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June 10, 2026

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सतीश शाह को मरणोपरांत मिलेगा पद्म श्री, भावुक हुईं रुपाली गांगुली बोलीं- काश वो खुद ये सम्मान ले पाते

Satish Shah: हिंदुस्तानीय सिनेमा और टेलीविजन जगत के दिग्गज अभिनेता सतीश शाह को मरणोपरांत पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. यह घोषणा होने के बाद उनके चाहने वालों और इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकारों ने खुशी के साथ भावुक प्रतिक्रियाएं भी दी हैं. अभिनेता के साथ लंबे समय तक काम कर चुकीं टीवी स्टार रुपाली गांगुली ने भी इस समाचार पर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं. सतीश शाह को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान गृह मंत्रालय द्वारा पद्म पुरस्कारों की सूची जारी किए जाने के बाद यह जानकारी सामने आई कि दिवंगत अभिनेता सतीश शाह को कला और मनोरंजन जगत में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा. सतीश शाह ने अपने करियर में फिल्मों, टेलीविजन और थिएटर तीनों माध्यमों में उल्लेखनीय काम किया था. अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, दमदार अभिनय और यादगार किरदारों की बदौलत उन्होंने चार दशक से अधिक समय तक दर्शकों का मनोरंजन किया. उनके अभिनय का प्रभाव कई पीढ़ियों तक देखने को मिला और यही वजह है कि आज भी उनके किरदार लोगों की यादों में बसे हुए हैं. रुपाली गांगुली हुईं भावुक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से सतीश शाह के योगदान को याद करते हुए एक पोस्ट साझा किया गया था. इस पोस्ट में उनके लंबे करियर, कला के प्रति समर्पण और युवा कलाकारों के मार्गदर्शन का जिक्र किया गया. Wish he could have received this honour himself …. https://t.co/c3fPnERcnu — Rupali Ganguly (@TheRupali) June 9, 2026 इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रुपाली गांगुली ने भावुक शब्दों में लिखा कि काश सतीश शाह खुद यह सम्मान प्राप्त करने के लिए मौजूद होते. उनके इस छोटे से संदेश ने फैंस को भी भावुक कर दिया. ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ से जुड़ा था खास रिश्ता रुपाली गांगुली और सतीश शाह ने लोकप्रिय टीवी शो Sarabhai vs Sarabhai में साथ काम किया था. शो में दोनों के किरदारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया था. रुपाली कई मौकों पर सतीश शाह को अपना मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत बता चुकी हैं. उनके निधन के बाद भी वह अक्सर उन्हें याद करती नजर आती हैं. 23 जून को होगा सम्मान समारोह राष्ट्रपति Droupadi Murmu 23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले सिविल इन्वेस्टिचर समारोह में पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी. इसी समारोह में सतीश शाह को मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा. इसके अलावा अभिनेता R. Madhavan और सुपरस्टार Mammootty को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा. यह भी पढ़ें: राम चरण की ‘पेद्दी’ की कमाई पर लगा ब्रेक, मंगलवार को सिंगल डिजिट में सिमटी फिल्म The post सतीश शाह को मरणोपरांत मिलेगा पद्म श्री, भावुक हुईं रुपाली गांगुली बोलीं- काश वो खुद ये सम्मान ले पाते appeared first on Naya Vichar.

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4399 दिन… पीछे छूटे नेहरू, नरेंद्र मोदी बने भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री

