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April 10, 2026

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Kia Sonet से Scorpio-N तक: हैचबैक से SUV में अपग्रेड करने वालों के लिए टॉप 5 ऑप्शंस

अगर आप हैचबैक से SUV में अपग्रेड करने की सोच रहे हैं, तो हिंदुस्तानीय बाजार में कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं. यहां हम पांच SUVs का जिक्र कर रहे हैं जो अलग-अलग बजट और जरूरतों के हिसाब से परफेक्ट साबित हो सकती हैं. Kia Sonet Kia Sonet उन लोगों के लिए सही विकल्प है जो हैचबैक से ज्यादा बड़ा बदलाव नहीं चाहते. ₹7.30 लाख से शुरू होने वाली इस कॉम्पैक्ट SUV में सनरूफ, वेंटिलेटेड सीट्स, 10.25-इंच इंफोटेनमेंट, डिजिटल क्लस्टर और 360° कैमरा जैसे फीचर्स मिलते हैं. Renault Duster अगर आप ज्यादा रग्ड और प्रीमियम SUV चाहते हैं तो Renault Duster ₹10.49 लाख से शुरू होती है. इसमें पैनोरमिक सनरूफ, डुअल-स्क्रीन डैशबोर्ड, वायरलेस चार्जिंग, PM 2.5 AQI फिल्टर और डुअल-जोन AC जैसे फीचर्स दिये गए हैं. Skoda Kushaq स्पोर्टी ड्राइविंग पसंद करने वालों के लिए Skoda Kushaq ₹10.69 लाख से शुरू होती है. इसमें टर्बो-पेट्रोल इंजन, सिंगल-पेन और पैनोरमिक सनरूफ, वायरलेस चार्जिंग, कूल्ड ग्लवबॉक्स और नया 10.25-इंच इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है. Honda Elevate Honda Elevate ₹11.69 लाख से शुरू होती है और यह ज्यादा स्पेस और आराम चाहने वालों के लिए है. इसमें Honda City वाला भरोसेमंद इंजन, बड़ा बूट स्पेस, 10.25-इंच इंफोटेनमेंट, Honda Sensing ADAS पैकेज और रियर AC वेंट्स दिये गए हैं. Mahindra Scorpio-N अगर आप फुल-साइज SUV चाहते हैं तो Mahindra Scorpio-N ₹13.49 लाख से शुरू होती है. इसमें 4×4 वेरिएंट्स, टर्बो-पेट्रोल और डीजल इंजन, सनरूफ, डुअल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल और 12-स्पीकर Sony ऑडियो सिस्टम जैसे फीचर्स मिलते हैं. यह भी पढ़ें: Fortuner से Brezza तक, हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा रीसेल वैल्यू देने वाली 5 SUVs The post Kia Sonet से Scorpio-N तक: हैचबैक से SUV में अपग्रेड करने वालों के लिए टॉप 5 ऑप्शंस appeared first on Naya Vichar.

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हरिवंश फिर बने राज्यसभा के सदस्य, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया मनोनीत

Harivansh: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति हरिवंश को उच्च सदन का सदस्य मनोनीत किया है. हरिवंश का उच्च सदन के सदस्य के रूप में कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो गया था. उन्हें राज्यसभा का सदस्य उस रिक्ति को भरने के लिए मनोनीत किया गया है, जो हिंदुस्तान के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद उत्पन्न हुई थी. प्रशासन की एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया- हिंदुस्तान के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1) के उपखंड (अ) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा उसी अनुच्छेद के खंड (3) के अनुसार राष्ट्रपति मनोनीत सदस्यों में से एक सदस्य के सेवानिवृत्त होने से उत्पन्न रिक्ति को भरने के लिए हरिवंश को राज्यसभा का सदस्य नामित करके प्रसन्न हैं. हरिवंश बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपने दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं. उन्होंने उच्च सदन के उपसभापति के पद पर भी अपनी सेवाएं दी हैं. इसे भी पढ़ें: नीतीश कुमार: दो दशकों में बदली बिहार की तस्वीर, अब दिल्ली की नई पारी की तैयारीबंगाल में मुस्लिम वोटरों से अधिक कटे गये हिंदू वोटरों के नाम, SIR पर तृणमूल कांग्रेस का नया खुलासा The post हरिवंश फिर बने राज्यसभा के सदस्य, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया मनोनीत appeared first on Naya Vichar.

