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March 2, 2026

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अमेरिका-ईरान तनाव से कांपा बाजार ! क्या फिर जेब पर पड़ेगी डबल मार ? जानिए एक्सपर्ट की राय

Crude Oil Price: वैश्विक ऊर्जा बाजार एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुका है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों में स्पष्ट रूप से एक “जियोपॉलिटिकल प्रीमियम” जोड़ दिया है. यानी कीमतों में वह अतिरिक्त बढ़ोतरी, जो वास्तविक मांग-आपूर्ति से ज्यादा युद्ध और भू-नेतृत्वक जोखिम के डर से आती है. यह स्थिति सिर्फ वैश्विक बाजार के लिए ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान जैसी उभरती और तेल आयात पर निर्भर वित्तीय स्थिति के लिए भी खतरे की घंटी है. तेल इतना महंगा क्यों हो रहा है? पूरा स्पोर्ट्स हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का है. यह समुद्र का एक बेहद संकरा लेकिन रणनीतिक रूप से अहम रास्ता है, जहाँ से दुनिया के कुल तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा जहाजों के जरिए गुजरता है. अगर किसी सैन्य टकराव या तनाव के कारण यह रास्ता बाधित होता है, तो वैश्विक स्तर पर तेल की भारी कमी हो सकती है. यही आशंका बाजार में डर पैदा कर रही है. इसी वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छूने या पार करने की कोशिश कर रही हैं. भले ही अभी वास्तविक आपूर्ति बाधित नहीं हुई है, लेकिन “संभावित संकट” ही कीमतों को ऊपर धकेल रहा है. हिंदुस्तान के लिए चिंता क्यों ? हिंदुस्तान अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हर उछाल सीधे देश की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करता है. इसके तीन बड़े असर हो सकते हैं: महंगाई में तेजी: जब पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं, तो ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है. ट्रकों का किराया बढ़ता है, जिससे सब्जी, फल, दूध और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें भी ऊपर चली जाती हैं. यानी तेल की महंगाई सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालती है. रुपये पर दबाव: तेल की खरीद डॉलर में होती है. अगर तेल महंगा होगा, तो हिंदुस्तान को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे. इससे विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपया कमजोर हो सकता है. कमजोर रुपया आयात को और महंगा बना देता है. यह एक तरह का दोहरा दबाव है. प्रशासनी बजट पर असर: तेल आयात बिल बढ़ने का मतलब है कि प्रशासन के संसाधनों का बड़ा हिस्सा ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में खर्च होगा. इससे विकास परियोजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं के लिए उपलब्ध फंड पर असर पड़ सकता है. सीए विकास सहाय (MD & CEO, VCap Money) का मानना है कि हिंदुस्तान जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह बढ़ता भू-नेतृत्वक जोखिम गंभीर चिंता का विषय है. यदि ब्रेंट क्रूड 90–100 डॉलर के दायरे में लंबे समय तक बना रहता है, तो चालू खाते के घाटे और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ सकता है. निवेशकों के लिए संकेत ऐसे अनिश्चित माहौल में निवेशकों की नजर सिर्फ शेयर बाजार पर नहीं, बल्कि सुरक्षित विकल्पों पर भी होती है. संकट के समय सोना (Gold) को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है. जब वैश्विक तनाव बढ़ता है और बाजार में उतार-चढ़ाव तेज होता है, तो निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं. इससे सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिलती है. फिलहाल बाजार इस इंतजार में है कि क्या यह तनाव केवल कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा या वास्तव में आपूर्ति मार्गों में बाधा उत्पन्न होगी. निवेशकों को क्या करना चाहिए? ऐसे समय में घबराहट में निर्णय लेने से बचना जरूरी है. अपने पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) बनाए रखें. कुल निवेश का एक संतुलित हिस्सा सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों में रखें. कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर पर नजर बनाए रखें. आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि हालात कूटनीतिक स्तर पर सुलझते हैं या वास्तविक आपूर्ति संकट में बदलते हैं. हिंदुस्तान के लिए सतर्कता, संतुलन और रणनीतिक तैयारी ही इस चुनौती का सबसे मजबूत जवाब होगा. Also Read : Share Market: ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ते ही सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम, करोड़ों की संपत्ति मिनटों में साफ The post अमेरिका-ईरान तनाव से कांपा बाजार ! क्या फिर जेब पर पड़ेगी डबल मार ? जानिए एक्सपर्ट की राय appeared first on Naya Vichar.

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यूएस‑इजरायल के ईरान पर हमले के बाद भारत में अलर्ट जारी, ऐसे लोगों पर रहेगी खास नजर