Modi Surpass Nehru PM of India: हिंदुस्तानीय नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक और बड़ा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है. लगातार तीसरी बार देश की सत्ता संभाल रहे नरेंद्र मोदी अब हिंदुस्तान के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं. इस उपलब्धि के साथ उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. प्रधानमंत्री मोदी का लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल अब 4,399 दिनों तक पहुंच चुका है, जबकि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,398 दिनों तक देश का नेतृत्व किया था. 2014 में शुरू हुआ सफर नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को हिंदुस्तान के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. उस समय हिंदुस्तानीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया था और मोदी देश के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता बने थे जिन्होंने अपने दम पर पूर्ण बहुमत वाली प्रशासन का नेतृत्व किया. इसके बाद उन्होंने 2019 में दूसरी बार और 2024 में लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. लगातार तीन आम चुनाव जीतकर सत्ता में वापसी करना भी हिंदुस्तानीय नेतृत्व में बेहद दुर्लभ उपलब्धि माना जाता है. टूटा जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र हिंदुस्तान में पहले आम चुनाव के बाद 13 मई 1952 को निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. वह 27 मई 1964 तक इस पद पर बने रहे. इस दौरान उनका कुल कार्यकाल 4,398 दिनों का रहा. अब नरेंद्र मोदी ने 4,399 दिनों का लगातार कार्यकाल पूरा कर इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. वह देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने वाले नेता बन गए हैं. हालांकि, जवाहर लाल नेहरू 15 अगस्त 1947 को देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे. लेकिन उस समय वह चुनकर नहीं आए थे. उन्हें सर्वसम्मति से इस पद पर नियुक्त किया गया था. अगर उनके 1947 से 1964 तक के कार्यकाल को जोड़ दें, तो यह 6 वर्ष और 286 दिन यानी 6,130 दिन होता है. गुजरात से दिल्ली तक का सफर नरेंद्र मोदी का नेतृत्वक सफर राष्ट्रीय नेतृत्व में आने से पहले गुजरात से शुरू हुआ था. उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी और 21 मई 2014 तक इस पद पर बने रहे. करीब 13 साल से अधिक समय तक गुजरात का नेतृत्व करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व में कदम रखा और प्रधानमंत्री बने. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल राज्य के इतिहास में सबसे लंबा रहा है. नागरकोल में जनसभा के दौरान पीएम मोदी. फोटो- एक्स. 25वें साल में पहुंचा नेतृत्व का सफर प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का कुल नेतृत्वकाल अब 8,931 दिनों तक पहुंच गया है. इसके साथ ही उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने 8,930 दिनों तक प्रशासन का नेतृत्व किया था. इस उपलब्धि के साथ मोदी अब हिंदुस्तान में किसी निर्वाचित प्रशासन के सबसे लंबे समय तक प्रमुख रहने वाले नेता बन गए हैं. उनका यह नेतृत्वक सफर अब 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. कई रिकॉर्ड पहले भी बना चुके हैं मोदी नरेंद्र मोदी के नाम पहले से ही कई महत्वपूर्ण नेतृत्वक उपलब्धियां दर्ज हैं. वह हिंदुस्तान के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म देश की स्वतंत्रता के बाद हुआ. इसके अलावा वह पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लगातार दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए और फिर तीसरे कार्यकाल के लिए भी सत्ता में वापसी की. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल कर अपनी नेतृत्वक पकड़ और जनसमर्थन को भी साबित किया है. बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान झालमुड़ी खाते पीएम मोदी. फोटो- एक्स. सोशल मीडिया पर भी कायम है दबदबा नेतृत्वक रिकॉर्ड्स के अलावा प्रधानमंत्री मोदी डिजिटल दुनिया में भी लगातार नए मुकाम हासिल कर रहे हैं. इसी महीने उनके यूट्यूब चैनल ने 3 करोड़ सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार किया है. इसके साथ ही वह दुनिया के मौजूदा और पूर्व राष्ट्राध्यक्षों तथा प्रशासन प्रमुखों में सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर्स वाले नेताओं में शामिल हो गए हैं. फरवरी 2025 में उन्होंने इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ फॉलोअर्स का आंकड़ा भी पार किया था. ऐसा करने वाले वह दुनिया के पहले कार्यरत राष्ट्र प्रमुख और राजनेता बने. फिलहाल इंस्टाग्राम पर उनके 10.1 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं. वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी के 10.64 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं. ये भी पढ़ें:- ‘हमें कांग्रेस के लोगों ने ही जानकारी दी होगी…’ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर बोले कैलाश विजयवर्गीय ये भी पढ़ें:- ममता बनर्जी के चारों ओर सन्नाटा! फोन बंद, चेहरे गायब, दीदी के सबसे करीबी सांसदों ने संकट में मुंह फेरा पीएम मोदी के 12 साल: प्रमुख उपलब्धियां एक नजर में आर्थिक और वैश्विक स्तर पर हिंदुस्तान दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वित्तीय स्थिति बना. जीडीपी लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 4.18 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हुई. कारोबार को आसान बनाने और निवेश बढ़ाने पर जोर. डिजिटल वित्तीय स्थिति और यूपीआई को वैश्विक पहचान मिली. जनकल्याण और सामाजिक योजनाएं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन. प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 58 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते. आयुष्मान हिंदुस्तान योजना के जरिए करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों परिवारों को पक्के घर. जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल पहुंचाने का अभियान. स्वच्छता अभियान के तहत देश भर में सफाई अभियान के साथ ओडीएफ का सफल प्रतिपादन. नेतृत्वक और संवैधानिक फैसले जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया. तीन तलाक कानून लागू किया गया. नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित किया गया. नए संसद भवन का निर्माण और उद्घाटन. सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया गया. बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी एक्सप्रेसवे, हाईवे और रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार. वंदे हिंदुस्तान ट्रेनों की शुरुआत. कई नए एयरपोर्ट और बंदरगाह परियोजनाएं शुरू हुईं. गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान लागू किया गया. रक्षा और सुरक्षा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर. राफेल लड़ाकू विमान हिंदुस्तानीय

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पान के पत्ते के ये आसान उपाय बदल सकते हैं किस्मत! वास्तु दोष से लेकर धन लाभ तक माने जाते हैं प्रभावी

Betel Leaf Remedies: हिंदू धर्म में पान के पत्ते को शुभता, समृद्धि और मांगलिक कार्यों का प्रतीक माना जाता है. पूजा-पाठ, कलश स्थापना, विवाह और देवी-देवताओं के पूजन में इसका विशेष महत्व बताया गया है. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में पान के पत्ते का संबंध बुध और शुक्र ग्रह से माना जाता है, जो बुद्धि, संवाद कौशल, सुख-सुविधा और वैभव के कारक माने जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पान के पत्ते से जुड़े कुछ उपाय जीवन की बाधाओं को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं. अटके हुए कार्यों के लिए करें यह उपाय यदि किसी कारणवश आपके महत्वपूर्ण कार्य लंबे समय से पूरे नहीं हो पा रहे हैं या बार-बार रुकावटें आ रही हैं, तो शुक्रवार या रविवार के दिन यह उपाय किया जा सकता है. मान्यता है कि पान के पत्ते पर थोड़ा सफेद चूना लगाकर उसे घर के मुख्य द्वार के पास ऐसी जगह रख दें, जहां किसी की नजर न पड़े. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और कार्यों में आने वाली बाधाओं को कम करने में सहायक माना जाता है. व्यापार में उन्नति के लिए पान की माला व्यापार में मंदी, नुकसान या कामकाज में रुकावट महसूस होने पर पान के पत्तों का यह पारंपरिक उपाय किया जाता है. शनिवार के दिन पांच अखंडित और ताजे पान के पत्ते लेकर उन्हें धागे में पिरोकर माला बनाएं. इस माला को दुकान या कार्यालय के मुख्य द्वार की पूर्व दिशा में टांग दें. पत्ते सूख जाने पर उन्हें सम्मानपूर्वक बहते जल में प्रवाहित कर नए पत्तों की माला लगा सकते हैं. ये भी पढ़ें: सूर्यास्त के बाद क्यों नहीं किए जाते ये सारे काम? जानिए धार्मिक मान्यताओं से जुड़े नियम आर्थिक समृद्धि के लिए करें यह उपाय धन-संपत्ति और आर्थिक स्थिरता की कामना रखने वाले लोग शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को गुलकंद युक्त पान अर्पित कर सकते हैं. इसके बाद एक अन्य पान के पत्ते के चिकने भाग पर थोड़ा सिंदूर लगाकर उसे तिजोरी, लॉकर या धन रखने के स्थान पर रखें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह उपाय आर्थिक खुशहाली और लक्ष्मी कृपा का प्रतीक माना जाता है. ध्यान रखें ये सभी उपाय ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इनके परिणाम व्यक्ति की आस्था और विश्वास से जुड़े हो सकते हैं. जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक प्रयासों और उचित वित्तीय योजना को भी समान महत्व देना चाहिए. The post पान के पत्ते के ये आसान उपाय बदल सकते हैं किस्मत! वास्तु दोष से लेकर धन लाभ तक माने जाते हैं प्रभावी appeared first on Naya Vichar.