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भारत-चीन संबंध में सुधार रणनीतिक है

India-China relations : हिंदुस्तान-चीन संबंधों में हाल के महीनों में जो नरमी दिख रही है, वह दोनों देशों के बीच पारस्परिक विश्वास में किसी बुनियादी बदलाव का परिणाम कम और तेजी से विखंडित होती वैश्विक व्यवस्था के दबावों का नतीजा अधिक है. पिछले एक दशक तक दोनों को प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाता रहा, जिनके बीच सीमा विवाद, क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और अलग-अलग रणनीतिक झुकाव जैसे गहरे मतभेद मौजूद थे. वर्ष 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद यह धारणा और मजबूत ही हुई कि दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहेंगे. पर 2025 के बाद के घटनाक्रम बताते हैं कि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं. यह बदलाव इसलिए नहीं है कि उनके मूल विवाद सुलझ गये हैं, बल्कि इसलिए है, क्योंकि वैश्विक परिस्थितियां, खासकर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने सहयोग के लिए एक सीमित, लेकिन महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर दिया है. जिस अमेरिका को हिंदुस्तान लंबे समय तक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता रहा, ट्रंप के नेतृत्व में वह अधिक लेन-देन आधारित और अनिश्चित रुख अपनाता नजर आ रहा है. हिंदुस्तान और चीन पर लगाये गये टैरिफ, खासकर हिंदुस्तानीय निर्यात पर कड़े शुल्क यह दिखाते हैं कि वैश्विक आर्थिक संबंध कितने अस्थिर हैं. चीन के प्रति अमेरिकी नीति में भी उतार-चढ़ाव दिखता है, जहां एक ओर दबाव बनाया जाता है, दूसरी ओर कुछ मामलों में समझौते की गुंजाइश भी रखी जाती है. इस असमान व्यवहार ने हिंदुस्तान को सोचने पर मजबूर किया है कि अमेरिका पर निर्भर रहना रणनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है. इसी परिदृश्य में चीन ने भी तेजी से कूटनीतिक अवसर को भुनाने की कोशिश की है. चीनी नेताओं के बयान इस पर जोर देते हैं कि हिंदुस्तान और चीन के साझा हित उनके मतभेदों से कहीं अधिक हैं. चीन यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि हिंदुस्तान को अमेरिकी नेतृत्व वाले इंडो-पैसिफिक ढांचे, खासकर क्वाड जैसे मंचों के साथ अपने जुड़ाव को संतुलित रखते हुए बीजिंग के साथ सहयोग के रास्ते खुले रखने चाहिए. कुछ ठोस कदम भी इस दिशा में उठाये गये हैं. हिंदुस्तान द्वारा सीमित रूप से चीनी निवेश के लिए नियमों में ढील देना संकेत है कि नयी दिल्ली आर्थिक वास्तविकताओं को समझते हुए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रही है. इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और पूंजीगत वस्तुओं में चीन की भूमिका की अनदेखी करना हिंदुस्तान के लिए संभव नहीं है, खासकर तब, जब वह अपने विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना चाहता है. इसी तरह, दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों का फिर से शुरू होना, पर्यटक वीजा की बहाली और कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनरारंभ दर्शाता है कि दोनों पक्ष संबंधों को सामान्य बनाने के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं. दोनों देश हाल के भू-नेतृत्वक झटकों से उत्पन्न समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता ने दोनों की बाहरी निर्भरता उजागर की है. चीन के लिए खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करना