Bihar News: बिहार में स्टार्टअप संस्कृति धीरे-धीरे लेकिन मजबूती से अपनी जड़ें जमा रही है. राज्य में सक्रिय 1597 स्टार्टअप आज रोजगार सृजन और आय के नए मॉडल के रूप में उभर चुके हैं.
स्टार्टअप बड़े उद्योगों की तरह दिखावटी नहीं हैं, लेकिन असर में कहीं ज्यादा ठोस साबित हो रहे हैं. खास बात यह है कि कई स्टार्टअप अब लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का सालाना टर्नओवर दर्ज कर रहे हैं.
कम पूंजी, बड़े सपने और स्थायी कमाई
बिहार के स्टार्टअप्स की सबसे बड़ी ताकत उनका स्थानीय जुड़ाव है. कृषि, फूड प्रोसेसिंग, एजु-टेक, हेल्थ, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल सेवाएं और ग्रामीण इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप न केवल समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, बल्कि स्थायी आय का स्रोत भी बन रहे हैं.
कई युवा उद्यमी सालाना पांच करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में स्टार्टअप तीन से पांच करोड़ और एक से तीन करोड़ रुपये के दायरे में पहुंच चुके हैं.
स्टार्टअप का नक्शा- 10 जिलों में सिमटा बिहार
बिहार के करीब 70 फीसदी स्टार्टअप केवल 10 जिलों में केंद्रित हैं. राजधानी पटना इस सूची में सबसे आगे है, जहां सैकड़ों स्टार्टअप सक्रिय हैं. इसके बाद मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, गया, सारण, वैशाली, बेगूसराय और पूर्वी-पश्चिमी चंपारण जैसे जिले आते हैं. इन जिलों में बेहतर कनेक्टिविटी, शैक्षणिक संस्थान और बाजार की उपलब्धता स्टार्टअप्स के पनपने में मदद कर रही है.
नवादा, सिवान, जमुई, बांका, अररिया, किशनगंज, खगड़िया, शिवहर और शेखपुरा जैसे जिलों में स्टार्टअप की संख्या बेहद कम है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि संसाधनों, मार्गदर्शन और निवेश तक पहुंच की कमी बड़ी बाधा है. अगर इन इलाकों में इनक्यूबेशन सेंटर, मेंटरशिप और फाइनेंशियल सपोर्ट बढ़ाया जाए, तो स्टार्टअप का दायरा पूरे बिहार में फैल सकता है.
स्त्रीओं की बढ़ती भागीदारी और प्रशासनी समर्थन
बिहार की स्टार्टअप कहानी में स्त्रीओं की भागीदारी भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. स्त्री संचालित स्टार्टअप न सिर्फ स्वरोजगार का माध्यम बन रहे हैं, बल्कि दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं. वहीं राज्य प्रशासन ने स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए अब तक करीब 84 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
डीपीआईआईटी से पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या भी हजारों में पहुंच चुकी है, जो यह संकेत देती है कि यह सेक्टर अब प्रयोग के चरण से निकलकर स्थिरता की ओर बढ़ रहा है.
रोजगार की सोच बदलता बिहार
स्टार्टअप्स ने बिहार में रोजगार की पारंपरिक सोच को चुनौती दी है. अब युवा सिर्फ प्रशासनी नौकरी या बाहर पलायन को ही विकल्प नहीं मान रहे. अपने जिले, अपने बाजार और अपनी जरूरतों को समझकर बिज़नेस मॉडल तैयार करना नई पीढ़ी की पहचान बन रहा है.
अगर यह रफ्तार बनी रही और स्टार्टअप इकोसिस्टम को जिलों तक समान रूप से फैलाया गया, तो आने वाले वर्षों में बिहार रोजगार मांगने वाला नहीं, रोजगार देने वाला राज्य बन सकता है.
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