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फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिका की मनमानी, रेफरी और ईरानी समर्थकों पर लगा बैन

FIFA WORLD CUP 2026: स्पोर्ट्स जगत के सबसे बड़े महाकुंभ ‘फीफा वर्ल्ड कप 2026’ की शुरुआत आगामी 11 जून से होने जा रही है. अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट को लेकर फैंस में उत्साह से ज्यादा अब बेचैनी का माहौल है. विवादों का मुख्य केंद्र सबसे बड़ा मेजबान अमेरिका बना हुआ है, जहां ट्रम्प प्रशासन की सख्त वीजा नीतियों के कारण गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक पहले ईरान फुटबॉल टीम, उनके अधिकारियों और समर्थकों को वीजा प्रक्रियाओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. इतना ही नहीं, सुरक्षा और कड़े नियमों का हवाला देकर कई अन्य देशों के खिलाड़ियों, दर्शकों और मीडियाकर्मियों को भी एंट्री देने से रोका जा रहा है, जिससे इस वैश्विक आयोजन के स्पोर्ट्स भावना पर असर पड़ने की आशंका है. सिर्फ ‘मैच डे’ की अनुमति 11 जून से शुरू हो रहे फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिका की सख्त वीजा और प्रशासनिक नीतियों ने विवाद को चरम पर पहुंचा दिया है. सबसे बड़ा झटका ईरान के फुटबॉल प्रशंसकों को लगा है, जिनके टिकट टूर्नामेंट से ठीक पहले रद्द कर दिए गए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच जारी नेतृत्वक गतिरोध के कारण ईरानी टीम को भी सख्त प्रतिबंधों के बीच स्पोर्ट्सना होगा. शेड्यूल के मुताबिक ईरान को अपने तीनों ग्रुप मैच अमेरिका में स्पोर्ट्सने हैं, लेकिन कड़े नियमों के चलते टीम वहां रुक नहीं सकती. वे मैच से चंद घंटे पहले अमेरिका पहुंचेंगे और स्पोर्ट्स खत्म होते ही तुरंत अपने मेक्सिको स्थित बेस कैंप लौट जाएंगे. कूटनीतिक तनातनी के कारण उपजे इन हालातों ने खिलाड़ियों और फुटबॉल प्रेमियों दोनों को बड़ी मायूसी दी है. फेडरेशन चीफ मेहदी ताज का वीजा भी खारिज फीफा वर्ल्ड कप 2026 के शुरू होने से पहले मेजबान अमेरिका और ईरान के बीच का विवाद अब पूरी तरह सामने आ चुका है. ईरान फुटबॉल फेडरेशन ने 9 जून को आधिकारिक तौर पर बताया कि अमेरिका ने उनके दर्शकों के लिए आवंटित ग्रुप स्टेज के टिकटों को रद्द कर दिया है. नियमों के तहत मिलने वाले 8% टिकटों के निरस्त होने से ईरानी फैंस अब अपनी टीम की हौसलाअफजाई नहीं कर सकेंगे. फेडरेशन ने इसे नेतृत्वक द्वेष का हिस्सा बताते हुए कहा कि इससे पहले महासंघ के अध्यक्ष मेहदी ताज, मेडिकल टीम और तकनीकी स्टाफ समेत करीब 12 अधिकारियों को भी आखिरी समय पर अमेरिकी वीजा देने से मना कर दिया गया था. सोमाली रेफरी ओमर अर्टान को एयरपोर्ट से लौटाया अमेरिका के कड़े प्रशासनिक नियमों के चलते फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. अब सोमालिया के स्टार रेफरी ओमर अर्टान को वैध वीजा होने के बाद भी अमेरिका में प्रवेश नहीं दिया गया है. मियामी एयरपोर्ट पर अमेरिकी बॉर्डर सिक्योरिटी ने कुछ शक का हवाला देकर उन्हें एंट्री देने से इनकार कर दिया. इस घटना के बाद फीफा ने आधिकारिक तौर पर अर्टान को वर्ल्ड कप पैनल से हटा दिया है. फीफा का कहना है कि वे टूर्नामेंट के सफल आयोजन के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन किसी देश के राष्ट्रीय सुरक्षा और वीजा फैसलों को बदलने का अधिकार उनके पास नहीं है. इसे भी पढ़े- 48 टीमें, 1248 खिलाड़ी और 891 डेब्यू! फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बनने जा रहा है इतिहास The post फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिका की मनमानी, रेफरी और ईरानी समर्थकों पर लगा बैन appeared first on Naya Vichar.

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सीवान में शहजाद अली हत्याकांड में बड़ा एक्शन, फरार आरोपियों के घरों की होगी कुर्की-जब्ती, पुलिस ने चस्पा किया इश्तेहार