लंबे समय से रणनीतिक प्राथमिकता रही है, जबकि हिंदुस्तान के लिए महंगा तेल महंगाई, मुद्रा दबाव और आर्थिक अस्थिरता का कारण बनता है. ऐसे में, जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं बाधित होती हैं या भुगतान संबंधी समस्याएं सामने आती हैं, तब हिंदुस्तान को अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इन साझा चिंताओं ने दोनों देशों को सीमित सहयोग की ओर प्रेरित किया है. हिंदुस्तान और चीन समझते हैं कि विखंडित वैश्विक व्यवस्था उनके आर्थिक हितों के लिए खतरा है. इसीलिए सीमित स्तर पर सहयोग करना उनके लिए व्यावहारिक बनता जा रहा है. चीन के लिए हिंदुस्तान के साथ संतुलित संबंध बनाये रखना इस बात की गारंटी देता है कि एशिया में उसके खिलाफ एकजुट मोर्चा न बने, जबकि हिंदुस्तान के लिए यह अमेरिका के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाये रखने का एक साधन है. हालांकि, इस नरमी को स्थायी सुधार के रूप में देखना गलत होगा. दोनों देशों के बीच अविश्वास के मूल कारण अब भी मौजूद हैं. सीमा विवाद अब भी अनसुलझा है और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव की आशंका बनी रहती है. ऐसे ही पाकिस्तान के साथ चीन की घनिष्ठता, जिसमें सैन्य और परमाणु सहयोग शामिल है, हिंदुस्तान के लिए चिंता का विषय है. जल संसाधनों, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय प्रभाव से जुड़े मुद्दे भी आपसी अविश्वास बढ़ाते हैं. बहुपक्षीय मंचों पर भी चीन का रवैया कई बार हिंदुस्तान के हितों के अनुरूप नहीं होता. दोनों देशों के बीच शक्ति का असंतुलन भी एक महत्वपूर्ण कारक है. चीन की आर्थिक और तकनीकी क्षमता हिंदुस्तान से अधिक है, जिससे उसे वैश्विक मंचों पर अधिक प्रभाव मिलता है. यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व में चीन और हिंदुस्तान के साथ व्यवहार करने का तरीका अलग-अलग होता है. यह स्थिति हिंदुस्तान के लिए एक चुनौती है, क्योंकि उसे अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाये रखते हुए अपने हितों की रक्षा करनी होती है. नयी दिल्ली ने अब तक इस स्थिति का संतुलित तरीके से सामना किया है. उसने अमेरिका और अन्य साझेदार देशों के साथ अपने संबंधों को कमजोर नहीं किया है, लेकिन साथ ही, चीन के साथ संवाद और सहयोग के रास्ते भी खुले रखे हैं. यह हिंदुस्तान की पारंपरिक रणनीतिक स्वायत्तता की नीति के अनुरूप है, जिसमें किसी एक शक्ति पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए बहुआयामी संबंध बनाये जाते हैं. लेकिन इस नीति को सफल बनाने के लिए हिंदुस्तान को अपनी घरेलू क्षमताओं को भी मजबूत करना होगा, चाहे वह विनिर्माण हो, प्रौद्योगिकी हो या फिर ऊर्जा सुरक्षा. इन दिनों हिंदुस्तान-चीन संबंधों में जो सुधार दिख रहा है, वह अंतत: एक रणनीतिक समायोजन है, न कि स्थायी समाधान. दोनों देश बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार अपने-अपने विकल्प तलाश रहे हैं. सहयोग और प्रतिस्पर्धा का यह मिश्रण भविष्य में भी बना रहेगा, जो इस पर निर्भर करेगा कि दोनों देश अपने मतभेदों को कितनी समझदारी से संभालते हैं और किस हद तक अपने साझा हितों को प्राथमिकता देते हैं. अभी यह कहना उचित होगा कि हिंदुस्तान और चीन पारंपरिक अर्थों में साझेदार नहीं बन रहे, बल्कि अनिश्चित और बदलती विश्व व्यवस्था में अपने हितों को सुरक्षित करने के लिए व्यावहारिक कदम उठा रहे हैं. यह एक सावधानीपूर्ण और सीमित सहयोग है, जो परिस्थितियों के

