Bihar Budget 2026: बिहार प्रशासन ने अपने बजट में स्त्रीओं और सामाजिक समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर खास जोर दिया है. मुख्यमंत्री स्त्री रोजगार योजना के तहत अब स्त्रीओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की बिक्री के लिए गांवों से लेकर शहरों तक हाट-बाजार विकसित किए जाएंगे. इसका मकसद स्त्रीओं को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें बाजार से सीधे जोड़ना है, ताकि उनकी आमदनी स्थायी रूप से बढ़ सके.
प्रशासनी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 1.56 करोड़ से अधिक स्त्रीओं को रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रति स्त्री 10 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है. इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी स्त्रीओं के छोटे-छोटे व्यवसायों को गति मिली है.
लखपति दीदी योजना से बदली स्त्रीओं की आर्थिक तस्वीर
बिहार में जीविका समूहों से जुड़ी स्त्रीओं की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है. वर्तमान में राज्य की 31.71 लाख जीविका दीदियों को ‘लखपति दीदी’ के रूप में चिह्नित किया जा चुका है. यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि ग्रामीण वित्तीय स्थिति में स्त्रीओं की भागीदारी अब सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका में बदल रही है.
हर प्रमंडल में मेगा स्किल सेंटर, फिर जिलों तक विस्तार
राज्य प्रशासन आधुनिक उद्योगों की जरूरतों को देखते हुए कौशल विकास के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठा रही है. हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित मेगा स्किल सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी गई है. पहले चरण में राज्य के सभी प्रमंडलों में एक-एक मेगा स्किल सेंटर स्थापित किया जाएगा, जहां उच्च गुणवत्ता का कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा. दूसरे चरण में यह मॉडल सभी जिलों तक विस्तार पाएगा.
इन केंद्रों में युवाओं और स्त्रीओं को रोजगारपरक व्यवसायों में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे इंडस्ट्री 4.0 के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें.
आईटीआई से रोजगार तक की सीधी कड़ी
बिहार में वर्तमान में 152 आईटीआई संचालित हैं, जिनमें 114 सामान्य और 38 स्त्री आईटीआई शामिल हैं. इनमें से 149 आईटीआई को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है. पहले चरण में 60 आईटीआई को अपग्रेड किया गया है, जहां अब तक 7,865 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है.
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक नियोजन मेलों के माध्यम से 19,593 और नियोजन कैंपों के जरिए 22,329 आवेदकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं. युवाओं को रोजगार सहायता देने के लिए एकीकृत ई-निबंधन और रोजगार पोर्टल का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे नौकरी की प्रक्रिया और पारदर्शी हो सके.
नियोजन मेलों ने बदली हजारों की तकदीर
वर्ष 2025-26 के दौरान बिहार में रोजगार के आंकड़ों ने नई ऊंचाई छुई है. विभिन्न नियोजन मेलों और कैंपों के माध्यम से अब तक लगभग 41,922 आवेदकों को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं.
प्रशासन की योजना है कि कौशल विकास और डायरेक्ट प्लेसमेंट के इस मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि राज्य के युवाओं को पलायन न करना पड़े.
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