Siwan News: सीवान जिले के बड़हरिया थाना क्षेत्र के शिवराजपुर गांव में हुए चर्चित शहजाद अली हत्याकांड को लेकर पुलिस ने फरार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. न्यायालय के आदेश पर मंगलवार की शाम बड़हरिया पुलिस ने गांव में पहुंचकर डुगडुगी बजवाते हुए फरार नामजद अभियुक्तों के घरों पर इश्तेहार चस्पा किया. इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है. डुगडुगी बजाकर गांव में कराई गई मुनादी थानाध्यक्ष छोटन कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम शिवराजपुर गांव पहुंची और न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए फरार आरोपियों के खिलाफ मुनादी कराई. पुलिस ने सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हुए आरोपियों को जल्द से जल्द कोर्ट या पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी. इस दौरान ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही और पूरे गांव में पुलिस कार्रवाई चर्चा का विषय बनी रही. इन फरार आरोपियों के घरों पर चस्पा हुआ इश्तेहार बड़हरिया थाना कांड संख्या-230/26 से जुड़े शहजाद अली हत्याकांड में पुलिस ने शिवराजपुर निवासी दीना चौधरी के पुत्र रंजन चौधरी उर्फ राजन चौधरी, ड्राइवर चौधरी के पुत्र अवधकिशोर चौधरी, ढोड़ा चौधरी के पुत्र अमित कुमार चौधरी तथा शंकर मांझी के पुत्र गुड्डू मांझी के घरों पर इश्तेहार चस्पा किया. सभी आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं. पुलिस ने शुरू की कानूनी प्रक्रिया पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की गई है. फरार आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उनके घरों पर इश्तेहार चस्पा कर आत्मसमर्पण करने का अंतिम अवसर दिया गया है. पुलिस का कहना है कि अब मामले में आगे की कार्रवाई भी तेज की जाएगी. आत्मसमर्पण नहीं किया तो होगी कुर्की-जब्ती थानाध्यक्ष छोटन कुमार ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई कुर्की-जब्ती से पहले की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है. यदि नामजद आरोपी निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो न्यायालय के निर्देशानुसार उनके खिलाफ कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की जाएगी. इससे फरार आरोपियों पर कानूनी दबाव और बढ़ सकता है. कई पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई कार्रवाई इश्तेहार चस्पा करने की कार्रवाई के दौरान एसआई हारून रशीद खान,एसआई गुड्डू कुमार,एसआई आभा कुमारी, चौकीदार अताउर रहमान सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद रहे. पुलिस टीम ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए प्रक्रिया पूरी की. ये भी पढ़ें… हत्याकांड के आरोपियों पर बढ़ा दबाव शहजाद अली हत्याकांड पहले से ही क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. अब फरार आरोपियों के घरों पर इश्तेहार चस्पा होने के बाद उन पर आत्मसमर्पण का दबाव बढ़ गया है. पुलिस का कहना है कि मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई जारी रहेगी. Also Read: सीवान बनेगा स्मार्ट सिटी, 38 हजार घरों को मिलेगा 2-2 डस्टबिन, प्रशासन का बड़ा एक्शन The post सीवान में शहजाद अली हत्याकांड में बड़ा एक्शन, फरार आरोपियों के घरों की होगी कुर्की-जब्ती, पुलिस ने चस्पा किया इश्तेहार appeared first on Naya Vichar.

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MBBS के लिए बेस्ट हैं वाराणसी के ये मेडिकल कॉलेज, डॉक्टर बनने का सपना होगा सच

Best Medical Colleges in Varanasi: हर साल देश के लाखों युवा आंखों में ‘डॉक्टर’ बनने का सपना लिए NEET UG की परीक्षा देते हैं. एक अच्छा डॉक्टर बनने के लिए कड़ी मेहनत के साथ-साथ एक सही मेडिकल इंस्टीट्यूट का मिलना भी बहुत जरूरी है. अगर आप उत्तर प्रदेश या पूर्वांचल के आस-पास रहकर मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो वाराणसी आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है.  वाराणसी सिर्फ अपनी संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि देश की टॉप क्लास मेडिकल एजुकेशन के लिए भी जाना जाता है. आइए जानते हैं वाराणसी के उन बेस्ट मेडिकल कॉलेजों (Best Medical Colleges in Varanasi) के बारे में, जो आपके सपनों को नई उड़ान दे सकते हैं.  Best Medical Colleges in Varanasi: वाराणसी के टॉप मेडिकल कॉलेज  कॉलेज का नाम प्रकार (Type) MBBS सीटें (अनुमानित) प्रमुख आकर्षण IMS BHU प्रशासनी (Central University) 100+ कम फीस, 50% इंटरनल पीजी कोटा, भारी क्लिनिकल एक्सपोजर Heritage Institute (HIMS) प्राइवेट (Private) 150 मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई-टेक लैब्स, बेहतरीन फैकल्टी 1. IMS BHU (इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी) जब बात वाराणसी के बेस्ट मेडिकल कॉलेज की हो, तो सबसे पहला नाम ‘IMS BHU’ का ही आता है. इसे देश के सबसे फेमस और टॉप प्रशासनी मेडिकल कॉलेजों (Best Medical Colleges in Varanasi) में गिना जाता है.  शानदार क्लिनिकल एक्सपोजर: इस कॉलेज के साथ ‘सर सुंदरलाल अस्पताल’ और ‘ट्रॉमा सेंटर’ जुड़ा हुआ है, जो पूरे पूर्वांचल और बिहार-झारखंड के मरीजों की लाइफलाइन है. यहां रोजाना हजारों मरीज आते हैं, जिससे छात्रों को बेहतरीन प्रैक्टिकल नॉलेज मिलती है.  इंटरनल पीजी कोटा: यहां से MBBS करने का एक बड़ा फायदा यह है कि आगे चलकर MD/MS (पोस्ट ग्रेजुएशन) की सीटों में यहां के छात्रों के लिए 50% का इंटरनल कोटा मिलता है.  2. हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (HIMS) अगर आप प्राइवेट कॉलेज से MBBS करने की सोच रहे हैं और आपका बजट ठीक-ठाक है, तो वाराणसी का ‘हेरिटेज मेडिकल कॉलेज’ एक बहुत ही बेहतरीन ऑप्शन है. यह कॉलेज नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता प्राप्त है.  आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: इस कॉलेज का कैंपस काफी बड़ा है और यहां की लैब्स, क्लासरूम और हॉस्टल मॉडर्न और हाई-टेक हैं.  अनुभवी फैकल्टी: यहां पढ़ाने वाले प्रोफेसर्स काफी सीनियर और एक्सपीरियंस हैं, जो छात्रों को थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल नॉलेज पर भी पूरा ध्यान देते हैं.  अस्पताल की सुविधा: कॉलेज का अपना खुद का बड़ा अस्पताल है, जहां वाराणसी और आस-पास के ग्रामीण इलाकों से मरीज आते हैं. इससे छात्रों की अच्छी प्रैक्टिस हो जाती है.  NEET UG के जरिए कैसे मिलेगा एडमिशन? IMS BHU कटऑफ: यह देश का टॉप मेडिकल कॉलेज है, इसलिए ऑल इंडिया कोटा (AIQ) के तहत यहां की कटऑफ बहुत हाई जाती है. जनरल कैटेगरी के छात्रों को यहां सीट सुरक्षित करने के लिए नीट में Top 1000 से 1500 ऑल इंडिया रैंक (AIR) या लगभग 680+ मार्क्स का टारगेट रखना होगा. हेरिटेज मेडिकल कॉलेज कटऑफ: प्राइवेट कॉलेज होने के कारण यहां का एडमिशन यूपी स्टेट मेडिकल काउंसलिंग (UPDGME) के जरिए होता है. इसके लिए नीट क्वालिफाई होना जरूरी है, लेकिन प्रशासनी के मुकाबले इसकी कटऑफ काफी कम रहती है. यह भी पढ़ें: डेंटल की पढ़ाई के लिए बेस्ट हैं चेन्नई के ये 5 कॉलेज, प्लेसमेंट और इंटर्नशिप में नंबर 1 The post MBBS के लिए बेस्ट हैं वाराणसी के ये मेडिकल कॉलेज, डॉक्टर बनने का सपना होगा सच appeared first on Naya Vichar.