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बंगाल में मुस्लिम वोटरों से अधिक कटे हिंदू वोटरों के नाम, SIR पर तृणमूल कांग्रेस का नया खुलासा

मुख्य बातें करीब 63 फीसदी हिंदू वोटरों के नाम कटे क्या कहना है तृणमूल प्रवक्ता का क्या कहना है भाजपा प्रवक्ता का SIR in Bengal: कोलकाता. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया में इस बार बंगाल में 91 लाख लोगों के नाम कट चुके हैं. हालांकि निर्वाचन आयोग ने यह जानकारी प्रकाशित नहीं की है कि इसमें कितने हिंदू व मुस्लिमों के नाम हैं. लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि जिनके नाम कटे हैं, उनमें 63 फीसदी हिंदू शामिल हैं. भाजपा ने इस आंकड़े पर सवाल उठाया. भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग ने कोई ऐसा आंकड़ा प्रकाशित नहीं किया है. करीब 63 फीसदी हिंदू वोटरों के नाम कटे तृणमूल के मुताबिक एसआइआर के पहले चरण में जिन 58 लाख लोगों के नाम कटे थे, उसमें 44 लाख हिंदू थे. उस चरण में करीब साढ़े 13 लाख मुस्लिम समुदाय के नाम काटे गये थे. दूसरे चरण में लिस्ट से साढ़े पांच लाख नाम काटे गये थे. इसमें करीब पांच लाख 28 हजार हिंदू थे. करीब 13 हजार मुस्लिम समुदाय के थे. तीसरे चरण में, यानी विचाराधीन श्रेणी में करीब 27 लाख नाम कटे थे. इस चरण में मुस्लिम समुदाय के 17 लाख 50 हजार नाम कटे हैं. तृणमूल का दावा है कि यदि कुल मिलाकर हिसाब किया जाये, तो करीब 63 फीसदी हिंदू व 35 फीसदी मुस्लिम समुदाय के नाम इसमें शामिल हैं. क्या कहना है तृणमूल प्रवक्ता का तृणमूल के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने गुरुवार को बताया कि भाजपा ने घुसपैठिये व रोहिंग्याओं को ढूंढ़ते हुए सबको लाइन में खड़ा कर दिया है. गरीब हिंदुओं को भी इस परेशानी से नहीं बख्शा गया. आंकड़े बताते हैं कि 57 लाख में ज्यादा हिंदू नाम वोटर लिस्ट से हटा दिये गये हैं. अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि कई संगठनों ने एसआइआर सूची को डिजिटाइज किया है. पहले दो चरण में जो नाम कटे थे, बूथ स्तरीय हिसाब हमारे पास है. इन आंकड़ों को पाने के लिए स्पेस रिसर्च की जरूरत नहीं है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें क्या कहना है भाजपा प्रवक्ता का भाजपा प्रवक्ता राजर्षि लाहिड़ी ने तृणमूल के बताये आंकड़ों की असलियत पर कहा कि चुनाव आयोग ने यह जानकारी प्रकाशित नहीं की है. फिर तृणमूल को यह कहां से मिली. क्या तृणमूल के झंडे तले आंदोलन कर रहे बीएलओ ने यह जानकारी तृणमूल को दी? हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने यह साफ तौर पर नहीं बताया कि उसे यह जानकारी कहां से मिली है. Also Read: बांग्ला भाषा को “बांग्लादेशी भाषा” बताने पर भड़की तृणमूल कांग्रेस, बताया बंगाल और बंगाली समाज का अपमान The post बंगाल में मुस्लिम वोटरों से अधिक कटे हिंदू वोटरों के नाम, SIR पर तृणमूल कांग्रेस का नया खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तान के रक्षामंत्री के ‘कैंसर’ वाले बयान से भड़का इजराइल, पीएम नेतन्याहू ने दिया जवाब

