प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की प्रशासन को अपने कार्यकाल के 12 वर्षों में कम से कम 9 बार बैकफुट पर आना पड़ा. नीट पेपर लीक 2026 मामले में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 10वां मामला है, जब मोदी प्रशासन को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे आंदोलनकारियों की मांग माननी पड़ी है. वर्ष 2014 से लेकर अब तक जिन राष्ट्रीय नीतियों, विधेयकों और अध्यादेशों पर मोदी प्रशासन को भारी विरोध या नेतृत्वक-सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा और अपने फैसले में बदलाव, संशोधन या पूर्ण वापसी करनी पड़ी है, उसकी पूरी लिस्ट यहां देखें.
1. तीन कृषि कानून (Farm Laws Repeal – 2021)
मुद्दा : प्रशासन ने कृषि क्षेत्र में सुधार के उद्देश्य से 2020 में तीन नये कृषि कानून लागू किये थे.
बैकफुट पर आने का कारण : पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत देशभर के किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर एक साल से अधिक समय तक ऐतिहासिक आंदोलन किया.
नतीजा : नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की.
2. भूमि अधिग्रहण अध्यादेश (Land Acquisition Ordinance – 2015)
मुद्दा : मोदी प्रशासन अपने पहले कार्यकाल (वर्ष 2014-15) में वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के लिए एक अध्यादेश लेकर आयी थी, ताकि बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण आसान हो सके.
बैकफुट पर आने का कारण : विपक्ष और किसान संगठनों ने इसे ‘किसान विरोधी’ और ‘उद्योगपति समर्थक’ बताकर देशभर में जोरदार विरोध किया.
नतीजा : प्रशासन को इस अध्यादेश को बार-बार जारी करने के बाद अंततः वापस लेना पड़ा और पुराने कानून को ही लागू रहने दिया गया.
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3. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) लेटरल एंट्री (Lateral Entry Rollback – 2024)
मुद्दा : अगस्त 2024 में UPSC ने बिना आरक्षण लागू किये ब्यूरोक्रेसी में सीधे संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर के 45 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकाला था.
बैकफुट पर आने का कारण : विपक्षी दलों के साथ-साथ NDA के सहयोगी दलों (जैसे जदयू और लोजपा) ने SC, ST और OBC के लिए आरक्षण न होने पर सख्त ऐतराज जताया.
नतीजा : प्रशासन ने तुरंत कदम पीछे खींचते हुए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के जरिये UPSC को इस विज्ञापन को रद्द करने का निर्देश दिया.
4. वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill – 2024)
मुद्दा : प्रशासन वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियमों में बदलाव के लिए संसद में वक्फ संशोधन विधेयक लेकर आयी.
बैकफुट पर आने का कारण : मुस्लिम संगठनों, विपक्षी दलों और सहयोगी दलों के भारी दबाव के कारण प्रशासन संसद में इसे सीधे पास कराने की स्थिति में नहीं रही.
नतीजा : प्रशासन ने विधेयक को पारित कराने की बजाय विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का निर्णय लिया.
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5. ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज बिल ड्राफ्ट (Broadcasting Services Bill – 2024)
मुद्दा : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स, यूट्यूबर्स और OTT प्लेटफॉर्म्स को विनियमित करने के लिए एक मसौदा (ड्राफ्ट) विधेयक तैयार किया था.
बैकफुट पर आने का कारण : स्वतंत्र पत्रकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और डिजिटल राइट्स ग्रुप्स ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी और निजता पर हमला करार दिया.
नतीजा : विवाद बढ़ता देख मंत्रालय ने मसौदे को पूरी तरह से वापस ले लिया और नये सिरे से परामर्श करने की बात कही.
6. नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) पर सफाई (2019-2020)
मुद्दा : नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित होने के बाद देशभर में राष्ट्रव्यापी NRC लागू करने को लेकर चर्चाएं तेज हो गयीं थीं.
बैकफुट पर आने का कारण : दिल्ली चुनाव के बीच शाहीन बाग में इसके खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू हुआ. शाहीन बाग के साथ-साथ असम और पूर्वोत्तर में भी विरोध और सामाजिक तनाव का माहौल बन गया.
नतीजा : गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री ने संसद व सार्वजनिक मंचों से स्पष्टीकरण दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर NRC लागू करने की फिलहाल कोई योजना या खाका नहीं है.
7. पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS – 2024)
मुद्दा : न्यू पेंशन स्कीम (NPS) को लेकर केंद्र और राज्य प्रशासन के कर्मचारियों का लंबे समय से विरोध चल रहा था. कई राज्यों में यह चुनाव का मुख्य मुद्दा बन गया था.
बैकफुट पर आने का कारण : प्रशासनी कर्मचारियों का लगातार दबाव और चुनावी नुकसान का डर.
नतीजा : प्रशासन ने NPS में सुधार करते हुए एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को मंजूरी दी, जिसमें अंतिम आहरित वेतन के 50 प्रतिशत की गारंटीकृत पेंशन का प्रावधान किया गया.
8. अग्निपथ योजना में रियायतें (Agnipath Scheme Adjustments – 2022)
मुद्दा : सेना में 4 साल की शॉर्ट टर्म कमिशनिंग यानी अल्पकालिक भर्ती के लिए ‘अग्निपथ योजना’ शुरू की गयी थी.
बैकफुट पर आने का कारण : बिहार, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना समेत देश के कई राज्यों में युवाओं ने हिंसक प्रदर्शन किये. रेल-सड़क यातायात ठप कर दिया.
नतीजा : प्रशासन ने योजना रद्द तो नहीं की, लेकिन पहले बैच के लिए आयु सीमा 21 से बढ़ाकर 23 वर्ष कर दी. CAPF और असम राइफल्स में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण व छूट का ऐलान किया.
9. शिक्षा और विश्वविद्यालय संबंधी नीतियां (Education Sector Rollbacks)
मुद्दा : दिल्ली विश्वविद्यालय फॉर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP – 2014).
बैकफुट पर आने का कारण : मोदी प्रशासन के सत्ता में आते ही छात्र संगठन ABVP और अध्यापकों ने दिल्ली विश्वविद्यालय फॉर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP – 2014) के विरोध में जबर्दस्त प्रदर्शन किया.
नतीजा : उच्च शिक्षण संस्थानों के नये नियमों UGC इक्विटी रूल्स / दिशा-निर्देश पर विभिन्न वर्गों और छात्रों के विरोध के बाद प्रशासन को पुनर्विचार या समीक्षा का रुख अपनाना पड़ा. 4 वर्षीय पाठ्यक्रम को रद्द कर 3 वर्षीय मॉडल लागू किया गया.
10. नीट पेपर लीक 2026 (NEET UG Paper Leak 2026)
मुद्दा : मेडिकल में एडमिशन के लिए होने वाले एंट्रेंस टेस्ट NEET UG 2026 के पेपर लीक हुआ. इसके विरोध में छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा.
बैकफुट पर आने का कारण : कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में छात्रों ने दिल्ली में प्रदर्शन हुआ. कांग्रेस समेत अन्य नेतृत्वक दलों का समर्थन मिला. छात्रों ने जमकर पत्थरबाजी की. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ गये.
नतीजा : धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि, अभी तक आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासन को प्रदर्शनकारियों की एक मांग मानने के लिए बाध्य होना पड़ा.
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