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आज पेट्रोल-डीजल के दाम बदले या नहीं? तुरंत चेक करें 10 जून का भाव 

Petrol Diesel Price Today 10 June 2026: ईरान संकट और स्ट्रेट ऑफ हार्मुज में बढ़ते तनाव के बीच ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. इस स्थिति को देखते हुए हिंदुस्तान प्रशासन ने सप्लाई और डिमांड को कंट्रोल करने के लिए कई कदम उठाए हैं. आइए जानते हैं कि आज यानी 10 जून को आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के दाम क्या हैं. पेट्रोल की नई कीमतें क्या हैं? आज 10 जून को देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल की कीमतों में मिला-जुला बदलाव देखा गया है. दिल्ली और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में दाम स्थिर हैं, वहीं मुंबई में पेट्रोल की कीमत में 3 पैसे की मामूली बढ़ोतरी हुई है. बेंगलुरु और नोएडा में भी दाम थोड़े बढ़े हैं, जबकि चेन्नई और गुरुग्राम में ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली है. नीचे दी गई टेबल में शहरों के आज के रेट और उनमें हुआ बदलाव देख सकते हैं: पेट्रोल रेट टेबल: शहर आज का रेट (₹/लीटर) कल का रेट (₹/लीटर) बदलाव (₹) पटना ₹114.24 ₹113.35 +0.89 भागलपुर ₹114.52 ₹114.33 +0.19 दरभंगा ₹114.16 ₹113.85 +0.31 गया ₹114.82 ₹114.55 +0.27 मुजफ्फरपुर ₹113.82 ₹114.18 -0.36 देवघर ₹104.95 ₹105.05 -0.10 धनबाद ₹105.30 ₹105.30 0.00 जमशेदपुर  ₹105.19 ₹105.47 -0.28 रांची ₹105.54 ₹105.26 +0.28 लखनऊ ₹101.89 ₹101.92 -0.03 नोएडा ₹102.09 ₹101.92 +0.17 नई दिल्ली ₹102.12 ₹102.12 0.00 कोलकाता ₹113.47 ₹113.47 0.00 मुंबई ₹111.21 ₹111.18 +0.03 चेन्नई ₹107.77 ₹108.01 -0.24 गुरुग्राम  ₹102.62 ₹102.69 -0.07 बेंगलुरु ₹110.91 ₹110.89 +0.02 भोपाल ₹114.45 ₹114.19 +0.26 डीजल के दाम में क्या बदलाव हुआ? डीजल की बात करें तो आज देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में इसकी कीमतें पूरी तरह स्थिर हैं. मुंबई में डीजल कल के ही भाव पर बिक रहा है. हालांकि, चेन्नई और गुरुग्राम में डीजल के दामों में गिरावट आई है, जिससे वहां के उपभोक्ताओं को फायदा हुआ है. इसके विपरीत, नोएडा और पटना जैसे शहरों में डीजल के दाम आज बढ़ गए हैं. डीजल रेट टेबल: शहर आज का रेट (₹/लीटर) कल का रेट (₹/लीटर) बदलाव (₹) पटना ₹100.20 ₹99.36 +0.84 भागलपुर ₹100.44 ₹100.26 +0.18 दरभंगा ₹100.11 ₹99.81 +0.30 गया ₹100.74 ₹100.50 +0.24 मुजफ्फरपुर ₹99.81 ₹100.13 -0.32 देवघर ₹100.15 ₹100.25 -0.10 धनबाद ₹100.51 ₹100.51 0.00 जमशेदपुर  ₹100.42 ₹100.65 -0.23 रांची ₹100.72 ₹100.49 +0.23 लखनऊ ₹95.36 ₹95.41 -0.05 नोएडा ₹95.54 ₹95.37 +0.17 नई दिल्ली ₹95.20 ₹95.20 0.00 कोलकाता ₹99.82 ₹99.82 0.00 मुंबई ₹97.83 ₹97.83 0.00 चेन्नई ₹99.58 ₹99.78 -0.20 गुरुग्राम  ₹95.30 ₹95.36 -0.06 बेंगलुरु ₹98.80 ₹98.80 0.00 भोपाल ₹99.55 ₹99.33 +0.22 ये भी पढ़ें: 9 जून को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, फटाफट चेक करें लेटेस्ट रेट लिस्ट  The post आज पेट्रोल-डीजल के दाम बदले या नहीं? तुरंत चेक करें 10 जून का भाव  appeared first on Naya Vichar.