Iran US Ceasefire: इजराइल ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है. इजराइलन ने उनके बयान की निंदा करते हुए पाकिस्तान के तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका पर भी संदेह जताया है. इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा- पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का इजराइल के विनाश का आह्वान बेहद आपत्तिजनक है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा- यह ऐसा बयान नहीं है जिसे किसी भी प्रशासन से बर्दाश्त किया जा सके, खासकर ऐसी प्रशासन से जो शांति के लिए स्वयं के एक निष्पक्ष मध्यस्थ होने का दावा करती है. इजराइलन के विदेश मंत्री ने की बयान की निंदा इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सआर ने भी आसिफ की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि शांति में मध्यस्थता का दावा करने वाली प्रशासन की ओर से यह खुला यहूदी-विरोधी और घोर मिथ्या आरोप है. सआर ने कहा- इजराइल उन आतंकवादियों के खिलाफ अपनी रक्षा करेगा जो उसके विनाश की कसम खाते हैं. ‼️🇵🇰 UNREAL:Israel slams Pakistan after Defense Minister Khawaja Asif calls Israel “evil and a curse for humanity,” “cancerous,” and says he hopes those who created it “burn in hell.” PM Benjamin Netanyahu’s office: “call for Israel’s annihilation is outrageous.” FM Gideon… pic.twitter.com/iAQZfBpd4H — Mossad Commentary (@MOSSADil) April 9, 2026 आसिफ ने इजराइल को मानवता के लिए अभिशाप बताया पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया एक्स पर अपने पोस्ट में इजराइल को बुरा और मानवता के लिए अभिशाप बताया था. आसिफ ने यह भी कहा- इस्लामाबाद में शांति वार्ता जारी है जबकि लेबनान में नरसंहार किया जा रहा है. उन्होंने कहा- निर्दोष नागरिकों को इजराइल मार रहा है. पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में रक्तपात बेरोकटोक जारी है. उन्होंने कहा- मैं आशा और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फलस्तीनी जमीन पर इस कैंसर जैसे देश को बनाया, वे नरक में जलें. पाकिस्तान में हो सकता है ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पाकिस्तान और इजराइल के बीच बयानों की जंग ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी-ईरान के बीच 14 दिन का सीजफायर हुआ है. दोनों देश पाकिस्तान में शांति समझौते के लिए बातचीत कर सकते हैं. The post पाकिस्तान के रक्षामंत्री के ‘कैंसर’ वाले बयान से भड़का इजराइल, पीएम नेतन्याहू ने दिया जवाब appeared first on Naya Vichar.

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शुरुआती गिरावट के बाद सोने में तेजी, 1.51 लाख के करीब पहुंचा वायदा भाव

Gold-Silver Price: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का वायदा भाव आज मामूली बढ़त के साथ ₹1,53,500 प्रति 10 ग्राम पर दिखा, जबकि सर्राफा बाजार में दिल्ली जैसे शहरों में कीमतों में ₹1,500 की कमी दर्ज की गई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया के हालात और अमेरिकी महंगाई दर (CPI) के आंकड़ों का असर कीमतों पर बना रहेगा. IBJA: कैरेट के हिसाब से आज का भाव (10 अप्रैल, सुबह) शुद्धता (कैरेट) भाव (प्रति 10 ग्राम) सोना 24 कैरेट ₹1,49,937 सोना 23 कैरेट ₹1,49,337 सोना 22 कैरेट ₹1,37,342 सोना 18 कैरेट ₹1,12,453 सोना 14 कैरेट ₹87,713 शहरों के अनुसार सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) शहर 24 कैरेट (10 ग्राम) 22 कैरेट (10 ग्राम) 18 कैरेट (10 ग्राम) दिल्ली ₹1,51,630 ₹1,39,000 ₹1,13,760 मुंबई/कोलकाता ₹1,51,480 ₹1,38,850 ₹1,13,610 चेन्नई ₹1,52,730 ₹1,40,000 ₹1,16,500 पटना/अहमदाबाद ₹1,51,530 ₹1,38,900 ₹1,13,660 लखनऊ/अयोध्या ₹1,51,630 ₹1,39,000 ₹1,13,760 एक्सपर्ट्स की राय और भविष्य के संकेत अनिश्चितता का असर: एचडीएफसी सिक्योरिटीज के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों की आवाजाही रुकने और छिटपुट लड़ाई की समाचारों ने निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया है. अमेरिकी सीपीआई (CPI): मिराए एसेट शेयरखान के विशेषज्ञों का मानना है कि शुक्रवार को जारी होने वाले अमेरिकी महंगाई के आंकड़े सोने की अगली दिशा तय करेंगे. बड़ी भविष्यवाणी: कॉमोडिटी विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी बाजार में सोना जल्द ही $5,000 प्रति औंस के पार जा सकता है. Also Read :रिटायरमेंट फंड को करें दोगुना, मैच्योरिटी के बाद ऐसे जारी रखें अपना PPF खाता The post शुरुआती गिरावट के बाद सोने में तेजी, 1.51 लाख के करीब पहुंचा वायदा भाव appeared first on Naya Vichar.