MHA Alert : केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी राज्य प्रशासनों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं. इस संबंध में अलर्ट लेटर जारी किया गया है. इसमें हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद हिंदुस्तान में संभावित सांप्रदायिक हिंसा के प्रति चौकसी बरतने को कहा गया है. 28 फरवरी को जारी इस लेटर में बताया गया कि विदेश में हुई ये घटनाएं देश में भी प्रभाव डाल सकती हैं, खासकर धार्मिक आयोजनों के जरिए भड़काऊ भाषण दिए जा सकते हैं. एडवाइजरी में मंत्रालय ने राज्य प्रशासनों से कहा है कि ईरान‑पक्ष के कट्टर प्रवक्ता (pro‑Iran radical preachers) उत्तेजक भाषण दे सकते हैं. इससे स्थानीय समुदायों में अशांति या सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है. ऐसे  लोगों पर सख्त नजर रखें और इनकी पहचान करें. मंत्रालय ने कहा है कि बड़े पैमाने पर खुफिया जानकारी शेयर करना और रोकथाम के उपाय करना जरूरी है, ताकि कानून‑व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को रोका जा सके. यह भी पढ़ें : US मिलिट्री पावर: ईरान में 1000 ठिकाने तबाह, इन हथियारों से बरसाए बम-बारूद; पूरी लिस्ट मध्य पूर्व में बढ़ गया है तनाव केंद्रीय गृह मंत्रालय की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान ने ईरानी शहरों और सैन्य ढ्रांचों को निशाना बनाया, जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा बढ़ गया है. हिंदुस्तान ने सभी पक्षों से संयम बरतने का अनुरोध किया है. हिंदुस्तान ने अपने नागरिकों, विशेषकर खाड़ी देशों में रहने वाले हिंदुस्तानीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है. भाषण और उपदेशों पर भी खास नजर रखने के निर्देश नई दिल्ली के अधिकारी इस पूरे मामले पर ध्यान रख रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की वजह से लोगों की भावनाएं बढ़ सकती हैं. कुछ चरमपंथी लोग इसे इस्तेमाल करके स्थानीय स्तर पर तनाव फैला सकते हैं. प्रशासन ने राज्यों को सलाह दी है कि वे सामान्य कानून-व्यवस्था संभालने के साथ-साथ ऐसे भाषण और उपदेशों पर भी खास नजर रखें, जो लोगों की सांप्रदायिक भावनाओं को भड़का सकते हैं. The post यूएस‑इजरायल के ईरान पर हमले के बाद हिंदुस्तान में अलर्ट जारी, ऐसे लोगों पर रहेगी खास नजर appeared first on Naya Vichar.

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Holika Dahan 2026: आज है होलिका दहन, जानें पूजा का शुभ मुर्हूत, विधि और सामग्री

Holika Dahan 2026: होलिका दहन हिंदुस्तान में मनाया जाने वाला एक विशेष पर्व है. यह होली के पर्व से एक दिन पहले मनाया जाता है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है. हर वर्ष यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि होलिका की अग्नि वातावरण की नकारात्मकता और बुराइयों को जलाकर भस्म कर देती है तथा सकारात्मकता का संचार करती है. होलिका दहन 2026: शुभ मुहूर्त और तिथियां होलिका दहन: 02 मार्च 2026, दिन सोमवार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 02 मार्च 2026, सोमवार को सुबह 05 बजकर 19 मिनट पर फाल्गुन पूर्णिमा तिथि समाप्त: 03 मार्च 2026, मंगलवार को सुबह 04 बजकर 33 मिनट पर होलिका दहन मुहूर्त: 02 मार्च 2026, सोमवार को शाम 05 बजकर 52 मिनट से रात 08 बजकर 20 मिनट तक पूजन सामग्री की सूची (Samagri List) एक लोटा गंगाजल या शुद्ध जल कच्चा सूत (मोली) रोली और अक्षत पीली सरसों हल्दी की गांठ अगरबत्ती दीपक गोबर के कंडों (बड़कुल्ले) की माला बताशे गुड़ फल गेहूं की नई बालियां नारियल पूजन की सरल विधि (Puja Vidhi) होलिका दहन के दिन शाम के समय सार्वजनिक होलिका स्थल पर जाकर पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. इस दिन सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें. इसके बाद भगवान विष्णु और भक्त प्रह्लाद का ध्यान करें तथा पूजा का संकल्प लें. फिर लकड़ी से बनाई गई होलिका के सामने जल अर्पित करें. इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, हल्दी की गांठ, मूंग की दाल, बताशे और कच्चा सूत अर्पित करें. होलिका के चारों ओर कच्चे सूत को लपेटते हुए 3, 5 या 7 बार परिक्रमा करें. इसके बाद नई फसल की बालियां और नारियल अग्नि में अर्पित करें. अंत में हाथ जोड़कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्रार्थना करें. यह भी पढ़ें: आज होलिका दहन पर भेजें शुभकामनाएं और फैलाएं खुशियों की रोशनी The post Holika Dahan 2026: आज है होलिका दहन, जानें पूजा का शुभ मुर्हूत, विधि और सामग्री appeared first on Naya Vichar.

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होली से पहले 3 मार्च को लगेगा खग्रास चंद्रग्रहण, सूतककाल में बचाव जरूरी