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ममता बनर्जी के चारों ओर सन्नाटा! फोन बंद, चेहरे गायब, दीदी के सबसे करीबी सांसदों ने संकट में मुंह फेरा

खास बातें लुटियंस जोन में टीएमसी के राष्ट्रीय वजूद का पतन दिल्ली में भी बिखर गया ममता का ‘पावर सिंडिकेट’ कॉल उठाने से किया परहेज अभिषेक बनर्जी के दिल्ली आवास पर मायूसी Mamata Banerjee Delhi Visit Political Silence: नेतृत्व में जब वक्त बदलता है, तो रसूखदार से रसूखदार नेताओं के दरबार भी किस तरह सूने पड़ जाते हैं, इसका सबसे जीवंत उदाहरण नयी दिल्ली में देखने को मिला. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद विद्रोह का सामना कर रहीं तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी जब इंडिया (INDIA) गठबंधन की बैठक में भाग लेने पहुंचीं, तो जो माहौल था, उसकी कभी दीदी ने कल्पना भी नहीं की होगी. लुटियंस जोन में टीएमसी के राष्ट्रीय वजूद का पतन तृणमूल कांग्रेस के जो सांसद कल तक ‘दीदी-दीदी’ कहते नहीं थकते थे, संकट की अंतिम घड़ी में उन्होंने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से पूरी तरह से दूरी बना ली है. दिल्ली के लुटियंस जोन में टीएमसी के राष्ट्रीय वजूद का पूरी तरह से पतन हो चुका है. दिल्ली में भी बिखर गया ममता का ‘पावर सिंडिकेट’ दिल्ली पहुंचने के बाद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने बगावत को रोकने के लिए अपने सांसदों से संपर्क साधने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन बदले में उन्हें केवल सन्नाटा मिला. रविवार रात से लेकर सोमवार तक ममता बनर्जी की कोर टीम और कालीघाट के रणनीतिकारों ने टीएमसी सांसदों को फोन किये, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व वाले बागी गुट के अधिकांश सांसदों के फोन या तो स्विच्ड ऑफ (बंद) थे या आउट ऑफ रीच (पहुंच से बाहर). इसे भी पढ़ें : शताब्दी रॉय ने भी छोड़ा ममता बनर्जी का साथ, कहा- दीदी अब बहुत बदल चुकी हैं कॉल उठाने से किया परहेज जिन गिने-चुने सांसदों के फोन चालू भी थे, उन्होंने स्क्रीन पर मुख्यमंत्री आवास या अभिषेक बनर्जी के सचिवालय का नंबर देखते ही या तो कॉल डिस्कनेक्ट कर दी या कॉल को नजरअंदाज (Unanswered Calls) किया. यह पहली बार था, जब दिल्ली में ममता बनर्जी की नेतृत्वक कॉल को किसी सांसद ने इस तरह ठुकराने की हिम्मत दिखायी है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें चाटुकारों ने भी बदला पाला कल तक जो लोग दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही ममता बनर्जी के लिए गुलदस्ते लेकर कतारों में खड़े हो जाते थे, इस बार वे साउथ एवेन्यू और नॉर्थ एवेन्यू (टीएमसी की सत्ता का मुख्य केंद्र) के प्रशासनी आवासों से गायब रहे. ये तमाम चेहरे दीदी के पास जाने की बजाय चुपके से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और शताब्दी रॉय के दिल्ली बंगले पर चल रही बैठक में जा रहे थे. सांसदों की सामूहिक अनुपस्थिति ममता बनर्जी को अंदर तक झकझोर गयी. Mamata Banerjee Delhi Visit Political Silence: अभिषेक बनर्जी के दिल्ली आवास पर मायूसी ममता बनर्जी दिल्ली प्रवास के दौरान अपने भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के दिल्ली आवास पर ठहरीं, लेकिन वहां का माहौल बेहद गमगीन रहा. अभिषेक ने अपने कुछ बेहद वफादार दूतों को बागी सांसदों को मनाने और डिनर पर आमंत्रित करने के लिए भेजा, लेकिन बागी खेमे के रणनीतिकारों ने साफ कह दिया कि अब बहुत देर हो चुकी है. वे एनडीए को समर्थन देने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे. इसे भी पढ़ें महुआ मोईत्रा को ‘इश्क करो पार्टी’ में शामिल होने का ऑफर! जस्टिस काटजू और टीएमसी सांसद के वार-पलटवार का क्या है सच? कौन हैं काकोली घोष दस्तीदार और रीतब्रत बनर्जी, जिन्होंने लगा दी ममता बनर्जी की ‘लंका’, जानिए 2 बागियों की इनसाइड स्टोरी यूसुफ पठान पर भड़कीं महुआ मोईत्रा, कहा- अमित शाह के बुलावे पर दिल्ली भागे? शर्म करो, थोड़ी हिम्मत दिखाओ ममता बनर्जी का रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष मानने से इनकार, स्पीकर के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची टीएमसी The post ममता बनर्जी के चारों ओर सन्नाटा! फोन बंद, चेहरे गायब, दीदी के सबसे करीबी सांसदों ने संकट में मुंह फेरा appeared first on Naya Vichar.

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अमेरिका ने अपाचे हेलीकॉप्टर गिराने का लिया बदला, ईरान के ऊपर किए ताबड़तोड़ हमले, तेहरान ने फिर दी चेतावनी