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मोहिनी एकादशी 2026 कब मनाई जाएगी? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Mohini Ekadashi 2026: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश को असुरों से बचाने के लिए ‘मोहिनी’ रूप धारण किया था. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने और विधि-पूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. मोहिनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेंगे: मोहिनी एकादशी तिथि: 27 अप्रैल 2026, सोमवार एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 अप्रैल 2026 को शाम 06:06 बजे से एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल 2026 को शाम 06:15 बजे तक पारण (व्रत तोड़ने का समय): 28 अप्रैल 2026 को सुबह 05:43 से 08:21 के बीच पूजा विधि मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के ‘मोहिनी’ स्वरूप की पूजा की जाती है. इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र पहनें. मंदिर के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. भगवान को पीले फूल, पंचामृत, चंदन, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें. भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, इसलिए भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें. ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें, पहले से टूटे हुए पत्तों का प्रयोग करें. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें. मोहिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें और अंत में आरती करें. एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए; भगवान के भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना श्रेष्ठ माना जाता है. मोहिनी एकादशी का महत्व शास्त्रों के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मोह-माया के बंधनों से मुक्ति मिलती है. यह व्रत जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों को नष्ट करने वाला माना गया है. इसके अलावा, मान्यता है कि जो व्यक्ति विधि-विधान से यह व्रत रखता है, उसे मृत्यु के पश्चात वैकुंठ धाम में स्थान मिलता है. यहां पढ़ें धर्म से जुड़ी बड़ी समाचारें: Religion News in Hindi – Spiritual News, Hindi Religion News, Today Panchang, Astrology at Naya Vichar The post मोहिनी एकादशी 2026 कब मनाई जाएगी? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि appeared first on Naya Vichar.

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घर पर झटपट तरीके से बनाए ये 10 जादुई मसाले, हर खाने का स्वाद करे दोगुना 

Cooking Tips: घर में बने मसाले खाने के स्वाद और खुशबू को कई गुना बढ़ा देते हैं. आजकल लोग बाजार के तैयार मसालों की जगह खुद के बनाए हुए मसाला मिक्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं क्योंकि ये शुद्ध, ताजे और सेहत के लिए बेहतर होते हैं. अलग-अलग डिश के लिए खास मसाला ब्लेंड जैसे चाट मसाला, गरम मसाला, तंदूरी मसाला और पाव भाजी मसाला खाने में जादुई स्वाद जोड़ते हैं. इन मसालों को घर पर बनाकर आप न सिर्फ अपने खाने को टेस्टी बना सकते हैं, बल्कि इसमें मौजूद साफ चीजों से परिवार की सेहत का भी ध्यान रख सकते हैं. ये हैं वो 10 जादुई मसालें चाट मसाला ट्विस्ट – यह मसाला सूखा आमचूर, काला नमक, भुना जीरा पाउडर, हींग और हल्की मिर्च पाउडर से बनाया जाता है. इसका स्वाद खट्टा-तीखा होता है जो चाट, फल और सलाद में डाला जाता है. गरम मसाला ब्लेंड – इसमें दालचीनी, लौंग, इलायची, काली मिर्च और जायफल जैसे मसालों को सुखाकर पीसा जाता है. यह सब्जियों और दालों में खुशबू और गहराई लाता है. तंदूरी मसाला स्टाइल – इसमें लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी, लहसुन पाउडर और कसूरी मेथी मिलाई जाती है. यह ग्रिल और रोस्टेड फूड को स्मोकी स्वाद देता है. पाव भाजी मसाला मिक्स – इसमें धनिया, जीरा, सौंफ, लाल मिर्च, अमचूर और काली मिर्च का मिश्रण होता है. यह स्ट्रीट-स्टाइल स्वाद देता है. चिकन/पनीर टिक्का मसाला – इसमें दही, लाल मिर्च, गरम मसाला, कसूरी मेथी और चाट मसाला मिलाया जाता है. यह स्मोकी और मसालेदार स्वाद देता है. अचार मसाला मिक्स – इसमें सरसों के बीज, मेथी दाना, सौंफ, हल्दी और लाल मिर्च मिलाई जाती है. यह तीखा और लंबे समय तक टिकने वाला स्वाद देता है. सब्जी मसाला ब्लेंड – इसमें धनिया, जीरा, हल्दी, लाल मिर्च और गरम मसाला मिलाकर तैयार किया जाता है. यह रोज की सब्जियों को खास बनाता है. फिश मसाला स्टाइल – इसमें हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, अदरक-लहसुन पेस्ट और काली मिर्च का उपयोग होता है. यह हल्का तीखा और सुगंधित स्वाद देता है. कढ़ी मसाला ट्विस्ट – इसमें जीरा, हल्दी, धनिया और हींग का मिश्रण होता है जो कढ़ी को देसी रेस्टोरेंट जैसा स्वाद देता है. सूप मसाला मिक्स – इसमें काली मिर्च, अजवाइन, हल्का नमक, सूखा अदरक और हर्ब्स मिलाए जाते हैं. यह हल्का, हेल्दी और फ्लेवरफुल स्वाद देता है. यह भी पढ़ें: जल्दबाजी में खाना बनाते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रही हैं ये गलतियां? स्वाद के साथ सेहत को भी हो सकता है भारी नुकसान यह भी पढ़ें: किचन में घंटों बिताने के बाद भी काम खत्म नहीं होता? ये आसान हैक्स बदल देंगे आपकी जिंदगी The post घर पर झटपट तरीके से बनाए ये 10 जादुई मसाले, हर खाने का स्वाद करे दोगुना  appeared first on Naya Vichar.