रघोत्तम शुक्लपूर्व पीसीएस, लखनऊ khagras Chandra Grahan 2026: इस वर्ष मंगलवार, 3 मार्च को खग्रास अर्थात पूर्ण चंद्र ग्रहण पड़ रहा है. यह ग्रहण अपराह्न 3:21 बजे से प्रारंभ होकर संध्या 6:46 बजे तक रहेगा. ज्योतिषीय गणना के अनुसार उस समय पूर्णिमा का चंद्र सिंह राशि पर गोचर करेगा और केतु द्वारा ग्रसित होगा. ग्रहण का सूतक उसी दिन प्रातः 6:20 बजे से प्रभावी हो जाएगा. शास्त्रों के मतानुसार ग्रहण काल केवल कुछ घंटों का नहीं होता, बल्कि इसका प्रभाव लगभग 15 दिन पहले से 15 दिन बाद तक माना जाता है. इस अवधि में होलाष्टक, अग्नि पंचक और भद्रा जैसे अशुभ योग भी सक्रिय बताए गए हैं. उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण पड़ चुका है, अर्थात एक पखवारे में दो ग्रहण की स्थिति बन रही है. समुद्र मंथन की कथा और राहु-केतु का रहस्य धर्म शास्त्रों में ग्रहण की उत्पत्ति का संबंध पौराणिक समुद्र मंथन से जोड़ा गया है. कथा के अनुसार देवताओं और दानवों ने अमृत प्राप्ति के लिए मंथन किया. जब धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए, तो देव-दानवों में छीना-झपटी होने लगी. उसी समय स्वर्भानु नामक दैत्य ने छलपूर्वक सूर्य और चंद्रमा के बीच बैठकर अमृत की कुछ बूंदें पी लीं. सूर्य और चंद्र ने इसकी सूचना भगवान विष्णु को दी. विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका मस्तक धड़ से अलग कर दिया. किंतु अमृत का स्पर्श हो जाने के कारण वह मरा नहीं, बल्कि दो भागों—राहु और केतु—के रूप में जीवित रहा. तब से यह दोनों सूर्य और चंद्र को अपना शत्रु मानकर अवसर मिलने पर उन्हें ग्रसते हैं. यही घटना ग्रहण के रूप में देखी जाती है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण: एक सामान्य खगोलीय घटना विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता. चंद्रमा स्वयं प्रकाशमान नहीं है, वह सूर्य के प्रकाश से ही चमकता है. राहु और केतु भौतिक ग्रह नहीं, बल्कि सूर्य, चंद्र और पृथ्वी की कक्षाओं के प्रतिच्छेदन बिंदु (नोड्स) हैं. इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है. हालांकि यह एक स्वाभाविक खगोलीय घटना है, फिर भी ज्योतिष में इसे विशेष महत्व दिया गया है. ग्रहण के समय अंतरिक्षीय विकिरणों का प्रभाव परिवर्तित माना जाता है और सूर्य-चंद्र-पृथ्वी के एक सीध में होने से गुरुत्वाकर्षण बल में विशेषता आती है. इसी कारण सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. सूतक काल में सावधानियां सूतक काल में भोजन ढककर रखना चाहिए. गर्भवती स्त्रीओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए—वे बाहर न निकलें और परंपरा के अनुसार कुक्षि पर गेरू (गैरिक) का लेप लगाएं. ग्रहण को नग्न आंखों से देखने से भी बचना चाहिए. ज्योतिष मत के अनुसार यह समय स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डाल सकता है. मंदाग्नि, अरुचि, जलदोष, रक्त विकार, कफ और वायु संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इसलिए इस दौरान नए कार्य, नई परियोजनाएं या महत्वपूर्ण निर्णय स्थगित रखना उचित माना गया है. किनके लिए शुभ और किनके लिए सावधानी? चूंकि यह ग्रहण सिंह राशि पर पड़ रहा है, इसलिए जिनकी सिंह लग्न या राशि है, उनके लिए यह विशेष सावधानी का संकेत देता है. उन्हें ग्रहण काल में संयम और सतर्कता रखनी चाहिए. वहीं कुछ जातकों के लिए यह लाभकारी भी सिद्ध हो सकता है. जिनका जन्मकालीन चंद्र नीच का है या छठे, आठवें अथवा बारहवें भाव का स्वामी है, उन्हें हानि के बजाय लाभ मिल सकता है. इसी प्रकार जिनका जन्म चंद्र पापग्रह से युक्त है या अकेला स्थित है, उनके लिए यह समय अनुकूल परिवर्तन ला सकता है. विशेष रूप से आध्यात्मिक साधना, मंत्र जाप और ध्यान के लिए ग्रहण काल को अत्यंत फलदायी माना गया है. होली और दीवाली की रात की भांति यह समय भी साधना सिद्धि के लिए श्रेष्ठ बताया गया है. ये भी पढ़ें: चंद्रमा का ज्योतिषीय रहस्य, कौन है मित्र, कौन है शत्रु? अशुभ प्रभाव के शमन के उपाय यद्यपि यह ग्रहण हिंदुस्तान में अल्प अवधि के लिए ही दृश्य होगा—दिल्ली में लगभग 25 मिनट—फिर भी शमन के उपाय करना हितकर है. कुप्रभावों से बचाव हेतु भगवान शिव के महामृत्युञ्जय मंत्र का जप अत्यंत प्रभावी माना गया है: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्द्धनंउर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। इसके अतिरिक्त केतु की शांति के लिए यह मंत्र भी जपा जा सकता है: पलाल धूम संकाशं तारक ग्रह मस्तकम्।रौद्रं रौद्रतरं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्।। श्रद्धा और भक्ति से किया गया जप तथा दान-पुण्य अनेक अनिष्टों का निवारण कर सकता है. शास्त्रों में कहा गया है कि भक्तिपूर्वक किया गया एक प्रणाम भी बड़े से बड़े दोषों को समाप्त कर देता है. चंद्र ग्रहण एक ओर जहां खगोलीय घटना है, वहीं धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. सावधानी, संयम और श्रद्धा के साथ इस काल को व्यतीत करना ही श्रेयस्कर है. आस्था के साथ विवेक का संतुलन बनाए रखते हुए मंत्र-जप, ध्यान और दान से सकारात्मक ऊर्जा अर्जित की जा सकती है. The post होली से पहले 3 मार्च को लगेगा खग्रास चंद्रग्रहण, सूतककाल में बचाव जरूरी appeared first on Naya Vichar.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव, दुनिया भर में तेल का अकाल पड़ने की आशंका