US Strikes Iran: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे के बाद कि ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया है, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी. जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संकेत दिया है कि किसी भी हमले या धमकी का जवाब दिया जाएगा. दक्षिणी ईरान में कई जगह विस्फोटों की समाचार अमेरिकी हमलों के बाद बुधवार तड़के दक्षिणी ईरान के कई इलाकों से विस्फोटों की सूचना सामने आई. अमेरिकी सैन्य अभियान केवल एक स्थान तक सीमित नहीं था, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट के आसपास कई क्षेत्रों तक फैला हुआ था. ईरान की समाचार एजेंसी फार्स ने बताया कि होर्मोजगान प्रांत के पूर्वी हिस्सों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं. वहीं मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार बंदर अब्बास शहर में भी विस्फोट हुए.  ईरानी प्रशासनी मीडिया ने यह भी पुष्टि की कि सीरिक क्षेत्र में किसी प्रोजेक्टाइल के टकराने की घटना हुई है. इसके अलावा केश्म द्वीप पर भी हमले की सूचना दी गई. केश्म पर तो 6 धमाकों की आवाज सुनाई दी. यह सभी हमले ड्रोन से नहीं, बल्कि फाइटर जेट से किए गए. हेलीकॉप्टर गिराए जाने के दावे से शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया कि ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक हेलीकॉप्टर को एक ईरानी ड्रोन ने मार गिराया, जब वह होर्मुज के ऊपर, ओमान के तट पर गश्त कर रहा था.  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हेलीकॉप्टर में सवार दोनों अमेरिकी पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें कोई चोट नहीं आई है. उन्हें ओमान के पास एक ड्रोन बोट से बचाया गया. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका इस घटना का जवाब देगा. अमेरिकी सेना ने बाद में बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई ‘ईरान की अनुचित आक्रामकता के खिलाफ अनुपातिक जवाब’ है. अमेरिका ने ईरानी एयर डिफेंस और रडार सिस्टम को बनाया निशाना कार्रवाई के दौरान एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास मौजूद ईरान के कई एयर डिफेंस सिस्टम और रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इस सैन्य अभियान को ‘आत्मरक्षा में उठाया गया कदम’ बताया. उसके अनुसार यह कार्रवाई अमेरिकी हेलीकॉप्टर को गिराए जाने की घटना के जवाब में की गई. U.S. Central Command (CENTCOM) forces began launching self-defense strikes against Iran at 5 p.m. ET today at the Commander in Chief’s direction, in response to yesterday’s downing of a U.S. Army Apache helicopter. The mission is a proportional response to unjustified Iranian… — U.S. Central Command (@CENTCOM) June 9, 2026 ईरानी विदेश मंत्री ने दी चेतावनी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हेलीकॉप्टर वाली घटना पर सीधे टिप्पणी नहीं की, लेकिन क्षेत्र में मौजूद विदेशी सैन्य बलों को चेतावनी जरूर दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ईरान के आसपास काम कर रही विदेशी सैन्य ताकतों को हमेशा दुर्घटनाओं, गलत आकलन या क्रॉसफायर का खतरा बना रहता है. यदि वे जोखिम कम करना चाहते हैं तो सबसे अच्छा समाधान यह है कि वे इस क्षेत्र को छोड़ दें.’ Foreign forces in proximity to our territory are at constant risk on account of their own human errors, plain accidents, or potentially being caught in crossfire. To reduce risk, best solution is for them to leave. We prefer language of diplomacy but speak other languages too. pic.twitter.com/5DDgHAscBj — Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) June 9, 2026 अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान का और सख्त संदेश अमेरिकी कार्रवाई के बाद अब्बास अराघची ने एक और बयान जारी कर वॉशिंगटन को आगे सैन्य कदम उठाने से सावधान किया. उन्होंने कहा, ‘युद्धक्षेत्र में मिली असफलताओं के बावजूद अमेरिका ने ईरान के संकल्प की परीक्षा लेने का फैसला किया है. हमारी सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले या धमकी को बिना जवाब नहीं छोड़ेंगी.’ उन्होंने विदेशी सेनाओं को क्षेत्र छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि यदि वे सुरक्षित रहना चाहते हैं तो उन्हें यहां से जाना चाहिए. अराघची ने फारस की खाड़ी के इतिहास का भी उल्लेख किया और कहा कि यह क्षेत्र ‘बाहरी हस्तक्षेप करने वालों के दुखद अंजाम’ के कई उदाहरणों का गवाह रहा है. इसे अमेरिकी हमलों के बाद दी गई सीधी चेतावनी माना जा रहा है. Despite its defeats on the battlefield, the U.S. opted to test our determination. Our Powerful Armed Forces will leave no attack or threat unanswered. Leave our region if you want to be safe. History of the Persian Gulf has many chapters on dire fates of intruding outsiders. pic.twitter.com/O17GGtklxA — Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) June 9, 2026 ईरान ने पहले ही किया था जवाबी कार्रवाई का संकेत अमेरिकी हमलों से पहले ईरान के प्रशासनी मीडिया ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से दावा किया था कि पिछले 24 घंटों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की ओर से कोई आक्रामक हवाई अभियान नहीं चलाया गया. सैन्य सूत्र ने साथ ही चेतावनी दी थी कि यदि हेलीकॉप्टर प्रकरण को आधार बनाकर ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई की गई, तो उसका ‘निर्णायक जवाब’ दिया जाएगा. ये भी पढ़ें:- हिंदुस्तान के दोस्त रूस ने पाकिस्तान के साथ किए दो बड़े समझौते, SCO में बनी सहमति; मिलकर करेंगे कार्रवाई ये भी पढ़ें:- दिन में अदालत, रात में ‘चांदनी बार’, पाकिस्तान के रावलपिंडी कोर्ट परिसर में ‘मुजरा’ का वीडियो वायरल; FIR दर्ज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव फिर से गंभीर सैन्य झड़प शुरू कर सकता है. फिलहाल दोनों पक्ष स्थायी शांति का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अगर स्थिति और बिगड़ती है तो पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है. ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक वित्तीय स्थिति पर भी असर डाल सकता है. 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सोनिया गांधी के गले लगकर क्यों रो पड़ीं तृणमूल चीफ ममता बनर्जी? जानें जादू की झप्पी की इनसाइड स्टोरी

