Mumma Boy Astrology Tips: ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावना और मानसिक स्थिति का कारक ग्रह माना गया है. व्यक्ति का स्वभाव कितना संवेदनशील, भावुक या मानसिक रूप से स्थिर होगा, इसका बड़ा संकेत कुंडली में चंद्रमा की स्थिति से मिलता है. ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा से बताते हैं जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा मजबूत और शुभ स्थिति में होता है, वे भावनात्मक रूप से गहरे और रिश्तों को महत्व देने वाले होते हैं.
किन भावों में चंद्रमा हो तो मां से जुड़ाव बढ़ता है
यदि चंद्रमा कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम या दशम भाव में स्थित हो, तो जातक का मां के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव देखा जाता है. ऐसे लोग किसी भी बड़े निर्णय से पहले मां की राय लेना जरूरी समझते हैं. इनके लिए मां सिर्फ अभिभावक नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारा होती हैं.
चंद्रमा और शुक्र का प्रभाव: प्रेम में भावुकता
जब कुंडली में चंद्रमा और शुक्र एक साथ हों, पास-पास हों या एक-दूसरे पर दृष्टि डालते हों, तो व्यक्ति प्रेम और रिश्तों में अत्यधिक समर्पित होता है. ऐसे जातक दिल से प्यार करते हैं और भावनाओं को खुलकर व्यक्त करते हैं. ये लोग रिश्तों में अपनापन और केयर को सबसे ऊपर रखते हैं.
चंद्र-राहु योग और मां पर मानसिक निर्भरता
यदि चंद्रमा पर राहु की दृष्टि हो या चंद्र-राहु योग बने, तो जातक मानसिक रूप से मां पर अधिक निर्भर हो सकता है. छोटी-छोटी बातों में भी मां से सलाह लेने की आदत बन जाती है. समाज में ऐसे लोगों को अक्सर “मम्मा बॉय” कहा जाता है, लेकिन ज्योतिष इसे भावनात्मक सुरक्षा की आवश्यकता से जोड़कर देखता है, न कि कमजोरी से.
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भावनात्मक संतुलन क्यों है जरूरी
ज्योतिष के अनुसार मजबूत चंद्रमा भावनात्मक शक्ति देता है, लेकिन अत्यधिक निर्भरता जीवन के अन्य रिश्तों में असंतुलन पैदा कर सकती है. इसलिए भावनाओं के साथ विवेक और आत्मनिर्भरता का संतुलन बनाए रखना जरूरी माना गया है.
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