Strait of Hormuz Oil Crisis: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती सैन्य तकरार ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उपजे तनाव से कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में 10% का जोरदार उछाल आया है. फिलहाल तेल की कीमतें 78.52 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के अनुसार, यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं है, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी के लिए एक बड़ा खतरा है. क्या तेल की कीमतें 150 डॉलर पार कर जाएंगी? ANI की रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह तनाव सीमित रहता है, तो कच्चा तेल 100-115 डॉलर तक जा सकता है. लेकिन अगर समुद्र के जरिए होने वाली सप्लाई रुकी, तो यह 140 डॉलर और यहां तक कि 150 डॉलर के पार भी पहुंच सकता है. सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है. अगर यह रास्ता बंद हुआ, तो दुनिया भर में तेल का अकाल पड़ सकता है. हिंदुस्तान की वित्तीय स्थिति पर क्या असर पड़ेगा? हिंदुस्तान अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है. अजय बग्गा के मुताबिक, तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी हिंदुस्तान के व्यापार घाटे को बढ़ाती है और महंगाई में 0.30% से 0.40% तक का इजाफा करती है. इससे न केवल पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, बल्कि माल ढुलाई महंगी होने से खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती हैं. कौन से सेक्टर को होगा नुकसान और किसे फायदा? तेल महंगा होने से एविएशन (हवाई जहाज), पेंट, केमिकल और ऑटो सेक्टर पर बुरा असर पड़ेगा क्योंकि इनकी लागत बढ़ जाएगी. दूसरी ओर, तेल निकालने वाली कंपनियों, डिफेंस (रक्षा क्षेत्र) और आईटी सेक्टर को इससे कुछ हद तक फायदा मिल सकता है. निवेशकों को अब क्या करना चाहिए? 2026 में बदलती जियोपॉलिटिक्स को देखते हुए एक्सपर्ट्स की सलाह है कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो को स्ट्रेस-टेस्ट करें. यानी यह मानकर चलें कि तेल 120 डॉलर तक जा सकता है. ऐसे में गोल्ड और रियल एसेट में निवेश करना एक सुरक्षित ऑप्शन हो सकता है. ये भी पढ़ें: Share Market: ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ते ही सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम, करोड़ों की संपत्ति मिनटों में साफ The post स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव, दुनिया भर में तेल का अकाल पड़ने की आशंका appeared first on Naya Vichar.

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US मिलिट्री पावर: ईरान में 1000 ठिकाने तबाह, इन हथियारों से बरसाए बम-बारूद; पूरी लिस्ट

