Navratri 2025: 22 सितंबर से शुरू हुआ नवरात्रि का महापर्व 2 अक्टूबर को समाप्त होगा. नवरात्रि के ये नौ पावन दिन माता दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित हैं. नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना से होती है, वहीं इसका समापन दशहरा के साथ होता है. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से इन नौ दिनों तक माता आदिशक्ति की पूजा, हवन और कन्या पूजन विधि-विधान के साथ करता है, उस पर माता दुर्गा की कृपा होती है. पूजा के दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं और मां की उपासना करते हैं.
लेकिन नवरात्रि के दौरान यदि स्त्रीओं को पीरियड यानी मासिक धर्म आ जाए, तो इस समय क्या करना चाहिए, इसे लेकर कई स्त्रीओं के मन में सवाल उठते हैं. क्या पीरियड्स में माता की पूजा करनी चाहिए या बीच में छोड़ देना चाहिए, और यदि पूजा बीच में छोड़ी गई तो क्या पूजा पूरी मानी जाएगी? आइए, इस प्रश्न का उत्तर इस आर्टिकल के माध्यम से जानने की कोशिश करते हैं.
पीरियड्स में पूजा करनी चाहिए या नहीं? – प्रेमानंद महाराज की राय
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि शास्त्रों में बताया गया है कि मासिक धर्म के दौरान स्त्रीओं को पूजा-पाठ और किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने से बचना चाहिए. उनका कहना है कि पीरियड्स के समय स्त्रीओं को पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए और न ही इस समय खाना बनाना, घर के भारी काम या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना चाहिए. इस दौरान स्त्रीओं को केवल आराम करना चाहिए.
शास्त्रों में क्या कहा गया है?
गरुड़ पुराण और याज्ञवल्क्य स्मृति में बताया गया है कि मासिक धर्म के समय स्त्रीओं को आराम करना चाहिए और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने से बचना चाहिए. माना जाता है कि इस दौरान मंदिर या हवन कार्य में हिस्सा नहीं लेना चाहिए.
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. नया विचार किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.
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