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घर पर ऐसे करें वॉशिंग मशीन की डीप क्लीनिंग, मशीन रहेगी नई जैसी

Washing Machine Cleaning Tips:  वॉशिंग मशीन की रेगुलर सफाई बहुत जरूरी है क्योंकि इससे मशीन की काम करने की क्षमता बनी रहती है और कपड़े भी साफ और ताजे निकलते हैं. समय के साथ मशीन के ड्रम, रबर गैस्केट और डिटर्जेंट ट्रे में गंदगी, डिटर्जेंट के अवशेष और फंगस जमा हो जाते हैं, जिससे बदबू और बैक्टीरिया पैदा हो सकते हैं. अगर मशीन की सफाई समय-समय पर न की जाए तो उसकी उम्र भी कम हो सकती है. इसलिए हर कुछ हफ्तों में घरेलू उपायों से या सही तरीके से मशीन की डीप क्लीनिंग करना जरूरी है. इससे न सिर्फ मशीन बेहतर चलती है बल्कि कपड़े भी ज्यादा स्वच्छ और सुरक्षित रहते हैं. 1. सिरका और बेकिंग सोडा से डीप क्लीनिंग ड्रम में 1 कप सफेद सिरका और आधा कप बेकिंग सोडा डालकर मशीन को खाली रखें और गर्म पानी पर पूरा साइकिल चलाएं. इससे मशीन के अंदर जमी गंदगी, बदबू और डिटर्जेंट के अवशेष आसानी से निकल जाते हैं और मशीन साफ हो जाती है. 2. डिटर्जेंट ट्रे की गहरी सफाई डिटर्जेंट और सॉफ्टनर डालने वाली ट्रे को बाहर निकालकर गर्म पानी में भिगोएं. फिर ब्रश की मदद से अच्छे से रगड़कर साफ करें. इस जगह पर अक्सर फंगस और चिपचिपा मैल जम जाता है, इसलिए इसे नियमित साफ करना जरूरी है. 3. ड्रम और रबर गैस्केट की सफाई मशीन के दरवाजे के रबर गैस्केट में बाल, धूल और गंदगी फंस जाती है. इसे मुलायम कपड़े और हल्के साबुन के घोल से अच्छे से पोंछें. इससे बदबू और बैक्टीरिया बनने से रोका जा सकता है. 4. हॉट वॉटर साइकिल का उपयोग करें महीने में कम से कम एक बार मशीन को बिना कपड़ों के सिर्फ गर्म पानी पर चलाएं. यह तरीका अंदर की चिकनाई, साबुन के अवशेष और बैक्टीरिया को खत्म करने में बहुत मदद करता है और मशीन को लंबे समय तक ठीक रखता है. 5. फिल्टर की नियमित सफाई मशीन के नीचे लगे फिल्टर को समय-समय पर निकालकर साफ करें. इसमें अक्सर धागे, कचरा और छोटे कण फंस जाते हैं, जिससे पानी की निकासी रुक सकती है. साफ फिल्टर मशीन की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए रखता है. The post घर पर ऐसे करें वॉशिंग मशीन की डीप क्लीनिंग, मशीन रहेगी नई जैसी appeared first on Naya Vichar.