US Weapons used to attack Iran: अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान पर किए गए सैन्य हमलों में कई तरह के आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया. 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया था, जिसे Operation Epic Fury और Operation Roaring Lion नाम दिया है. इसके तहत अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर अटैक किया, जिनमें सुप्रीम लीडर खामेनेई और आईआरजीसी के ऑफिस को निशाना बनाया गया.  इन हमलों में अमेरिका ने नई तकनीक का भी सहारा लिया गया, जिसमें खतरनाक हथियारों से लेकर एआई टेक्निक भी शामिल रही.  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर हमले के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने Anthropic नाम की कंपनी की कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेवाओं का उपयोग किया. इनमें उसके ‘क्लॉड’ नाम के टूल भी शामिल थे. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल युद्ध में किस तरह किया गया. इस मामले में न तो पेंटागन और न ही कंपनी ने कोई आधिकारिक बयान दिया. दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में अमेरिका ने Anthropic को सप्लाई चेन के लिए जोखिम और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से संभावित खतरा बताया था, और इसके बावजूद उसी की तकनीक का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई में किया गया. हवाई हमले और लड़ाकू क्षमता हवाई हमलों के लिए अमेरिका ने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों और बमवर्षकों की तैनाती की. इसमें B-2 स्टील्थ बॉम्बर जैसे लंबी दूरी के स्टील्थ बमवर्षक शामिल रहे, जो गहरे और सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने में सक्षम हैं. इनके साथ F-35 स्टील्थ फाइटर, F-22 स्टील्थ फाइटर, F-18 फाइटर जेट और F-16 फाइटर जेट जैसे तेज़ और बहु-भूमिका वाले विमान भी शामिल थे. जमीन पर सीधे हमलों के लिए A-10 अटैक जेट का इस्तेमाल किया गया, जबकि दुश्मन की रडार और संचार क्षमताओं को कमजोर करने के लिए EA-18G इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट को तैनात किया गया. रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अमेरिका ने अपने B-2 स्टील्थ बॉम्बर विमानों को सीधे अमेरिका से उड़ाकर ईरान के बेहद सुरक्षित और ज़मीन के नीचे बने मिसाइल ठिकानों पर भारी बम गिराए. इन बमों का वजन करीब 2000 पाउंड था. इससे पहले भी जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान ऐसे विमानों का इस्तेमाल किया गया था. Last night, U.S. B-2 stealth bombers, armed with 2,000 lb. bombs, struck Iran’s hardened ballistic missile facilities. No nation should ever doubt America’s resolve. pic.twitter.com/6JpG73lHYW — U.S. Central Command (@CENTCOM) March 1, 2026 ड्रोन, निगरानी और रक्षा प्रणाली हमलों के दौरान निगरानी और सटीक स्ट्राइक के लिए ड्रोन और जासूसी प्लेटफॉर्म अहम भूमिका में रहे. इनमें MQ-9 रीपर ड्रोन और लुकास (LUCAS) ड्रोन शामिल थे, जिनसे लंबी अवधि तक निगरानी और सटीक हमला संभव हुआ. खुफिया जानकारी जुटाने के लिए RC-135 टोही विमान और समुद्री इलाकों की निगरानी के लिए P-8 मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया. हवाई क्षेत्र की निगरानी और कमांड के लिए AWACS तैनात रहे, जबकि सुरक्षा के लिहाज से THAAD, पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम, M-142 HIMARS और काउंटर-ड्रोन सिस्टम का सहारा लिया गया. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ऐसे ड्रोन भी इस्तेमाल किए, जो खुद को निशाने पर टकराकर विस्फोट कर देते हैं. ये ड्रोन दिखने में ईरान के शाहेद ड्रोन जैसे बताए जा रहे हैं. पहली बार US Central Command ने इस तरह के एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन इस्तेमाल करने की पुष्टि की. साथ ही, ईरान पर हमलों में F/A-18 और F-35 लड़ाकू विमानों की तस्वीरें और वीडियो भी जारी किए गए. सेना ने कहा कि हमले अभी भी जारी हैं. नौसैनिक शक्ति और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट समुद्र से संचालन और क्षेत्रीय नियंत्रण के लिए नौसैनिक शक्ति को भी सक्रिय रखा गया. इसमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमान वाहक पोत और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल थे, जिन्हें रिफ्यूलिंग शिप्स से लगातार समर्थन मिला. लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए C-17 ग्लोबमास्टर और C-130 कार्गो विमान का उपयोग किया गया. इसके अलावा, लंबी उड़ानों के दौरान लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन देने के लिए रिफ्यूलिंग टैंकर एयरक्राफ्ट और संपर्क बनाए रखने के लिए एयरबोर्न कम्युनिकेशन रिले तैनात रहे. अमेरिकी नौसेना के जहाज़ों पर लगे एजिस कॉम्बैट सिस्टम से लैस स्टैंडर्ड मिसाइलों का इस्तेमाल समुद्र से आने वाले खतरों को रोकने के लिए किया गया. इन मिसाइलों से खाड़ी क्षेत्र में हवाई सुरक्षा को और मजबूती मिली. USS Gerald R. Ford (CVN 78), the world’s largest aircraft carrier, is in the fight with U.S. forces supporting Operation Epic Fury – launching aircraft from the Eastern Mediterranean Sea. pic.twitter.com/olehL4htW4 — U.S. Central Command (@CENTCOM) March 2, 2026 ये भी पढ़ें:- ईरान के खिलाफ हुए ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी, देंगे US-इजरायल का साथ, यूके पीएम ने दिए अपने मिलिट्री बेस रॉकेट मिसाइल और प्रतिरक्षा Business Insider की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि इस ऑपरेशन में अमेरिका ने कई अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया. इनमें प्रमुख रूप से अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाली टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागीं. ये मिसाइलें समुद्री जहाज़ों, पनडुब्बियों और जमीन से लॉन्च की जा सकती हैं और करीब 1,000 मील दूर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम होती हैं, चाहे दुश्मन की हवाई सुरक्षा कितनी भी मजबूत क्यों न हो.  जमीन पर तैनात अमेरिकी बलों ने HIMARS रॉकेट सिस्टम का उपयोग किया. यह एक हल्का और तेजी से मूव करने वाला मल्टी-रॉकेट लॉन्चर है, जो कम समय में हमला कर तुरंत स्थान बदल सकता है, ताकि जवाबी हमले से बचा जा सके.  ईरान की ओर से आने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए अमेरिका ने पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया. यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्रूज मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है.  टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम (THAAD) का इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके अंतिम चरण में मार गिराने के लिए किया गया. यह छोटी, मध्यम और इंटरमीडिएट रेंज की मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है. U.S. forces are taking bold action to eliminate imminent threats posed by the Iranian regime. Strikes continue. pic.twitter.com/z1x07D7APl — U.S. Central Command (@CENTCOM) March 2, 2026 बातचीत की टेबल पर आ रहा

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Share Market: ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ते ही सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम, करोड़ों की संपत्ति मिनटों में साफ