खास बातें खूनी क्रोनोलॉजी का अंतिम और असहाय पड़ाव जब ममता ने ‘सोनिया की कांग्रेस’ को बंगाल में किया था शून्य ढह गये कांग्रेस के पुराने गढ़ ‘सीट शेयरिंग’ के अहंकार से विधानसभा की शिकस्त तक Mamata Banerjee Sonia Gandhi Hug: 2026 की हार ने बदला समीकरण क्या सोनिया का यह भरोसा बचायेगा ममता का राष्ट्रीय वजूद? फिर सोनिया गांधी से मिलीं ममता बनर्जी टीएमसी में बगावत के बीच हुई बैठक Mamata Banerjee Sonia Gandhi Hug: नयी दिल्ली में आयोजित इंडिया (INDIA) गठबंधन की समन्वय बैठक में सोमवार को ऐसा अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जिसने नेतृत्वक विश्लेषकों को हैरान कर दिया. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी अपनी पार्टी में टूट के बीच जब बैठक में पहुंचीं, तो कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आगे बढ़कर उन्हें गले लगा लिया. बंद कमरे में अपनी पुरानी सहेली और नेतृत्वक साथी को सामने देख ममता बनर्जी के आंसू छलक पड़े. खूनी क्रोनोलॉजी का अंतिम और असहाय पड़ाव नेतृत्वक विश्लेषक मानते हैं कि यह ‘जादू की झप्पी’ सिर्फ व्यक्तिगत ढाढ़स नहीं थी. यह कांग्रेस और टीएमसी के बीच पिछले 3 दशकों से चले आ रहे उतार-चढ़ाव, पुरानी नेतृत्वक दरारों और बंगाल में एक-दूसरे के वजूद को मिटाने की खूनी क्रोनोलॉजी का अंतिम और सबसे असहाय पड़ाव था. जब ममता ने ‘सोनिया की कांग्रेस’ को बंगाल में किया था शून्य सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के इस भावुक मिलन के पीछे छिपे गहरे इतिहास को समझना बेहद जरूरी है. 1997-98 में ममता बनर्जी ने तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व (सोनिया गांधी के उभार के समय) पर वामपंथियों (वाममोर्चा) के खिलाफ ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था. अलग तृणमूल कांग्रेस पार्टी का गठन किया था. अगले 2 दशक में ममता बनर्जी ने वामपंथ के साथ-साथ कांग्रेस को भी बंगाल में शून्य कर दिया. इसे भी पढ़ें : शताब्दी रॉय ने भी छोड़ा ममता बनर्जी का साथ, कहा- दीदी अब बहुत बदल चुकी हैं ढह गये कांग्रेस के पुराने गढ़ कांग्रेस पार्टी के पारंपरिक गढ़ों (मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर) को भी पूरी तरह से ममता बनर्जी ने निगल लिया. अधीर रंजन चौधरी जैसे कद्दावर नेताओं को साइडलाइन कर उन्होंने कांग्रेस के वोट बैंक पर अपना एकछत्र राज स्थापित कर लिया था. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ‘सीट शेयरिंग’ के अहंकार से विधानसभा की शिकस्त तक विपक्षी गठबंधन के भीतर दोनों दलों के बीच हालिया कड़वाहट और अहंकार की दीवार कैसे खड़ी हुई, इसकी पूरी कड़वी हकीकत अब सामने आ चुकी है. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने बंगाल में कांग्रेस को एक भी सीट देने से इनकार कर दिया. उन्होंने ‘एकला चलो’ की नीति अपनाते हुए बहरमपुर में यूसुफ पठान को उतारकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को हरा दिया. इससे दिल्ली का कांग्रेस नेतृत्व अंदर से बेहद आहत था. Mamata Banerjee Sonia Gandhi Hug: 2026 की हार ने बदला समीकरण बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में जब हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 207 सीटें जीतकर ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल कर दिया, तो अचानक से पूरी बाजी पलट गयी. सत्ता हाथ से जाते ही टीएमसी के भीतर सांसदों और विधायकों में भगदड़ मच गयी. इसके बाद ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन की याद आयी. गठबंधन की बैठक में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख बचाने के लिए दीदी अब कांग्रेस और सोनिया गांधी के दरबार में मदद की गुहार लगा रही हैं. इसे भी पढ़ें : ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में फूट-फूटकर रोने लगीं ममता बनर्जी! कहा- अपनों की गद्दारी ने कहीं का नहीं छोड़ा क्या सोनिया का यह भरोसा बचायेगा ममता का राष्ट्रीय वजूद? बंद कमरे की बैठक में सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को सांत्वना देते हुए कहा कि कांग्रेस इस संकट में उनके साथ खड़ी है, लेकिन पार्टी के भीतर के कई रणनीतिकार इसे केवल ‘शिष्टाचार’ मान रहे हैं. बंगाल में ममता बनर्जी के कमजोर होने से प्रदेश कांग्रेस के नेताओं विशेषकर अधीर रंजन गुट खुश है. उन्हें लगता है कि टीएमसी के पतन के बाद ही बंगाल में कांग्रेस का पुराना वोट बैंक वापस लौट पायेगा. देश की सबसे कद्दावर विपक्षी चेहरा रहीं ममता बनर्जी की हकीकत अब यही है कि लोकसभा में दो-तिहाई सांसदों की टूट के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन में ‘किंगमेकर’ या प्रधानमंत्री पद की दावेदार वाली उनकी पुरानी मजबूत स्थिति अब नहीं रही. इसलिए वह इंडिया गठबंधन की शरण में हैं. फिर सोनिया गांधी से मिलीं ममता बनर्जी ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में विपक्षी एकजुटता मजबूत करने पर जोर देने के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी से उनके आवास 10 जनपथ पर मुलाकात की. दोनों पार्टियों ने बैठक के ब्योरे का खुलासा नहीं किया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ममता ने कांग्रेस नेता के साथ बातचीत के दौरान विपक्षी एकता पर जोर दिया. कहा कि सभी घटक दल अतीत की बातों को भूलकर एकजुट हों. टीएमसी में बगावत के बीच हुई बैठक यह बैठक तृणमूल के भीतर बगावत के मद्देनजर हो रही है, जिसमें पार्टी के कई सांसदों ने एक अलग समूह बनाने और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ जुड़ने का फैसला किया है. तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से अधिकतर ने पहले ही राज्य विधानसभा में रीतब्रत बनर्जी को अपना नेता मान लिया है और उन्हें स्पीकर ने लीडर ऑफ ऑपोजीशन का दर्जा दे दिया है. इसे भी पढ़ें जहांगीर खान की गिरफ्तारी के बाद दफ्तर में तोड़फोड़, मिला राहत सामग्री का गुप्त भंडार तृणमूल नेता सब्यसाची दत्ता देर रात गिरफ्तार, जबरन वसूली और जान मारने की धमकी देने का आरोप बीरभूम के बाहुबली अनुब्रत मंडल पर कसा शिकंजा, 2021 के चुनावी दंगे और 30 लाख की ईंट लूट मामले में FIR दर्ज गिरफ्तारी से बचने के लिए साड़ियों में छिपे तृणमूल नेता ब्रह्मानंद चक्रवर्ती, ‘कट मनी’ लेने का है आरोप The post सोनिया गांधी के गले लगकर क्यों रो पड़ीं तृणमूल चीफ ममता बनर्जी? जानें जादू की झप्पी की इनसाइड स्टोरी appeared first on Naya Vichar.

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