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नीतीश कुमार: दो दशकों में बदली बिहार की तस्वीर, अब दिल्ली की नई पारी की तैयारी

Nitish Kumar: बिहार की नेतृत्व में एक युग का अंत हो रहा है और साथ ही एक नए अध्याय की शुरुआत भी. करीब दो दशकों तक मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने बिहार के सामाजिक जीवन में नेतृत्वक संस्कॄति के एक नए दौर की शुरुआत की कोशिश की, जिसमें बड़बोलापन और अहंकार से मुक्त होकर मौन का सारांश स्थापित किया. नेतृत्व की आक्रामक शैली के स्थान पर समन्वय के युग का श्रीगणेश किया. करीब 19 साल और 236 दिनों तक बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले नीतीश कुमार अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं. उनके शासन का मूलमंत्र हमेशा ‘विकास के साथ न्याय’ और ‘सुशासन’ रहा. सादगी और ईमानदारी को अपनी ढाल बनाकर उन्होंने न केवल राज्य की तस्वीर बदली, बल्कि हिंदुस्तानीय नेतृत्व में अपनी एक ऐसी धवल छवि बनाई जिसे उनके विरोधी भी सम्मान की नजर से देखते हैं. बेपटरी बिहार को फिर से ट्रैक पर लाए नीतीश नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने वह बदलाव देखे जो कभी असंभव माने जाते थे. जिस राज्य में शाम ढलते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था, वहां उन्होंने चकाचक सड़कों का जाल बिछाया और राजधानी पटना से बिहार के किसी भी कोने तक पहुंचने का समय तय कर दिया. शिक्षा के क्षेत्र में उनकी ‘साइकिल योजना’ ने न केवल बेटियों को स्कूल तक पहुंचाया, बल्कि पूरे देश के लिए एक नजीर पेश की. स्वास्थ्य सेवाओं का आलम यह था कि अस्पतालों के किवाड़ तक उखड़े हुए थे, लेकिन नीतीश कुमार ने व्यवस्था को दुरुस्त कर मरीजों का भरोसा प्रशासनी तंत्र पर वापस कायम किया. बिजली के क्षेत्र में उन्होंने जो क्रांति की, उसी का नतीजा है कि आज गांवों में भी 22 से 24 घंटे बिजली मिल रही है. संसदीय जीवन के 41 साल और रिकॉर्ड 10 बार शपथ नीतीश कुमार का राजनैतिक जीवन संघर्षों और उपलब्धियों से भरा रहा है. 1985 में पहली बार विधायक बनने से लेकर 6 बार लोकसभा सांसद और फिर रिकॉर्ड 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले वे देश के पहले राजनेता बने. उन्होंने संसदीय लोकतंत्र के चारों सदनों—लोकसभा, विधानसभा, विधान परिषद और अब राज्यसभा का हिस्सा बनकर अपनी संसदीय यात्रा को पूर्णता दी है. उनके कार्यकाल में शराबबंदी और पंचायती राज संस्थाओं में स्त्रीओं को 50 प्रतिशत आरक्षण जैसे कड़े और क्रांतिकारी फैसलों ने उन्हें समाज सुधारक नेता के रूप में स्थापित किया. आने वाली प्रशासन के लिए ‘बड़ी लकीर’ की चुनौती अब जब नीतीश कुमार विदा ले रहे हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके द्वारा खींची गई विकास की इस लंबी लकीर को आगे कौन बढ़ाएगा. एनडीए के नेताओं का मानना है कि नई प्रशासन भी उनके मार्गदर्शन में ही चलेगी, लेकिन बिहार को जिस ऊंचाई पर नीतीश ने पहुंचाया है, उसे बरकरार रखना आने वाले नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. विपक्ष हो या पक्ष, आज हर कोई यह स्वीकार कर रहा है कि नीतीश कुमार ने नेतृत्व को सेवा और जिम्मेदारी के रूप में परिभाषित किया है. बिहार के विकास की जो इबारत उन्होंने लिखी है, वह इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगी. Also Read: शराबबंदी, आरक्षण समेत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 10 यादगार फैसले, जिसने बिहार को दी नई राह The post नीतीश कुमार: दो दशकों में बदली बिहार की तस्वीर, अब दिल्ली की नई पारी की तैयारी appeared first on Naya Vichar.

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