Share Market : सोमवार को देश के शेयर बाजारों की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया, जिसका सीधा असर बाजार पर दिखा. सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट कारोबार की शुरुआत में Nifty 50 24,659 के स्तर पर खुला, जो 519 अंकों यानी करीब 2% की गिरावट थी. वहीं BSE Sensex 78,512 पर खुला और 2,775 अंक यानी 3.41% टूट गया. इससे साफ है कि बाजार में घबराहट का माहौल बना हुआ है. एक्सपर्ट की राय क्या है ? मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, दुनिया इस समय काफी अनिश्चित दौर से गुजर रही है और बाजार स्थिरता खोजने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर ईरान बातचीत फिर से शुरू करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही जारी रहती है, तो बाजार में सुधार आ सकता है. उन्होंने तीन बड़े खतरे गिनाए. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. खाड़ी देशों में हिंदुस्तान के व्यापार पर असर पड़ सकता है. मिडिल ईस्ट में काम कर रहे करीब 90 लाख हिंदुस्तानीयों पर खतरा बढ़ सकता है. टेक्निकल संकेत क्या कहते हैं ? सेबी रजिस्टर्ड एनालिस्ट सुनील गुर्जर ने बताया कि इंडेक्स 200-EMA के नीचे चला गया है, जो लंबी अवधि की कमजोरी का संकेत है. अगर बाजार इसी स्तर के नीचे बंद होता रहा तो गिरावट और बढ़ सकती है. हालांकि, यहां से मजबूत रिकवरी भी संभव है. सभी सेक्टरों में बिकवाली एनएसई के बड़े इंडेक्स में भी गिरावट रही. निफ्टी 100: 2% से ज्यादा नीचे निफ्टी मिडकैप 100: 3.43% गिरा निफ्टी स्मॉलकैप 100: 3.78% टूटा सेक्टरों की बात करें तो ऑटो, FMCG और IT समेत लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे. सोना-चांदी में तेजी जहां शेयर बाजार गिरा, वहीं सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी में तेजी आई. 24 कैरेट सोना 3% बढ़कर ₹1,67,329 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया. चांदी भी करीब 3.89% बढ़कर ₹2,85,700 प्रति किलो हो गई. एशिया और अमेरिका के बाजार भी कमजोर एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली. जापान, सिंगापुर और हांगकांग के प्रमुख इंडेक्स नीचे रहे. वहीं अमेरिका में भी दबाव दिखा. S&P 500 और Nasdaq Composite में भी गिरावट दर्ज की गई. Also Read: ईरान-इजराइल युद्ध का असर, जानें क्या है आज सोना-चांदी के लेटेस्ट रेट्स The post Share Market: ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ते ही सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम, करोड़ों की संपत्ति मिनटों में साफ appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तान धुआं–धुआं, अफगानिस्तान ने नूर खान एयरबेस को किया टारगेट

Afghanistan-Pakistan War: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया है. पाकिस्तान पर हमले किए गए हैं, लेकिन पाक ने अभी तक अफगानिस्तान के इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है. अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को दावा किया कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए. इनमें रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस भी शामिल है. इससे पहले हिंदुस्तान के Operation Sindoor के दौरान इसे निशाना बनाया गया था. अफगानिस्तान के अनुसार, यह कार्रवाई काबुल और बगराम में हालिया पाकिस्तानी हवाई घुसपैठ के जवाब में की गई. अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी किया है. बयान में कहा गया है कि उसकी वायुसेना ने एक ही अभियान में पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِفَمَنِ اعْتَدَىٰ عَلَيْكُمْ فَاعْتَدُوا عَلَيْهِ بِمِثْلِ مَا اعْتَدَىٰ عَلَيْكُمْ Today, the Air Force of the Ministry of National Defense conducted precise and coordinated aerial operations against key military installations in Pakistan.. pic.twitter.com/i9ctZPxjgK — د ملي دفاع وزارت – وزارت دفاع ملی (@MoDAfghanistan2) March 1, 2026 अफगानिस्तान ने कहां किया टारगेट अफगानिस्तान ने कहा कि हमले के टारगेट में रावलपिंडी स्थित Nur Khan Airbase, बलूचिस्तान के क्वेटा में 12वीं डिवीजन मुख्यालय और खैबर पख्तूनख्वा के मोहम्मद एजेंसी में ख्वाजाई कैंप शामिल हैं. इसके अलावा, बयान में कहा गया कि पाकिस्तान के कई अन्य महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों और कमांड सेंटरों पर भी सटीक कार्रवाई की गई. بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ فَمَنِ اعْتَدَىٰ عَلَيْكُمْ فَاعْتَدُوا عَلَيْهِ بِمِثْلِ مَا اعْتَدَىٰ عَلَيْكُمْ قوای هوایی وزارت دفاع ملی، امروز بار دیگر حملات هوایی مؤثری را بر پایگاه‌های مهم نظامی در پاکستان انجام دادند. این حملات پایگاه نورخان در راولپندی،… pic.twitter.com/KQJL4MJEhE — د ملي دفاع وزارت – وزارت دفاع ملی (@MoDAfghanistan2) March 1, 2026 यह भी पढ़ें : खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में बवाल, अमेरिकी दूतावास में घुसी भीड़, 9 की मौत अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों ने टारगेट किए गए ठिकानों को खासा नुकसान पहुंचा है. अफगानिस्तान ने उन बेस को अपने टारगेट में रखा जहां से हमले किए जा रहे थे. The post पाकिस्तान धुआं–धुआं, अफगानिस्तान ने नूर खान एयरबेस को किया टारगेट appeared first on Naya Vichar.

