय जवाबदेही और संसदीय नियंत्रण सुनिश्चित करता है. इस संबंध में कलकत्ता हाइकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवब्रत उपाध्याय ने बजट की आवश्यकता को लेकर पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रशासन की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण प्रस्तुत करवायें. यह विवरण प्रशासन की आर्थिक दिशा तय करता है और इसमें राजस्व खाते और पूंजीगत खाते के व्यय को अलग-अलग दिखाया जाना अनिवार्य है. उन्होंने बताया कि संविधान के अंतर्गत व्यय को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है, जो संसदीय प्रक्रिया को निर्धारित करते हैं. अनुच्छेद 112 और 113 के अनुसार, इन खर्चों पर संसद में चर्चा तो हो सकती है, लेकिन इन पर मतदान नहीं किया जा सकता, जिससे संवैधानिक पदों की स्वतंत्रता और साख बनी रहती है. वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण अनुच्छेद 114 और अनुच्छेद 266 में निहित है. अनुच्छेद 266 हिंदुस्तान की संचित निधि की स्थापना करता है, जबकि अनुच्छेद 114 यह सुनिश्चित करता है कि संसद द्वारा पारित विनियोग विधेयक के बिना इस निधि से एक भी पैसा नहीं निकाला जा सकता. यह प्रावधान कार्यपालिका को मनमाने खर्च से रोकता है. इसके अलावा, अनुच्छेद 116 प्रशासन को पूर्ण बजट पारित होने तक ””””लेखानुदान”””” के माध्यम से कुछ महीनों के लिए अंतरिम खर्च की अनुमति देता है. संक्षेप में, ये संवैधानिक प्रावधान न केवल राजकोषीय पारदर्शिता को अनिवार्य बनाते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि लोकतंत्र में जनता का धन केवल जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की स्वीकृति से ही खर्च हो. सवाल : मैंने एक जमीन खरीदी थी. बाद में देखा कि वह प्लॉट के मालिक के रूप में दो लोगों का नाम पहले से दर्ज है. ऐसे में उन्हें क्या करना चाहिए ? -रंजीत सिंह, सोदपुर जवाब : आपको भूमि व भू-राजस्व विभाग के उपायुक्त को पत्र लिखना होगा, जिसमें आप अपने जमीन से संबंधित पूरी जानकारी अंकित करें. साथ ही त्रुटियों के संबंध में जानकारी दें. उपायुक्त के आदेश के बाद अंचलाधिकारी के कार्यालय से यह ठीक होगा. इस संबंध में कोई परेशानी होने पर आप उपायुक्त से इसकी शिकायत कर सकते हैं. सवाल : वर्ष 2013 में उन्होंने एक सामान्य जाति के व्यक्ति से जमीन खरीदी थी. उस जमीन का म्यूटेशन भी है. लेकिन अब उस जमीन पर लोन नहीं मिल रहा है. जिस कारण से में कोई काम नहीं कर पा रहा हूं. बेचने पर भी उसकी सही कीमत नहीं मिल रही है? -महेंद्र चौधरी, हांसिया, बैरकपुर जवाब : आपकी जमीन वर्तमान में सीएनटी एक्ट में आ गया है. इस कारण से आपकी कोई लोन नहीं मिल रहा है. सीएनटी एक्ट के अधीन आने वाली जमीन से संबंधित कई नियम हैं, इस संबंध में विशेष जानकारी के लिए आप डीसीएलआर से मिल सकते हैं. आपकी समस्या का समाधान होगा. सवाल : एक बिल्डर से पांच साल पहले एक जमीन खरीदी थी, लेकिन बिल्डर ने उसी जमीन को तीन साल बाद एक बार फिर दूसरे व्यक्ति को बेच दिया है? -कुलदीप जायसवाल, उत्तरपाड़ा जवाब : चूंकि आप पहले खरीदार हैं, इसलिए आप अपनी जमीन का भूमि व भू-राजस्व कार्यालय में जाकर सबसे पहले म्यूटेशन करवायें, उसे कब्जा में ले. उसके बाद इसकी जानकारी लिखित रूप से सीओ को दें. The post हिंदुस्तान की राजकोषीय नीति का मूल आधार है केंद्रीय बजट appeared first on Naya Vichar.