Hindu Marriage Rituals: हिंदू धर्म की शादियों में अलग-अलग रस्में निभाई जाती है, शादी में दुल्हन का चेहरा घूंघट से ढंक दिया जाता है, दूल्हे की सेहराबंदी की रस्म की जाती है, यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है, शादी के लिए तैयार करते समय दूल्हे को सेहरा बांधा जाता है, सेहरा आमतौर पर फूल, मोती, कुंदन, चमकीली व रेशमी धागे या कई बार तो सोने-चांदी की कलाकारी से बनता है, पगड़ी या सेहरे से दूल्हे का चेहरा ढका जाता है, सेहरे को आम बोलचाल की भाषा में मुकुट, विवाह मुकुट, किरीट और मउर भी कहा जाता है.
क्या है इस रस्म की मान्यता
इस रस्म के पीछे मान्यता ये है कि दूल्हे का चेहरा विवाह तक किसी को नहीं दिखना चाहिए ताकि उन पर किसी नकारात्मक ऊर्जा या बुरी नजर न पड़े, कुछ जगहों पर ये भी माना जाता है विवाह की रस्में पूरी होने तक दूल्हे और दुल्हन को एक-दूसरे का चेहरा देखना अपशकुन होता है.
पंचदेव से सुशोभित नर का दिव्य श्रृंगार
शास्त्रों में विवाह मुकुट या सेहरे को पंचदेव से सुशोभित नर का श्रृंगार कहा गया है, यही कारण है कि विवाह के समय आम लोग भी मुकुट या सेहरा पहनते हैं, शिव विवाह के प्रसंग में भगवान शिव द्वारा जटाओं का मुकुट और सांपों से मौर को सजाने का वर्णन मिलता है.
महादेव ने पहना था सांपों से बना मुकुट
जटा मुकुट अहि मउर संवारा’ चौपाई के माध्यम से ये बताया गया है कि भगवान शिव के गण उनकी जटाओं का मुकुट बना रहे हैं और उन्हें सांपों के मौर से सजाया जा रहा है, इससे पता चलता है कि मां पार्वती से विवाह के समय स्वयं महादेव ने सिर पर सांपों से बना मुकुट पहना था, इसलिए दूल्हे का चेहरा सेहरे से ढकने की परंपरा आदि काल से चली आ रही है.
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