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ईरान के खिलाफ हुए ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी, देंगे US-इजरायल का साथ, यूके पीएम ने दिए अपने मिलिट्री बेस

Iran Israel War: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के साथ ही अब यूरोप भी जुड़ रहा है. ब्रिटेन समेत फ्रांस और जर्मनी ने रविवार को कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे खाड़ी क्षेत्र में अपने हितों और अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए ईरान के खिलाफ ‘रक्षात्मक कार्रवाई’ करने को तैयार हैं. हालांकि, पहले ब्रिटेन ने अमेरिका का इस युद्ध में किसी तरह की सहायता करने से इनकार किया था, लेकिन बदलती परिस्थिति में अब वह भी साथ आ गया है.  ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के नेताओं ने इस योजना पर एक साझा बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि वे ‘ईरान द्वारा क्षेत्र के देशों पर किए गए अंधाधुंध और असंगत मिसाइल हमलों से स्तब्ध हैं, जिनमें वे देश भी शामिल हैं जो अमेरिका और इजरायल की शुरुआती सैन्य कार्रवाइयों में शामिल नहीं थे. उन्होंने कहा कि ईरान के लापरवाह हमलों ने हमारे करीबी सहयोगियों को निशाना बनाया है और पूरे क्षेत्र में हमारे सैन्य कर्मियों तथा आम नागरिकों के लिए खतरा पैदा किया है.’ उन्होंने आगे कहा कि हम ईरान से अपील करते हैं कि वह तुरंत इन लापरवाह हमलों को रोके. बयान में आगे कहा गया कि हम क्षेत्र में अपने हितों और अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए कदम उठाएंगे,  ताकि ईरान की मिसाइलों और ड्रोन दागने की क्षमता को उनके स्रोत पर ही नष्ट किया जा सके.’ तीनों देशों ने कहा, ‘हमने इस मुद्दे पर अमेरिका और क्षेत्र के सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई है.’ ईरान के हमलों में उत्तरी इराक के एरबिल के पास स्थित एक बहुराष्ट्रीय सैन्य अड्डा और जॉर्डन के पूर्वी हिस्से में जर्मन सेना का एक शिविर प्रभावित हुआ है. जर्मन सेना के एक प्रवक्ता ने मीडिया रिपोर्टों की पुष्टि करते हुए यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इन हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग वहीं, ब्रिटेन ने अमेरिका के उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत अमेरिकी सेना को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि अमेरिका को ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग ईरान के मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने के लिए करने दिया जाएगा, ताकि पूरे क्षेत्र में आगे होने वाले हमलों को रोका जा सके. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान पर हुए शुरुआती अमेरिका-इजरायल हमलों में ब्रिटेन की कोई भूमिका नहीं थी और वह ‘अब किसी भी आक्रामक कार्रवाई में शामिल नहीं होगा.’ स्टारमर ने कहा कि यह कदम ‘सामूहिक आत्मरक्षा’ के सिद्धांत पर आधारित है और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है. साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रशासन अपने कानूनी परामर्श का एक सार सार्वजनिक करेगी. My update on the situation in the Middle East. pic.twitter.com/DvsOVcTDMy — Keir Starmer (@Keir_Starmer) March 1, 2026 BBC की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका जिन ठिकानों का उपयोग कर सकता है, उनमें ग्लॉस्टरशायर स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड और हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया शामिल हैं. इन दोनों ठिकानों का उपयोग पहले भी अमेरिका की लंबी दूरी की बमबारी अभियानों के लिए किया जा चुका है. ट्रंप ने पहले कहा था कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो अमेरिका को इन बेसेज की जरूरत पड़ सकती है.  ये भी पढ़ें:- ईरान में तबाही के बीच अमेरिका में गोलीबारी, 3 की मौत 14 घायल; हमलावर ने ‘पॉपर्टी ऑफ अल्लाह’ वाली हुडी पहनी थी अमेरिका-इजरायल हमले पर ईरान की प्रतिक्रिया अमेरिका और इजरायल ने शनिवार तड़के ईरान पर हमले शुरू किए थे. इसमें ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो चुकी है, साथ ही ईरान में अब तक मरने वालों की संख्या 200 से ज्यादा पहुंच चुकी है. इसके बाद से तेहरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के तहत अमेरिकी ठिकानों और उन देशों पर हमले किए हैं, जहां अमेरिकी सेनाएं तैनात हैं.  इनमें बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक शामिल हैं. इसके साथ ही यरुशलम और तेल अवीव में धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं. इजरायली बचाव सेवाओं के अनुसार, बेत शेमेश शहर में कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई. इसके साथ ही अमेरिका के ऑपरेशन के जवाब में ईरान के हमले में 3 यूएस सैनिक मारे गए हैं, जबकि 5 गंभीर रूप से घायल हुए हैं. ये भी पढ़ें:- क्या खामेनेई को मार के ट्रंप ने बड़ी भूल कर दी? आ सकता है जलजला; 8 पॉइंट्स ईरान ने बदले की खाई है कसम ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने आयातुल्ला खामेनेई की हत्या को ‘मुसलमानों के खिलाफ युद्ध की घोषणा’ करार दिया और चेतावनी दी, ‘ईरान इस ऐतिहासिक अपराध के दोषियों और साजिशकर्ताओं से बदला लेना अपना वैध कर्तव्य और अधिकार मानता है.’ वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को अमेरिकी चैनल एबीसी न्यूज से कहा, ‘हम किसी भी कीमत पर अपनी रक्षा कर रहे हैं और अपने लोगों की सुरक्षा के लिए हमारे लिए कोई सीमा नहीं है.’ हालांकि, ट्रंप ने इसके बाद ईरान को फिर से चेतावनी दी कि अगर ईरान हमला बंद नहीं करता है, तो उसके खिलाफ ऐसा हमला किया जाएगा, जैसा दुनिया में किसी ने नहीं देखा होगा.  The post ईरान के खिलाफ हुए ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी, देंगे US-इजरायल का साथ, यूके पीएम ने दिए अपने मिलिट्री बेस appeared first on Naya Vichar.

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Mahindra XEV 9e Cineluxe Edition: ₹29.35 लाख में मिलेगा स्टाइल और परफॉर्मेंस का पैकेज

इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए Mahindra ने XEV 9e का नया Cineluxe Edition पेश किया है. यह एडिशन सिर्फ एक नया वेरिएंट नहीं, बल्कि स्टाइल और प्रीमियम फील का खास पैकेज है, जो मौजूदा टॉप ट्रिम पर बेस्ड है. 29.35 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा गया यह मॉडल उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर लाया गया है, जो दमदार रेंज के साथ एक्सक्लूसिव लुक भी चाहते हैं. इसकी बुकिंग 2 मार्च से शुरू होगी और डिलीवरी 10 मार्च 2026 से दी जाएगी. आइए जानते हैं कि यह एडिशन स्टैंडर्ड मॉडल से कितना अलग है. स्टाइलिंग में क्या नया? Cineluxe Edition में मैकेनिकल बदलाव नहीं किए गए हैं, लेकिन एक्सटीरियर और इंटीरियर में खास कॉस्मेटिक अपडेट्स दिए गए हैं. एक्सटीरियर में सबसे बड़ा बदलाव इसके दो नए मोनोटोन कलर Satin Black और Satin White ऑप्शन है. Satin Black शेड SUV को बोल्ड और स्टेल्थ लुक देता है, जबकि Satin White कलर के साथ ग्लॉस ब्लैक बॉडी क्लैडिंग इसे और ज्यादा प्रीमियम अपील देती है. इसके अलावा रियर पिलर पर दिया गया ‘Cineluxe’ बैज इस खास एडिशन की अलग पहचान बनाता है. बाकी डिजाइन एलिमेंट्स टॉप Pack Three ट्रिम जैसे ही रखे गए हैं. इसमें 19-इंच अलॉय व्हील्स, फुल-LED हेडलैंप और टेललैंप मिलते हैं, जो इसे मॉडर्न लुक देते हैं. साथ ही पावर्ड टेलगेट जैसी सुविधा रोजमर्रा के इस्तेमाल को और ज्यादा आसान बनाती है. वहीं, Cineluxe Edition के केबिन में प्रीमियम फील को और बेहतर बनाने के लिए Chestnut Brown और Nocturne Black का नया टू-टोन थीम दिया गया है. लेदरैट सीट्स पर ब्राउन स्टिचिंग और डैशबोर्ड व स्टीयरिंग पर कॉन्ट्रास्ट स्टिचिंग इसे एक क्लासी और अपमार्केट लुक देती है. यह कलर कॉम्बिनेशन केबिन को बाकी वेरिएंट्स से अलग पहचान देता है. इसके अलावा इसमें दो-स्पोक स्टीयरिंग व्हील और स्टबी गियर सेलेक्टर जैसे मॉडर्न डिजाइन एलिमेंट्स मिलते हैं, जो इंटीरियर को फ्यूचरिस्टिक टच देते हैं. फीचर्स के मामले में यह वेरिएंट Pack Three ट्रिम जैसा ही फुली-लोडेड है, यानी टेक्नोलॉजी और कम्फर्ट से कोई समझौता नहीं किया गया है. पावरट्रेन और रेंज Cineluxe Edition केवल 79kWh लिथियम-आयन बैटरी पैक के साथ अवेलेबल है, जो इस SUV को दमदार रेंज और परफॉर्मेंस दोनों देता है. कंपनी के मुताबिक यह वेरिएंट करीब 500km की मैक्सिमम रेंज देने में कैपेबल है. हालांकि एक्चुअल टेस्ट में इसकी रेंज लगभग 456km दर्ज की गई है. इसमें रियर-माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 286hp की पावर और 380Nm का टॉर्क जेनरेट करती है. परफॉर्मेंस के लिहाज से यह SUV 0 से 100km प्रति घंटा की रफ्तार सिर्फ 7.45 सेकेंड में पकड़ लेती है, जो इसे अपने सेगमेंट में काफी तेज बनाता है. कीमत 29.35 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर यह वेरिएंट 59kWh Pack Three Select (28.65 लाख रुपये) और 79kWh Pack Three (31.25 लाख रुपये) के बीच में आता है. चार्जर ऑपशंस ऑफिशियली कन्फर्म नहीं किए गए हैं, लेकिन स्टैंडर्ड मॉडल में 7.2kW AC (50,000 रुपये) और 11kW AC (75,000 रुपये) चार्जर का ऑप्शन मिलता है. यह भी पढ़ें: 160hp पावर और लेवल 2 ADAS के साथ आ रही है नई Renault Duster The post Mahindra XEV 9e Cineluxe Edition: ₹29.35 लाख में मिलेगा स्टाइल और परफॉर्मेंस का पैकेज appeared first on Naya Vichar.

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